अराई गांव में नीम के पेड़ से निकल रहा श्वेत तरल पदार्थ बना चर्चा का विषय मेजा,प्रयागराज । जनपद प्रयागराज के मेजा तहसील अंतर्गत अरई गाँव इन दिनों एक नीम के पेड़ से सफेद तरल पदार्थ निकल रहा है जो लोगों में बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ एक पुराने नीम के पेड़ से अचानक निकल रहे 'रहस्यमयी श्वेत पदार्थ' ने ग्रामीणों के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव में स्थित एक नीम के पेड़ के तने से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ (स्वेत पदार्थ) स्वतः ही बाहर निकल रहा है। जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के इलाकों से लोगों का हुजूम इसे देखने के लिए उमड़ पड़ा। स्थानीय लोग इसे किसी दैवीय चमत्कार या भगवान का आशीर्वाद मानकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। लोगों ने पेड़ के पास अगरबत्ती और फूल चढ़ाकर इसे 'दूधिया नीम' का नाम दे दिया है। क्या कहता है विज्ञान? हालांकि जनमानस में इसे चमत्कार माना जा रहा है, लेकिन वनस्पति विज्ञान (Botany) के नजरिए से इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं: * बैक्टेरियल वेटवुड (Bacterial Wetwood): यह एक सामान्य स्थिति है जिसे 'स्लाइम फ्लक्स' भी कहा जाता है। जब पेड़ के तने के अंदर बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे आंतरिक दबाव पैदा करते हैं, जिससे सफेद या मटमैला तरल बाहर निकलने लगता है। * पौधे का दबाव: कभी-कभी जमीन में अत्यधिक नमी या पोषक तत्वों के असंतुलन के कारण पेड़ के जाइलम (Xylem) ऊतकों से रस का रिसाव होने लगता है। * कीटों का प्रभाव: तने के अंदर मौजूद कुछ कीट भी इस तरह के रिसाव का कारण बन सकते हैं। सामाजिक प्रभाव अरई गाँव में इस घटना ने विज्ञान और आस्था के बीच एक बहस छेड़ दी है। जहाँ बुजुर्ग और श्रद्धालु इसे प्रकृति का संकेत मान रहे हैं, वहीं जागरूक युवा और विशेषज्ञ इसे एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं। प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों का अक्सर ऐसे मामलों में यह सुझाव होता है कि इस तरह के पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया की अधिकता होती है। निष्कर्ष: मेजा के अरई गाँव की यह घटना हमारी लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। चमत्कार हो या विज्ञान, इस नीम के पेड़ ने निश्चित रूप से गाँव को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। देखिए पूरी वीडियो
अराई गांव में नीम के पेड़ से निकल रहा श्वेत तरल पदार्थ बना चर्चा का विषय मेजा,प्रयागराज । जनपद प्रयागराज के मेजा तहसील अंतर्गत अरई गाँव इन दिनों एक नीम के पेड़ से सफेद तरल पदार्थ निकल रहा है जो लोगों में बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ एक पुराने नीम के पेड़ से अचानक निकल रहे 'रहस्यमयी श्वेत पदार्थ' ने ग्रामीणों के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव में स्थित एक नीम के पेड़ के तने से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ (स्वेत पदार्थ) स्वतः ही बाहर निकल रहा है। जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के इलाकों से लोगों का हुजूम इसे देखने के लिए उमड़ पड़ा। स्थानीय लोग इसे किसी दैवीय चमत्कार या भगवान का आशीर्वाद मानकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। लोगों ने पेड़ के पास अगरबत्ती और फूल चढ़ाकर इसे 'दूधिया नीम' का नाम दे दिया है। क्या कहता है विज्ञान? हालांकि जनमानस में इसे चमत्कार माना जा रहा है, लेकिन वनस्पति विज्ञान (Botany) के नजरिए से इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं: * बैक्टेरियल वेटवुड (Bacterial Wetwood): यह एक सामान्य स्थिति है जिसे 'स्लाइम फ्लक्स' भी कहा जाता है। जब पेड़ के तने के अंदर बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे आंतरिक दबाव पैदा करते हैं, जिससे सफेद या मटमैला तरल बाहर