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पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई20) के मिश्रण को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। एक तरफ जहां सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्रदूषण में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहनों के मालिक माइलेज में गिरावट और इंजन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। नीति आयोग की 'भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण 2020-25' रिपोर्ट के मुताबिक, ई20 ईंधन के उपयोग से देश को सालाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और दोपहिया वाहनों से होने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, आयोग ने खुद यह स्वीकार किया है कि ई20 के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में लगभग तीन से सात प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) की तकनीकी रिपोर्टों ने भी इस पर आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन वाहनों को 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें रबर पाइप, गैसकेट, सील और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों के समय से पहले खराब होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल नमी को आकर्षित करता है, जिससे पुराने इंजनों में जंग और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी कंपनियों के पुराने ओनर मैनुअल और सार्वजनिक दावों में विरोधाभास देखा जा रहा है। पुराने मैनुअल में स्पष्ट लिखा है कि ई10 से अधिक एथेनॉल पेट्रोल इंजन के प्रदर्शन और वारंटी को प्रभावित कर सकता है, जबकि कंपनियां अब सार्वजनिक रूप से ई20 को सुरक्षित बता रही हैं। इसी विरोधाभास को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से जवाब भी मांगा है। इस नए ईंधन मिश्रण से आम वाहन मालिकों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। मोटरसाइकिल मालिक राजा की बाइक का माइलेज 50 किमी प्रति लीटर से घटकर 45 किमी रह गया है, जिससे उनका मासिक पेट्रोल खर्च करीब 500 रुपये बढ़ गया है। वहीं, पुरानी एक्टिवा की मालिक छवि का कहना है कि सर्दियों में गाड़ी स्टार्ट करने में अब पहले से ज्यादा परेशानी होती है। 13 साल पुरानी कार के मालिक गौरव जैन शुद्ध पेट्रोल का विकल्प न मिलने से अपनी कार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि कार मालिक अमन का कहना है कि ब्राजील और अमेरिका की तरह भारत में भी उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

2 hrs ago
user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
राठौड़ न्यूज एजेंसी
Jawad, Neemuch•
2 hrs ago

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई20) के मिश्रण को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। एक तरफ जहां सरकार इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्रदूषण में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहनों के मालिक माइलेज में गिरावट और इंजन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। नीति आयोग की 'भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण 2020-25' रिपोर्ट के मुताबिक, ई20 ईंधन के उपयोग से देश को सालाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और दोपहिया वाहनों से होने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 30 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, आयोग ने खुद यह स्वीकार किया है कि ई20 के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में लगभग तीन से सात प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) की तकनीकी रिपोर्टों ने भी इस पर आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन वाहनों को 10 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें रबर पाइप, गैसकेट, सील और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों के समय से पहले खराब होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल नमी को आकर्षित करता है, जिससे पुराने इंजनों में जंग और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, मारुति, टोयोटा और हीरो जैसी कंपनियों के पुराने ओनर मैनुअल और सार्वजनिक दावों में विरोधाभास देखा जा रहा है। पुराने मैनुअल में स्पष्ट लिखा है कि ई10 से अधिक एथेनॉल पेट्रोल इंजन के प्रदर्शन और वारंटी को प्रभावित कर सकता है, जबकि कंपनियां अब सार्वजनिक रूप से ई20 को सुरक्षित बता रही हैं। इसी विरोधाभास को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से जवाब भी मांगा है। इस नए ईंधन मिश्रण से आम वाहन मालिकों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। मोटरसाइकिल मालिक राजा की बाइक का माइलेज 50 किमी प्रति लीटर से घटकर 45 किमी रह गया है, जिससे उनका मासिक पेट्रोल खर्च करीब 500 रुपये बढ़ गया है। वहीं, पुरानी एक्टिवा की मालिक छवि का कहना है कि सर्दियों में गाड़ी स्टार्ट करने में अब पहले से ज्यादा परेशानी होती है। 13 साल पुरानी कार के मालिक गौरव जैन शुद्ध पेट्रोल का विकल्प न मिलने से अपनी कार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि कार मालिक अमन का कहना है कि ब्राजील और अमेरिका की तरह भारत में भी उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए।

