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चतरा मयूरहंड प्रखंड का फुलांग पंचायत का बलिया गांव में बच्चे स्कूल जाने में कठिनाइयों का सामना कर रहें हैं नन्हे बच्चे
Om Singh
चतरा मयूरहंड प्रखंड का फुलांग पंचायत का बलिया गांव में बच्चे स्कूल जाने में कठिनाइयों का सामना कर रहें हैं नन्हे बच्चे
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- संथाली भाषा पोर्टल खोलने पर बनी सहमति, कुलपति ने कहा— भाषा का संरक्षण और विकास हम सबकी जिम्मेदारी आदिवासी छात्र संघ एवं भारतीय आदिवासी कल्याण सेवा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से की मुलाकात, जल्द पोर्टल खोलने का मिला आश्वासन हजारीबाग | विनोबा भावे विश्वविद्यालय में संथाली भाषा के पोर्टल को खोलने की मांग को लेकर आदिवासी छात्र संघ एवं भारतीय आदिवासी कल्याण सेवा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर विस्तृत वार्ता की। बैठक के दौरान कुलपति ने संथाली भाषा पोर्टल खोलने पर सहमति जताई और प्रतिनिधिमंडल को सकारात्मक आश्वासन दिया। वार्ता के दौरान कुलपति ने कहा कि संथाली भाषा देश की महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है। इस भाषा का संरक्षण, संवर्धन और विकास हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय आदिवासी भाषाओं के संरक्षण एवं विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के समक्ष संथाली भाषा की पढ़ाई को सुचारु रूप से संचालित करने, विद्यार्थियों को नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराने तथा संबंधित पोर्टल को शीघ्र प्रारंभ करने की मांग रखी। कुलपति द्वारा सकारात्मक सहमति दिए जाने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने इसे आदिवासी समाज एवं विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। प्रतिनिधिमंडल में रमेश कुमार हेम्ब्रोम (जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति के मनोनीत सदस्य एवं आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष), सुशील ओड़िया, सुधीर बास्के, पप्पू एक्का, प्रदीप उरांव, अनिल टुडू, प्रिंस टोप्पो, दिलीप किस्कू, लक्ष्मी सोरेन, प्रियंका किस्कू, आशा टुडू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द ही संथाली भाषा पोर्टल शुरू करेगा, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और आदिवासी भाषाओं के संरक्षण एवं विकास को नई दिशा मिलेगी।1
- हजारीबाग में दीवार ढहने से मिला पूर्वजों का खजाना, चांदी के सिक्कों से भरा घड़ा देख लोग हैरान टाटीझरिया प्रखंड के अमनारी गांव में गुरुवार को एक पुरानी मिट्टी की दीवार ढहने के बाद ऐसा नजारा सामने आया, जिसने पूरे इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण जब संयुक्त परिवार के पुराने मकान की दीवार भरभराकर गिरी और मलबा हटाया जाने लगा, तभी दीवार के भीतर चुनवाकर रखा गया मिट्टी का एक बड़ा गगरा (घड़ा) नीचे गिरकर टूट गया।गगरा टूटते ही उसके अंदर रखे चांदी के सिक्के आंगन में चारों ओर बिखर गए। घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। जानकारी के अनुसार अमनारी निवासी रामचंद्र महतो, सुरेश महतो, संतोष प्रसाद (पिता-बढ़न महतो), बुधन महतो, बालेश्वर महतो तथा नंदु महतो (पिता-बैजु महतो) का यह संयुक्त मिट्टी का मकान काफी पुराना है।लगातार बारिश के कारण मकान की एक दीवार अचानक ढह गई। जब परिवार के लोग मलबा हटाने लगे तो दीवार के भीतर छिपाकर रखा गया मिट्टी का गगरा नीचे गिरा और टूट गया। इसके साथ ही उसमें रखे चांदी के सिक्के बाहर निकलकर बिखर गए। घटना के बाद पूरे गांव में इसकी चर्चा शुरू हो गई। कुछ ही देर में यह खबर आसपास के दर्जनों गांवों तक पहुंच गई और लोगों की भीड़ उक्त घर पर उमड़ पड़ी। हर कोई दीवार के भीतर वर्षों से सुरक्षित रखे गए चांदी के सिक्कों को देखने के लिए उत्सुक नजर आया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने सिक्कों या गगरे को नहीं छुआ है। समाचार लिखे जाने तक मलबा और सिक्के उसी स्थिति में पड़े थे, जिस स्थिति में दीवार गिरने के बाद मिले थे। परिवार के लोग भी पूरे घटनाक्रम को लेकर आश्चर्यचकित हैं।ग्रामीणों का मानना है कि यह गगरा उनके पूर्वजों द्वारा कई दशक पहले दीवार के भीतर सुरक्षित रखवाया गया होगा। पुराने समय में बैंकिंग व्यवस्था नहीं होने और चोरी-डकैती की घटनाओं के डर से लोग अपनी बहुमूल्य संपत्ति, चांदी के सिक्के और आभूषण मिट्टी के बर्तनों में रखकर घर की दीवारों या जमीन के भीतर छिपा दिया करते थे। माना जा रहा है कि यह गगरा भी उसी परंपरा का हिस्सा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सिक्के कितने पुराने हैं और उनकी संख्या कितनी है। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कई लोग इसे पूर्वजों की धरोहर बता रहे हैं, तो कुछ इसे ऐतिहासिक महत्व की खोज मान रहे हैं। फिलहाल अमनारी गांव में यह घटना लोगों के बीच आकर्षण और चर्चा का विषय बनी हुई है।1
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