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एक वायरल पोस्ट में उपयोगकर्ताओं से एक वीडियो को लाइक और शेयर करने का आग्रह किया गया है। दावा किया गया है कि ऐसा करने से उनके सभी बिगड़े हुए काम बन जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पोस्ट में कमेंट सेक्शन में 'जय माता दी' लिखने का अनुरोध किया गया है और साथ ही दर्शकों से यह भी पूछा गया है कि उन्हें यह वीडियो कैसा लगा।
ARJUN Machar
एक वायरल पोस्ट में उपयोगकर्ताओं से एक वीडियो को लाइक और शेयर करने का आग्रह किया गया है। दावा किया गया है कि ऐसा करने से उनके सभी बिगड़े हुए काम बन जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पोस्ट में कमेंट सेक्शन में 'जय माता दी' लिखने का अनुरोध किया गया है और साथ ही दर्शकों से यह भी पूछा गया है कि उन्हें यह वीडियो कैसा लगा।
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- 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 4,399 दिनों का नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर, नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी भावुक भी नजर आए।1
- बांसवाड़ा में बालश्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव दुर्व्यापार के खिलाफ एक क्षमतावर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस लाईन सभागार में जस्ट राईट फोर चिल्ड्रन, पुलिस विभाग, बाल अधिकारिता विभाग एवं बेणेष्वर लोक विकास संस्थान बांसवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुई। इस कार्यक्रम में पुलिस उप अधीक्षक गोविन्द सिंह ने बालश्रम में लिप्त बच्चों की पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति का आंकलन करने और उन्हें सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। गोपाल पण्ड्या ने बाल संरक्षण के लिए विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया, जबकि दिलीप रोकडिया ने बालश्रम की रोकथाम हेतु टीम भावना से कार्य करने पर बल दिया। हेमन्त खटीक ने बालश्रम व यौन शोषण से पीड़ित बच्चों को शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने संबंधी जानकारी दी। कार्यशाला में धर्मेश भारद्वाज, कमलेश बुनकर, शान्तिलाल चौबिसा, देवेन्द्र सिंह राव, भागवत कुन्दन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन गोपाल पण्ड्या ने किया और आभार दर्शन पण्ड्या ने व्यक्त किया।2
- इंदौर के बेटमा में मंदिर के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाने को लेकर ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखा जा रहा है। ग्रामीण इस प्लांट की स्थापना पर सवाल उठा रहे हैं और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद मां अमन-चमन माता मंदिर और एक ऐतिहासिक दशहरा मैदान के पास प्रस्तावित/निर्माणाधीन एसटीपी प्लांट को लेकर है। ग्रामीण इसे अपनी आस्था पर सीधा अतिक्रमण मान रहे हैं और इसे विकास की आड़ में उपजा विवाद बता रहे हैं। इस मुद्दे पर करणी सेना भी ग्रामीणों के समर्थन में उतर आई है और उन्होंने एक बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीण इन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को बचाने के लिए एकजुट हो गए हैं।1
- राष्ट्रीय राजमार्ग पर धामनोद के समीप एक कंटेनर में भीषण आग लग गई।1
- बड़वानी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने सफलतापूर्वक अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, महिला जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच प्रक्रिया के दौरान, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष रूप से पहचान की गई।1
- डूंगरपुर के सीमलवाड़ा स्थित पीठ विद्या निकेतन में विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान द्वारा नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग के उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। विद्या भारती जनजाति समिति के अध्यक्ष प्रभुलाल कटारा मुख्य वक्ता रहे, जबकि प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दीनदयाल सिंह चौहान ने अध्यक्षता की। चौरासी क्षेत्र के निवर्तमान प्रधान कारीलाल ननोमा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे, और विभाग प्रमुख दिनेश डामोर ने कार्यक्रम का संचालन किया। अपने संबोधन में मुख्य वक्ता प्रभुलाल कटारा ने जोर देकर कहा कि भील समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने बताया कि भील समाज शबरी माता के वंशज हैं और सदियों से सनातन संस्कृति एवं परंपराओं से गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। कटारा ने भगवान राम और माता शबरी की कथा को भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया, जो भील समाज और सनातन परंपरा के अटूट संबंध को प्रदर्शित करती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में कुछ बाहरी ताकतें भील समाज को उसकी जड़ों से अलग करने