निकलने लगता है। * पौधे का दबाव: कभी-कभी जमीन में अत्यधिक नमी या पोषक तत्वों के असंतुलन के कारण पेड़ के जाइलम (Xylem) ऊतकों से रस का रिसाव होने लगता है। * कीटों का प्रभाव: तने के अंदर मौजूद कुछ कीट भी इस तरह के रिसाव का कारण बन सकते हैं। सामाजिक प्रभाव अरई गाँव में इस घटना ने विज्ञान और आस्था के बीच एक बहस छेड़ दी है। जहाँ बुजुर्ग और श्रद्धालु इसे प्रकृति का संकेत मान रहे हैं, वहीं जागरूक युवा और विशेषज्ञ इसे एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं। प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों का अक्सर ऐसे मामलों में यह सुझाव होता है कि इस तरह के पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया की अधिकता होती है। निष्कर्ष: मेजा के अरई गाँव की यह घटना हमारी लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। चमत्कार हो या विज्ञान, इस नीम के पेड़ ने निश्चित रूप से गाँव को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। देखिए पूरी वीडियो
- मेजा,प्रयागराज । जनपद प्रयागराज के मेजा तहसील अंतर्गत अरई गाँव इन दिनों एक नीम के पेड़ से सफेद तरल पदार्थ निकल रहा है जो लोगों में बेहद चर्चा का विषय बना हुआ है। यहाँ एक पुराने नीम के पेड़ से अचानक निकल रहे 'रहस्यमयी श्वेत पदार्थ' ने ग्रामीणों के बीच कौतूहल और आस्था का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, गाँव में स्थित एक नीम के पेड़ के तने से दूध जैसा सफेद तरल पदार्थ (स्वेत पदार्थ) स्वतः ही बाहर निकल रहा है। जैसे ही यह खबर फैली, आसपास के इलाकों से लोगों का हुजूम इसे देखने के लिए उमड़ पड़ा। स्थानीय लोग इसे किसी दैवीय चमत्कार या भगवान का आशीर्वाद मानकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। लोगों ने पेड़ के पास अगरबत्ती और फूल चढ़ाकर इसे 'दूधिया नीम' का नाम दे दिया है। क्या कहता है विज्ञान? हालांकि जनमानस में इसे चमत्कार माना जा रहा है, लेकिन वनस्पति विज्ञान (Botany) के नजरिए से इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं: * बैक्टेरियल वेटवुड (Bacterial Wetwood): यह एक सामान्य स्थिति है जिसे 'स्लाइम फ्लक्स' भी कहा जाता है। जब पेड़ के तने के अंदर बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे आंतरिक दबाव पैदा करते हैं, जिससे सफेद या मटमैला तरल बाहर निकलने लगता है। * पौधे का दबाव: कभी-कभी जमीन में अत्यधिक नमी या पोषक तत्वों के असंतुलन के कारण पेड़ के जाइलम (Xylem) ऊतकों से रस का रिसाव होने लगता है। * कीटों का प्रभाव: तने के अंदर मौजूद कुछ कीट भी इस तरह के रिसाव का कारण बन सकते हैं। सामाजिक प्रभाव अरई गाँव में इस घटना ने विज्ञान और आस्था के बीच एक बहस छेड़ दी है। जहाँ बुजुर्ग और श्रद्धालु इसे प्रकृति का संकेत मान रहे हैं, वहीं जागरूक युवा और विशेषज्ञ इसे एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में देख रहे हैं। प्रशासन और कृषि वैज्ञानिकों का अक्सर ऐसे मामलों में यह सुझाव होता है कि इस तरह के पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया की अधिकता होती है। निष्कर्ष: मेजा के अरई गाँव की यह घटना हमारी लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाती है। चमत्कार हो या विज्ञान, इस नीम के पेड़ ने निश्चित रूप से गाँव को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। देखिए पूरी वीडियो1
