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आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था। ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ। अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।

2 hrs ago
user_आलीराजपुर समाचार
आलीराजपुर समाचार
Local News Reporter अलीराजपुर, अलीराजपुर, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था। ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ। अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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  • आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था। ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ। अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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    आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था।

ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ।

अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।
    user_आलीराजपुर समाचार
    आलीराजपुर समाचार
    Local News Reporter अलीराजपुर, अलीराजपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बड़वानी जिला मुख्यालय पर 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने शनिवार को बड़वानी शहर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बैठक व्यवस्था और कंट्रोल रूम का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, एसडीएम श्री भूपेन्द्र रावत, नोडल व डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान और सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर भी उपस्थित थे। इस वर्ष जिले के कुल 3,845 अभ्यर्थी नीट परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, जिनके लिए शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार एनटीए (NTA) द्वारा सभी सामान्य अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, जबकि प्रमाणित दिव्यांग अभ्यर्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर ने बताया कि अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट, पोस्ट कार्ड साइज फोटो और वैध पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आधार कार्ड) साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल में एनटीए द्वारा ही काला बॉल पॉइंट पेन प्रदान किया जाएगा। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। फ्रिस्किंग प्रक्रिया के दौरान छात्र का फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक फेल होता है, तो छात्र अंडरटेकिंग फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकेंगे। तलाशी में समय बचाने के लिए कड़ा ड्रेस कोड भी लागू रहेगा, जिसके तहत परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, आधी बाजू वाले कपड़े पहनने होंगे। बंद जूते पहनना पूरी तरह प्रतिबंधित है, केवल चप्पल या सैंडल ही मान्य होंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर सामान रखने हेतु क्लॉक रूम और अभिभावकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष भी बनाए गए हैं।
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    बड़वानी जिला मुख्यालय पर 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने शनिवार को बड़वानी शहर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बैठक व्यवस्था और कंट्रोल रूम का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, एसडीएम श्री भूपेन्द्र रावत, नोडल व डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान और सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर भी उपस्थित थे।

इस वर्ष जिले के कुल 3,845 अभ्यर्थी नीट परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, जिनके लिए शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार एनटीए (NTA) द्वारा सभी सामान्य अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, जबकि प्रमाणित दिव्यांग अभ्यर्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर ने बताया कि अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट, पोस्ट कार्ड साइज फोटो और वैध पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आधार कार्ड) साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल में एनटीए द्वारा ही काला बॉल पॉइंट पेन प्रदान किया जाएगा।

परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। फ्रिस्किंग प्रक्रिया के दौरान छात्र का फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक फेल होता है, तो छात्र अंडरटेकिंग फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकेंगे। तलाशी में समय बचाने के लिए कड़ा ड्रेस कोड भी लागू रहेगा, जिसके तहत परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, आधी बाजू वाले कपड़े पहनने होंगे। बंद जूते पहनना पूरी तरह प्रतिबंधित है, केवल चप्पल या सैंडल ही मान्य होंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर सामान रखने हेतु क्लॉक रूम और अभिभावकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष भी बनाए गए हैं।
    user_NIMAD DASTAK NEWS
    NIMAD DASTAK NEWS
    Local News Reporter बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • नागलवाड़ी उद्वहन सिंचाई परियोजना से पर्याप्त पानी न मिलने से नाराज़ किसानों ने दोमाडा स्थित डिवीजन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया है। किसानों का आरोप है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, इसका लाभ अधिकतर किसानों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके अलावा, कई जगहों पर जल वितरण पेटियां भी खेतों से 1,000 से 2,000 फीट दूर स्थापित की गई हैं, जिससे सिंचाई करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरनारत किसानों ने परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कड़ी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये माँगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।
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    नागलवाड़ी उद्वहन सिंचाई परियोजना से पर्याप्त पानी न मिलने से नाराज़ किसानों ने दोमाडा स्थित डिवीजन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया है। किसानों का आरोप है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, इसका लाभ अधिकतर किसानों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके अलावा, कई जगहों पर जल वितरण पेटियां भी खेतों से 1,000 से 2,000 फीट दूर स्थापित की गई हैं, जिससे सिंचाई करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

