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ग्राम अकलवा में हनुमान दादा मंदिर तक जाने और दर्शन करने की सुविधा के लिए सड़क मार्ग की आवश्यकता जताई गई है।
Surendra Tomar
ग्राम अकलवा में हनुमान दादा मंदिर तक जाने और दर्शन करने की सुविधा के लिए सड़क मार्ग की आवश्यकता जताई गई है।
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- आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था। ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ। अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की वरसाला ग्राम पंचायत में स्थित पांच डुंगरी और कर्ण घाटी, महाभारत काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रही हैं। अज्ञातवास के समय पांडवों ने इन स्थलों पर घोर तपस्या की थी, जिससे ये स्थान द्वापर युग की घटनाओं के जीवंत साक्षी बन गए हैं, हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण ये अभी भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। प्राइम न्यूज़ राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छल-कपट कर पांडवों को अज्ञातवास दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि अज्ञातवास भंग हुआ तो उन्हें दोबारा अज्ञातवास भुगतना पड़ेगा। इसी दौरान, पांडवों ने भेस बदलकर माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ बांसवाड़ा जिले के घोटीया आंबा में शरण ली। बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और घोटीया आंबा में आज भी पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जहाँ गोमुख से निर्मल जलधारा बहती है और प्रतिवर्ष मेला लगता है। इसी पवित्र धाम पर पांडवों ने जप-तप, यज्ञ-हवन और विधि-विधान से पूजा अर्चना की, तब भगवान शिव ने असत्य पर सत्य की जीत का आशीर्वाद दिया। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के बताए विधि-विधान से पांडवों ने अपनी माता कुंती व पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर बैठकर आराधना शुरू की। जब सुत पुत्र कर्ण को पांडवों के पांच डुंगरी पर होने का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर अज्ञातवास भंग करने आया। किंतु ईश्वरीय शक्ति के आगे कर्ण भी नतमस्तक हो गया, वह दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया। यह स्थल आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी द्वारा तपस्या की गई पांच डुंगरी और उनकी दो अलग डुंगरिया आज भी इस बियाबान जंगल में विद्यमान हैं। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और वरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ महाभारत की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा की अनदेखी का हमेशा से शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की एक कार्य योजना तैयार की है, जिसमें पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इस संदर्भ में, संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार सोनी सहित संघ के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने पांच डुंगरी का अवलोकन किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
- बड़वानी जिला मुख्यालय पर 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने शनिवार को बड़वानी शहर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बैठक व्यवस्था और कंट्रोल रूम का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, एसडीएम श्री भूपेन्द्र रावत, नोडल व डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान और सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर भी उपस्थित थे। इस वर्ष जिले के कुल 3,845 अभ्यर्थी नीट परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, जिनके लिए शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार एनटीए (NTA) द्वारा सभी सामान्य अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, जबकि प्रमाणित दिव्यांग अभ्यर्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर ने बताया कि अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट, पोस्ट कार्ड साइज फोटो और वैध पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आधार कार्ड) साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल में एनटीए द्वारा ही काला बॉल पॉइंट पेन प्रदान किया जाएगा। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। फ्रिस्किंग प्रक्रिया के दौरान छात्र का फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक फेल होता है, तो छात्र अंडरटेकिंग फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकेंगे। तलाशी में समय बचाने के लिए कड़ा ड्रेस कोड भी लागू रहेगा, जिसके तहत परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, आधी बाजू वाले कपड़े पहनने होंगे। बंद जूते पहनना पूरी तरह प्रतिबंधित है, केवल चप्पल या सैंडल ही मान्य होंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर सामान रखने हेतु क्लॉक रूम और अभिभावकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष भी बनाए गए हैं।3
- नागणेश्वरी माताजी मंदिर, रावला परिसर कुआं में 15वां पाटोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। मंदिर के संरक्षक महिपाल सिंह राठौर ने बताया कि इस पाटोत्सव के तहत मुख्य यजमान प्रह्लाद सिंह और लोकेंद्र सिंह राठौर द्वारा पंडित जलज दवे एवं राज दवे की देखरेख में विशेष पूजा-अर्चना और हवन कार्य संपन्न किया गया। इसके पश्चात, ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, लोकेन्द्रसिंह सहित सभी क्षत्रिय समाजजनों ने मिलकर माताजी की आरती उतारी। कार्यक्रम के मुख्य यजमानों द्वारा महाप्रसाद का भी भव्य आयोजन किया गया। इस पाटोत्सव कार्यक्रम की एक खास विशेषता यह रही कि सभी क्षत्रिय समाज के पुरुषों ने सफेद पजामा-कुर्ता और साफा पहनकर एक समान वेशभूषा धारण की, जबकि क्षत्रिय महिलाएं पारंपरिक राजपूती वेशभूषा में उपस्थित थीं। इस पाटोत्सव में ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, हिम्मत सिंह, कुआं थानाधिकारी रघुवीरसिंह, नरपत सिंह, संग्राम सिंह, नागेंद्र सिंह, दिग्विजय सिंह, हनुमान सिंह, त्रिलोकेश्वर सिंह, गुणवंत सिंह, राजेन्द्र सिंह मांडव, जितेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, रविन्द्र सिंह, गजेंद्र सिंह दाड़ोदिया, भारत सिंह मटूवोट, भीम सिंह पाडली, चंद्रवीर सिंह वखतपुरा, प्रदीप सिंह गडा नाथजी, कमल प्रताप सिंह टेकला, महेन्द्र सिंह देवला, उदय सिंह गरीयता, हितेंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह, निरंजन सिंह, भूपेंद्र पाल सिंह, हेमेंद्र सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, तेज बहादुर सिंह, जयवर्धन सिंह, पोपट सिंह, जयवीर सिंह, लोकेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरेंद्र पाल सिंह, दीनदयाल सिंह मेड़ी, वैदिक पाल सिंह, टमर, धर्मवीर सिंह सहित अनेक क्षत्रिय महिलाएं और समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।3
- नागलवाड़ी उद्वहन सिंचाई परियोजना से पर्याप्त पानी न मिलने से नाराज़ किसानों ने दोमाडा स्थित डिवीजन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया है। किसानों का आरोप है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, इसका लाभ अधिकतर किसानों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके अलावा, कई जगहों पर जल वितरण पेटियां भी खेतों से 1,000 से 2,000 फीट दूर स्थापित की गई हैं, जिससे सिंचाई करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरनारत किसानों ने परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कड़ी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये माँगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।1
- एक व्यक्ति अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अपनी ही मस्ती में नाचता हुआ दिखाई दिया। ज्यादा शराब पीने के कारण वह इतना बेसुध था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी होश नहीं था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी वह लगातार अपनी धुन में नाच रहा था।1