- मेजा, प्रयागराज। तहसील क्षेत्र के गंगा तट पर बसे पकरी सेवार गांव की मुख्य सड़क इन दिनों बदहाल स्थिति में है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राहगीर रोजाना हिचकोले खाते हुए सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब पखवाड़े भर पहले लोक निर्माण विभाग की ओर से कुछ गड्ढों में गिट्टी डलवाई गई थी, लेकिन उस पर पिंचिंग नहीं कराई गई। परिणामस्वरूप सड़क पर बिखरी गिट्टियां राहगीरों के लिए खतरा बन गई हैं। आए दिन लोग फिसलकर गिर रहे हैं। गांव के धीरज यादव ने बताया कि प्रतिदिन तड़के चार बजे के आसपास डोहरिया, जयराम का पुरा, परानीपुर समेत विभिन्न गांवों के श्रद्धालु इसी मार्ग से गंगा स्नान के लिए जाते हैं। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देते और लोग गिरकर चोटिल हो जाते हैं। ग्रामीण आनंद कुमार, कृष्ण प्रकाश द्विवेदी और ललन तिवारी का कहना है कि गंगा तट पर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बाबा कोटेश्वर नाथ मंदिर के समीप करोड़ों रुपये की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। इसका निर्माण दक्षिण भारत की संस्था ‘गजा’ द्वारा कराया जा रहा है। आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान गांव की मुख्य सड़क को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। साथ ही जल निगम की पाइप लाइन और प्राथमिक विद्यालय तक गई इंटरनेट केबल भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे ग्रामीणों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। जल जीवन मिशन के अवर अभियंता अखिल देव सिंह ने बताया कि सड़क निर्माण में आने वाले खर्च का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग से मांगा गया है। प्रस्ताव प्राप्त होते ही बजट जारी कर दिया जाएगा, जिसके बाद सड़क का निर्माण कार्य कराया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन मिल सके।1
- प्रयागराज जिले के बसवार फायरिंग कांड को लेकर 50 बालू मजदूरों की रैली, आरोपियों पर कार्रवाई की मांग अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेतृत्व में शुक्रवार को बसवार फायरिंग कांड के विरोध में करीब 50 बालू मजदूरों ने रैली निकालकर थाना घूरपुर पहुंचकर प्रदर्शन किया। मजदूरों ने एसीपी कौंधियारा श्री अब्दुल सलाम खान को तहरीर सौंपते हुए नामजद आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। मजदूरों द्वारा दी गई तहरीर में (1) चंदू निषाद, (2) नितिन निषाद, (3) रतन निषाद, (4) रामजी निषाद, (5) सुखलाल पासी, (6) लक्ष्मन सिंह, (7) धनराज पासी समेत करीब 30 अन्य लोगों पर फायरिंग करने और घटना में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। तहरीर में मजदूरों ने कहा कि वे लंबे समय से सरकार से 24 जून 2019 के आदेश को वापस लेने, हर घाट पर बालू मंडी शुरू करने, मशीनों व लोडरों पर रोक लगाने तथा अवैध वसूली बंद कर नाव द्वारा खनन शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा बीच-बीच में खनन की छूट दिए जाने की जानकारी मिलती रही है, इसी के तहत बसवार घाट पर खनन कार्य चल रहा था। मजदूरों का कहना है कि बसवार घाट पर चल रहे खनन को रोकने और नावों को विद्यापीठ घाट पर उतारने का दबाव बनाने के उद्देश्य से आरोपियों ने फायरिंग की, जिससे दहशत का माहौल बन गया। इस संबंध में एसीपी कौंधियारा श्री अब्दुल सलाम खान ने बताया कि घटना को लेकर पहले ही एक मुकदमा दर्ज किया जा चुका है, जिसमें मुख्य आरोपी चंदू निषाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने मजदूरों द्वारा दी गई नई तहरीर के आधार पर भी मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। घटना को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है, वहीं मजदूर संगठनों ने दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग दोहराई।1
- प्रयागराज के औद्योगिक थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर तिराहा के पास गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें दोपहिया वाहन सवार व्यक्ति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाकर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दुर्घटना कैसे हुई, इसकी जांच जारी है।1
- Post by Bhanu Prbhav.p1
- एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है इस वीडियो को आप देख करके जान सकते हैं कि क्या सही है क्या गलत है1
- Post by Raju Yadav1
- रामनगर बाजार में पसरा सन्नाटा मेजा प्रयागराज।1