हमें कर्मों से नहीं डरना,परिणाम बिगड़ने से डरना चाहिए:पं संयम शास्त्री विदिशा।श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर किले अंदर में चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म मनाया गया।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि मुम्बई से पधारे पंडित संयम शास्त्री द्वारा समयसार ग्रंथ पर स्वाध्याय चल रहा है।उन्होंने बताया कि जीव अपने हर कार्य में सुख चाहता है, पर उसे सुख मिलता नहीं क्योंकि उसकी दृष्टि बाहर है। जैसे कोई व्यक्ति सोने के सोफे पर भी दुखी बैठा है क्योंकि उसके घर में सुख-शांति नहीं। वैसे ही हम सब परिग्रह में सुख ढूंढ रहे हैं। आचार्य कुंदकुंद ने *समयसार* इसलिए नहीं लिखा कि लोग इसे पढ़कर *स्वच्छंद* बन जाएं, बल्कि *स्वच्छ* बनें। बनारसीदास जी ने देखा कि मूल समयसार बहुत कठिन है, इसलिए उन्होंने उसे ब्रजभाषा में समयसार नाटक के रूप में लिखा ताकि हर व्यक्ति अपनी परिणति को पवित्र कर सके।"मुझसे मेरा रिश्ता क्या है, ये रिश्ता मैं भूल गया" - हमें सबसे बड़ा अज्ञान यही है कि हम अपने आप को ही नहीं जानते। पंडित जी ने बताया कि भेद विज्ञान इस ग्रंथ की आत्मा है। पहले द्वारों में बताया - *जीव* क्या है, *अजीव* क्या है, कर्ता-कर्म का भेद क्या है।अज्ञानी जैसे लकड़ी आग में जलकर कोयला बन जाती है, वैसे ही अज्ञानी थोड़ी सी भी प्रतिकूल परिस्थिति आते ही राग-द्वेष रूप बन जाता है। दुकान में ग्राहक नहीं आया तो दुखी, पूजा में बाजा अच्छा नहीं बजा तो पूजा खराब लगी - ये सब अज्ञान है। ज्ञानी जैसे सोने को कितना भी तपाओ, वो सोना ही रहता है, और निखरता है। वैसे ही ज्ञानी कितनी भी बुरी परिस्थिति में अपने ज्ञान भाव को नहीं छोड़ता। उनहोने ने कहा - परिस्थिति पर हमारा कंट्रोल नहीं, पर परिणाम पर है। जैसे जिम (Gym) में रोज जाने से शरीर बनता है, एक दिन में नहीं बनता। वैसे ही भेद विज्ञान का अभ्यास रोज करना है। जब जीव भेद विज्ञान से यह जान लेता है कि "मैं ज्ञाता-दृष्टा हूँ, राग मेरा स्वरूप नहीं", तब उसके अंदर सम्यक दर्शन की धारा शुरू हो जाती है। सायंकालीन स्वाध्याय में दशलक्षण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म पर प्रकाश डाला। उत्तम आर्जव यानी मन, वचन और कर्म में एकरूपता - जैसा मन में हो वैसा ही बोले और वैसा ही करे। छल-कपट, दिखावा और कुटिलता से दूर रहना ही सच्ची सरलता है।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि सायंकालीन संगीतमय भक्ति व विभिन्न ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है।ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन द्वारा सभी से अधिक संख्या में धर्म लाभ लेने की अपील की।
हमें कर्मों से नहीं डरना,परिणाम बिगड़ने से डरना चाहिए:पं संयम शास्त्री विदिशा।श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर किले अंदर में चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म मनाया गया।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि मुम्बई से पधारे पंडित संयम शास्त्री द्वारा समयसार ग्रंथ पर स्वाध्याय चल रहा है।उन्होंने बताया कि जीव अपने हर कार्य में सुख चाहता है, पर उसे सुख मिलता नहीं क्योंकि उसकी दृष्टि बाहर है। जैसे कोई व्यक्ति सोने के सोफे पर भी दुखी बैठा है क्योंकि उसके घर में सुख-शांति नहीं। वैसे ही हम सब परिग्रह में सुख ढूंढ रहे हैं। आचार्य कुंदकुंद ने *समयसार* इसलिए नहीं लिखा कि लोग इसे पढ़कर *स्वच्छंद* बन जाएं, बल्कि *स्वच्छ* बनें। बनारसीदास जी ने देखा कि मूल समयसार बहुत कठिन है, इसलिए उन्होंने उसे ब्रजभाषा में समयसार नाटक के रूप में लिखा ताकि हर व्यक्ति अपनी परिणति को पवित्र कर सके।"मुझसे मेरा रिश्ता क्या है, ये रिश्ता मैं भूल गया" - हमें सबसे बड़ा अज्ञान यही है कि हम अपने आप को ही नहीं जानते। पंडित जी ने बताया कि भेद विज्ञान इस ग्रंथ की आत्मा है। पहले द्वारों में बताया - *जीव* क्या है, *अजीव* क्या है, कर्ता-कर्म का भेद क्या है।अज्ञानी जैसे लकड़ी आग में जलकर कोयला बन जाती है, वैसे ही अज्ञानी