धरनारत किसानों ने परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कड़ी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये माँगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।
    user_Allrounder Rahul Gupta
    Allrounder Rahul Gupta
    पत्रकार राजपुर, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • मध्यप्रदेश के निवाली नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भक्ति और आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि दोनों विशाल पंडाल छोटे पड़ गए। शनिवार, 20 जून को कथा श्रवण के लिए हजारों श्रद्धालु भीषण गर्मी में भी पंडाल के बाहर खड़े रहे, जिसके लिए आयोजकों ने कूलर और एसी की विशेष व्यवस्था की। जैसे-जैसे कथा अपने अंतिम चरण में पहुँच रही है, मातृशक्ति सहित श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते आने वाले दिनों में पंडाल की सीमा बढ़ाने का अनुमान है। पूरे नगर में 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' का पावन उद्घोष गूँज रहा है और केसरिया पताकाओं से सजे वाहनों की आवाजाही से निवाली क्षेत्र एक बड़े तीर्थस्थल जैसा प्रतीत हो रहा है। इस दौरान पानसेमल क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्याम बरडे और राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सिसोदिया ने भी कथा में उपस्थित होकर व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। दोपहर 2 बजे परम पूज्य पंडित किशोर नागर जी महाराज ('बड़े गुरु जी') की कथा का शुभारंभ हुआ, इससे पूर्व इंदौर से आए भूतड़ा जी ने उनका भावपूर्ण स्वागत-वंदन किया। व्यासपीठ से पंडित किशोर नागर जी ने भक्त और भगवान के दिव्य संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्यांग भक्त और अबोध बालक के आँसुओं में साक्षात भगवान बसते हैं। उन्होंने मनुष्य को जीवन में झुककर चलने की सीख दी, जिससे पापों का शमन होता है, और अपनी सोच को इतना पावन रखने को कहा कि गंदे नाले में भी गंगा मैया के दर्शन हो सकें। महाराज श्री ने पूतना मोक्ष के प्रसंग को समझाते हुए बताया कि चाकू या कुल्हाड़ी के घाव तो भर जाते हैं, लेकिन 'अपने ही जूते' से लगे घाव कभी नहीं भरते, जिसका सीधा अर्थ है कि अपनों द्वारा दिए गए घाव जीवन भर रहते हैं और आज समाज में अपनों से ही सर्वाधिक डर है, वे ही आपका नाम कटवाने में लगे हैं। उन्होंने शबरी माता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के पूछने पर शबरी जी ने कहा था कि 'अपनों को भूलो और दूसरों को याद करो'। महाराज जी ने जोर देकर कहा कि कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हृदय धोने का महापात्र है, जिसकी पूर्णता तभी होती है जब वक्ता के बोलते समय श्रोताओं की आँखों से प्रेमाश्रु बहें। कथा के दौरान महाराज श्री ने जब प्रभु और भक्त के रिश्ते को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी विवाह या विशेष आयोजन में भोजनालय वाला दूसरों को मुफ्त में भोजन कराता है, ठीक वैसे ही जब परमात्मा का भक्त इस भवसागर में परेशान होता है, तो प्रभु स्वयं धरती पर उतरकर उसे पार लगाते हैं। इस दौरान 'जीवन पछतावा है, ना आवा है ना जावा है' और 'मेरा क्या बिगड़ेगा गिरधारी, जाएगी लाज तुम्हारी' जैसे भजनों पर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमे। वहीं, भरत-कैकेयी संवाद और पूतना मोक्ष के प्रसंग को महाराज श्री ने इतने सहज और करुण भाव से प्रस्तुत किया कि पंडाल में मौजूद हर आँख नम हो गई। इस महाआयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि निवाली का हर छोटा-बड़ा परिवार बिना किसी संकोच और शर्म के, जी-जान से सेवा कार्य में जुटा रहा, हर इंसान खुद को धन्य मानकर सेवा कर रहा था। आज के इस विशाल भंडारे और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था निवाली के राठौड़ समाज द्वारा बेहद सुचारू रूप से की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। कथा में कल भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं एवं छप्पन भोग प्रसंग का विशेष आकर्षण रहेगा।
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    मध्यप्रदेश के निवाली नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भक्ति और आस्था का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि दोनों विशाल पंडाल छोटे पड़ गए। शनिवार, 20 जून को कथा श्रवण के लिए हजारों श्रद्धालु भीषण गर्मी में भी पंडाल के बाहर खड़े रहे, जिसके लिए आयोजकों ने कूलर और एसी की विशेष व्यवस्था की।

