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कार फंसी नाले में, ट्रैक्टर की मदद से नाले में से कार को निकाला बाहर। राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड में नाले में कार फंसने की घटना सामने आई है,आबू रोड के आकरा भट्टा स्थित बी एस पेट्रोल पंप के सामने एक कर चालक अपनी कर को खड़ी कर कार से नीचे ही उतरा था और अचानक कार नाले में फस गई, कार चालक कार खड़ी कर हैंडब्रेक लगाना भूल गया था, जिससे कार आगे चली गई और आगे एक बड़े नाले में फस गई, कार नाले में फंसते ही आसपास खड़े लोग मौके पर एकत्रित हो गए और कड़ी मशक्कत के बाद अन्य वाहन ओर ट्रैक्टर की मदद से कार को बाहर निकाला।
Ritik Sargara
कार फंसी नाले में, ट्रैक्टर की मदद से नाले में से कार को निकाला बाहर। राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड में नाले में कार फंसने की घटना सामने आई है,आबू रोड के आकरा भट्टा स्थित बी एस पेट्रोल पंप के सामने एक कर चालक अपनी कर को खड़ी कर कार से नीचे ही उतरा था और अचानक कार नाले में फस गई, कार चालक कार खड़ी कर हैंडब्रेक लगाना भूल गया था, जिससे कार आगे चली गई और आगे एक बड़े नाले में फस गई, कार नाले में फंसते ही आसपास खड़े लोग मौके पर एकत्रित हो गए और कड़ी मशक्कत के बाद अन्य वाहन ओर ट्रैक्टर की मदद से कार को बाहर निकाला।
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- राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड में नाले में कार फंसने की घटना सामने आई है,आबू रोड के आकरा भट्टा स्थित बी एस पेट्रोल पंप के सामने एक कर चालक अपनी कर को खड़ी कर कार से नीचे ही उतरा था और अचानक कार नाले में फस गई, कार चालक कार खड़ी कर हैंडब्रेक लगाना भूल गया था, जिससे कार आगे चली गई और आगे एक बड़े नाले में फस गई, कार नाले में फंसते ही आसपास खड़े लोग मौके पर एकत्रित हो गए और कड़ी मशक्कत के बाद अन्य वाहन ओर ट्रैक्टर की मदद से कार को बाहर निकाला।1
- विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग। राज्यसभा सांसद नीरज डाँगी ने संसद में प्रमुखता से रखी अपनी मांग। राजस्थान के माउंट आबू स्थित विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग को लेकर राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने संसद में सभापति के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया। राज्यसभा सांसद डांगी ने कहा कि राजस्थान में सिरोही जिले के माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की उच्चतम चोटी गुरु शिखर की गोद में स्थित विश्व विख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्प कला तथा सांस्कृतिक उत्कृष्टता का अनुपम उदाहरण है। इन मंदिरों का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य किया गया था। यहां पांच जैन श्वेताम्बर मंदिर है जिनमें विमल वसई तथा लुन वसई के मंदिर अत्यंत ही कलात्मक एवं विशिष्ट है। अन्य मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, बितलहर मंदिर तथा पार्श्वनाथ मंदिर प्रमुख है। मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों एवं 1200 श्रमिकों के 12 वर्ष के अथक प्रयासों एवं 18.53 करोड रुपए की लागत से श्वेत संगमरमर के पाषणों से निर्मित इन मंदिरों की छतों, गुंबदों, तोरणद्वारों की अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला की झलक प्रतिवर्ष देश - विदेश से लाखों श्रद्धालुओ और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जिससे क्षेत्रीय पर्यटन, स्थानीय रोजगार तथा आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होता है। मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 53 देहरीयों में मूर्तियां स्थापित है जिनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मी जी, अंबाजी के साथ नरसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप व्रत, श्री कृष्ण द्वारा कालिया दमन, शेषनाग की क्षया की मूर्तिया स्थापित है। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के प्रत्यक्ष दर्शन के साथ-साथ उस युग की हिंदू संस्कृति, नृत्य, नाट्य कला के अद्भुत एवं चित्ताकर्षक चित्र अंकित है। शिल्प सौंदर्य की सुष्मता, कोमलता, अलंकरण की विशेषता और गुंबदों की छतों पर स्फूटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहरावों का बारीक अलंकरण, शीलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु - पक्षियों, वृक्षों, लताओं, पुष्पों आदि की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती है। यहां की वास्तुकला एवं शिल्प कौशल अद्वितीय है जिसकी मिसाल विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिलती। देलवाड़ा जैन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है अपितु भारत की बहुलतावादी संस्कृति, अहिंसा, सहिष्णुता तथा शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के जीवन का प्रतीक भी है। राज्यसभा डांगी ने सरकार से अनुरोध किया कि इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुनिश्चित करने हेतु यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र प्रारंभ किया जाए। इससे हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा सुनिश्चित होगी तथा भावी पीढ़ियों को भारत की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी प्राप्त होगा।2
