सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़ देगा। सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़ देगा।
सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़
देगा। सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़ देगा।
- सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़ देगा। सरकारी बजट की आस में अटका युवा वैज्ञानिक का सपना, एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए सरकारी मदद की दरकार शहडोल जयसिंनगर देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही संसाधन और आर्थिक मदद न मिलने के कारण कई बड़े आविष्कार फाइलों में ही दबे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां एक होनहार युवक किशोरीलाल यादव ने अपने दम पर एक एयरक्राफ्ट (विमान) का मॉडल तैयार किया है, लेकिन अब वित्तीय तंगी के कारण उसका यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रुकने की कगार पर है। युवक को अब अपना सपना पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट और प्रशासनिक मदद की आस है। प्रतिभा के पंखों को उड़ान का इंतज़ार बचपन से ही आसमान में उड़ने वाले विमानों के प्रति आकर्षित रहने वाले इस युवक ने बिना किसी बड़े कॉरपोरेट सपोर्ट के, अपनी सीमित जमापूंजी लगाकर इस एयरक्राफ्ट के डिजाइन और शुरुआती ढांचे पर काम शुरू किया था। तकनीकी बारीकियों को समझने और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद प्रोजेक्ट एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां इसे अंतिम रूप देने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। युवक का कहना है, "मैंने अपने स्तर पर जितना हो सकता था, इस प्रोजेक्ट में लगा दिया है। लेकिन एक सुरक्षित और पूरी तरह से काम करने वाले एयरक्राफ्ट को बनाने के लिए महंगे उपकरणों, एवियोनिक्स सिस्टम और टेस्टिंग के लिए एक बड़े बजट की आवश्यकता है, जो मेरे जैसे सामान्य पृष्ठभूमि के युवक के लिए अकेले वहन करना असंभव है।" क्यों जरूरी है सरकारी मदद कानूनी अनुमतियां नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) जैसी संस्थाओं से आवश्यक क्लीयरेंस और गाइडेंस दिलाने में सरकार बड़ी भूमिका निभा सकती है। 'मेक इन इंडिया' को मिल सकती है ताकत यदि सरकार इस युवक की प्रतिभा को पहचानकर उसे 'स्टार्टअप इंडिया' या रक्षा उड्डयन मंत्रालय के किसी विशेष बजट के तहत सहायता प्रदान करती है, तो यह 'मेक इन इंडिया' अभियान के लिए एक मिसाल बन सकता है। स्थानीय स्तर पर कम लागत में एयरक्राफ्ट निर्माण की यह तकनीक भविष्य में देश के विमानन क्षेत्र को एक नई दिशा दे सकती है। फिलहाल, युवक अपनी फाइलों और एयरक्राफ्ट के प्रोटोटाइप के साथ सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस युवा आविष्कारक की आवाज सुनता है या फिर यह हुनर फंड के अभाव में जमीन पर ही दम तोड़ देगा।2
- बड़वारा में खाकी और खादी की खुली शह पर शराब माफियाओं का तांडव! कटनी के नन्हवारा (सेझा) में अवैध शराब का विरोध करने वाली महिलाओं के साथ दबंगों ने बेरहमी से मारपीट की। शरीर पर पड़े चोट के निशान बड़वारा के जंगलराज की गवाही दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब बेखौफ माफियाओं ने सरेआम डींग हाँकी— "पुलिस हमारी जेब में रहती है, जो उखाड़ना है उखाड़ लो!" 👮♂️ बड़वारा पुलिस: पैसे लेकर शराब के इन सौदागरों को खुला संरक्षण दे रही है और पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं है। 🏛️ क्षेत्रीय विधायक: न्याय की आस में पहुँचे ग्रामीणों के सामने "अभी आरोपियों को उठवा लेते हैं" जैसी बड़ी-बड़ी शेखी तो बघारी, लेकिन वह सिर्फ एक घटिया और खोखला ड्रामा साबित हुआ! धरातल पर अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कल ही पीड़ित महिलाओं ने एसपी ऑफिस पहुँचकर अपनी आपबीती सुनाई और इन सबकी पोल खोल दी है! 🛑 चेतावनी: यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का गुस्सा फूटेगा और बड़ा उग्र आंदोलन होगा! #InstaViral #ReelKaroFeelKaro #TrendingReels #explorepage #FBViral #ViralPost #TrendingNow #FacebookReels #ExploreFB #TopNews #BreakingNews #NewsAlert24x73
