भीलवाड़ा जिले के अंतिम छोर पर स्थित फूलियाकलां का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। डॉक्टरों के अवकाश पर चले जाने और कर्मचारियों के डेपुटेशन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में लगातार आ रहे मरीजों को इलाज न मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ रहा है या फिर अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में चिकित्सा और जांच व्यवस्था ठप होने के पीछे कर्मचारियों की कमी एक बड़ा कारण है। डॉ. सत्यनारायण शर्मा 1 जून से मेडिकल अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. नितेश झाजोरिया 2 जुलाई से अवैतनिक अवकाश पर चल रहे हैं। इसके अलावा, डॉ. दुर्गेश खिंची को 23 मई से पीएचसी कोठियां में डेपुटेशन पर लगाया गया है। फार्मासिस्ट हितेश सेन पिछले छह महीने से केकड़ी में और लैब टेक्नीशियन सालु खां पिछले पांच महीने से बच्छखेड़ा पीएचसी में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं। इन परिस्थितियों के चलते अस्पताल की पूरी व्यवस्था नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के अंतिम छोर पर होने की वजह से यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से विभागीय अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार है। उच्च अधिकारियों के दौरे भी बहुत कम होते हैं और केवल निरीक्षण की सूचना मिलने पर ही कर्मचारी उपस्थित नजर आते हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार द्वारा डेपुटेशन पर रोक संबंधी निर्देशों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंभीर रोगियों को केवल प्राथमिक उपचार देकर अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू करने का प्रयास किया जाएगा। स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही प्रभावी कदम उठाकर डॉक्टरों और आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
भीलवाड़ा जिले के अंतिम छोर पर स्थित फूलियाकलां का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। डॉक्टरों के अवकाश पर चले जाने और कर्मचारियों के डेपुटेशन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में लगातार आ रहे मरीजों को इलाज न मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ रहा है या फिर अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में चिकित्सा और जांच व्यवस्था ठप होने के पीछे कर्मचारियों की कमी एक बड़ा कारण है। डॉ. सत्यनारायण शर्मा 1 जून से मेडिकल अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. नितेश झाजोरिया 2 जुलाई से अवैतनिक अवकाश पर चल रहे हैं। इसके अलावा, डॉ. दुर्गेश खिंची को 23 मई से पीएचसी कोठियां में डेपुटेशन पर लगाया गया है। फार्मासिस्ट हितेश सेन पिछले छह महीने से केकड़ी में और लैब टेक्नीशियन सालु खां पिछले पांच महीने से बच्छखेड़ा पीएचसी में डेपुटेशन पर
कार्यरत हैं। इन परिस्थितियों के चलते अस्पताल की पूरी व्यवस्था नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के अंतिम छोर पर होने की वजह से यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से विभागीय अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार है। उच्च अधिकारियों के दौरे भी बहुत कम होते हैं और केवल निरीक्षण की सूचना मिलने पर ही कर्मचारी उपस्थित नजर आते हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार द्वारा डेपुटेशन पर रोक संबंधी निर्देशों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंभीर रोगियों को केवल प्राथमिक उपचार देकर अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू करने का प्रयास किया जाएगा। स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही प्रभावी कदम उठाकर डॉक्टरों और आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
- भीलवाड़ा जिले के अंतिम छोर पर स्थित फूलियाकलां का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। डॉक्टरों के अवकाश पर चले जाने और कर्मचारियों के डेपुटेशन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में लगातार आ रहे मरीजों को इलाज न मिलने के कारण निराश होकर लौटना पड़ रहा है या फिर अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल में चिकित्सा और जांच व्यवस्था ठप होने के पीछे कर्मचारियों की कमी एक बड़ा कारण है। डॉ. सत्यनारायण शर्मा 1 जून से मेडिकल अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. नितेश झाजोरिया 2 जुलाई से अवैतनिक अवकाश पर चल रहे हैं। इसके अलावा, डॉ. दुर्गेश खिंची को 23 मई से पीएचसी कोठियां में डेपुटेशन पर लगाया गया है। फार्मासिस्ट हितेश सेन पिछले छह महीने से केकड़ी में और लैब टेक्नीशियन सालु खां पिछले पांच महीने से बच्छखेड़ा पीएचसी में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं। इन परिस्थितियों के चलते अस्पताल की पूरी व्यवस्था नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के अंतिम छोर पर होने की वजह से यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से विभागीय अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार है। उच्च अधिकारियों के दौरे भी बहुत कम होते हैं और केवल निरीक्षण की सूचना मिलने पर ही कर्मचारी उपस्थित नजर आते हैं। ग्रामीणों ने राज्य सरकार द्वारा डेपुटेशन पर रोक संबंधी निर्देशों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गंभीर रोगियों को केवल प्राथमिक उपचार देकर अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू करने का प्रयास किया जाएगा। स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही प्रभावी कदम उठाकर डॉक्टरों और आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके।2