थोड़ी सी भी प्रतिकूल परिस्थिति आते ही राग-द्वेष रूप बन जाता है। दुकान में ग्राहक नहीं आया तो दुखी, पूजा में बाजा अच्छा नहीं बजा तो पूजा खराब लगी - ये सब अज्ञान है। ज्ञानी जैसे सोने को कितना भी तपाओ, वो सोना ही रहता है, और निखरता है। वैसे ही ज्ञानी कितनी भी बुरी परिस्थिति में अपने ज्ञान भाव को नहीं छोड़ता। उनहोने ने कहा - परिस्थिति पर हमारा कंट्रोल नहीं, पर परिणाम पर है। जैसे जिम (Gym) में रोज जाने से शरीर बनता है, एक दिन में नहीं बनता। वैसे ही भेद विज्ञान का अभ्यास रोज करना है। जब जीव भेद विज्ञान से यह जान लेता है कि "मैं ज्ञाता-दृष्टा हूँ, राग मेरा स्वरूप नहीं", तब उसके अंदर सम्यक दर्शन की धारा शुरू हो जाती है। सायंकालीन स्वाध्याय में दशलक्षण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म पर प्रकाश डाला। उत्तम आर्जव यानी मन, वचन और कर्म में एकरूपता - जैसा मन में हो वैसा ही बोले और वैसा ही करे। छल-कपट, दिखावा और कुटिलता से दूर रहना ही सच्ची सरलता है।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि सायंकालीन संगीतमय भक्ति व विभिन्न ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है।ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन द्वारा सभी से अधिक संख्या में धर्म लाभ लेने की अपील की।
- हमें कर्मों से नहीं डरना,परिणाम बिगड़ने से डरना चाहिए:पं संयम शास्त्री विदिशा।श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर किले अंदर में चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म मनाया गया।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि मुम्बई से पधारे पंडित संयम शास्त्री द्वारा समयसार ग्रंथ पर स्वाध्याय चल रहा है।उन्होंने बताया कि जीव अपने हर कार्य में सुख चाहता है, पर उसे सुख मिलता नहीं क्योंकि उसकी दृष्टि बाहर है। जैसे कोई व्यक्ति सोने के सोफे पर भी दुखी बैठा है क्योंकि उसके घर में सुख-शांति नहीं। वैसे ही हम सब परिग्रह में सुख ढूंढ रहे हैं। आचार्य कुंदकुंद ने *समयसार* इसलिए नहीं लिखा कि लोग इसे पढ़कर *स्वच्छंद* बन जाएं, बल्कि *स्वच्छ* बनें। बनारसीदास जी ने देखा कि मूल समयसार बहुत कठिन है, इसलिए उन्होंने उसे ब्रजभाषा में समयसार नाटक के रूप में लिखा ताकि हर व्यक्ति अपनी परिणति को पवित्र कर सके।"मुझसे मेरा रिश्ता क्या है, ये रिश्ता मैं भूल गया" - हमें सबसे बड़ा अज्ञान यही है कि हम अपने आप को ही नहीं जानते। पंडित जी ने बताया कि भेद विज्ञान इस ग्रंथ की आत्मा है। पहले द्वारों में बताया - *जीव* क्या है, *अजीव* क्या है, कर्ता-कर्म का भेद क्या है।अज्ञानी जैसे लकड़ी आग में जलकर कोयला बन जाती है, वैसे ही अज्ञानी थोड़ी सी भी प्रतिकूल परिस्थिति आते ही राग-द्वेष रूप बन जाता है। दुकान में ग्राहक नहीं आया तो दुखी, पूजा में बाजा अच्छा नहीं बजा तो पूजा खराब लगी - ये सब अज्ञान है। ज्ञानी जैसे सोने को कितना भी तपाओ, वो सोना ही रहता है, और निखरता है। वैसे ही ज्ञानी कितनी भी बुरी परिस्थिति में अपने ज्ञान भाव को नहीं छोड़ता। उनहोने ने कहा - परिस्थिति पर हमारा कंट्रोल नहीं, पर परिणाम पर है। जैसे जिम (Gym) में रोज जाने से शरीर बनता है, एक दिन में नहीं बनता। वैसे ही भेद विज्ञान का अभ्यास रोज करना है। जब जीव भेद विज्ञान से यह जान लेता है कि "मैं ज्ञाता-दृष्टा हूँ, राग मेरा स्वरूप नहीं", तब उसके अंदर सम्यक दर्शन की धारा शुरू हो जाती है। सायंकालीन स्वाध्याय में दशलक्षण पर्व के तृतीय दिवस उत्तम आर्जव धर्म पर प्रकाश डाला। उत्तम आर्जव यानी मन, वचन और कर्म में एकरूपता - जैसा मन में हो वैसा ही बोले और वैसा ही करे। छल-कपट, दिखावा और कुटिलता से दूर रहना ही सच्ची सरलता है।प्रवक्ता डॉ मक्खन लाल जैन ने बताया कि सायंकालीन संगीतमय भक्ति व विभिन्न ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों का आयोजन प्रतिदिन किया जा रहा है।ट्रस्ट अध्यक्ष मलुकचंद जैन द्वारा सभी से अधिक संख्या में धर्म लाभ लेने की अपील की।2