जैसे-जैसे कथा अपने अंतिम चरण में पहुँच रही है, मातृशक्ति सहित श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते आने वाले दिनों में पंडाल की सीमा बढ़ाने का अनुमान है। पूरे नगर में 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' का पावन उद्घोष गूँज रहा है और केसरिया पताकाओं से सजे वाहनों की आवाजाही से निवाली क्षेत्र एक बड़े तीर्थस्थल जैसा प्रतीत हो रहा है। इस दौरान पानसेमल क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्याम बरडे और राज्यसभा सांसद सुमेरसिंह सिसोदिया ने भी कथा में उपस्थित होकर व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। दोपहर 2 बजे परम पूज्य पंडित किशोर नागर जी महाराज ('बड़े गुरु जी') की कथा का शुभारंभ हुआ, इससे पूर्व इंदौर से आए भूतड़ा जी ने उनका भावपूर्ण स्वागत-वंदन किया।

व्यासपीठ से पंडित किशोर नागर जी ने भक्त और भगवान के दिव्य संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दिव्यांग भक्त और अबोध बालक के आँसुओं में साक्षात भगवान बसते हैं। उन्होंने मनुष्य को जीवन में झुककर चलने की सीख दी, जिससे पापों का शमन होता है, और अपनी सोच को इतना पावन रखने को कहा कि गंदे नाले में भी गंगा मैया के दर्शन हो सकें। महाराज श्री ने पूतना मोक्ष के प्रसंग को समझाते हुए बताया कि चाकू या कुल्हाड़ी के घाव तो भर जाते हैं, लेकिन 'अपने ही जूते' से लगे घाव कभी नहीं भरते, जिसका सीधा अर्थ है कि अपनों द्वारा दिए गए घाव जीवन भर रहते हैं और आज समाज में अपनों से ही सर्वाधिक डर है, वे ही आपका नाम कटवाने में लगे हैं। उन्होंने शबरी माता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के पूछने पर शबरी जी ने कहा था कि 'अपनों को भूलो और दूसरों को याद करो'। महाराज जी ने जोर देकर कहा कि कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हृदय धोने का महापात्र है, जिसकी पूर्णता तभी होती है जब वक्ता के बोलते समय श्रोताओं की आँखों से प्रेमाश्रु बहें।

कथा के दौरान महाराज श्री ने जब प्रभु और भक्त के रिश्ते को समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी विवाह या विशेष आयोजन में भोजनालय वाला दूसरों को मुफ्त में भोजन कराता है, ठीक वैसे ही जब परमात्मा का भक्त इस भवसागर में परेशान होता है, तो प्रभु स्वयं धरती पर उतरकर उसे पार लगाते हैं। इस दौरान 'जीवन पछतावा है, ना आवा है ना जावा है' और 'मेरा क्या बिगड़ेगा गिरधारी, जाएगी लाज तुम्हारी' जैसे भजनों पर पंडाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमे। वहीं, भरत-कैकेयी संवाद और पूतना मोक्ष के प्रसंग को महाराज श्री ने इतने सहज और करुण भाव से प्रस्तुत किया कि पंडाल में मौजूद हर आँख नम हो गई।

इस महाआयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि निवाली का हर छोटा-बड़ा परिवार बिना किसी संकोच और शर्म के, जी-जान से सेवा कार्य में जुटा रहा, हर इंसान खुद को धन्य मानकर सेवा कर रहा था। आज के इस विशाल भंडारे और भोजन की संपूर्ण व्यवस्था निवाली के राठौड़ समाज द्वारा बेहद सुचारू रूप से की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। कथा में कल भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं एवं छप्पन भोग प्रसंग का विशेष आकर्षण रहेगा।
    user_Sunil Soni
    Sunil Soni
    Niwali, Barwani•
    8 hrs ago
  • राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की वरसाला ग्राम पंचायत में स्थित पांच डुंगरी और कर्ण घाटी, महाभारत काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रही हैं। अज्ञातवास के समय पांडवों ने इन स्थलों पर घोर तपस्या की थी, जिससे ये स्थान द्वापर युग की घटनाओं के जीवंत साक्षी बन गए हैं, हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण ये अभी भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। प्राइम न्यूज़ राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छल-कपट कर पांडवों को अज्ञातवास दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि अज्ञातवास भंग हुआ तो उन्हें दोबारा अज्ञातवास भुगतना पड़ेगा। इसी दौरान, पांडवों ने भेस बदलकर माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ बांसवाड़ा जिले के घोटीया आंबा में शरण ली। बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और घोटीया आंबा में आज भी पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जहाँ गोमुख से निर्मल जलधारा बहती है और प्रतिवर्ष मेला लगता है। इसी पवित्र धाम पर पांडवों ने जप-तप, यज्ञ-हवन और विधि-विधान से पूजा अर्चना की, तब भगवान शिव ने असत्य पर सत्य की जीत का आशीर्वाद दिया। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के बताए विधि-विधान से पांडवों ने अपनी माता कुंती व पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर बैठकर आराधना शुरू की। जब सुत पुत्र कर्ण को पांडवों के पांच डुंगरी पर होने का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर अज्ञातवास भंग करने आया। किंतु ईश्वरीय शक्ति के आगे कर्ण भी नतमस्तक हो गया, वह दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया। यह स्थल आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी द्वारा तपस्या की गई पांच डुंगरी और उनकी दो अलग डुंगरिया आज भी इस बियाबान जंगल में विद्यमान हैं। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और वरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ महाभारत की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा की अनदेखी का हमेशा से शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की एक कार्य योजना तैयार की है, जिसमें पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इस संदर्भ में, संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार सोनी सहित संघ के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने पांच डुंगरी का अवलोकन किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
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    राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की वरसाला ग्राम पंचायत में स्थित पांच डुंगरी और कर्ण घाटी, महाभारत काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रही हैं। अज्ञातवास के समय पांडवों ने इन स्थलों पर घोर तपस्या की थी, जिससे ये स्थान द्वापर युग की घटनाओं के जीवंत साक्षी बन गए हैं, हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण ये अभी भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं।

