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खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर परिजनों और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। इस घटना ने आदिवासी संगठन को भी नाराज कर दिया है, जिसके चलते सभी ने मिलकर कलेक्टर और एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। आदिवासी समाज खालवा के युवक की मौत की घटना से बेहद गुस्से में है और मामले की उचित जांच की मांग कर रहा है।
Ramchandra Kasde
खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर परिजनों और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। इस घटना ने आदिवासी संगठन को भी नाराज कर दिया है, जिसके चलते सभी ने मिलकर कलेक्टर और एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। आदिवासी समाज खालवा के युवक की मौत की घटना से बेहद गुस्से में है और मामले की उचित जांच की मांग कर रहा है।
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- बुरहानपुर में 30 जून, 2026 को रेणुका झील के किनारे 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें म.प्र. शासन के जल संसाधन विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट शामिल हुए। उन्होंने इस अभियान को जल संरक्षण की जनक्रांति बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की जल संरचनाओं को पुनर्जीवित करने तथा भूमिगत जलस्तर बढ़ाने की एक सार्थक पहल है। मंत्री श्री सिलावट ने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण और पौधारोपण को आवश्यक बताया, साथ ही सभी से जल की एक-एक बूंद बचाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। अपने संबोधन में, प्रभारी मंत्री श्री सिलावट ने बुरहानपुर को आस्था एवं संस्कृति की नगरी तथा गौरवशाली इतिहास वाला जिला बताया। उन्होंने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, उद्यानों और शासकीय संस्थानों में पौधे रोपित करने तथा विद्यार्थियों व युवाओं को पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर अभियान से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और हरित भविष्य मिल सके। उन्होंने नागरिकों से जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य विशेष अवसरों पर एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। मंत्री श्री सिलावट ने रेणुका झील के सौंदर्यीकरण के शेष कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, जिसका कार्य अमृत 2.0 के तहत 185.27 करोड़ रुपये की राशि से किया गया है और इसमें म्यूजिकल फाउंटेन व मनोरंजन गतिविधियों जैसे प्रस्तावित कार्य शामिल हैं। उन्होंने बुरहानपुर एवं खंडवा क्षेत्र को ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना के उपहार का भी उल्लेख किया, जो भविष्य में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को नई दिशा देगी। समापन समारोह में प्रभारी मंत्री श्री सिलावट ने मुख्यमंत्री जी के संदेश का वाचन किया, जिसमें जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश की सामूहिक यात्रा का उल्लेख था। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पौधारोपण किया, जिसमें प्रभारी मंत्री श्री सिलावट ने त्रिवेणी का पौधा रोपित किया। बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने रेणुका झील के सौंदर्यीकरण के लिए 70 लाख रुपये देने की बात कही और जल के सदुपयोग का आह्वान किया, जबकि नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू ने तालाबों के गहरीकरण से क्षेत्र को होने वाले लाभ पर प्रकाश डाला। महापौर श्रीमती माधुरी पटेल ने घोषणा की कि आगामी 6 जुलाई को भारत के महान राष्ट्रनायक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जयंती पर इसी परिसर में प्रतिमा स्थापना का भूमिपूजन किया जाएगा। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने अभियान के घटकों और विभागों द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री श्री सिलावट ने अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और राष्ट्रीय तिलहन मिशन अंतर्गत 'एक बगियां माँ के नाम' के तहत चयनित स्व सहायता समूह की दीदीयों को मूंगफल्ली के बीज वितरित किए गए। अंत में, जल संरक्षण की शपथ ली गई।1