- सलामतपुर के सेमरा में खेड़ापति माता मंदिर की मूर्ति खंडित, आरोपी गिरफ्तार सेमरा गांव के प्राचीन खेड़ापति माता मंदिर में शुक्रवार देर रात मूर्ति खंडित किए जाने का मामला सामने आया। शनिवार सुबह श्रद्धालुओं ने मूर्ति क्षतिग्रस्त देखी, जिसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी श्यामराज सिंह सोमवंशी एवं चौकी प्रभारी सुनील शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम सक्रिय हुई। पुलिस ने मंदिर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और कुछ ही देर में आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान गांव के लखन लोधी के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने शराब के नशे में वारदात करना स्वीकार किया। घटना के बाद ग्रामीणों ने थाने पहुंचकर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 298 एवं 170 के तहत मामला दर्ज कर उसे रायसेन न्यायालय में पेश किया। पुलिस ने बताया कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम है।1
- हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि बाबा महाकाल की धरती उज्जैन में दो वर्ष बाद सिंहस्थ होने जा रहा है। प्राकट्य दिवस पर आयोजित यह धर्मसभा इंद्र की सभा जैसी भव्य प्रतीत हो रही है। इस अवसर पर उपस्थित सभी संतों एवं श्रद्धालुओं का मैं सरकार की ओर से अभिनंदन करता हूं। धर्मसभा से जनकल्याण का मार्गदर्शन मिलेगा। हमारी सरकार सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से कार्य कर रही है। सिंहस्थ के माध्यम से हम एक बार फिर मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है। जहां पहले 60-70 लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं पिछले वर्ष करीब 8 करोड़ लोगों ने उज्जैन की यात्रा की। यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में धार्मिक पर्यटन का विस्तार हो रहा है। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री* हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि बाबा महाकाल की धरती उज्जैन में दो वर्ष बाद सिंहस्थ होने जा रहा है। प्राकट्य दिवस पर आयोजित यह धर्मसभा इंद्र की सभा जैसी भव्य प्रतीत हो रही है। इस अवसर पर उपस्थित सभी संतों एवं श्रद्धालुओं का मैं सरकार की ओर से अभिनंदन करता हूं। धर्मसभा से जनकल्याण का मार्गदर्शन मिलेगा। हमारी सरकार सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से कार्य कर रही है। सिंहस्थ के माध्यम से हम एक बार फिर मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेंगे। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है। जहां पहले 60-70 लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं पिछले वर्ष करीब 8 करोड़ लोगों ने उज्जैन की यात्रा की। यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में धार्मिक पर्यटन का विस्तार हो रहा है। - *डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री*1
- आज इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए राहुल गांधी जी नेता प्रतिपक्ष लोकसभा पधारे हैं।1
- शमशाबाद-बिछिया में गणेश उत्सव की धूम, शिव भक्ति स्वरूप सजी भव्य गणेश प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र शमशाबाद-बिछिया में गणेश उत्सव की धूम, शिव भक्ति स्वरूप सजी भव्य गणेश प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र1