- भीलवाड़ा में समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय टीम मुस्कान फाउंडेशन ने रक्तदान के बाद अब पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई पहल शुरू की है। फाउंडेशन ने अपने 1285 यूनिट रक्तदान के ऐतिहासिक संकल्प को आगे बढ़ाते हुए अब 1285 पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस हरित अभियान के प्रथम चरण के तहत सार्वजनिक स्थानों पर 95 पौधे लगाए गए हैं। इसके साथ ही फाउंडेशन के सदस्यों ने इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण करने का भी पूरा संकल्प लिया है। फाउंडेशन का मानना है कि जिस तरह रक्तदान से लोगों को नया जीवन मिलता है, उसी प्रकार पौधारोपण से पर्यावरण को जीवन मिलता है। संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज में सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। टीम मुस्कान फाउंडेशन ने भीलवाड़ा के शहरवासियों से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने और अधिक से अधिक पौधे लगाकर उन्हें सुरक्षित रखने की अपील की है ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।1
- भीलवाड़ा में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को महामृत्युंजय मंत्र जाप के साथ श्रद्धांजलि देने के लिए एक विशेष हवन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम रविवार, 12 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत के राष्ट्रीय कार्यालय गीता भवन सभागार में आयोजित हुआ। इस श्रद्धांजलि हवन कार्यक्रम का आयोजन क्लब की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती अनिता डॉ. अशोक सोडाणी के नेतृत्व में किया गया। अंतर्राष्ट्रीय माहेश्वरी कपल क्लब भारत द्वारा वर्ष 2004 से लगातार सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से साल 2016 से क्लब अपनी देश भर में फैली 133 जिला शाखाओं के माध्यम से आम लोगों और विशेषकर युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है। इसके लिए क्लब द्वारा क्विज प्रतियोगिताएं, स्लोगन प्रतियोगिताएं, रैलियां, स्टेज शो, सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और संस्थाओं का सम्मान, रिफ्लेक्टर वितरण और हवन जैसे विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि इन सभी प्रकल्पों के पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या हैं। इन दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को सामूहिक रूप से अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने ही होंगे।2
- भीलवाड़ा के आसींद कस्बे में अखिल भारतीय जैन तेरापंथ महिला मंडल के तत्वाधान में स्थानीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा दो दिवसीय 'श्री उत्सव प्रदर्शनी' का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से जिले भर से आईं समाज की महिलाओं ने विभिन्न प्रकार की स्टॉल लगाईं। इन स्टॉल के जरिए महिलाओं ने 'उन्नत भारत विकसित भारत' की राह पर आगे बढ़ते हुए महिला आत्मनिर्भरता का एक बेहद मजबूत और सकारात्मक संदेश दिया है।4
- भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत होने के मामले को लेकर एक जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति अस्पताल में हुई प्रसूता मौतों के मामले की जांच करेगी।1
- अजमेर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ ठगी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यह घटना तब हुई जब बुजुर्ग महिला गाय को रोटी खिलाने के लिए घर से बाहर निकली थीं। रास्ते में बदमाशों ने महिला को अपनी बातों में फंसा लिया और झांसा देकर उनकी दो सोने की चूड़ियां उतरवा लीं। चूड़ियां हाथ में आते ही बदमाश मौके से फरार हो गए। इस वारदात के बाद पीड़िता ने सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और इसके लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। इस वीडियो में जानें कि पुलिस का इस पूरी घटना पर क्या कहना है और ये शातिर ठग किस तरह लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।1
- भीलवाड़ा के पुर थाना क्षेत्र के काणोली चौराहे पर स्थित जंबो पंजाब ढाबे पर बैठे एक युवक पर बदमाशों ने चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में चाकू सीधे युवक की छाती पर लगा। घायल युवक को लहूलुहान हालत में इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया है, जहां ट्रॉमा वार्ड में उसका इलाज जारी है। अस्पताल में भर्ती घायल राजोला निवासी 22 वर्षीय सत्यनारायण उर्फ सत्तू जाट (पिता हीरा जाट) ने रविवार शाम करीब 5 बजे बताया कि वह दिन में ढाबे पर बैठा हुआ था। इसी दौरान कमलेश जाट, सांवर जाट और उनके साथ 3 से 4 अन्य लोग वहां पहुंचे और आते ही मारपीट शुरू कर दी। इसी बीच कमलेश ने अचानक उस पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। वारदात के बाद सभी हमलावर मौके से फरार हो गए।1