बिहार की सियासत में 'सम्राट' का उदय: भाजपा के चाणक्य रणनीति की जीत पटना। बिहार की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रखर नेता सम्राट चौधरी का कद जिस तरह पार्टी के भीतर और राज्य की सत्ता में बढ़ा है, उसने यह साफ कर दिया है कि भाजपा अब बिहार में अपने 'कोर' चेहरे पर दांव लगा रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और इसे बिहार में "लव-कुश" समीकरण को साधने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्य आकर्षण: रिपोर्ट के खास बिंदु आक्रामक नेतृत्व: सम्राट चौधरी अपनी बेबाक बयानबाजी और नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाने जाते हैं। उनकी पगड़ी की कसम और उनके संकल्प ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है। जातीय समीकरण का मास्टरस्ट्रोक: पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाले सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा ने बिहार के एक बड़े वोट बैंक को सीधा संदेश दिया है। संगठन से सत्ता तक: एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी क्षमता साबित करने के बाद, अब उनके कंधों पर बिहार के विकास और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। सत्ता के गलियारों में हलचल सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं ने विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने सम्राट चौधरी को आगे करके बिहार में "चेहरा विहीन" राजनीति के दौर को खत्म करने की कोशिश की है। "बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। हमारा लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि बिहार को सुशासन और विकास के पथ पर अग्रसर करना है।" > — सम्राट चौधरी (हालिया संबोधन के दौरान) चुनौतियां और भविष्य की राह मुख्यमंत्री के रूप में या नेतृत्वकर्ता के रूप में सम्राट चौधरी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं: रोजगार और पलायन: बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाना। गठबंधन का तालमेल: सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार को स्थिरता देना। निष्कर्ष सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भाजपा की उस दूरगामी रणनीति का हिस्सा है, जिसके केंद्र में बिहार की कमान अपने हाथों में लेना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह बिहार की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। रिपोर्टर : खेमराज जोशी
बिहार की सियासत में 'सम्राट' का उदय: भाजपा के चाणक्य रणनीति की जीत पटना। बिहार की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रखर नेता सम्राट चौधरी का कद जिस तरह पार्टी के भीतर और राज्य की सत्ता में बढ़ा है, उसने यह साफ कर दिया है कि भाजपा अब बिहार में अपने 'कोर' चेहरे पर दांव लगा रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और इसे बिहार में "लव-कुश" समीकरण को साधने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्य आकर्षण: रिपोर्ट के खास बिंदु आक्रामक नेतृत्व: सम्राट चौधरी अपनी बेबाक बयानबाजी और नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाने जाते हैं। उनकी पगड़ी की कसम और उनके संकल्प ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है। जातीय समीकरण का मास्टरस्ट्रोक: पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाले सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा ने बिहार के एक बड़े वोट बैंक को सीधा संदेश दिया है। संगठन से सत्ता तक: एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी क्षमता साबित करने के बाद, अब उनके कंधों पर बिहार के विकास और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। सत्ता के गलियारों में हलचल सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं ने विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने सम्राट चौधरी को आगे करके बिहार में "चेहरा विहीन" राजनीति के दौर को खत्म करने की कोशिश की है। "बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। हमारा लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि बिहार को सुशासन और विकास के पथ पर अग्रसर करना है।" > — सम्राट चौधरी (हालिया संबोधन के दौरान) चुनौतियां और भविष्य की राह मुख्यमंत्री के रूप में या नेतृत्वकर्ता के रूप में सम्राट चौधरी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं: रोजगार और पलायन: बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाना। गठबंधन का तालमेल: सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार को स्थिरता देना। निष्कर्ष सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भाजपा की उस दूरगामी रणनीति का हिस्सा है, जिसके केंद्र में बिहार की कमान अपने हाथों में लेना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह बिहार की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। रिपोर्टर : खेमराज जोशी
