मैहर जिले के अमरपाटन नगर परिषद क्षेत्र में घनी आबादी और रिहायशी कॉलोनियों के बिल्कुल सामने शराब दुकान के संचालन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आबकारी विभाग की अनुमति से चल रही यह दुकान क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए भारी असुविधा का कारण बन रही है। रहवासियों का कहना है कि दुकान के आसपास अक्सर असामाजिक गतिविधियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे क्षेत्र का शांतिपूर्ण माहौल खतरे में है। यह भी बताया गया कि कुछ समय पहले इसी स्थान पर शराब दुकान को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया था, उस दौरान दुकान को आबादी वाले क्षेत्र से हटाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई थी। तब अधिकारियों ने इस स्थान को शराब दुकान के लिए 'अनुपयुक्त' भी माना था। हालांकि, अब दुकान के दोबारा शुरू होने के बाद विरोध के स्वर अचानक शांत दिखाई दे रहे हैं, जिस पर स्थानीय लोग हैरानी जता रहे हैं। वे प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बदलीं कि इस स्थान को फिर से अनुमति दे दी गई। स्थानीय नागरिक अब प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने और दुकान को वहां से हटाने की मांग कर रहे हैं।
मैहर जिले के अमरपाटन नगर परिषद क्षेत्र में घनी आबादी और रिहायशी कॉलोनियों के बिल्कुल सामने शराब दुकान के संचालन को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आबकारी विभाग की अनुमति से चल रही यह दुकान क्षेत्र के लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए भारी असुविधा का कारण बन रही है। रहवासियों का कहना है कि दुकान के आसपास अक्सर असामाजिक गतिविधियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे क्षेत्र का शांतिपूर्ण माहौल खतरे में है। यह भी बताया गया कि कुछ समय पहले इसी स्थान पर शराब दुकान को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया था, उस दौरान दुकान को आबादी वाले क्षेत्र से हटाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई थी। तब अधिकारियों ने इस स्थान को शराब दुकान के लिए 'अनुपयुक्त' भी माना था। हालांकि, अब दुकान के दोबारा शुरू होने के बाद विरोध के स्वर अचानक शांत दिखाई दे रहे हैं, जिस पर स्थानीय लोग हैरानी जता रहे हैं। वे प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बदलीं कि इस स्थान को फिर से अनुमति दे दी गई। स्थानीय नागरिक अब प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने और दुकान को वहां से हटाने की मांग कर रहे हैं।
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के आर्यन ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। अपनी कठिन ट्रेनिंग के दौरान असाधारण प्रदर्शन के लिए उन्हें 'बेस्ट ट्रेनिंग अवॉर्ड' से भी नवाजा गया है। राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हो रहा है, जिसमें आर्यन पूरे जोश के साथ मार्च पास्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। आर्यन की यह उल्लेखनीय सफलता युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखी जा रही है, जिसके लिए पूरा सतना जिला उन्हें बधाई दे रहा है।1
- मैहर जिले के ग्राम मड़ाई में ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए तालाब से निकाली गई मिट्टी का उपयोग सरपंच द्वारा सार्वजनिक कार्यों में न करके निजी उपयोग में किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाब की इस मिट्टी का इस्तेमाल गांव के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए ही किया जाना था, लेकिन इसके बजाय मिट्टी को निजी स्थानों पर ले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस मामले को लेकर गांव में जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों ने प्रशासन से इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने जोर देकर कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोकने के लिए संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, इस मामले पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।1
- मैहर एसपी कार्यालय में लापरवाही की हद पार होने को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह प्रश्न लगातार उठ रहा है कि क्या कार्यालय में व्यवस्था को लेकर अनदेखी बढ़ गई है।1
- मैहर जिले के रामनगर क्षेत्र में एक बेहद दुखद और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ घर में खेल रही 18 महीने की एक मासूम बच्ची की पानी से भरी बाल्टी में डूबने से असमय मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह दर्दनाक हादसा मंगलवार को उस समय हुआ जब मासूम बच्ची की माँ रोज़ाना की तरह अपने काम पर गई हुई थी। घर में अकेले खेलते समय बच्ची पानी से भरी एक बाल्टी के पास पहुँच गई। खेलते समय अचानक बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह सिर के बल बाल्टी के अंदर जा गिरी। बाल्टी में पानी भरा होने के कारण मासूम खुद को बाहर नहीं निकाल सकी और उसमें डूब गई। जब माँ काम खत्म करके वापस घर लौटी, तो उसने अपनी बच्ची को बाल्टी के पानी में डूबा हुआ पाया। आनन-फानन में मासूम बच्ची को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया क्योंकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना ने एक बार फिर छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। स्थानीय प्रशासन और प्रबुद्ध जनों ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे घर में छोटे बच्चों के आसपास पानी से भरे बर्तन, बाल्टी या टब खुले न छोड़ें और बच्चों पर निरंतर निगरानी बनाए रखें।1
