यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बाद रसूखदारों के दबाव में जांच में ढिलाई बरतती है और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं करती, तो नागरिकों को थाने के चक्कर काटने के बजाय कानून के विधिक प्रावधानों का उपयोग करने का अधिकार है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, पीड़ित को सीधे 'न्यायिक मजिस्ट्रेट' (CJM कोर्ट) के सामने अपनी गुहार लगाने का पूरा वैधानिक अधिकार प्राप्त है। इस विधिक प्रारूप में कोर्ट में आवेदन दाखिल होते ही, मजिस्ट्रेट सीधे थाना प्रभारी को समन जारी कर 'स्टेटस रिपोर्ट' तलब करते हैं। कोर्ट की निगरानी शुरू होते ही जांच अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित हो जाती है और पुलिस को एक तय समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष चार्जशीट दाखिल करनी ही पड़ती है। नागरिकों को अपने इन अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया गया है। यह जानकारी सामान्य नागरिकों व पीड़ितों की विधिक साक्षरता और प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई है। नए आपराधिक कानूनों, विशेष रूप से BNSS, के अंतर्गत पुलिस को गंभीर मामलों में प्रारंभिक जांच और चार्जशीट दाखिल करने के लिए विशिष्ट समय-सीमाएं दी गई हैं। हालांकि, मामलों की विधिक प्रकृति (जैसे दीवानी या फौजदारी विवाद) के अनुसार अदालती आवेदनों की धाराओं और ड्राफ्टिंग में तकनीकी भिन्नता हो सकती है। इसलिए, न्यायालय में कोई भी औपचारिक वाद या याचिका दायर करने से पहले, अपने स्थानीय जिला न्यायालय के किसी सक्षम आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता से व्यक्तिगत विधिक परामर्श और हस्ताक्षर प्राप्त करना आवश्यक है।
यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बाद रसूखदारों के दबाव में जांच में ढिलाई बरतती है और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल नहीं करती, तो नागरिकों को थाने के चक्कर काटने के बजाय कानून के विधिक प्रावधानों का उपयोग करने का अधिकार है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, पीड़ित को सीधे 'न्यायिक मजिस्ट्रेट' (CJM कोर्ट) के सामने अपनी गुहार लगाने का पूरा वैधानिक अधिकार प्राप्त है। इस विधिक प्रारूप में कोर्ट में आवेदन दाखिल होते ही, मजिस्ट्रेट सीधे थाना प्रभारी को समन जारी कर 'स्टेटस रिपोर्ट' तलब करते हैं। कोर्ट की निगरानी शुरू होते ही जांच अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित हो जाती है और पुलिस को एक तय समय-सीमा के भीतर निष्पक्ष चार्जशीट दाखिल करनी ही पड़ती है। नागरिकों को अपने इन अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया गया है। यह जानकारी सामान्य नागरिकों व पीड़ितों की विधिक साक्षरता और प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन के लिए प्रदान की गई है। नए आपराधिक कानूनों, विशेष रूप से BNSS, के अंतर्गत पुलिस को गंभीर मामलों में प्रारंभिक जांच और चार्जशीट दाखिल करने के लिए विशिष्ट समय-सीमाएं दी गई हैं। हालांकि, मामलों की विधिक प्रकृति (जैसे दीवानी या फौजदारी विवाद) के अनुसार अदालती आवेदनों की धाराओं और ड्राफ्टिंग में तकनीकी भिन्नता हो सकती है। इसलिए, न्यायालय में कोई भी औपचारिक वाद या याचिका दायर करने से पहले, अपने स्थानीय जिला न्यायालय के किसी सक्षम आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता से व्यक्तिगत विधिक परामर्श और हस्ताक्षर प्राप्त करना आवश्यक है।
- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।1
- सरकार पर छात्रों की पीड़ा और उनकी मानसिक स्थिति को समझने में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया गया है। प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं के कारण छात्रों को लगातार अनिश्चितता, असमंजस और अत्यधिक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर सरकार की गलतियों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 'निकम्मेपन' को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसकी सज़ा देश के बच्चे और उनके परिवार भुगत रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में रही है, और इसके बावजूद छात्रों के लिए कुछ मिनट का बफर टाइम या किसी भी तरह की राहत का प्रावधान न होने पर चिंता व्यक्त की गई है। इसका एक उदाहरण मध्य प्रदेश के विदिशा में हुए नीट री-एग्जाम के दौरान सामने आया, जहाँ महज़ दो मिनट की देरी के कारण तीन छात्रों की सालों की मेहनत पर पानी फिर गया। इन घटनाओं से व्यथित छात्र गेट बंद होने पर रोते हुए भी देखे गए। इस पूरे मामले को 'धृतराष्ट्र की तरह सब कुछ जानते हुए भी आँखें मूंदे बैठे रहने' जैसा बताते हुए इसे महापाप करार दिया गया है।1
- मोबाइल टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ नई पीढ़ी के स्मार्टफोन अत्याधुनिक AI फीचर्स, दमदार कैमरा और सुपरफास्ट परफॉर्मेंस के साथ बाजार में दस्तक दे रहे हैं। इन स्मार्टफोन्स को विशेष रूप से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन नए स्मार्टफोन्स में AI असिस्टेंट, रियल-टाइम फोटो एडिटिंग, स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट और हाई-स्पीड प्रोसेसर जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं। अब मोबाइल केवल कॉलिंग और चैटिंग तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह काम करने, मनोरंजन करने और कंटेंट बनाने का एक शक्तिशाली साधन बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित स्मार्टफोन यूजर्स की आदतों को समझकर कई काम अपने आप करने लगेंगे। इससे समय की बचत होगी और मोबाइल इस्तेमाल करने का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आसान बनेगा। नई टेक्नोलॉजी वाले इन स्मार्टफोन्स को लेकर युवाओं और टेक प्रेमियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, और माना जा रहा है कि यह तकनीक डिजिटल दुनिया में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।1