- पटना। बिहार की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और प्रखर नेता सम्राट चौधरी का कद जिस तरह पार्टी के भीतर और राज्य की सत्ता में बढ़ा है, उसने यह साफ कर दिया है कि भाजपा अब बिहार में अपने 'कोर' चेहरे पर दांव लगा रही है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है और इसे बिहार में "लव-कुश" समीकरण को साधने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्य आकर्षण: रिपोर्ट के खास बिंदु आक्रामक नेतृत्व: सम्राट चौधरी अपनी बेबाक बयानबाजी और नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए जाने जाते हैं। उनकी पगड़ी की कसम और उनके संकल्प ने उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया है। जातीय समीकरण का मास्टरस्ट्रोक: पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाले सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा ने बिहार के एक बड़े वोट बैंक को सीधा संदेश दिया है। संगठन से सत्ता तक: एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी क्षमता साबित करने के बाद, अब उनके कंधों पर बिहार के विकास और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। सत्ता के गलियारों में हलचल सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं ने विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने सम्राट चौधरी को आगे करके बिहार में "चेहरा विहीन" राजनीति के दौर को खत्म करने की कोशिश की है। "बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। हमारा लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि बिहार को सुशासन और विकास के पथ पर अग्रसर करना है।" > — सम्राट चौधरी (हालिया संबोधन के दौरान) चुनौतियां और भविष्य की राह मुख्यमंत्री के रूप में या नेतृत्वकर्ता के रूप में सम्राट चौधरी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं: रोजगार और पलायन: बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाना। गठबंधन का तालमेल: सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार को स्थिरता देना। निष्कर्ष सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भाजपा की उस दूरगामी रणनीति का हिस्सा है, जिसके केंद्र में बिहार की कमान अपने हाथों में लेना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह बिहार की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। रिपोर्टर : खेमराज जोशी1
- लालसोट उपखंड में मंगलवार को परशुराम सर्किल पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया। जिसमे भक्तों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।3
- लालसोट में भव्य महारैली के साथ मनाई गई की 135वीं जयंती लालसोट में अंबेडकर विकास मंच के तत्वावधान में विशाल रैली निकाली गई, जो रामदेव मंदिर से अंबेडकर सर्किल तक पहुंची। इस दौरान बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। रैली में हजारों लोग शामिल हुए, वहीं घोड़ियों पर बच्चियों का जुलूस मुख्य आकर्षण रहा। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर रैली का स्वागत किया गया।4
- दौसा। बांदीकुई क्षेत्र के गांव दुड़की के पास स्थित नाई की खातली में एक युवक का शव पेड़ से लटका हुआ मिला शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार मृतक की पहचान प्रहलाद मीणा पुत्र प्रभाती लाल के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, युवक का शव गुलर के पेड़ पर फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। मृतक का भाई जगदीश भी घटनास्थल पर मौजूद था, जिसने किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता से इनकार किया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। ग्रामीणों द्वारा घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बांदीकुई अस्पताल में भेजा गया,आगे की कार्रवाई की जा रही है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और चर्चा का विषय बना हुआ है।4
- बांदीकुई के आगरा फाटक पर बड़ी लापरवाही! बिजली का पोल हटाया… लेकिन जानलेवा तार छोड़ दिए गए खुले! राहगीर हो रहे थे चोटिल, हादसे का बना था खतरा… खबर चलते ही मचा हड़कंप — सिर्फ 1 घंटे में हरकत में आया बिजली विभाग! अब मौके पर शुरू हुआ सुधार कार्य… 👉 सवाल कायम — पहले क्यों नहीं जागा प्रशासन?2