- सिंमडारी में किसान के खेत में गड़ा मिला नीलगाय का नवजात, वन विभाग ने शव निकालकर शुरू की जांच *newsstar* *rishab* katni कटनी जिले के रीठी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिमड़ारी में किसान के खेत में नीलगाय के नवजात बच्चे का शव खेत में गड़ा हुआ मिलने से क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। मामले की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खेत में खुदाई कर नवजात के शव को बाहर निकाला। वन विभाग ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। वहीं, मामले में खेत मालिक से पूछताछ कर घटना के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल, वन विभाग की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। दरअसल, पूरा मामला कटनी जिले के रीठी वन परिक्षेत्र के ग्राम सिमड़ारी का है, जहां एक किसान के खेत में नीलगाय का नवजात बच्चा गड़ा हुआ मिला। इसकी सूचना मुखबिरों के माध्यम से वन विभाग तक पहुंची, जिसके बाद वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। मौके का निरीक्षण करने के बाद टीम ने खेत में खुदाई कर नवजात नीलगाय के शव को बाहर निकाला और अपने कब्जे में लेकर शव परीक्षण कराया। वन परिक्षेत्र अधिकारी महेश पटेल के अनुसार, सूचना मिलने पर टीम को मौके पर भेजा गया था। मामले में खेत मालिक चंद्रभान, पिता संतोष पटेल से पूछताछ की जा रही है और घटना से जुड़ी आवश्यक जानकारियां जुटाई जा रही हैं। फिलहाल, नवजात नीलगाय की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसका शव खेत में क्यों गाड़ा गया था, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। वन विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।3
- कलेक्टर श्री तिवारी जनसुनवाई में सुन रहे लोगों की समस्याएं* *अधिकारियों को दे रहे निराकरण के निर्देश* कटनी। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों को आवेदनों के त्वरित निराकरण के निर्देश दे रहे हैं।कलेक्टर श्री तिवारी अब तक 57आवेदकों की समस्याओं और शिकायतों को सुन कर निराकरण के निर्देश दे चुके हैं। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर,अपर कलेक्टर श्री नीलांबर मिश्रा,एसडीएम कटनी श्री जितेन्द्र पटेल , लोकसेवा जिला प्रबंधक श्री दिनेश विश्वकर्मा सहित सभी विभागों के जिला अधिकारी मौजूद हैं। *जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन अभी भी जारी है*1
- पुलिस के ऊपर लगा आरोप1
- लोकेशन मैहर, मध्य प्रदेश जिला संवाददाता:- उमेश चर्मकार मैहर बना प्रदूषण की नगरी! शहर में कदम-कदम पर उड़ती धूल से आम जनजीवन प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आखिर मैहर की हवा में धूल और प्रदूषण की समस्या क्यों बढ़ रही है? क्या आम नागरिकों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं है? सीमेंट उद्योगों, सड़कों पर उड़ती धूल और प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठा रहे हैं? क्या लोगों को इस समस्या से राहत मिलेगी या फिर उन्हें इसी तरह धूल के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ेगी? प्रदूषण के मामले में मैहर के युवा पत्रकार से हुई खास चर्चा उठाएं गए कई सवाल1
- मैहर: दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर, 10 माह की बच्ची और गर्भवती महिला समेत एक ही परिवार के 4 लोग घायल मैहर: जिले के बदेरा थाना क्षेत्र के पास मंगलवार सुबह दो बाइकों की आमने-सामने की जबरदस्त टक्कर हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनमें 10 महीने की एक मासूम बच्ची और छह माह की गर्भवती महिला भी शामिल हैं। घटना के बाद मौके से भाग रहे दूसरे बाइक सवार को राहगीरों की मदद से पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। मौसी के घर जा रहा था परिवार प्राप्त जानकारी के अनुसार, सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र के पोड़ी गरदा निवासी बृजेश कुमार धीमर (28) मंगलवार सुबह अपनी बाइक पर सवार होकर परिवार के साथ मैहर स्थित अपनी मौसी के घर अमारा जा रहे थे। इसी दौरान बदेरा थाना क्षेत्र के पास सामने से आ रही दूसरी बाइक से उनकी टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में बृजेश कुमार, उनकी पत्नी काजल धीमर (25), बहन पूजा धीमर (20) और 10 माह की बेटी साक्षी घायल हो गईं। काजल धीमर छह माह की गर्भवती हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के बाद डॉक्टरों द्वारा उनकी अलग से विशेष जांच शुरू की गई है। दूसरा बाइक सवार पकड़ा गया टक्कर के बाद दूसरी बाइक पर सवार युवक मौके से भागने की फिराक में था, लेकिन मुस्तैद राहगीरों की सूचना पर पुलिस ने उसे तुरंत पकड़ लिया और थाने पहुंचा दिया। घटना के तुरंत बाद डायल 112 की मदद से सभी घायलों को सिविल अस्पताल मैहर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।1