प्राइम न्यूज़ राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छल-कपट कर पांडवों को अज्ञातवास दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि अज्ञातवास भंग हुआ तो उन्हें दोबारा अज्ञातवास भुगतना पड़ेगा। इसी दौरान, पांडवों ने भेस बदलकर माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ बांसवाड़ा जिले के घोटीया आंबा में शरण ली। बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और घोटीया आंबा में आज भी पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जहाँ गोमुख से निर्मल जलधारा बहती है और प्रतिवर्ष मेला लगता है। इसी पवित्र धाम पर पांडवों ने जप-तप, यज्ञ-हवन और विधि-विधान से पूजा अर्चना की, तब भगवान शिव ने असत्य पर सत्य की जीत का आशीर्वाद दिया। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के बताए विधि-विधान से पांडवों ने अपनी माता कुंती व पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर बैठकर आराधना शुरू की। जब सुत पुत्र कर्ण को पांडवों के पांच डुंगरी पर होने का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर अज्ञातवास भंग करने आया। किंतु ईश्वरीय शक्ति के आगे कर्ण भी नतमस्तक हो गया, वह दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया। यह स्थल आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी द्वारा तपस्या की गई पांच डुंगरी और उनकी दो अलग डुंगरिया आज भी इस बियाबान जंगल में विद्यमान हैं।

राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और वरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ महाभारत की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा की अनदेखी का हमेशा से शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की एक कार्य योजना तैयार की है, जिसमें पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इस संदर्भ में, संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार सोनी सहित संघ के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने पांच डुंगरी का अवलोकन किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    कुशलगढ़, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • झाबुआ जिले के राणापुर के इंधरी गाँव से आदिवासी संस्कृति नृत्य का एक वीडियो जारी किया गया है। यह वीडियो स्थानीय आदिवासी संस्कृति और उसकी विशिष्ट नृत्य शैली को दर्शाता है। पोस्ट में दर्शकों से इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया साझा करने का आग्रह किया गया है, और साथ ही संबंधित पेज को फॉलो करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
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    झाबुआ जिले के राणापुर के इंधरी गाँव से आदिवासी संस्कृति नृत्य का एक वीडियो जारी किया गया है। यह वीडियो स्थानीय आदिवासी संस्कृति और उसकी विशिष्ट नृत्य शैली को दर्शाता है। पोस्ट में दर्शकों से इस सांस्कृतिक प्रस्तुति के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया साझा करने का आग्रह किया गया है, और साथ ही संबंधित पेज को फॉलो करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
    user_Mahesh Ajnar
    Mahesh Ajnar
    Psychologist Kukshi, Dhar•
    6 hrs ago
  • एक व्यक्ति अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अपनी ही मस्ती में नाचता हुआ दिखाई दिया। ज्यादा शराब पीने के कारण वह इतना बेसुध था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी होश नहीं था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी वह लगातार अपनी धुन में नाच रहा था।
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    एक व्यक्ति अत्यधिक शराब के नशे में धुत होकर अपनी ही मस्ती में नाचता हुआ दिखाई दिया। ज्यादा शराब पीने के कारण वह इतना बेसुध था कि उसे इस बात का बिल्कुल भी होश नहीं था कि वह क्या कर रहा है, फिर भी वह लगातार अपनी धुन में नाच रहा था।
    user_Farukh Qureshi
    Farukh Qureshi
    अलीराजपुर, अलीराजपुर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
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