विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग। राज्यसभा सांसद नीरज डाँगी ने संसद में प्रमुखता से रखी अपनी मांग। राजस्थान के माउंट आबू स्थित विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग को लेकर राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने संसद में सभापति के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया। राज्यसभा सांसद डांगी ने कहा कि राजस्थान में सिरोही जिले के माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की उच्चतम चोटी गुरु शिखर की गोद में स्थित विश्व विख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्प कला तथा सांस्कृतिक उत्कृष्टता का अनुपम उदाहरण है। इन मंदिरों का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य किया गया था। यहां पांच जैन श्वेताम्बर मंदिर है जिनमें विमल वसई तथा लुन वसई के मंदिर अत्यंत ही कलात्मक एवं विशिष्ट है। अन्य मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, बितलहर मंदिर तथा पार्श्वनाथ मंदिर प्रमुख है। मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों एवं 1200 श्रमिकों के 12 वर्ष के अथक प्रयासों एवं 18.53 करोड रुपए की लागत से श्वेत संगमरमर के पाषणों से निर्मित इन मंदिरों की छतों, गुंबदों, तोरणद्वारों की अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला की झलक प्रतिवर्ष देश - विदेश से लाखों श्रद्धालुओ और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जिससे क्षेत्रीय पर्यटन, स्थानीय रोजगार तथा आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होता है। मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 53 देहरीयों में मूर्तियां स्थापित है जिनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मी जी, अंबाजी के साथ नरसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप व्रत, श्री कृष्ण द्वारा कालिया दमन, शेषनाग की क्षया की मूर्तिया स्थापित है। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के प्रत्यक्ष दर्शन के साथ-साथ उस युग की हिंदू संस्कृति, नृत्य, नाट्य कला के अद्भुत एवं चित्ताकर्षक चित्र अंकित है। शिल्प सौंदर्य की सुष्मता, कोमलता, अलंकरण की विशेषता और गुंबदों की छतों पर स्फूटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहरावों का बारीक अलंकरण, शीलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु - पक्षियों, वृक्षों, लताओं, पुष्पों आदि की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती है। यहां की वास्तुकला एवं शिल्प कौशल अद्वितीय है जिसकी मिसाल विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिलती। देलवाड़ा जैन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है अपितु भारत की बहुलतावादी संस्कृति, अहिंसा, सहिष्णुता तथा शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के जीवन का प्रतीक भी है। राज्यसभा डांगी ने सरकार से अनुरोध किया कि इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुनिश्चित करने हेतु यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र प्रारंभ किया जाए। इससे हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा सुनिश्चित होगी तथा भावी पीढ़ियों को भारत की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी प्राप्त होगा।
विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग। राज्यसभा सांसद नीरज डाँगी ने संसद में प्रमुखता से रखी अपनी मांग। राजस्थान के माउंट आबू स्थित विश्वविख्यात देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की माँग को लेकर राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने संसद में सभापति के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया। राज्यसभा सांसद डांगी ने कहा कि राजस्थान में सिरोही जिले के माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की उच्चतम चोटी गुरु शिखर की गोद में स्थित विश्व विख्यात देलवाड़ा जैन मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्प कला तथा सांस्कृतिक उत्कृष्टता का अनुपम उदाहरण है। इन मंदिरों का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य किया गया था। यहां पांच जैन श्वेताम्बर मंदिर है जिनमें विमल वसई तथा लुन वसई के मंदिर अत्यंत ही कलात्मक एवं विशिष्ट है। अन्य मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, बितलहर मंदिर तथा पार्श्वनाथ मंदिर प्रमुख है। मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों एवं 1200 श्रमिकों के 12 वर्ष के अथक प्रयासों एवं 18.53 करोड रुपए की लागत से श्वेत संगमरमर के पाषणों से निर्मित इन मंदिरों की छतों, गुंबदों, तोरणद्वारों की अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला की झलक प्रतिवर्ष देश - विदेश से लाखों श्रद्धालुओ और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जिससे क्षेत्रीय पर्यटन, स्थानीय रोजगार तथा आर्थिक विकास को
महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होता है। मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 53 देहरीयों में मूर्तियां स्थापित है जिनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मी जी, अंबाजी के साथ नरसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप व्रत, श्री कृष्ण द्वारा कालिया दमन, शेषनाग की क्षया की मूर्तिया स्थापित है। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के प्रत्यक्ष दर्शन के साथ-साथ उस युग की हिंदू संस्कृति, नृत्य, नाट्य कला के अद्भुत एवं चित्ताकर्षक चित्र अंकित है। शिल्प सौंदर्य की सुष्मता, कोमलता, अलंकरण की विशेषता और गुंबदों की छतों पर स्फूटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहरावों का बारीक अलंकरण, शीलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु - पक्षियों, वृक्षों, लताओं, पुष्पों आदि की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती है। यहां की वास्तुकला एवं शिल्प कौशल अद्वितीय है जिसकी मिसाल विश्व में अन्यत्र कहीं नहीं मिलती। देलवाड़ा जैन मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है अपितु भारत की बहुलतावादी संस्कृति, अहिंसा, सहिष्णुता तथा शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के जीवन का प्रतीक भी है। राज्यसभा डांगी ने सरकार से अनुरोध किया कि इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं उनके अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुनिश्चित करने हेतु यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र प्रारंभ किया जाए। इससे हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा सुनिश्चित होगी तथा भावी पीढ़ियों को भारत की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी प्राप्त होगा।
- जोधपुर से हैदराबाद जा रही बस में मिली 5000 हजार की एक हरी मिर्च जिसे देख कर उड़ गए ड्राइवर के होश1
- झाड़ोल विधायक व मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कोटड़ा में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में सहभागिता की। सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम भाईसाहब की गरिमामयी उपस्थिति रही। सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, राष्ट्रबोध व हिंदू एकता पर विचार-विमर्श हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया।1
- जवाई बांध का गेज 49.67 फीट के साथ 4617.29 एमसीएफटी रहा नरेश मालवीय सुमेरपुर । रबी फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को जवाई बांध से मंगलवार को चाैथी व अंतिम पाण का पानी देने दाेपहर 1.15 मिनट हवामहल क्षेत्र से नहर में पानी छाेड़ा गया। जल संशाधन विभाग सहायक अभियंता अक्षय कुमावत, अशोक पूनिया कनिष्ठ अभियंता व कार्मिकाें ने गेट खाेलकर नहर में पानी प्रवाहित किया। जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता अशोक पूनियाँ ने बताया कि बुधवार से बाराबंदी लागू हाेगी। चाैथी पाण की अवधि 25 दिन रहेगी जिसमें कुल 1250 एमसीएफटी पानी दिया जाएगा। इस दौरान नहरों के माध्यम से टेल तक किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। जवाई बांध का गेज मंगलवार सवेरे 8 बजे 49.67 फीट दर्ज किया गया, जबकि बांध में कुल जल संग्रहण 4617.29 एमसीएफटी रहा। जवाई बांध की कुल भराव क्षमता 61.25 फीट के साथ 7327.5 एमसीएफटी हैं। अंतिम पाण में 1250 एमसीएफटी पानी देंगे, प्रतिदिन 50 एमसीएफटी छाेडेंगे अधिशासी अभियंता राज भंवरायत ने बताया कि किसानों काे चाैथी पाण में 1250 एमसीएफटी पानी दिया जाएगा। यानि प्रतिदिन 50 एमसीएफटी पानी मिलेगा। गौरतलब है कि किसानों को जवाई से पानी देने के लिए संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में कुल 4900 एमसीएफटी पानी देने का निर्णय लिया गया था। इसमें पूर्व में 3 पाण के माध्यम से 1200-1200 व 1250 एमसीएफटी, कुल 3650 एमसीएफटी पानी दिया जा चुका है।1
- शिव जी मंदिर1
- Post by Mahendra Mali1
- दुदनी गांव में बड़ी चोरी की वारदात का खुलासा, छह युवक पकड़े गए। बाली।पाली नाना थाना के गांव दुदनी में हाल ही में हुई चोरी की घटनाओं का खुलासा पुलिस कांस्टेबल श्याम सिंह चौहान की सतर्कता से हुआ है। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे देशी शराब ठेके के पास संदिग्ध अवस्था में शराब पी रहे छह युवकों को कांस्टेबल चौहान ने पकड़ा। तलाशी के दौरान युवकों के पास से मंदिरों से संबंधित सामान, गहने और नकदी बरामद हुई। कांस्टेबल चौहान को युवकों पर उस समय संदेह हुआ जब उन्होंने देखा कि दो बाइकों की नंबर प्लेट टूटी हुई थीं। तत्परता दिखाते हुए उन्होंने आसपास के युवा साथियों एवं ग्रामीणों को सूचना दी, जिसके बाद घेराबंदी कर सभी युवकों को मौके पर ही रोक लिया गया। तलाशी लेने पर युवकों के बैग से चोरी का सामान मिलने पर ग्रामीणों ने नाना थाना पुलिस को सूचित किया। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने सिरोही जिले के कालंदी थाना क्षेत्र में चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। पुलिस के अनुसार यह सात लोगों का गिरोह बताया जा रहा है, जिसमें से छह सदस्य बेकरिया निवासी बताए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दुदनी क्षेत्र में हाल के दिनों में चोरी की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिसके चलते ग्रामीण रात में अपने स्तर पर पहरा दे रहे थे। इसी सतर्कता और सहयोग के चलते यह सफलता मिली। ग्रामीणों का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से अन्य चोरी की घटनाओं का भी खुलासा होने की संभावना है। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।2
- बाली। पाली जिले के बाली उपखंड के दुदनी गांव में नाणा पुलिस और ग्रामीणों की सयुक्त गश्त ने 7 संदिग्धों को दबोचा1
- उदयपुर जिले के भचेडी, मोड़ी, बाठेड़ा कला व खुर्द तथा मेनार गांवों में योग शिविर व जागरूकता अभियान आयोजित हुआ। योगाचार्यों ने ग्रामीणों को योग, जल संरक्षण, पर्यावरण, पशु-पक्षी संरक्षण और प्लास्टिक निस्तारण के प्रति जागरूक किया तथा गांव की स्वच्छता व तालाब संरक्षण का संदेश दिया। रिपोर्टर : विष्णु लोहार1
- Post by Topper Star Life1