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  • नीमच के जमुनिया कलां में निर्माण कार्य में लापरवाही की सारी हदें पार हो चुकी हैं। यहाँ ठेकेदार की खुली मनमानी सरेआम देखने को मिल रही है, जहाँ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का निर्माण बिना रोलर के ही सीधे हाथों से किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा बिना किसी रोलर के इस तरह हाथों से सड़क बनाना उसकी घोर मनमानी और लापरवाही को उजागर करता है।
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    नीमच के जमुनिया कलां में निर्माण कार्य में लापरवाही की सारी हदें पार हो चुकी हैं। यहाँ ठेकेदार की खुली मनमानी सरेआम देखने को मिल रही है, जहाँ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़क का निर्माण बिना रोलर के ही सीधे हाथों से किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा बिना किसी रोलर के इस तरह हाथों से सड़क बनाना उसकी घोर मनमानी और लापरवाही को उजागर करता है।
    user_भविष्य न्यूज़ 24
    भविष्य न्यूज़ 24
    Court reporter नीमच, नीमच, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • नीमच की आस्था को देखकर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जहां ईश्वर, संत और भक्तों का संगम होता है, वहीं पर कुंभ साकार होता है। इस दौरान टाउन हॉल में 'हर-हर महादेव' का उद्घोष गूंज उठा और स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने सनातन संस्कृति, धर्म और सेवा का संदेश दिया।
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    नीमच की आस्था को देखकर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जहां ईश्वर, संत और भक्तों का संगम होता है, वहीं पर कुंभ साकार होता है। इस दौरान टाउन हॉल में 'हर-हर महादेव' का उद्घोष गूंज उठा और स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने सनातन संस्कृति, धर्म और सेवा का संदेश दिया।
    user_Mahesh Suthar
    Mahesh Suthar
    Carpenter नीमच नगर, नीमच, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी क्षेत्र से एक हकीकत सामने आई है कि भारत सरकार में केवल बड़े किसानों को ही फायदा मिलता है, जबकि छोटे किसानों तक नई तकनीक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इस परिस्थिति के बीच अब किसान स्वयं ही अपनी मंजिल तय कर रहे हैं कि कौन सी फसल उन्हें बेहतर मुनाफा देगी और किस फसल में लागत अधिक व कमाई कम है। इसी बदलाव के तहत गगरोल निवासी एक होनहार, जागरूक और युवा किसान ने परंपरागत खेती का रास्ता छोड़ दिया है। इस युवा किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर सब्जी उगाने की ओर ध्यान आकर्षित किया है और अब वे सब्जी की खेती करके अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
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    प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी क्षेत्र से एक हकीकत सामने आई है कि भारत सरकार में केवल बड़े किसानों को ही फायदा मिलता है, जबकि छोटे किसानों तक नई तकनीक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इस परिस्थिति के बीच अब किसान स्वयं ही अपनी मंजिल तय कर रहे हैं कि कौन सी फसल उन्हें बेहतर मुनाफा देगी और किस फसल में लागत अधिक व कमाई कम है।