- देवास शहर के जिला अस्पताल में मनमानी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ किसी स्वास्थ्यकर्मी की अनुपस्थिति में ही एक डिलीवरी हो गई। इस घटना को शहर के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया है। लेखक ने इस गंभीर स्थिति के लिए विधायक, महापौर और अस्पताल की सीएमएचओ जैसे जिम्मेदार अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया है कि इन सभी अधिकारियों के महिला होने के बावजूद भी महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इस तरह की घटनाओं के वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, जो इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। एम जी अस्पताल का नाम लेते हुए, लेखक ने तीखे शब्दों में पूछा है कि क्या देवास के जनप्रतिनिधि केवल फोटो खिंचवाने और जन्मदिन मनाने के लिए ही अस्पताल आते हैं, जबकि जन समस्याओं पर उनका ध्यान बिल्कुल नहीं जाता है। इस दोहराए गए सवाल ने जनप्रतिनिधियों की जन-कल्याण के प्रति उदासीनता पर गहरा रोष व्यक्त किया है।2
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में इन दिनों हल चलाने की तस्वीरें राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बैतूल दौरे के दौरान कुकरू के खेत में किसानों के साथ हल चलाया और खेती-किसानी से अपने जुड़ाव का संदेश दिया। इसके कुछ ही समय बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी बैतूल पहुंचे। भोपाल लौटते समय पाढ़र में उनकी नज़र खेत में बुवाई कर रहे किसानों पर पड़ी, जिसके बाद वे अपनी गाड़ी से उतरकर सीधे खेत में पहुँच गए। उन्होंने अपने सिर पर गमछा बांधकर, बैलों को हांकते हुए हल चलाया और किसानों के साथ कुछ समय बिताकर उनके खेती के कार्य में हाथ बंटाया। मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, दोनों नेताओं के खेत में हल चलाने की ये तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि बैतूल में नेताओं द्वारा हल चलाने की ये तस्वीरें केवल किसानों से जुड़ाव का संदेश हैं या फिर आने वाले समय में इनका कोई गहरा सियासी हल भी निकलेगा, यह तो वक्त ही बताएगा।2
- राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के करेड़ा कस्बे में 'मातेश्वरी मोबाइल शॉप' में चोरों ने करीब 35 से 40 स्मार्टफोन चुरा लिए, जिनकी कुल कीमत 4 से 5 लाख रुपये बताई जा रही है। इस वारदात का खुलासा तब हुआ जब सुबह दुकान मालिक दुकान खोलने पहुंचे और दुकान में चोरी का पता चला। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक संदिग्ध चोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा मुखौटा पहने हुए दिखाई दिया, जिसने छत के रास्ते दुकान में प्रवेश किया और चोरी को अंजाम देकर फरार हो गया। बताया गया है कि इसी गिरोह ने उसी रात एक और मोबाइल दुकान में चोरी करने का प्रयास भी किया था। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली है और अब आरोपियों की पहचान करने तथा उन्हें गिरफ्तार करने के लिए गहनता से तलाश कर रही है।1
- खंडवा जिले के ग्राम घोसली में शासन-प्रशासन और बिजली कंपनियों की अनदेखी के खिलाफ एक अनोखा विरोध प्रदर्शन सामने आया है, जहाँ मुआवजे की बकाया राशि और बिजली टावर लाइन की विसंगतियों से तंग आकर एक किसान ने टावर के खंभे पर ही अपना आशियाना बना लिया है। ग्राम घोसली के 58 वर्षीय किसान कैलाश सिंह पिछले कई दिनों से इसी ऊँचे बिजली टावर पर रहने को मजबूर हैं। कैलाश सिंह का आरोप है कि कंपनी ने उनके खेत में टावर लाइन का खंभा खड़ा कर दिया, लेकिन मुआवजे के नाम पर आज तक उन्हें एक रुपया भी नहीं दिया गया। अधिकारियों द्वारा उन्हें लगातार "आज-कल" कहकर केवल आश्वासन दिया जा रहा है और काम निकाला जा रहा है। पीड़ित किसान कैलाश सिंह ने दृढ़ता से कहा है, "मैं अपना पूरा बैंक स्टेटमेंट देने को तैयार हूँ, ताकि साबित हो सके कि कंपनी ने मुझे अब तक फूटी कौड़ी भी नहीं दी है।" इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अपनी गाढ़ी कमाई की जमीन पर हक की लड़ाई लड़ रहा यह किसान अब आर-पार के मूड में है। ग्रामीणों का भी कहना है कि जब तक किसान को उसका जायज मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक यह अनूठा आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बेबस किसान की सुध कब लेता है।1
