मिथिला के ग्रामीण अंचल में स्थित संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल में “किसान मेला 2.0” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन किसानों के आजीविका सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के उद्देश्य से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने की। किसान मेला के मुख्य अतिथि श्री मनीष कुमार, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विकास, मधुबनी तथा अतिविशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय रहे। संदीप फाउंडेशन के निदेशक श्री आर्यन झा, बसैठ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मंगलानन्द झा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्य अतिथि एवं अतिविशिष्ट अतिथि का स्वागत विश्वविद्यालय के संस्थापक सह अध्यक्ष मिथिला रत्न डॉ. संदीप नित्यानंद झा द्वारा मिथिला की प्राचीन परंपरा के अनुसार पाग, दोपट्टा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। छात्राओं ने मधुर मैथिली गीतों के साथ अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने संबोधन में डॉ. संदीप नित्यानंद झा ने कहा कि कृषि विश्व का सबसे प्राचीन पेशा है और भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के कारण किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीज, बेहतर उर्वरक तथा नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आगे कहा कि मिथिला की उपजाऊ मिट्टी, जल एवं अनुकूल जलवायु प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ एवं छात्र समाज में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती, पोषक अनाज उत्पादन तथा उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण देंगे। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु-सक्षम प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए वर्मी कम्पोस्ट इकाई, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती तथा प्राकृतिक कृषि उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मेले में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। किसान मेले में राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड, किसान नर्सरी, इफको, आधुनिक कृषि यंत्र निर्माताओं तथा सहकारिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित सुधा डेयरी सहित 60 से अधिक स्टॉल लगाए गए। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ विशेषज्ञों से सीधे संवाद का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया गया। मधुबनी जिले के विभिन्न पंचायतों से आए उत्कृष्ट कृषकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कृषि विभाग के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक तथा छात्राओं द्वारा मिथिला की पारंपरिक झिझिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिससे हजारों किसान बंधुओं को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नौशेरवां रौनक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर श्रीराम पॉलिटेक्निक के प्राचार्य पश्री चंद्रप्रकाश,श्री महावीर ठाकुर स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के संकायाध्यक्ष डाँ. आर पी श्रीवास्तव के सभी विभागाध्यक्षों एवं भू-अर्जन समिति के आमंत्रित सदस्य भी उपस्थित रहे।
मिथिला के ग्रामीण अंचल में स्थित संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल में “किसान मेला 2.0” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन किसानों के आजीविका सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के उद्देश्य से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने की। किसान मेला के मुख्य अतिथि श्री मनीष कुमार, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विकास, मधुबनी तथा अतिविशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय रहे। संदीप फाउंडेशन के निदेशक श्री आर्यन झा, बसैठ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मंगलानन्द झा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्य अतिथि एवं अतिविशिष्ट अतिथि का स्वागत विश्वविद्यालय के संस्थापक सह अध्यक्ष मिथिला रत्न डॉ. संदीप नित्यानंद झा द्वारा मिथिला की प्राचीन परंपरा के अनुसार पाग, दोपट्टा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। छात्राओं ने मधुर मैथिली गीतों के साथ अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने संबोधन में डॉ. संदीप नित्यानंद झा ने कहा कि कृषि विश्व का सबसे प्राचीन पेशा है और भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के कारण किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीज, बेहतर उर्वरक तथा नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आगे कहा कि मिथिला की उपजाऊ मिट्टी, जल एवं अनुकूल जलवायु प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ एवं छात्र समाज में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती, पोषक अनाज उत्पादन तथा उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण देंगे। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु-सक्षम प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए वर्मी कम्पोस्ट इकाई, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती तथा प्राकृतिक कृषि उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मेले में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। किसान मेले में राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड, किसान नर्सरी, इफको, आधुनिक कृषि यंत्र निर्माताओं तथा सहकारिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित सुधा डेयरी सहित 60 से अधिक स्टॉल लगाए गए। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ विशेषज्ञों से सीधे संवाद का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया गया। मधुबनी जिले के विभिन्न पंचायतों से आए उत्कृष्ट कृषकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कृषि विभाग के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक तथा छात्राओं द्वारा मिथिला की पारंपरिक झिझिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिससे हजारों किसान बंधुओं को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नौशेरवां रौनक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर श्रीराम पॉलिटेक्निक के प्राचार्य पश्री चंद्रप्रकाश,श्री महावीर ठाकुर स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के संकायाध्यक्ष डाँ. आर पी श्रीवास्तव के सभी विभागाध्यक्षों एवं भू-अर्जन समिति के आमंत्रित सदस्य भी उपस्थित रहे।