- गाजियाबाद के डासना क्षेत्र में दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे के निकट स्थित लगभग 250 बीघा सरकारी भूमि को जिला प्रशासन ने अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया है। इस भूमि की अनुमानित कीमत करीब 250 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि सरकारी जमीन पर फर्जी प्रविष्टियां कराकर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। सोमवार को पुलिस और प्रशासन की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुँची और मुनादी के ज़रिए लोगों को चेतावनी दी कि यह सरकारी भूमि है और इस पर किसी भी प्रकार का निर्माण, कब्जा या क्रय-विक्रय न किया जाए। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के निर्देश पर, पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया जाएगा, जिसमें चार अधिकारी स्तर के अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह एसआईटी इस बात की जांच करेगी कि सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े की साज़िश किसने रची और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, साथ ही भूमि पर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के गांव सिमरौली निवासी संगीता पत्नी योगराज ने पुलिस को शिकायती पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने एलएमसी (LMC) के रास्ते को दोबारा अवरुद्ध करने के प्रयास और जान से मारने की धमकी मिलने का आरोप लगाया है। संगीता के अनुसार, गांव में स्थित यह एलएमसी रास्ता पूर्व में एसडीएम के आदेश पर मुक्त कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिमरौली निवासी अरविन्द्र पुत्र तेजपाल और धर्मेन्द्र पुत्र तेजपाल, साथ ही ततारपुर निवासी सोनू पुत्र कंवरपाल ने एक बार फिर इस रास्ते को रोकने की कोशिश की। जब संगीता ने इसका विरोध किया, तो कथित तौर पर आरोपियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने बताया कि ये आरोपी आए दिन झगड़ा करने और लड़ाई-झगड़े का प्रयास करते हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर लगातार भय बना रहता है। संगीता ने पुलिस से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- जिओ की ओर से यह सुविधा प्रदान की जा रही है कि एक ही रिचार्ज के माध्यम से अब पूरे घर के सभी फोन को सक्रिय रखा जा सकेगा।1
- तकनीक की दुनिया में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप नए जमाने के स्मार्टफोन पहले से कहीं अधिक स्मार्ट, तेज और शक्तिशाली हो गए हैं। ये नई टेक्नोलॉजी से लैस मोबाइल फोन बाजार में आते ही लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। इनमें AI आधारित फीचर्स, दमदार प्रोसेसर, प्रोफेशनल कैमरा सिस्टम, लंबी बैटरी लाइफ और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जिनसे यूजर्स को बेहतर परफॉर्मेंस और शानदार अनुभव मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन अब केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि एक मिनी कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहे हैं। इन फोनों के माध्यम से वीडियो एडिटिंग, ऑनलाइन मीटिंग, गेमिंग, कंटेंट क्रिएशन और AI टूल्स का इस्तेमाल करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। साथ ही, इन नई तकनीक वाले स्मार्टफोन्स में सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, जिसमें एडवांस फेस अनलॉक, फिंगरप्रिंट सेंसर और AI सिक्योरिटी फीचर्स यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखने में सहायक होंगे। तकनीकी जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में AI और स्मार्ट तकनीकों से सुसज्जित ये मोबाइल फोन डिजिटल दुनिया की पूरी तस्वीर बदल देंगे। ये नए स्मार्टफोन न केवल लोगों की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और उत्पादकता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।1
- जनपद हापुड़ की सड़कों पर ‘शिवा डांसर’ नामक एक युवक की करतूत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस युवक पर महिलाओं और लड़कियों को देखकर बीच बाजार में डांस कर अश्लीलता फैलाने का आरोप लगा है। ‘रील के शौकीन’ इस युवक द्वारा बीच सड़क पर डांस करने का यह वायरल वीडियो जनपद हापुड़ के थाना बाबूगढ़ अंतर्गत कुचेसर चौपले का बताया जा रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बाबूगढ़ थाना पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की। थाने में पेश होने के बाद, डांसर को लंगड़ाते हुए देखा गया, जहाँ उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि “मुझे माफ कर दो, अब गलती नहीं होगी।”1
- हापुड़ कलेक्ट्रेट पर भाकियू के किसानों ने गन्ना भुगतान और नकली खाद-बीज पर कार्रवाई की मांग को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। डीएम कार्यालय के बाहर काफी संख्या में किसान एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर हल्ला बोला। किसानों ने घोषणा की है कि वे इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।1