शिक्षा के मंदिर में मजदूरी का मंजर जब मासूम हाथों में किताबें छीन कर तसले फावड़ा थमा दिए जाएं ?... बांदा जनपद के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अछरौड़ स्थित कंपोजिट विद्यालय से सामने आया वीडियो केवल एक वायरल दृश्य नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर पड़ा वह सवाल है जिसे अब अनदेखा करना मुश्किल होता जा रहा है। जिस विद्यालय में बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और सपनों की उड़ान होनी चाहिए थी, वहां कथित रूप से मासूम बच्चे मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं।वीडियो में यदि बच्चे विद्यालय परिसर में निर्माण कार्य या श्रम करते नजर आ रहे हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि बचपन की गरिमा पर चोट है। शिक्षा का मंदिर तब कलंकित हो जाता है जब वहां ज्ञान के स्थान पर श्रम का बोझ बच्चों के कंधों पर डाल दिया जाए।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर “सब पढ़ें, सब बढ़ें” के नारे देती है, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार उन नारों का मजाक उड़ाती दिखाई देती है। आखिर वह कौन सी मजबूरी या लापरवाही है जिसने विद्यालय प्रशासन को इस स्थिति तक पहुंचा दिया? क्या बच्चों से श्रम करवाना अब सामान्य बात मान ली गई है? और यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय केवल भवनों से नहीं चलते, बल्कि संवेदनाओं और जिम्मेदारियों से संचालित होते हैं। यदि शिक्षक और प्रशासन ही बच्चों के अधिकारों के प्रति उदासीन हो जाएं, तो फिर समाज किससे उम्मीद करे?यह मामला केवल एक विद्यालय का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बनता जा रहा है जहां गरीब और ग्रामीण बच्चों का बचपन सबसे सस्ता समझ लिया जाता है। जिन हाथों को भविष्य लिखना था, वे यदि मिट्टी ढोने को मजबूर हों, तो यह लोकतंत्र के उस वादे पर भी प्रश्नचिह्न है जिसमें हर बच्चे को समान शिक्षा और सम्मान का अधिकार दिया गया है।अब आवश्यकता केवल जांच बैठाने की नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता पर कठोर प्रहार करने की है। दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि शिक्षा के मंदिर फिर से शिक्षा के केंद्र बन सकें, मजदूरी के नहीं।
शिक्षा के मंदिर में मजदूरी का मंजर जब मासूम हाथों में किताबें छीन कर तसले फावड़ा थमा दिए जाएं ?... बांदा जनपद के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अछरौड़ स्थित कंपोजिट विद्यालय से सामने आया वीडियो केवल एक वायरल दृश्य नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर पड़ा वह सवाल है जिसे अब अनदेखा करना मुश्किल होता जा रहा है। जिस विद्यालय में बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और सपनों की उड़ान होनी चाहिए थी, वहां कथित रूप से मासूम बच्चे मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं।वीडियो में यदि बच्चे विद्यालय परिसर में निर्माण कार्य या श्रम करते नजर आ रहे हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि बचपन की गरिमा पर चोट है। शिक्षा का मंदिर तब कलंकित हो जाता है जब वहां ज्ञान के स्थान पर श्रम का बोझ बच्चों के कंधों पर डाल दिया जाए।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर “सब पढ़ें, सब बढ़ें” के नारे देती है, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार उन नारों का मजाक उड़ाती दिखाई देती है। आखिर वह कौन सी मजबूरी या लापरवाही है जिसने विद्यालय प्रशासन को इस स्थिति तक पहुंचा दिया? क्या बच्चों से श्रम करवाना अब सामान्य बात मान ली गई है? और यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय केवल भवनों से नहीं चलते, बल्कि संवेदनाओं और जिम्मेदारियों से संचालित होते हैं। यदि शिक्षक और प्रशासन ही बच्चों के अधिकारों के प्रति उदासीन हो जाएं, तो फिर समाज किससे उम्मीद करे?यह मामला केवल एक विद्यालय का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बनता जा रहा है जहां गरीब और ग्रामीण बच्चों का बचपन सबसे सस्ता समझ लिया जाता है। जिन हाथों को भविष्य लिखना था, वे यदि मिट्टी ढोने को मजबूर हों, तो यह लोकतंत्र के उस वादे पर भी प्रश्नचिह्न है जिसमें हर बच्चे को समान शिक्षा और सम्मान का अधिकार दिया गया है।अब आवश्यकता केवल जांच बैठाने की नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता पर कठोर प्रहार करने की है। दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि शिक्षा के मंदिर फिर से शिक्षा के केंद्र बन सकें, मजदूरी के नहीं।