- आज शाम बैतूल जनपद के खेड़ीसावलीगढ़ ग्राम स्थित मंगल भवन में जिला स्तरीय 'जल गंगा संवर्धन अभियान' का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी राव पटेल और केंद्रीय मंत्री डी डी उईके प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री डी डी उईके ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'जल गंगा अभियान' वर्तमान समय की आवश्यकता है और जल संवर्धन की योजनाओं पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया और बताया कि वनों के विनाश के बाद अब वृक्षारोपण अनिवार्य हो गया है, क्योंकि पेड़ों में जल अवशोषित करने की क्षमता होती है, जो जल संरक्षण में सहायक है। वहीं, राज्य मंत्री शिवाजी राव पटेल ने इस अभियान को जल संरक्षण के उद्देश्य से चलाए जाने की बात कही। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार, कलेक्टर बैतूल डॉक्टर सौरभ संजय सोनवणे, ग्राम सरपंच शर्मिला ठाकुर, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष नितिन बारस्कर, राजसीह परिहार और हंसराज धुर्वे भी मौजूद थे। इसके अतिरिक्त, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी इस समापन अवसर पर उपस्थित रहे।1
- बुरहानपुर में लोहार मंडी वार्ड के पार्षद एवं डिप्टी स्पीकर फहीम हाशमी पिछले 13 वर्षों से 'फरिश्ता-ए-तालीम' बनकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं। वे हजारों बच्चों के पढ़ने के सपनों को पूरा करने में मदद कर रहे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कॉपी, पेन और किताबों का खर्च उठाने की अनुमति नहीं देती। हर वर्ष नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले चार दिनों तक एक विशेष अभियान चलाया जाता है, जिसके तहत कक्षा पहली से बारहवीं तक के लगभग 15 से 20 हजार विद्यार्थियों को मुफ्त स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाती है। इसमें कॉपियां, पेन, पेंसिल, रबर, ज्योमेट्री बॉक्स और लॉन्ग रजिस्टर सहित पढ़ाई के लिए लगभग सभी आवश्यक सामग्री शामिल होती है, सिलेबस की पुस्तकें छोड़कर। इस पहल में धर्म, जाति या संप्रदाय का कोई भेद नहीं किया जाता; केवल बच्चे की गरीबी और पढ़ने की इच्छा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होती है। सहायता प्राप्त करने के लिए भी एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके तहत केवल सरकारी और निम्न आय वर्ग के स्कूलों के विद्यार्थियों को यह सुविधा मिलती है। पहले से उनके गरीबी रेखा कार्ड पंजीकृत किए जाते हैं और सामग्री वितरण के समय माता-पिता की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाती है, ताकि सहायता सही मायने में सबसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुँचे, जो आईएएस बनने जैसे सपने देखते हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी बच्चे के चेहरे पर आई मुस्कान, माता-पिता की आँखों में राहत और उनके सिर से आर्थिक बोझ का हटना है। यह पूरी पहल इस सिद्धांत पर आधारित है कि इंसानियत सबसे ऊपर है, और यही कारण है कि सभी समाजों के लोग इसकी सराहना करते हैं। इस नेक कार्य पर हर साल करीब दो से तीन लाख रुपये का खर्च आता है, जिसे फहीम हाशमी स्वयं वहन करते हैं। उन्हें किसी संस्था या सरकारी अनुदान से कोई मदद नहीं मिलती, जो इसे व्यक्तिगत संकल्प और सामाजिक जिम्मेदारी का एक अनूठा उदाहरण बनाता है। फहीम हाशमी का मानना है कि "बच्चे पढ़ेंगे, तो समाज आगे बढ़ेगा।" 13 वर्षों से हजारों बच्चों की आँखों में शिक्षा का उजाला भरने का यह प्रयास केवल स्टेशनरी बांटना नहीं है, बल्कि उम्मीद, विश्वास और इंसानियत की एक ऐसी मिसाल है जो दर्शाती है कि समाज बदलने के लिए हमेशा बड़े पद की नहीं, बल्कि बड़े दिल की आवश्यकता होती है। यह एक कॉपी है जो भविष्य में किसी डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या अधिकारी की नींव बन सकती है, और आगे चलकर किसी और जरूरतमंद बच्चे का हाथ थाम सकती है।1
- देवास में सूतार बाखल सब्जी मंडी चौराहे पर एक बड़ी दुर्घटना होते-होते बची, जहाँ स्कूटी सहित दो बालिकाएं एक नाले में गिर गईं। वहाँ मौजूद राहगीरों ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए उन्हें नाले से बाहर निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना स्थल पर नाला निर्माण कार्य के कई दिनों से रुके होने के कारण हुई। यदि राहगीरों ने तत्काल मदद न की होती, तो वहाँ एक बड़ा हादसा हो सकता था।1