- मंडीदीप के राहुल नगर में 18 सितंबर 2026 को अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर स्थानीय आदिवासी गोंड समाज द्वारा एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्रांति के इन महानायकों को नमन करते हुए उनके बलिदान की गाथा को याद किया गया। इस अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के रायसेन जिला अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ छोटे लाल उइके, भोपाल जिला महासचिव मोहन लाल पन्द्रो, भोपाल कार्यवाहक अध्यक्ष, जय कुमार वरकड़े, भोपाल जिला सन्तोष पोर्ते जिला महामंत्री प्रदेश कार्यालय प्रभारी बंटी धुर्वे,जिला भोपाल , प्रदेश मीडिया प्रभारी ललित महेश्वरी पूरी टीम के साथ शामिल हुए। राजा शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य के शासक थे और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह ने भी अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में अंग्रेजों ने दोनों को तोप के मुहाने से बांधकर शहीद कर दिया था, जिसे आज भी स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी प्रतिरोध के इतिहास में खास जगह मिली है। मंडीदीप के राहुल नगर में गोंड समाज के लोगों ने इसी ऐतिहासिक बलिदान दिवस पर स्थानीय स्तर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मंडीदीप के राहुल नगर में 18 सितंबर 2026 को अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर स्थानीय आदिवासी गोंड समाज द्वारा एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्रांति के इन महानायकों को नमन करते हुए उनके बलिदान की गाथा को याद किया गया। इस अवसर पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के रायसेन जिला अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ छोटे लाल उइके, भोपाल जिला महासचिव मोहन लाल पन्द्रो, भोपाल कार्यवाहक अध्यक्ष, जय कुमार वरकड़े, भोपाल जिला सन्तोष पोर्ते जिला महामंत्री प्रदेश कार्यालय प्रभारी बंटी धुर्वे,जिला भोपाल , प्रदेश मीडिया प्रभारी ललित महेश्वरी पूरी टीम के साथ शामिल हुए। राजा शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य के शासक थे और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह ने भी अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में अंग्रेजों ने दोनों को तोप के मुहाने से बांधकर शहीद कर दिया था, जिसे आज भी स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी प्रतिरोध के इतिहास में खास जगह मिली है। मंडीदीप के राहुल नगर में गोंड समाज के लोगों ने इसी ऐतिहासिक बलिदान दिवस पर स्थानीय स्तर पर श्रद्धांजलि अर्पित की।4
- शमशाबाद में गूंजी ‘छात्रों की गूंज’, एलईडी पर राहुल गांधी का लाइव कार्यक्रम शमशाबाद में गूंजी ‘छात्रों की गूंज’, एलईडी पर राहुल गांधी का लाइव कार्यक्रम1
- 12 नवंबर 2025 की शाम, ग्रेटर नोएडा की लुकसर जेल से सुरेंद्र कोली बाहर निकला। निठारी कांड में 19 बच्चों के दुष्कर्म-हत्या के आरोप में 18 साल से जेल काटने के बाद कोली को सुप्रीम कोर्ट ने दुर्लभ फैसले में बरी कर दिया था। आखिर जेल से बाहर 10 महीनों में ऐसा क्या हुआ कि सुरेंद्र कोली ने जीनव समाप्त कर ली, क्या था निठारी कांड, जिसमें 3 बार कोली को फांसी की सजा सुनाई गई थी और तब वो कैसे बचा था; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... 12 नवंबर 2025 की शाम, ग्रेटर नोएडा की लुकसर जेल से सुरेंद्र कोली बाहर निकला। निठारी कांड में 19 बच्चों के दुष्कर्म-हत्या के आरोप में 18 साल से जेल काटने के बाद कोली को सुप्रीम कोर्ट ने दुर्लभ फैसले में बरी कर दिया था। आखिर जेल से बाहर 10 महीनों में ऐसा क्या हुआ कि सुरेंद्र कोली ने जीनव समाप्त कर ली, क्या था निठारी कांड, जिसमें 3 बार कोली को फांसी की सजा सुनाई गई थी और तब वो कैसे बचा था; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में...1