- *दंपति ने फांसी लगाकर की आत्महत्या* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा- जिले में झकझोर कर देने वाली एक खबर सामने आई है। जहां पर मामूली कहा सुनी के बाद पति-पत्नी ने अपने घर में अलग अलग कमरों में जाकर गुस्से में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटना की जानकारी तब हुई जब घर के अंदर मौजूद दंपति के 2 मासूम बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी।घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है. वही फॉरेंसिक टीम की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं. बताया जा रहा है कि लगभग 6 साल पहले इन लोगों ने प्रेम विवाह किया था और ये अलग अलग जाती के थे और इनके दो बच्चे हैं। अरहर कूटने को लेकर इनमें आपस में झगड़ा हो गया था। मामला तिंदवारी थाना क्षेत्र के अमलीकौर गांव के भगदरा डेरा से सामने आया है।यहां के रहने वाले 28 वर्षीय लल्लू निषाद व 26 वर्षीय उसकी पत्नी गोमती का शव घर के अंदर अलग अलग कमरे में फांसी के फंदे पर लटकता मिला. मृतक लल्लू के भाई बृजमोहन ने बताया कि दोनों पति-पत्नी में किसी तरह के कोई विवाद होने की जानकारी नहीं थी। जब उनके दोनों बच्चों अनुष्का (4 वर्ष) व किस्सू (2 वर्ष) के रोने की आवाज सुनी तो मोहल्ले की कुछ बच्चियों वहां पर गई. जिसके बाद घटना के बारे में जानकारी हुई. इसने बताया कि लल्लू भूमिहीन था और वह 4 बीघे जमीन दूसरे की बटाई पर लिए हुए था और खेती कर अपना गुजर बसर करता था और शनिवार को उसे खेत में अरहर की फसल कूटने जाना था लेकिन वह वहां नहीं पहुंचा. इसने बताया कि घर के अंदर किसी बात को लेकर इनमें आपस में कहासुनी हो गई जिस पर जहां लल्लू ने घर के अंदर बने एक पक्के कमरे में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, तो वहीं उसकी पत्नी गोमती का शव घर के अंदर ही एक कच्चे कमरे में धन्नी में साड़ी से फांसी के फंदे पर लटकता मिला।घटना के संबंध में जानकारी देते हुए सीओ सौरभ सिंह ने बताया की पति-पत्नी ने किसी बात को लेकर हुए झगड़े के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मौके से साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गई है और जांच पड़ताल कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।2
- बांदा जनपद के बड़ोखर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत अछरौड़ स्थित कंपोजिट विद्यालय से सामने आया वीडियो केवल एक वायरल दृश्य नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर पड़ा वह सवाल है जिसे अब अनदेखा करना मुश्किल होता जा रहा है। जिस विद्यालय में बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और सपनों की उड़ान होनी चाहिए थी, वहां कथित रूप से मासूम बच्चे मजदूरी करते दिखाई दे रहे हैं।वीडियो में यदि बच्चे विद्यालय परिसर में निर्माण कार्य या श्रम करते नजर आ रहे हैं, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि बचपन की गरिमा पर चोट है। शिक्षा का मंदिर तब कलंकित हो जाता है जब वहां ज्ञान के स्थान पर श्रम का बोझ बच्चों के कंधों पर डाल दिया जाए।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर “सब पढ़ें, सब बढ़ें” के नारे देती है, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार उन नारों का मजाक उड़ाती दिखाई देती है। आखिर वह कौन सी मजबूरी या लापरवाही है जिसने विद्यालय प्रशासन को इस स्थिति तक पहुंचा दिया? क्या बच्चों से श्रम करवाना अब सामान्य बात मान ली गई है? और यदि नहीं, तो फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय केवल भवनों से नहीं चलते, बल्कि संवेदनाओं और जिम्मेदारियों से संचालित होते हैं। यदि शिक्षक और प्रशासन ही बच्चों के अधिकारों के प्रति उदासीन हो जाएं, तो फिर समाज किससे उम्मीद करे?