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Ramesh Kumar Kewat
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- Post by Ramesh Kumar Kewat1
- Post by भारत बाबा जी1
- विशेष आलेख कहते हैं कि सत्ता और प्रशासन की नाक बहुत तेज होती है, उसे दूर से ही घोटाले और गड़बड़ियां सूंघने की आदत होती है। लेकिन बनारसी फेब्रिकेटर के बगल में लालपुर और चैनपुर दुग्गड की चिप्स फैक्ट्री के मामले में शायद यह 'घ्राण शक्ति' (सूंघने की क्षमता) जवाब दे गई है। आज आलम यह है कि फैक्ट्री से निकलने वाली सड़ांध ने पूरे इलाके के जन-जीवन को 'नर्क' बना दिया है, लेकिन विडंबना देखिए—ग्रामीणों के लिए जो 'असहनीय दुर्गंध' है, वह शायद जिले के आला अधिकारियों और कलेक्टर साहब के लिए किसी 'मधुर सुगंध' से कम नहीं है! तभी तो महीनों से ग्रामीण अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। साहब! यह सिर्फ बदबू नहीं, प्रशासनिक विफलता की सड़न है जब हैंडपंपों और बोरवेल से पानी की जगह 'बदबूदार जहर' निकलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि सिस्टम सड़ चुका है। चिप्स फैक्ट्री का गंदा पानी जमीन के अंदर रिसकर ग्रामीणों की नसों में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, बुजुर्गों का दम घुट रहा है, और लोग अपने ही घरों में रुमाल बांधकर बैठने को मजबूर हैं। क्या एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारियों को इस बात का अंदाजा भी है कि एक लोटा साफ पानी न मिल पाने का दर्द क्या होता है? फैक्ट्री की मनमानी या 'सुगंधित' सांठगांठ? सवाल यह उठता है कि क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आंखें बंद हैं? या फिर फैक्ट्री के 'रसूख' की खुशबू इतनी तेज है कि उसके आगे गरीब ग्रामीणों की चीखें और सड़ते हुए पानी की दुर्गंध दब गई है? अगर कलेक्टर साहब की नाक तक यह दुर्गंध नहीं पहुंच रही, तो यह मान लेना चाहिए कि विकास की चकाचौंध में 'आम आदमी' की बुनियादी जरूरतें—साफ हवा और शुद्ध पानी—अब गौण हो चुकी हैं। निष्कर्ष ग्रामीणों का आक्रोश अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार है। अगर प्रशासन ने जल्द ही अपनी 'सुगंधित नींद' से जागकर इस चिप्स फैक्ट्री पर नकेल नहीं कसी, तो जनता को अपनी नाक बचाने के लिए सड़कों पर उतरने से कोई नहीं रोक पाएगा। याद रहे साहब, जनता की बदुआओं की दुर्गंध बहुत लंबी चलती है!3
- भ्रमित करने वाले से रहे सावधान खाश कर के कान भरने वाले से जब आपके सामने आए इस तरह की बात तो पहले अपने दिल का सुने और दिमाग से काम ले,👉 आखिर यह हाल न हो हम तो डूब रहे सनम तुम भी डुबो हमारे संग,😅😅🤣1
- ब्यौहारी/शहडोल: डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठग मासूम लोगों की मेहनत की कमाई पर गिद्ध जैसी नजर गड़ाए बैठे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला ब्यौहारी थाना क्षेत्र में सामने आया है, जहाँ एक जालसाज ने महिला के बैंक खातों से लाखों रुपये पार कर दिए। हालांकि, शहडोल पुलिस की मुस्तैदी के आगे आरोपी की चालाकी धरी की धरी रह गई और उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया गया है। लाखों की ठगी, फिर फरार मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम ब्यौहारी निवासी निर्मला पटेल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के मुताबिक, उसके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खातों से किस्तों में कुल 4,85,307 रुपये गायब कर दिए गए। ठग ने बड़ी ही सफाई से UPI के माध्यम से इन पैसों को अपने कब्जे में लिया था। जब पीड़िता ने बैंक स्टेटमेंट निकलवाया, तो आरोपी अभिराज साहू (निवासी जबलपुर) का काला चिट्ठा खुलकर सामने आ गया। पुलिस की घेराबंदी और गिरफ्तारी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में साइबर सेल की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की गई। घटना के बाद से ही आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था। आखिरकार, ब्यौहारी पुलिस ने सटीक सूचना और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी अभिराज साहू को जबलपुर रेलवे स्टेशन से घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। टीम की शानदार सफलता इस कामयाबी में थाना प्रभारी ब्यौहारी निरीक्षक जियाउल हक के नेतृत्व में उपनिरीक्षक वीरेंद्र तिवारी, आरक्षक सागर गुप्ता, पंकज सिंह और महिला आरक्षक माधुरी साहू सहित साइबर सेल शहडोल की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया है। चेतावनी: पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या यूपीआई पिन किसी भी अनजान व्यक्ति से साझा न करें। डिजिटल लेन-देन में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।2
- Post by Sumit Singh Chandel1
- शहडोल। पेट्रोल पंप पर लिमिट से तेल देने पर हंगामा, भेदभाव का आरोप, वीडियो हुआ वायरल#शहडोल #छत्तीसगढ़ #post #वायरल #शहडोलकलेक्टर1
- उमरिया में सुबह-सुबह सड़क पर बाघ! उमरिया जिले के मानपुर रोड स्थित मगधी गेट के पास शनिवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक बाघ सड़क पार करते हुए नजर आया। नजारा ऐसा था कि बाघ आराम से जंगल की ओर बढ़ रहा था, लेकिन दूसरी तरफ कुछ राहगीर अपनी जान जोखिम में डालकर उसका वीडियो बनाने में जुटे रहे। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह की लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। वन्य जीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।1