और विभाजित करने का प्रयास कर रही हैं, साथ ही भ्रम फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। कटारा ने इस बात पर विशेष रूप से चिंता जताई कि कुछ लोग यह प्रचारित कर रहे हैं कि भील समाज हिंदू नहीं है, जिसे उन्होंने समाज के इतिहास, परंपराओं और पूर्वजों के जीवन मूल्यों के पूर्णतः विपरीत बताया। कटारा ने आगे कहा कि भील समाज के पूर्वज सदियों से सनातन संस्कृति, देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को मानते आए हैं, और ऐसे में अपने इतिहास तथा पूर्वजों से विमुख होना उनके सम्मान के विरुद्ध है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे अपने गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को समझते हुए एकजुट रहें। उन्होंने यह भी बताया कि अंग्रेजी शासनकाल में जनजातीय समाज की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना को प्रभावित करने वाली कई नीतियां लागू की गईं, फिर भी समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवंत रखा। कटारा ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सहित देश की आजादी के विभिन्न आंदोलनों में जनजातीय समाज के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और इसे इतिहास में उचित स्थान दिए जाने की मांग की। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, महापुरुषों के योगदान, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति के संस्कारों से परिचित कराएं, क्योंकि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि कारीलाल ननोमा ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी विकसित होने चाहिए। उन्होंने विद्या भारती के शिक्षण संस्थानों द्वारा शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान कर राष्ट्र निर्माण में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्य की सराहना की। अध्यक्षीय उद्बोधन में दीनदयाल सिंह चौहान ने भारतीय संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को एक-दूसरे का पूरक बताया, और समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हुए शिक्षा व संगठन के माध्यम से आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस उद्घाटन सत्र में उपस्थित आचार्यों को संस्कारयुक्त शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति तथा समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों पर मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवीन आचार्यों को संगठन की कार्यपद्धति, शिक्षा दर्शन, भारतीय संस्कृति और जनजातीय समाज के इतिहास से परिचित कराना था।1
- बांसवाड़ा जिले के सदर थाना क्षेत्र में भैंस चोरी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, जहाँ जाँच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चिड़ियावासा निवासी राहुल पुत्र तोलाराम निनामा और कमलेश पुत्र शंकर चरपोटा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों ने गाँव के पास से भैंस चोरी कर उसे एक सुनसान स्थान पर छिपा दिया था। मुखबिर सूचना और तकनीकी जाँच के आधार पर पुलिस ने उन्हें दबोचा। फिलहाल, पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है तथा चोरी की गई भैंस की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।1
- कुशलगढ़ क्षेत्र में किसानों के लिए निर्धारित उर्वरक की संभावित कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रीतेश डामोर, विश्वनाथ भईडा, भावेश भईडा और ग्रामीणों की सूचना पर भेरू पधाड़-घाटरी मार्ग से यूरिया से भरी एक आयशर गाड़ी को रोका गया। इस गाड़ी में कुल 300 बैग यूरिया लदा था, जिसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दी गई। उपखंड अधिकारी श्रद्धा सिंह के निर्देश पर सहायक निदेशक कृषि छगनलाल दामा के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर जांच की। वाहन क्रमांक एमपी-15-जी-5813 के चालक दिनेश डामोर वैध परिवहन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद वाहन को कुशलगढ़ लैम्पस ले जाकर 300 बैग यूरिया को सुरक्षित अभिरक्षा में रखवाया गया। जांच में यह भी पता चला कि 284 बैग आईपीएल कंपनी के थे और 16 बैग एनएफएल कंपनी के पाए गए। कृषि विभाग की प्रारंभिक जांच में यह मामला उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के उल्लंघन और संभावित कालाबाजारी का प्रतीत हो रहा है। इसके चलते संबंधित उर्वरक विक्रेताओं पवन लबाना और शंकर सिंह के लाइसेंस निलंबित करने की अनुशंसा की गई है। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच उपखंड अधिकारी श्रद्धा सिंह और सहायक निदेशक कृषि छगनलाल दामा की निगरानी में लगातार जारी है।2
- इंदौर की सराफा चौपाटी पर हुए एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस घटना में कुछ युवकों के बीच कुर्सियों से जमकर मारपीट हुई। इस पूरी घटना का एक वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है।1