- बामनवास l उपखण्ड क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोयला में विद्यालयी शिक्षा विभाग के आदेश की अनुपलना में नवीन शिक्षण सत्र में शुभारम्भ ऋषभ पखवाड़े के तहत परम पूज्य आचार्य श्री 108 सन्मति महाराज और परम पूज्य बुंदेलखण्ड केसरी आचार्य श्री 108 सिद्धान्त सागर जी महाराज की परम शिष्या परम पूज्य गणिनी आर्यिकारत्न णमोकार जिनशासन प्रभाविक गुरु मां 105 श्री संगममति माताजी ने विद्यार्थियों को प्रवचन के माध्यम से देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव के जीवन के बारे में बताते हुए उनके सिद्धांतों को जीवन में उतरने की सीख दी l कार्यक्रम का शुभारम्भ राजकीय विद्यालय की प्रधानाचार्य अनिता मीणा ने देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान और मां सरस्वती चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करने के साथ हुआ l इसके बाद विद्यार्थियों ने ऋषभ देव की स्तुति की जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक उर्जा एवं सकारात्मकता से ओत प्रोत हो गया l इस अवसर पर वर्धमान कोचिंग की निदेशक एकता जैन ने प्रधानाचार्य अनिता मीणा का दुपट्टा पहनाते हुए जय जिनेन्द्र का बैज लगाकर उनका स्वागत सम्मान किया l विद्यालय के शिक्षक बाबूलाल जैन ने देवाधिदेव ऋषभदेव भगवान के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की l प्रधानाचार्य अनिता मीणा ने बताया कि शिक्षा विभाग अभिनव पहल पर आयोजित किया जा रहा ऋषभदेव पखवाड़ा विद्यार्थियों के अन्दर छुपी हुई प्रतिभा को सामने ला रहा है l विधार्थी की आयु के अनुसार प्रतियोगिताओं का आयोजन करने से बालक सहज रूप से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे है l वर्तमान परिपेक्ष्य में भगवान ऋषभदेव भगवान के संदेश जियो और जीने दो,शान्ति से रहने दो के सिद्धान्त ही विश्व को शान्ति की ओर ले जा सकते हैं l *विधार्थियों को आर्यिकाओं का विशेष प्रवचन* आर्यिकारत्न गुरु मां 105 श्री संगममति माताजी ने विद्यार्थियों को प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान ऋषभदेव युग के शुरुआत जब हुई जब योगभूमि समाप्त हो रही थी तब अयोध्या की पावन धरा पर ऋषभदेव का जन्म हुआ वे बचपन से ही अत्यन्त शांत, तेजस्वी और मानवीय गुणों से भरपूर था l उन्होंने संसार को जीवन जीने की कला सिखाई l समाज को व्यवस्थित करने के लिए वर्णों की स्थापना कि जिससे मनुष्य अनुशासन के साथ रह सके l आर्यिका 105 संयोमती माताजी ने बताया कि ऋषभदेव के 100 पुत्र थे,जिनमें चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम से अपने देश का नाम भारत पड़ा l उनकी पुत्रीयों ब्राह्मी और सुन्दरी ने लिपि और अंक विद्या का ज्ञान दिया l जिसके कारण आज हम लिख पढ़ पा रहे है l क्षुल्लिका 105 सम्पर्कमति माताजी,सानिध्यमति माताजी और समर्पितमति माताजी ने बताया कि भगवान ऋषभदेव भगवान के बताए सिद्धांतों को अपने जीवन उतारते हुए सभी बच्चे उन्नति के पथ पर अग्रसर हो और अपने माता -पिता और गुरुओं का सदा सम्मान करे l इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक मनोज कुमार मीणा,राधेश्याम मीणा,धर्मसिंह मीणा,निलमणि मीणा,पूनम सैनी, नेमीचन्द मीणा,नेतराम मीणा मीणा,गंगाराम मीणा,घनश्याम मीणा,बाबूलाल जैन,अमित कुमार,कमरुद्दीन खांन,मीरा गुप्ता, मोहसिन खांन,बनवारी लाल जांगिड़,नीलम सैनी,समयराज गुर्जर और वर्धमान दिगम्बर जैन विकास समिति के सदस्य सुनील कुमार जैन,सुमनलता जैन एवं संयोमति माताजी के संघ के साथ पैदल विहार में सहयोग प्रदान करने वाले विजय जैन,प्रदीप जैन,ममता जैन,मोनिका जैन,अरविन्द कुमार, शुभम कुमार,अनिकेत कुमार, लक्ष्मण कुमार आदि उपस्थित थे l3
- डा भीमराव अंबेडकर की 135 वी जयंती मनाई बांसखोह योगेश कुमार गुप्ता बांसखोह कस्बा स्थित रामदेव जी महाराज के मंदिर में मंगलवार को सुबह डा भीमराव अंबेडकर के जन्मोत्सव पर ग्रामीणों द्वारा माला पहनाकर डॉ भीमराव अंबेडकर की जय जयकार लगाते हुए नजर आए इस मौके पर चिरंजीलाल पिंगोलिया, विनोद पिंगोलिया, लालचंद पिंगोलिया, पवन, देवेन्द्र पिंगोलिया योगेश कुमार गुप्ता, हनुमान सहाय सैनी, बद्रीनारायण मीणा, प्रभातीलाल पिंगोलिया, रामेश्वर परेवा, पुरण , अन्य काफी संख्या में लोग मौजूद थे इस दौरान चिरंजीलाल पिंगोलिया ने डॉ भीमराव अंबेडकर के जीवन के बारे मे बताया कि भारतीय संविधान निर्माता आधुनिक भारत के शिल्पकार न्याय समानता शिक्षा ओर बंधुत्व के प्रतीक भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की 135 वी जयंती पर यह कार्यक्रम सभी के सहयोग से किया गया4
- लालसोट उपखंड में मंगलवार को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की 135 वीं जयंती पर डां.भीमराव अंबेडकर मंच के तत्वाधान में वार्ड नंबर 29 बाबा रामदेव मंदिर से विशाल रैली निकाली गई। रैली शहर के प्रमुख मार्गो से होते हुए तिबारा स्थित अंबेडकर सर्किल पहुंची। जहां पर बालिकाओं द्वारा बाबा साहब की मूर्ति पर माला अर्पण कर आशीर्वाद लिया। रैली का जगह-जगह समाज सेवियों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। वहीं कई जगह समाज सेवीयौ द्वारा शीतल पेयजल की भी व्यवस्था की गई। इस दौरान हजारों की संख्या में महिला पुरुषों व बच्चों ने बढ़ चढ़कर रैली में भाग लिया। वही डीजे की धुन पर महिला व पुरुष नाचते हुए नजर आए। रैली लगभग 1 किलोमीटर लंबी थी । वही रैली के दौरान जय भीम के नारों से पूरा लालसोट शहर गुंजमान हो उठा। पुलिस प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से साथ यातायात व्यवस्था सुचारू करते हुए नजर आए। रैली के अंदर विभिन्न प्रकार की जीवन झांकियां का भी प्रदर्शन किया गया। इस दौरान अनेक गण्यमान्य लोग भी रहे मौजूद।2