- रेवदर विधायक मोतीराम कोली ने कहा कि सिरोही से मण्डार के बीच 70 किलोमीटर की दूरी में हर-रोज सडक दुर्घटना में कोई न कोई परिवार उजड रहा है, लगातार दुर्घटनाएं हो रही है और उन दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर ईलाज नहीं मिलने के कारण मौतें हो रही है, इसकी सुध सरकार लें और हाईवे पर आबादी से दूर करोंटी के समीप मॉडल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लम्बित प्रस्ताव की स्वीकृति दें। विधायक मोतीराम कोली ने मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान विशेष उल्लेख प्रस्ताव के जरीए सरकार का ध्यान रेवदर ब्लॉक क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था की ओर आकर्षित करवाते हुए कहा कि रेवदर विधानसभा क्षेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में काफी पिछडा हुआ क्षेत्र है। नेशनल हाईवे रेवदर विधानसभा क्षेत्र में से गुजरता है जो कि अभी स्टेट हाईवे की तर्ज पर बना हुआ है, इस मार्ग पर हजारों की संख्या की आबादी वाले कई बडे कस्बे स्थापित है। उन कस्बों में से गुजरने वाले इस हाईवे पर प्रतिदिन कोई न कोई बडा हादसा हो रहा है। सरकार चाहे तो रिकॉर्ड देख लें, प्रतिदिन सिरोही से मण्डार के बीच कोई न कोई बडा हादसा हुआ है, जिसमें आमलोगों की जानें गई है। उन्होंने वर्तमान में स्थापित चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देते हुए कहा कि रेवदर मुख्यालय समेत 70 किलोमीटर लम्बे इस हाईवे मार्ग पर कोई बडी चिकित्सा सुविधा का केन्द्र नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बने हुए है लेकिन वे भी आबादी क्षेत्रों में सुविधाओं के अभाव में चल रहे है। ये चिकित्सा केन्द्र रेफरल केन्द्र बनकर रह गये है। बडी दुर्घटना में संसाधनों एवं चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को रेफर किया जाता है। उन्होंने प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को अवगत करवाया कि जनसहभागिता योजना के तहत क्षेत्र के एक भामाशाह परिवार द्वारा राज्य सरकार के पास मॉडल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाने का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। यहां तक की मॉडल सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए करोंटी के समीप राजगढ में भूमि भी आवंटित की जा चुकी है। विधायक मोतीराम कोली ने जनसहभागिता योजना में मॉडल सीएचसी के लम्बित प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए स्वीकृति दिलाने की मांग की।1
- बाड़मेर से चोहटन जाने वाली MR बस मंगलवार को मंदिर में घुसी कोई जनहानि नहीं1
- राज हॉस्पिटल भीनमाल एमरजैंसी एम्बुलेंस सेवा +91 95872045711
- झाड़ोल क्षेत्र के मोहम्मद फलासिया गांव स्थित राम माता जंगल में मंगलवार को दो पैंथरों के बीच आपसी संघर्ष हो गया, जिसमें एक नर पैंथर की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पोस्टमार्टम झाड़ोल पशु चिकित्सालय में किया गया।1
- Post by Keshulal Gameti1
- रेवदर क्षेत्र के साड़का नाड़ा स्थित अंजनी माता मंदिर, मकावल में आज सेन समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक सेन समाज के सुप्रसिद्ध धाम श्री चेतन पुरी जी महाराज की कुटिया परिसर में आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संजय औगड़ भटाना ने की। बैठक में सेन समाज साठ गांव परगना अनादर रेवदर कमेटी के तत्वावधान में बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कमेटी अध्यक्ष पोपट लाल सेन भटाना एवं अन्य सदस्यों ने कमेटी के कार्यों और भावी दिशा पर बिंदुवार मार्गदर्शन दिया। इस दौरान मुख्य संरक्षक एवं मार्गदर्शक औगड़ ने समाज में फैली विभिन्न कुप्रथाओं को समाप्त करने, नशा बंदी को बढ़ावा देने तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे सामाजिक सरोकारों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने समाज को शिक्षा, एकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक के अंत में सभी उपस्थित समाजबंधुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। बैठक में रणछेड़, पारस, बाबूलाल भटाना, किरीट, चंदन, मुकेश कुमार, जीतू सेन, सुरेश सेन, भावेश सेन, विष्णु सेन, देवराज सेन, प्रकाश कुमार, नेमाराम, जीवाराम, मोहनलाल, अर्जुनलाल, जीतू, देवाराम सहित अनेक समाजबंधुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।1