इसी बदलाव के तहत गगरोल निवासी एक होनहार, जागरूक और युवा किसान ने परंपरागत खेती का रास्ता छोड़ दिया है। इस युवा किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर सब्जी उगाने की ओर ध्यान आकर्षित किया है और अब वे सब्जी की खेती करके अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
    user_Reporter ambalal suthar
    Reporter ambalal suthar
    Video Creator छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा में शहीदान-ए-कर्बला की याद में इंसानियत का महाकुंभ आयोजित हुआ, जहां कुल 143 यूनिट रक्तदान किया गया। इस अवसर पर पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने इस पुनीत कार्य की सराहना की। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि समाज में रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरी सेवा नहीं है।
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    चित्तौड़गढ़ के निंबाहेड़ा में शहीदान-ए-कर्बला की याद में इंसानियत का महाकुंभ आयोजित हुआ, जहां कुल 143 यूनिट रक्तदान किया गया। इस अवसर पर पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने इस पुनीत कार्य की सराहना की। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि समाज में रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरी सेवा नहीं है।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला तहसील के तहत आने वाली बढ़वाई पंचायत के चकतिया बावजी गांव में 24 फीट का स्वीकृत रास्ता बंद कर दिया गया है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है और उनकी आवाज को पूरी तरह से अनसुना किया जा रहा है।
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    चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला तहसील के तहत आने वाली बढ़वाई पंचायत के चकतिया बावजी गांव में 24 फीट का स्वीकृत रास्ता बंद कर दिया गया है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है और उनकी आवाज को पूरी तरह से अनसुना किया जा रहा है।
    user_Uday Lal RAMESHWAR meena
    Uday Lal RAMESHWAR meena
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी उपखंड क्षेत्र के पावली गांव में रहने वाले एक किसान किशनलाल बैरवा खेती की जुताई का कार्य आसान करने के लिए एक नया यंत्र लेकर आए हैं। इस नए औजार का नाम 'किसान किंग' है। इस यंत्र के आने से अब किसानों के लिए खेतों की जुताई का काम बेहद आसान हो जाएगा।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी उपखंड क्षेत्र के पावली गांव में रहने वाले एक किसान किशनलाल बैरवा खेती की जुताई का कार्य आसान करने के लिए एक नया यंत्र लेकर आए हैं। इस नए औजार का नाम 'किसान किंग' है। इस यंत्र के आने से अब किसानों के लिए खेतों की जुताई का काम बेहद आसान हो जाएगा।
    user_(ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    (ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के डूँगला क्षेत्र के चिकारड़ा अंतर्गत पदमपुरा स्थित राजकीय विद्यालय के बाहर लंबे समय से जलभराव, कीचड़ और दुर्गंध के कारण विद्यार्थियों तथा ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। विद्यालय आने-जाने वाले छोटे बच्चों को प्रतिदिन इस कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे उनके आवागमन प्रभावित होने के साथ ही हर समय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती थी। इस गंभीर समस्या के उजागर होने के बाद ग्राम पंचायत पालोद ने रविवार को विद्यालय के बाहर जलभराव वाले स्थान पर मिट्टी डलवाकर ट्रैक्टर की सहायता से उसे समतल कराया, जिससे बच्चों और ग्रामीणों को लंबे समय से बनी इस परेशानी से राहत मिली है। ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेश डांगी ने बताया कि पदमपुरा में जर्जर सड़क, सड़क किनारे उगी झाड़ियां, टूटी पुलिया और झुके हुए बिजली पोल जैसी अन्य कई समस्याएं भी मौजूद हैं। इन सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के सहयोग से इन समस्याओं का भी शीघ्र समाधान कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के डूँगला क्षेत्र के चिकारड़ा अंतर्गत पदमपुरा स्थित राजकीय विद्यालय के बाहर लंबे समय से जलभराव, कीचड़ और दुर्गंध के कारण विद्यार्थियों तथा ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। विद्यालय आने-जाने वाले छोटे बच्चों को प्रतिदिन इस कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता था, जिससे उनके आवागमन प्रभावित होने के साथ ही हर समय दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती थी। इस गंभीर समस्या के उजागर होने के बाद ग्राम पंचायत पालोद ने रविवार को विद्यालय के बाहर जलभराव वाले स्थान पर मिट्टी डलवाकर ट्रैक्टर की सहायता से उसे समतल कराया, जिससे बच्चों और ग्रामीणों को लंबे समय से बनी इस परेशानी से राहत मिली है।

ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेश डांगी ने बताया कि पदमपुरा में जर्जर सड़क, सड़क किनारे उगी झाड़ियां, टूटी पुलिया और झुके हुए बिजली पोल जैसी अन्य कई समस्याएं भी मौजूद हैं। इन सभी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों के सहयोग से इन समस्याओं का भी शीघ्र समाधान कराया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
    user_पवन अग्रवाल
    पवन अग्रवाल
    Local News Reporter डूंगला, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के नीमच में स्वामी कैलाशनंद गिरी महाराज के अनुसार, जहाँ ईश्वर, महात्मा और भक्तों का संगम होता है, वही स्थान कुंभ का रूप है। यहाँ महात्मा और भक्तों का ऐसा पवित्र संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ ईश्वर, महात्मा और श्रद्धालुओं का यह पावन मिलन साक्षात कुंभ के समान है।
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    मध्य प्रदेश के नीमच में स्वामी कैलाशनंद गिरी महाराज के अनुसार, जहाँ ईश्वर, महात्मा और भक्तों का संगम होता है, वही स्थान कुंभ का रूप है। यहाँ महात्मा और भक्तों का ऐसा पवित्र संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ ईश्वर, महात्मा और श्रद्धालुओं का यह पावन मिलन साक्षात कुंभ के समान है।
    user_भविष्य न्यूज़ 24
    भविष्य न्यूज़ 24
    Court reporter नीमच, नीमच, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
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