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मध्य प्रदेश के मैहर धाम में स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में गुरुवार को दोपहर की आरती संपन्न हुई। मंदिर के प्रधान पुजारी द्वारा इस दोपहर की आरती को पूरा कराया गया। मां शारदा शक्तिपीठ मैहर धाम में गुरुवार के इस पावन अवसर पर प्रधान पुजारी की गरिमामयी उपस्थिति में आरती का यह आयोजन किया गया।
रोहित कुमार पाठक
मध्य प्रदेश के मैहर धाम में स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में गुरुवार को दोपहर की आरती संपन्न हुई। मंदिर के प्रधान पुजारी द्वारा इस दोपहर की आरती को पूरा कराया गया। मां शारदा शक्तिपीठ मैहर धाम में गुरुवार के इस पावन अवसर पर प्रधान पुजारी की गरिमामयी उपस्थिति में आरती का यह आयोजन किया गया।
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- मैहर में सरलानगर से सगमनिया मार्ग पर सड़क के दोनों ओर खड़े रहने वाले भारी वाहनों को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधीन आने वाले इस मार्ग पर सड़क किनारे खड़े होने वाले ट्रकों के कारण रोजाना आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इससे गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमेंट प्लांट से जुड़े वाहनों के चलते ही यहां लगातार ऐसी स्थिति बनी रहती है, लेकिन लगातार की जा रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार प्रशासन द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। परेशान नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि परिवहन नियमों का बिना किसी भेदभाव के समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही आम लोगों की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए सड़क पर बेतरतीब खड़े इन वाहनों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर संबंधित पक्ष की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- सतना में यातायात पुलिस ने पिछले कई महीनों से अभियान चलाकर जब्त करके रखे गए मॉडिफाइड साइलेंसरों पर बुलडोजर चला दिया है। पुलिस द्वारा अभियान के तहत इन साइलेंसरों को जब्त किया गया था, जिन पर अब बुलडोजर चलाने की यह कार्रवाई की गई है।1
- मध्य प्रदेश के मैहर में जगन्नाथ यात्रा का आयोजन किया गया है। मैहर में आयोजित हुई इस जगन्नाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में बेहद उत्साह और भक्ति का माहौल है।1
- मैहर के अमरपाटन में मध्य प्रदेश शासन के 'नशे से है दूरी जरूरी 2.0' अभियान के तहत संदीपनी हायर सेकेंडरी स्कूल में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अमरपाटन थाना पुलिस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई और उन्हें नशे से दूर रहने, नशे का त्याग करने तथा समाज को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का संदेश दिया गया। इस जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से अमरपाटन तहसीलदार आर.डी. साकेत, थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह परस्ते, उप निरीक्षक बी.एल. रावत, प्रधान आरक्षक रीता सिंह और महिला कॉन्स्टेबल शिवानी उपस्थित रहीं। इनके साथ ही स्कूल का स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी इस दौरान मौजूद रहे।3
- सतना जिले के मैहर में "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान के पहले ही दिन पुलिस ने मेडिकल नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने रामपथगमन रोड पर एक संदिग्ध बोलेरो वाहन की जांच के दौरान 205 शीशी प्रतिबंधित ऑनरेक्स कफ सिरप, ₹5.96 लाख की नगदी और बोलेरो सहित कुल ₹16.36 लाख का मशरूका जब्त किया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट एवं मध्यप्रदेश ड्रग कंट्रोल एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मैहर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करों के खिलाफ उनका यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।1