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- Post by Rahul Chaubey10
- मिथिला के ग्रामीण अंचल में स्थित संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल में “किसान मेला 2.0” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन किसानों के आजीविका सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के उद्देश्य से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने की। किसान मेला के मुख्य अतिथि श्री मनीष कुमार, कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विकास, मधुबनी तथा अतिविशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय रहे। संदीप फाउंडेशन के निदेशक श्री आर्यन झा, बसैठ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मंगलानन्द झा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। मुख्य अतिथि एवं अतिविशिष्ट अतिथि का स्वागत विश्वविद्यालय के संस्थापक सह अध्यक्ष मिथिला रत्न डॉ. संदीप नित्यानंद झा द्वारा मिथिला की प्राचीन परंपरा के अनुसार पाग, दोपट्टा एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। छात्राओं ने मधुर मैथिली गीतों के साथ अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। अपने संबोधन में डॉ. संदीप नित्यानंद झा ने कहा कि कृषि विश्व का सबसे प्राचीन पेशा है और भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के कारण किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीज, बेहतर उर्वरक तथा नवीन कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आगे कहा कि मिथिला की उपजाऊ मिट्टी, जल एवं अनुकूल जलवायु प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त है। विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ एवं छात्र समाज में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती, पोषक अनाज उत्पादन तथा उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण देंगे। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अरुण कुमार द्विवेदी ने पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु-सक्षम प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर बल देते हुए वर्मी कम्पोस्ट इकाई, मशरूम उत्पादन, जैविक खेती तथा प्राकृतिक कृषि उत्पादों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मेले में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। किसान मेले में राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड, किसान नर्सरी, इफको, आधुनिक कृषि यंत्र निर्माताओं तथा सहकारिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित सुधा डेयरी सहित 60 से अधिक स्टॉल लगाए गए। किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ विशेषज्ञों से सीधे संवाद का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया गया। मधुबनी जिले के विभिन्न पंचायतों से आए उत्कृष्ट कृषकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। कृषि विभाग के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक तथा छात्राओं द्वारा मिथिला की पारंपरिक झिझिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई, जिससे हजारों किसान बंधुओं को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. नौशेरवां रौनक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर श्रीराम पॉलिटेक्निक के प्राचार्य पश्री चंद्रप्रकाश,श्री महावीर ठाकुर स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के संकायाध्यक्ष डाँ. आर पी श्रीवास्तव के सभी विभागाध्यक्षों एवं भू-अर्जन समिति के आमंत्रित सदस्य भी उपस्थित रहे।1
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- समस्तीपुर में भूकंप की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास के दौरान जिले के आठ अलग-अलग स्थानों पर काल्पनिक रूप से भूकंप आने की स्थिति बनाई गई, जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्यों का संचालन किया गया। मॉक ड्रिल शुरू होने से पूर्व सभी विभागों की टीमें पटेल मैदान में एकत्रित हुईं, जहां जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा विस्तृत ब्रीफिंग दी गई। ब्रीफिंग के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, अग्निशमन दल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें एंबुलेंस के साथ सायरन बजाते हुए निर्धारित स्थलों की ओर रवाना हुईं। निर्धारित स्थानों पर पहुंचकर टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने, प्राथमिक उपचार देने और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभ्यास किया। जख्मी लोगों को एंबुलेंस के माध्यम से मेडिकल कैंप में लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज किया। गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया। इस दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों के उपयोग का भी परीक्षण किया गया। प्रशासन ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम करना और सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की कि भूकंप या किसी भी आपदा की स्थिति में घबराएं नहीं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।1
- अपने सभ शुभचिंतक साथी के महापर्व होलीक अग्रिम शुभकामनाएं।❤️🙏🏻1
- दरभंगा के कंट्रोल थाना क्षेत्र की पूरी वारदात1