- शहडोल राष्ट्रीय युवा उत्सव-2027’’- जिला स्तरीय आयोजन 27 अक्टूबर को पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में किया गया। *युवाओं को प्रतिभा प्रदर्शन का शानदार अवसर साबित हुआ युवा उत्सव,2026 - 27 वर्ष 2026-27 के युवा उत्सव की थीम नशा मुक्ति एवं विकसित भारत रही। हर वर्ष की भांति इस वर्ष “युवा शक्ति से जन भागीदारी” के उद्देश्य से दिनांक 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में 15 से 29 वर्ष (17 अगस्त, 2026 की स्थिति में) के युवाओं हेतु ‘‘राष्ट्रीय युवा उत्सव-2027’’ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष सांस्कृतिक ट्रेक में समूह लोकनृत्य, समूह लोकगायन, पेंटिंग, कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक का आयोजन “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” थीम पर किया जा रहा है। “युवा उत्सव 2026- 27” का आयोजन जिला, संभाग एवं राज्य स्तर पर किया जायेगा, जिसमें जिले के विजेता युवा/दल संभाग पर प्रतिभागिता करेंगे तथा संभाग से प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त युवा/दल राज्य स्तर पर प्रतिभागिता करेंगे। भारत सरकार से प्राप्त निर्देशानुसार गतवर्ष युवा उत्सव के अन्तर्गत सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रतिभागिता कर चुके युवा इस वर्ष युवा उत्सव के अन्तर्गत प्रतिभागिता नहीं कर सकेंगे। जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी श्री अभिषेक दीवान ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला स्तरीय युवा उत्सव में 05 विधाओं जैसे चित्रकला , कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक ,समूह लोकगीत एवं समूह लोकतंत्र में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई । संभाग स्तरीय युवा उत्सव का आयोजन 15 और 16 नवंबर को किया जाएगा। कुल विजुअल - 08 बाइट - अजय सोंधिया, समन्वयक खेल एवं युवा कल्याण विभाग शहडोल बाइट - मंजुला पांडेय, सदस्य निर्णायक टीम बाइट - दुर्गेश त्रिपाठी, प्रतिभागी बाइट - जाह्नवी गुप्ता, प्रतिभागी शहडोल राष्ट्रीय युवा उत्सव-2027’’- जिला स्तरीय आयोजन 27 अक्टूबर को पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में किया गया। *युवाओं को प्रतिभा प्रदर्शन का शानदार अवसर साबित हुआ युवा उत्सव,2026 - 27 वर्ष 2026-27 के युवा उत्सव की थीम नशा मुक्ति एवं विकसित भारत रही। हर वर्ष की भांति इस वर्ष “युवा शक्ति से जन भागीदारी” के उद्देश्य से दिनांक 10 से 12 जनवरी 2027 तक नई दिल्ली में 15 से 29 वर्ष (17 अगस्त, 2026 की स्थिति में) के युवाओं हेतु ‘‘राष्ट्रीय युवा उत्सव-2027’’ का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष सांस्कृतिक ट्रेक में समूह लोकनृत्य, समूह लोकगायन, पेंटिंग, कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक का आयोजन “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” थीम पर किया जा रहा है। “युवा उत्सव 2026- 27” का आयोजन जिला, संभाग एवं राज्य स्तर पर किया जायेगा, जिसमें जिले के विजेता युवा/दल संभाग पर प्रतिभागिता करेंगे तथा संभाग से प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त युवा/दल राज्य स्तर पर प्रतिभागिता करेंगे। भारत सरकार से प्राप्त निर्देशानुसार गतवर्ष युवा उत्सव के अन्तर्गत सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रतिभागिता कर चुके युवा इस वर्ष युवा उत्सव के अन्तर्गत प्रतिभागिता नहीं कर सकेंगे। जिला खेल और युवा कल्याण अधिकारी श्री अभिषेक दीवान ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला स्तरीय युवा उत्सव में 05 विधाओं जैसे चित्रकला , कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक ,समूह लोकगीत एवं समूह लोकतंत्र में प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई । संभाग स्तरीय युवा उत्सव का आयोजन 15 और 16 नवंबर को किया जाएगा। कुल विजुअल - 08 बाइट - अजय सोंधिया, समन्वयक खेल एवं युवा कल्याण विभाग शहडोल बाइट - मंजुला पांडेय, सदस्य निर्णायक टीम बाइट - दुर्गेश त्रिपाठी, प्रतिभागी बाइट - जाह्नवी गुप्ता, प्रतिभागी4