यह मामला केवल एक विद्यालय का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक बनता जा रहा है जहां गरीब और ग्रामीण बच्चों का बचपन सबसे सस्ता समझ लिया जाता है। जिन हाथों को भविष्य लिखना था, वे यदि मिट्टी ढोने को मजबूर हों, तो यह लोकतंत्र के उस वादे पर भी प्रश्नचिह्न है जिसमें हर बच्चे को समान शिक्षा और सम्मान का अधिकार दिया गया है।अब आवश्यकता केवल जांच बैठाने की नहीं, बल्कि ऐसी मानसिकता पर कठोर प्रहार करने की है। दोषियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि शिक्षा के मंदिर फिर से शिक्षा के केंद्र बन सकें, मजदूरी के नहीं।1
- Post by Mamta chaurasiya1
- Post by Mr_shyamu _kumar1
- मौदहा (हमीरपुर)। सिचौली पुरवा मोहल्ले में रविवार को उपजिलाधिकारी कर्णवीर सिंह के नेतृत्व में राजस्व व पुलिस टीम ने अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान महिलाओं ने विरोध करते हुए हंगामा किया और आग लगाने की कोशिश से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए कुछ महिलाओं को हिरासत में लिया। प्रशासन ने साफ किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।1
- मौदहा हमीरपुर। पांच साल पहले बालू लदे ट्रैक्टर ट्राली पकडने की खुन्नस रखते हुए युवक ने जान से मारने की धमकी देते हुए वीडियो सोशल मीडिया में अपलोड कर दिया जिससे मामला सुर्खियों में आते ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। सिसोलर थाना क्षेत्र के ग्राम चांदी कला निवासी सार्थक सिंह ने थाने में दिए शिकायती पत्र में बताया कि,शनिवार दोपहर गांव का नारद सिंह उसे मिला और कहने लगा कि बीते पांच सात साल पहले तुमने मेरा बालू का ट्रैक्टर पकडवाया था।जिसे छुडाने में मेरे लगभग डेढ लाख रुपये लगे थे अगर रुपये नहीं दिए तो तीस मई तक तुम्हे जान से मार दूंगा।जिसका वीडियो बनाकर उसने सोशल मीडिया में अपलोड कर दिया। पीडित की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- अतर्रा थाना क्षेत्र में मारपीट कर एक व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करने वाले दो वांछित अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।1
- *इलेक्ट्रिक मोटर चोरी करने वाले 02 अभियुक्त गिरफ्तार* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा। पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु चलाए जा रहे अभियान के क्रम में थाना नरैनी पुलिस द्वारा इलेक्ट्रिक मोटर चोरी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है।थाना नरैनी पुलिस को गश्त एवं चेकिंग के दौरान ग्राम पनगरा में पुलिया पर दो संदिग्ध युवक बैठे हुए दिखाई दिए।पुलिस द्वारा पूछताछ हेतु पास जाने पर दोनों भागने लगे जिनको पुलिस द्वारा आवश्यक बल का प्रयोग करते हुए घेरकर पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे 05 हजार रुपए बरामद हुए । कड़ाई से भागने का कारण पूछने पर दोनों युवकों द्वारा अपना जुर्म स्वीकार करते हुए बताया गया वे दोनों घूम-घूमकर चोरी करते है तथा कुछ दिन पूर्व एक मकान से एक इंडक्शन मोटर चोरी किया था उसी की बिक्री हेतु यहां पर बैठे थे। पुलिस द्वारा दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए उनकी निशादेही पर चोरी की एक इलेक्ट्रिक मोटर बरामद किया गया है। इस सम्बन्ध में गहनता से जांच की जा रही है कि अभियुक्तों द्वारा और कहाँ-कहाँ चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया है।गिरफ्तार अभियुक्त राहुल पुत्र पवन निवासी नन्दवारा थाना नरैनी जनपद बांदा व मनीष पुत्र मनोज निवासी मुरवा थाना गिरवां जनपद बांदा के निवासी हैं।1
- हमीरपुर सदर कोतवाली क्षेत्र के कुछेछा इलाके में तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और चालक की तलाश जारी है।1