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Guddu bhaiya cover Yatra Chhatarpur se jatashankar Dham प्रदेश मंत्री अर्चना भाभी सा
पत्रकार धर्मेंद्र बुन्देला
Guddu bhaiya cover Yatra Chhatarpur se jatashankar Dham प्रदेश मंत्री अर्चना भाभी सा
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- पलेरा नगर परिषद की साधारण सभा: 50 में से 33 बिंदुओं पर लगी मुहर, ठेकेदारों को लेकर लगे आरोप-प्रत्यारोप, बैठक वायरल नगर परिषद पलेरा में *मंगलवार को साधारण सभा की बैठक* आयोजित की गई। बैठक में *नगर विकास के लिए 50 बिंदु* रखे गए थे। - *50 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई - *33 बिंदुओं पर सहमति* बनी, कुछ बिंदुओं को निरस्त किया गया - बाकी बचे बिंदुओं पर आगामी बैठक में चर्चा - सभी पार्षदों ने विकास कार्यों में सहभागिता दर्ज कराई* #आरोप-प्रत्यारोप* बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ: पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सुनील खटीक ने अध्यक्ष एवं जनप्रतिनिधियों चहेतो पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने" का आरोप लगाया। भाजपा नेता पार्षद प्रतिनिधि संजय अहिरवार 'संजू बाबा' ने पूर्व अध्यक्ष पर ठेकेदारों के साथ पार्टनरशिप और हिस्सेदारीका आरोप लगाया। पूर्व अध्यक्ष ने आरोपों को *निराधार* बताते हुए *सबूत मांगे*। बैठक की बहस का वीडियो *सोशल मीडिया पर वायरल* है। बैठक में अध्यक्ष श्रीमती गायत्री विनोद वर्मा, सीएमओ शिवी उपाध्याय, उपाध्यक्ष संदीप रानू तिवारी, सांसद प्रतिनिधि सुनील खटीक, सब इंजीनियर मोनिका खरे, लेखपाल राजकुमार खरे, बाबू छत्रपाल प्रजापति, एल्डरमैन सहित 15 वार्डों के पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधि* मौजूद रहे। #### *सीएमओ का बयान* *सुश्री शिवी उपाध्याय, सीएमओ नगर परिषद पलेरा* ने कहा: _"50 बिंदुओं पर चर्चा हुई, 33 बिंदुओं पर सहमति बनी। कुछ बिंदुओं को निरस्त किया गया और कुछ पर आगामी परिषद की बैठक में चर्चा की जाएगी।"_ इस तरह *नगर परिषद पलेरा* एक बार फिर सुर्खियों में है। --- *#PaleRa #NagarParishadPaleRa #SadharanSabha #TikamgarhNews #MPNews #Vikas #Politics* पलेरा नगर परिषद की साधारण सभा: 50 में से 33 बिंदुओं पर लगी मुहर, ठेकेदारों को लेकर लगे आरोप-प्रत्यारोप, बैठक वायरल नगर परिषद पलेरा में *मंगलवार को साधारण सभा की बैठक* आयोजित की गई। बैठक में *नगर विकास के लिए 50 बिंदु* रखे गए थे। - *50 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा हुई - *33 बिंदुओं पर सहमति* बनी, कुछ बिंदुओं को निरस्त किया गया - बाकी बचे बिंदुओं पर आगामी बैठक में चर्चा - सभी पार्षदों ने विकास कार्यों में सहभागिता दर्ज कराई* #आरोप-प्रत्यारोप* बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ: पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सुनील खटीक ने अध्यक्ष एवं जनप्रतिनिधियों चहेतो पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने" का आरोप लगाया। भाजपा नेता पार्षद प्रतिनिधि संजय अहिरवार 'संजू बाबा' ने पूर्व अध्यक्ष पर ठेकेदारों के साथ पार्टनरशिप और हिस्सेदारीका आरोप लगाया। पूर्व अध्यक्ष ने आरोपों को *निराधार* बताते हुए *सबूत मांगे*। बैठक की बहस का वीडियो *सोशल मीडिया पर वायरल* है। बैठक में अध्यक्ष श्रीमती गायत्री विनोद वर्मा, सीएमओ शिवी उपाध्याय, उपाध्यक्ष संदीप रानू तिवारी, सांसद प्रतिनिधि सुनील खटीक, सब इंजीनियर मोनिका खरे, लेखपाल राजकुमार खरे, बाबू छत्रपाल प्रजापति, एल्डरमैन सहित 15 वार्डों के पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधि* मौजूद रहे। #### *सीएमओ का बयान* *सुश्री शिवी उपाध्याय, सीएमओ नगर परिषद पलेरा* ने कहा: _"50 बिंदुओं पर चर्चा हुई, 33 बिंदुओं पर सहमति बनी। कुछ बिंदुओं को निरस्त किया गया और कुछ पर आगामी परिषद की बैठक में चर्चा की जाएगी।"_ इस तरह *नगर परिषद पलेरा* एक बार फिर सुर्खियों में है। --- *#PaleRa #NagarParishadPaleRa #SadharanSabha #TikamgarhNews #MPNews #Vikas #Politics*3
