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फिल्म की शुरुआत थंगलान (चियान विक्रम) नाम के एक गरीब आदिवासी से होती है, जो अपने परिवार और कबीले के साथ एक छोटे से गाँव में रहता है। इस समुदाय की ज़मीन ज़मींदारों ने हड़प ली थी, जिसके कारण उन्हें बंधुआ मज़दूर बनने पर मजबूर होना पड़ा। इसी दौरान, ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड क्लेमेंट को पता चलता है कि उस इलाके की मिट्टी में सोना छिपा है। सोने की तलाश के लिए, वह थंगलान को अपने साथ शामिल करता है क्योंकि आदिवासियों को ज़मीन और जंगलों की गहरी समझ होती है। थंगलान अपने परिवार और गाँव वालों की गरीबी मिटाने और उन्हें उनका सम्मान वापस दिलाने की लालच में अंग्रेजों की मदद करने को तैयार हो जाता है।
AMARPAL RATHORE
फिल्म की शुरुआत थंगलान (चियान विक्रम) नाम के एक गरीब आदिवासी से होती है, जो अपने परिवार और कबीले के साथ एक छोटे से गाँव में रहता है। इस समुदाय की ज़मीन ज़मींदारों ने हड़प ली थी, जिसके कारण उन्हें बंधुआ मज़दूर बनने पर मजबूर होना पड़ा। इसी दौरान, ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड क्लेमेंट को पता चलता है कि उस इलाके की मिट्टी में सोना छिपा है। सोने की तलाश के लिए, वह थंगलान को अपने साथ शामिल करता है क्योंकि आदिवासियों को ज़मीन और जंगलों की गहरी समझ होती है। थंगलान अपने परिवार और गाँव वालों की गरीबी मिटाने और उन्हें उनका सम्मान वापस दिलाने की लालच में अंग्रेजों की मदद करने को तैयार हो जाता है।
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- फिल्म 'थंगलान' की शुरुआत थंगलान (चियान विक्रम) नाम के एक गरीब आदिवासी से होती है, जो अपने परिवार और कबीले के साथ एक छोटे से गाँव में रहता है। इस समुदाय की ज़मीन ज़मींदारों द्वारा हड़प ली गई थी, जिसके कारण उन्हें बंधुआ मजदूर बनने पर मजबूर होना पड़ा। इसी बीच, ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड क्लेमेंट को पता चलता है कि इस इलाके की मिट्टी में सोना दबा हुआ है। सोने की तलाश के लिए, वह थंगलान को अपने साथ जोड़ता है, क्योंकि आदिवासियों को उस ज़मीन और जंगलों की गहरी समझ होती है। थंगलान अपने परिवार और गाँव वालों की गरीबी मिटाने तथा उन्हें उनका सम्मान वापस दिलाने की लालच में अंग्रेजों की मदद करने के लिए तैयार हो जाता है। यह फिल्म 19वीं सदी के ब्रिटिश शासनकाल के दौरान कर्नाटक के कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। 'थंगलान' आदिवासियों और मजदूरों के संघर्ष, ब्रिटिश शोषण और सोने की खदानों के काले सच को दर्शाती है।1
- हरदोई कोतवाली शहर पुलिस ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी मु0अ0स0 229/26 धारा 3(1) गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप एक्ट से संबंधित मामले में की गई है।1
- फर्रुखाबाद जिले की तहसील अमृतपुर में सोमवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 30 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से सिर्फ दो शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया जा सका, जबकि शेष शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग की 12, पुलिस विभाग की 6, विकास विभाग की 4, विद्युत विभाग की 4, खाद्य एवं रसद विभाग की 2 और अन्य विभागों की 2 शिकायतें शामिल थीं। समाधान दिवस के दौरान, खंडौली ग्राम निवासी ओमचंद्र, रामसिंह, सर्वेश और पवन ने मेडबंदी दायरा के कारण खेत कम हो जाने की शिकायत दर्ज कराई। नवादा, मौजा कुम्हरौर निवासी ऋतु देवी पत्नी कमलेश कुमार ने अपने नाबालिग पुत्र से अवैध रूप से बैनामा कराने का आरोप लगाते हुए प्रार्थना पत्र दिया। इसी मौजा के नवादा निवासी लाला राम पुत्र मोहन ने न्यायालय के आदेश के बावजूद भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत की। इसके अतिरिक्त, दिउसी हुसैनपुर परमनगर के सर्वेश कुमार पुत्र गौतम सिंह ने तालाब की भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने की मांग की, वहीं कमालुद्दीनपुर निवासी रामनारायण ने बिना किसी पूर्व सूचना के घरेलू विद्युत कनेक्शन को व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित किए जाने की शिकायत प्रस्तुत की। उपजिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्राप्त शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को समयबद्ध न्याय मिल सके। इस समाधान दिवस में न्यायिक उपजिलाधिकारी यदुवंश सिंह, नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह, खंड विकास अधिकारी सुनील जायसवाल, एडीओ पंचायत अजीत पाठक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- फिल्म की शुरुआत थंगलान (चियान विक्रम) नाम के एक गरीब आदिवासी से होती है, जो अपने परिवार और कबीले के साथ एक छोटे से गाँव में रहता है। इस समुदाय की ज़मीन ज़मींदारों ने हड़प ली थी, जिसके कारण उन्हें बंधुआ मज़दूर बनने पर मजबूर होना पड़ा। इसी दौरान, ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड क्लेमेंट को पता चलता है कि उस इलाके की मिट्टी में सोना छिपा है। सोने की तलाश के लिए, वह थंगलान को अपने साथ शामिल करता है क्योंकि आदिवासियों को ज़मीन और जंगलों की गहरी समझ होती है। थंगलान अपने परिवार और गाँव वालों की गरीबी मिटाने और उन्हें उनका सम्मान वापस दिलाने की लालच में अंग्रेजों की मदद करने को तैयार हो जाता है।1
- शाहजहांपुर के जलालाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कोना याकूबपुर में 42 वर्षीय लक्ष्मण सिंह ने आम के पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह विवाहित थे और अपने पीछे पत्नी शीला देवी व चार छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि परिजनों ने शव को फंदे से उतारकर घर ले आए थे। पुलिस के अनुसार, लक्ष्मण सिंह लंबे समय से काला पीलिया (जॉन्डिस) से पीड़ित थे और बीमारी के कारण मानसिक अवसाद में चल रहे थे। खेत में काम कर रहे लोगों ने सोमवार की रात उन्हें फंदे पर लटका देखा और तत्काल परिजनों को इसकी सूचना दी। पुलिस ने मामले में फील्ड यूनिट की मदद से साक्ष्य संकलित किए, पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, और सूचना फौती दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है।1