- मैहर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए, मैहर देहात पुलिस ने नादन क्षेत्र में अवैध शराब की एक बड़ी खेप पकड़ी है। इस कार्रवाई के दौरान एक सफेद रंग की सफारी गाड़ी से लगभग 11 पेटी अवैध शराब जब्त की गई। बताया गया है कि अमरपाटन का शराब ठेकेदार अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर नादन इलाके में अवैध रूप से पैकारी (शराब की आपूर्ति या बिक्री) करवा रहा था। इस अवैध पैकारी में ठेकेदार का एक गुर्गा, राहुल सिंह, कथित तौर पर शामिल था। मांग उठ रही है कि राहुल सिंह के खिलाफ धारा 34/2 के तहत अपराध दर्ज किया जाना चाहिए।2
- मैहर कलेक्टर श्रीमती विदिशा मुखर्जी द्वारा गठित टास्क फोर्स समिति ने 16 जून को तहसील मैहर स्थित पांच स्टोन क्रेशरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया। जांच के दौरान इन स्टोन क्रेशरों में आवश्यक दस्तावेज नहीं पाए गए, जिसके चलते पर्यावरणीय और खनिज नियमों का उल्लंघन मानते हुए उन पर ताला लगाया गया। समिति ने स्टोन क्रेशरों की पर्यावरणीय अनुमति, वृक्षारोपण की स्थिति, बाउंड्रीवॉल, भंडारित खनिज की मात्रा, स्वीकृत क्षेत्र एवं डायवर्सन की स्थिति, स्प्रिंकलर और पर्यावरण संबंधी उपकरणों की विस्तृत जांच की थी। जिन पांच स्टोन क्रेशरों पर यह कार्रवाई की गई, उनमें जय बजरंग स्टोन क्रेशर तिलोरा, विंध्यवासिनी स्टोन क्रेशर बठिया, मां शारदा स्टोन क्रेशर रेउसा, अन्नपूर्णा स्टोन क्रेशर सिरमीली और साई स्टोन क्रेशर बठिया शामिल हैं। जांच दल में एसडीएम मैहर सुश्री दिव्या पटेल, तहसीलदार मैहर श्री जितेंद्र कुमार, पर्यावरण अधिकारी श्री जी. के. बैगा, महेंद्र सिंह, सहायक खनि अधिकारी आशुतोष मिश्रा के साथ संबंधित राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी भी शामिल थे। मैहर तहसील में स्टोन क्रेशरों की यह जांच अभी भी जारी है।2
- सतना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझगवां में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कथित तौर पर 9वीं कक्षा का एक छात्र ओपीडी पर्चियाँ बनाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह वायरल वीडियो स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है, क्योंकि जिस काउंटर पर प्रशिक्षित कर्मचारी होना चाहिए, वहाँ एक नाबालिग से काम कराया जा रहा था, जो अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही दर्शाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में व्यवस्थाएँ लंबे समय से भगवान भरोसे चल रही हैं। यदि वीडियो में दिख रहा बालक सच में छात्र है और उससे नियमित रूप से यह काम कराया जा रहा था, तो यह न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के डेटा और स्वास्थ्य सेवाओं की गोपनीयता के लिए भी गंभीर खतरा है। इस घटना से कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: ओपीडी काउंटर पर तैनात कर्मचारी आखिर कहाँ थे? किसके आदेश पर एक छात्र को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई? और क्या अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में जानकारी थी या नहीं? वीडियो वायरल होने के बाद, लोगों की निगाहें अब स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। यह घटना केवल एक अस्पताल की लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और कार्यप्रणाली पर भी गहरे सवाल खड़े करती है।1
- सतना जिले के कृपालपुर स्थित 100-सीटर पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास से छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ उन्हें परोसे जा रहे भोजन में कीड़े मिल रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और छात्रों को अस्वास्थ्यकर खाना खाने पर मजबूर किया जा रहा है। सामने आए वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि यह समस्या किसी एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छात्रावास में छात्रों की थालियों में कीड़े वाला खाना परोसा जा रहा है। यहाँ 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' के तहत 45 दिवसीय प्रशिक्षण ले रहे छात्रों का आरोप है कि उन्हें कीड़े वाली दाल और चावल खाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। छात्रों ने अपनी और अपने साथियों की थालियाँ दिखाते हुए वीडियो के माध्यम से इस प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया और सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया। छात्रों को इस तरह का अस्वच्छ भोजन परोसना न केवल प्रशासनिक उदासीनता का प्रमाण है, बल्कि उनके जीवन के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के वायरल होने और छात्रों के हंगामे के बाद स्थानीय प्रशासन और पिछड़ा वर्ग विभाग इस मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।1