- *दुख की घड़ी में संबल बनी मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना* *कलेक्टर मृणाल मीणा ने श्रमिक परिवार को 4 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत कर सौंपी आदेश प्रति* जनसुनवाई में कलेक्टर मृणाल मीणा ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दिवंगत श्रमिक संदीप सेन के परिवार को मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत 4 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत कराई। श्रमिक की दुखद मृत्यु के बाद परिवार के सामने उत्पन्न आर्थिक संकट को देखते हुए कलेक्टर ने प्रकरण में तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। जनसुनवाई में ग्राम खौंप, जिला छतरपुर निवासी श्रमिक उत्तराधिकारी भारती सेन ने सहायता राशि के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। कलेक्टर ने आवेदन को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत छतरपुर के सीईओ अजय सिंह को प्रकरण में तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में पात्रता संबंधी कार्यवाही पूर्ण कर 4 लाख रुपए की अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत की गई। कलेक्टर मृणाल मीणा ने जनसुनवाई के दौरान ही आवेदक भारती सेन को सहायता राशि का स्वीकृति आदेश सौंपा।1
- नागेश्वर ज्योतिर्लिग मन्दिर द्वारका नगरी गुजरात बहुत सुन्दर दृष्य नागेश्वर ज्योतिर्लिग मन्दिर द्वारका नगरी गुजरात बहुत सुन्दर दृष्य देखने के लिए हजारों की संख्या में भक्त जन सामिल होते हैं1
- पनवाड़ी पी डी ए महापंचायत पर महेंद्र राजपूत बीरा के समर्थन में उमड़ा जन सैलाब जनसंवाद पनवाड़ी पी डी ए महापंचायत पर महेंद्र राजपूत बीरा के समर्थन में उमड़ा जन सैलाब जनसंवाद1
- प्रेम विवाह के बाद पति पर दूसरी शादी की तैयारी का आरोप, न्याय की गुहार लेकर पुलिस कार्यालय पहुंची महिला। छतरपुर शहर में एक महिला ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए आज 11 अगस्त दोपहर करीब 12:00 बजे पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। महिला का कहना है कि उसने अपने पति से प्रेम विवाह किया था और दोनों की एक बच्ची भी है। आरोप है कि अब उसका पति उसे साथ रखने के बजाय दूसरी लड़की से प्रेम विवाह करने की तैयारी कर रहा है।पीड़िता के मुताबिक, उसका पति कथित तौर पर उसे अपने साथ रखने के एवज में ₹1 लाख नकद और मोटरसाइकिल की मांग कर रहा है। महिला ने पति पर धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं।पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने और उसे न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1
- एक महीने में सड़क में दरारें... फिर शुरू हुई लीपापोती! लाखों की सड़क... महीनेभर में बदहाल गुणवत्ता पर सवाल, लीपापोती का खेल? विकास के नाम पर सड़क बनी... लागत हुई लाखों में... लेकिन सड़क बनने के महज एक महीने के भीतर ही उसमें लंबी-लंबी दरारें पड़ गईं। सवाल सिर्फ सड़क की गुणवत्ता का नहीं है... सवाल ये है कि जनता के पैसे से बनी सड़क इतनी जल्दी कैसे टूट गई? और जब सड़क की तस्वीरें सामने आईं... तो दरारों को ठीक करने के बजाय शुरू हो गई लीपापोती। टीकमगढ़ की ग्राम पंचायत नयाखेरा से सामने आई इन तस्वीरों ने पंचायत के विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये तस्वीरें हैं टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत नयाखेरा की... सड़क नई है... लेकिन हालत देखकर इसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। सड़क पर जगह-जगह लंबी दरारें... कहीं सतह उखड़ी हुई... तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में। ग्रामीणों का आरोप है कि मुक्तिधाम रोड का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से किया गया, जिसके चलते सड़क बनने के कुछ ही समय बाद खराब होने लगी। सबसे बड़ा सवाल सड़क के निर्माण की रफ्तार को लेकर भी है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक सड़क का काम महज दो दिन में पूरा कराया गया। अब सवाल है... क्या इतनी जल्दी सड़क का निर्माण पूरा करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई? क्या निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ? और अगर सड़क का निर्माण सही तरीके से हुआ था... तो महज कुछ ही समय में इसमें इतनी दरारें क्यों दिखाई देने लगीं? ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण में पर्याप्त सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया... और रेत की जगह मिट्टी मिली डस्ट जैसे घटिया मटेरियल के इस्तेमाल का भी आरोप है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी... लेकिन सड़क की मौजूदा तस्वीरें निश्चित तौर पर गुणवत्ता की जांच की जरूरत जरूर पैदा करती हैं। और अब देखिए... सड़क की दरारों पर कैसे मरहम लगाने की कोशिश की जा रही है। सड़क की तस्वीरें रिकॉर्ड किए जाने के कुछ ही घंटे बाद यहां लीपापोती का काम शुरू हो गया। कैमरे में साफ दिखाई दे रहा है कि मजदूर सड़क की दरारों और खराब हिस्सों पर काम कर रहे हैं। जब मजदूर से पूछा गया कि उसे यह काम किसने दिया... तो उसका कहना था कि उसे सरपंच की ओर से काम के लिए लगाया गया है। सड़क टूटी... तो शुरू हुई लीपापोती! ग्रामीणों का कहना है कि अगर नई बनी सड़क का ये हाल है... तो आने वाले समय में सड़क की स्थिति क्या होगी? ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत CM हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है। --- BYTE — ग्रामीण सुनील कुमार अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा बृजेश विश्वकर्मा — ग्रामीण, नयाखेरा भैरव भिल्लू अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा अरविंद अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा इस मामले में पंचायत के सरपंच से भी बात की गई। सरपंच की ओर से सड़क निर्माण को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। वहीं ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत के कामकाज पर सवाल उठाने वालों को कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय से फोन पर बात की। कलेक्टर ने मामले में जांच की बात कही और कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब असली सवाल यही है... क्या इस सड़क के निर्माण की तकनीकी जांच होगी? क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच होगी? और अगर जांच में गड़बड़ी सामने आती है... तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? नई सड़क एक महीने में कैसे टूट गई? क्या निर्माण में तय गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ? क्या सड़क निर्माण की तकनीकी जांच हुई थी? दरारों पर जांच से पहले लीपापोती क्यों? जनता के पैसे से बने काम की जवाबदेही किसकी? --- सड़क नई... दरारें पुरानी कहानी जैसी... और सवाल वही... विकास के नाम पर खर्च होने वाले जनता के पैसे का हिसाब आखिर कौन देगा? फिलहाल ग्रामीणों ने जांच की मांग की है... प्रशासन ने भी जांच का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है... या फिर सड़क की गुणवत्ता तय करने वालों की जिम्मेदारी भी तय होती है। एक महीने में सड़क में दरारें... फिर शुरू हुई लीपापोती! लाखों की सड़क... महीनेभर में बदहाल गुणवत्ता पर सवाल, लीपापोती का खेल? विकास के नाम पर सड़क बनी... लागत हुई लाखों में... लेकिन सड़क बनने के महज एक महीने के भीतर ही उसमें लंबी-लंबी दरारें पड़ गईं। सवाल सिर्फ सड़क की गुणवत्ता का नहीं है... सवाल ये है कि जनता के पैसे से बनी सड़क इतनी जल्दी कैसे टूट गई? और जब सड़क की तस्वीरें सामने आईं... तो दरारों को ठीक करने के बजाय शुरू हो गई लीपापोती। टीकमगढ़ की ग्राम पंचायत नयाखेरा से सामने आई इन तस्वीरों ने पंचायत के विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये तस्वीरें हैं टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत नयाखेरा की... सड़क नई है... लेकिन हालत देखकर इसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल है। सड़क पर जगह-जगह लंबी दरारें... कहीं सतह उखड़ी हुई... तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता सवालों के घेरे में। ग्रामीणों का आरोप है कि मुक्तिधाम रोड का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से किया गया, जिसके चलते सड़क बनने के कुछ ही समय बाद खराब होने लगी। सबसे बड़ा सवाल सड़क के निर्माण की रफ्तार को लेकर भी है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक सड़क का काम महज दो दिन में पूरा कराया गया। अब सवाल है... क्या इतनी जल्दी सड़क का निर्माण पूरा करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई? क्या निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ? और अगर सड़क का निर्माण सही तरीके से हुआ था... तो महज कुछ ही समय में इसमें इतनी दरारें क्यों दिखाई देने लगीं? ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण में पर्याप्त सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया... और रेत की जगह मिट्टी मिली डस्ट जैसे घटिया मटेरियल के इस्तेमाल का भी आरोप है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी... लेकिन सड़क की मौजूदा तस्वीरें निश्चित तौर पर गुणवत्ता की जांच की जरूरत जरूर पैदा करती हैं। और अब देखिए... सड़क की दरारों पर कैसे मरहम लगाने की कोशिश की जा रही है। सड़क की तस्वीरें रिकॉर्ड किए जाने के कुछ ही घंटे बाद यहां लीपापोती का काम शुरू हो गया। कैमरे में साफ दिखाई दे रहा है कि मजदूर सड़क की दरारों और खराब हिस्सों पर काम कर रहे हैं। जब मजदूर से पूछा गया कि उसे यह काम किसने दिया... तो उसका कहना था कि उसे सरपंच की ओर से काम के लिए लगाया गया है। सड़क टूटी... तो शुरू हुई लीपापोती! ग्रामीणों का कहना है कि अगर नई बनी सड़क का ये हाल है... तो आने वाले समय में सड़क की स्थिति क्या होगी? ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत CM हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है। --- BYTE — ग्रामीण सुनील कुमार अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा बृजेश विश्वकर्मा — ग्रामीण, नयाखेरा भैरव भिल्लू अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा अरविंद अहिरवार — ग्रामीण, नयाखेरा इस मामले में पंचायत के सरपंच से भी बात की गई। सरपंच की ओर से सड़क निर्माण को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। वहीं ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ निर्माण कार्य में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत के कामकाज पर सवाल उठाने वालों को कार्रवाई की धमकी दी जाती है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय से फोन पर बात की। कलेक्टर ने मामले में जांच की बात कही और कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब असली सवाल यही है... क्या इस सड़क के निर्माण की तकनीकी जांच होगी? क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच होगी? और अगर जांच में गड़बड़ी सामने आती है... तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? नई सड़क एक महीने में कैसे टूट गई? क्या निर्माण में तय गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ? क्या सड़क निर्माण की तकनीकी जांच हुई थी? दरारों पर जांच से पहले लीपापोती क्यों? जनता के पैसे से बने काम की जवाबदेही किसकी? --- सड़क नई... दरारें पुरानी कहानी जैसी... और सवाल वही... विकास के नाम पर खर्च होने वाले जनता के पैसे का हिसाब आखिर कौन देगा? फिलहाल ग्रामीणों ने जांच की मांग की है... प्रशासन ने भी जांच का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है... या फिर सड़क की गुणवत्ता तय करने वालों की जिम्मेदारी भी तय होती है।4
- न्यायालय के आदेश के बावजूद भूमि पर कब्जा न मिलने का आरोप, डीएम से लगाई गुहार महोबा। महोबकंठ थाना क्षेत्र के धरवार गांव निवासी एक व्यक्ति ने अपनी भूमि पर कथित कब्जे और बाउंड्री निर्माण को लेकर जिलाधिकारी से शिकायत की है। शिकायतकर्ता लक्ष्मण पुत्र श्रीपत ने गाटा संख्या 629, रकबा 0.364 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा दिलाए जाने की मांग की है। जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने बताया कि उक्त भूमि को लेकर न्यायालय अपर जिलाधिकारी महोबा तथा न्यायालय आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल बांदा में मामला चला, जिसमें उसके पक्ष में आदेश होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता के अनुसार उसे अभी तक भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर कुछ लोगों द्वारा बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उसने निर्माण का विरोध किया तो उसके साथ गाली-गलौज करते हुए कथित रूप से मारपीट की गई। शिकायत के मुताबिक मामले की सूचना महोबकंठ थाने में देने पर भी उसे कथित तौर पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की जांच कराते हुए बाउंड्री निर्माण पर रोक लगाई जाए और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप उसे भूमि पर कब्जा दिलाया जाए। #ikvnews #mahobainsight DM Mahoba1