- चित्रकूट में भू-माफियाओं ने एक बड़ी साजिश के तहत वन विभाग और मेला कंट्रोल रूम की करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। यह पूरा मामला रजौला हल्का मौजा राजौरा के खसरा नंबर 14 की आराजी से जुड़ा हुआ है। साल 1958 में हुए भूमि हस्तांतरण यानी अदला-बदली के बाद से यह जमीन वन विभाग के पास थी। इस बेशकीमती जमीन पर पिछले 70 वर्षों से वन परिक्षेत्र कार्यालय, कर्मचारियों के निवास स्थान, वन विश्राम गृह और पुलिस-मेला कंट्रोल रूम का सुचारू रूप से संचालन किया जा रहा है। इस सरकारी जमीन को हड़पने के लिए भू-माफियाओं ने दस्तावेजों में गलत चौहद्दी दर्शाकर रजिस्ट्रार को धोखे में रखा और रजिस्ट्री के नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए रजिस्ट्री करा ली। यहां सरकारी निर्माण और सार्वजनिक उपयोग की जमीन होने के बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इसके साथ ही, यह जमीन पुण्य मंदाकिनी नदी से महज 100 मीटर के दायरे में आती है, जिसकी वजह से यह रजिस्ट्री नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और हाईकोर्ट के आदेशों की भी सीधे तौर पर अवहेलना करती है। करोड़ों की इस मूल्यवान सरकारी जमीन को भू-माफियाओं से मुक्त कराने और इसे बचाने के लिए अब कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेजी से उठने लगी है।1
- सतना जिले के जैतवारा थाना अंतर्गत ग्राम जैतवारा से 17 वर्षीय नाबालिग अरुण डोहर के अपहरण के मामले में पुलिस की उदासीनता और लचर कार्रवाई को लेकर डोहर समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। अपनी विधवा माँ के इकलौते सहारे अरुण का 24 जून 2026 को अपहरण कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने और पीड़ित परिवार पर ही रिपोर्ट वापस लेने के लिए दबाव बनाने के विरोध में डोहर समाज संघ सतना ने जन समूह के साथ पैदल मार्च निकाला और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा है। डोहर समाज के जिला अध्यक्ष राजेंद्र डोहर ने बताया कि अरुण डोहर (पिता स्वर्गीय कमलेश डोहर) को जैतवारा निवासी आरोपी दिनेश गुप्ता द्वारा एक अज्ञात किराना व्यापारी की दुकान से अगवा किया गया था। घटना की सूचना तुरंत जैतवारा थाने में दी गई थी, लेकिन आज तक न तो आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही नाबालिग को बरामद किया जा सका है। सबसे दुखद बात यह है कि जैतवारा थाने के कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा पीड़ित विधवा माँ पर ही रिपोर्ट वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय लोगों में गहरा रोष है। इस प्रदर्शन के दौरान जिला डोहर समाज संघ के मुख्य संरक्षक रामगोपाल डोहर, नीति निर्धारक जयपाल डोहर, कार्यक्रम संयोजक संतोष डोहर, मुख्य सलाहकार रामबहादुर डोहर, जिला उपाध्यक्ष मोहनलाल डोहर, जिला संगठन मंत्री पुष्पेंद्र डोहर, कोषाध्यक्ष राजभान डोहर, सहसचिव सोहनलाल डोहर, महासचिव अभयराज डोहर, सहमीडिया प्रभारी धर्मराज डोहर, कार्यालय प्रभारी नेकमणी डोहर, जिला कार्यकारिणी सदस्य रामबिश्वास डोहर, गेंदलाल डोहर सहित छोटेलाल डोहर, बिनय डोहर, राजेश डोहर, रमेश डोहर और हजारों सामाजिक शुभचिंतक उपस्थित रहे। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से प्रमुख मांगें उठाई हैं, जिनमें आरोपी दिनेश गुप्ता की तुरंत गिरफ्तारी, नाबालिग की सुरक्षित बरामदगी, आरोपी के विरुद्ध आईपीसी और पोक्सो एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई, अपहरण के स्थान वाली दुकान की जांच, और पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई शामिल है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, आर्थिक सहायता और पूरे प्रकरण की आईजी या एडीजी स्तर पर मॉनिटरिंग की मांग की गई है। संघ ने शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है कि यदि तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो डोहर समाज उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।4