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रायगढ़ जिला स्तरीय रोजगार मेले में भारी भीड़ उमड़ी। इस रोजगार मेले के दौरान कई निजी कंपनियों ने शामिल होकर युवाओं के साक्षात्कार लिए।
Raigarh Chhattisgarh
रायगढ़ जिला स्तरीय रोजगार मेले में भारी भीड़ उमड़ी। इस रोजगार मेले के दौरान कई निजी कंपनियों ने शामिल होकर युवाओं के साक्षात्कार लिए।
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- सारंगढ़ में एक बड़ा स्कैम सामने आया है, जहां सैकड़ों महिलाओं को पैसे डबल करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। इस धोखाधड़ी का शिकार हुईं महिलाओं ने लोन लेकर करोड़ों रुपये की भारी-भरकम रकम दी थी। ठगी का शिकार होने के बाद अब ये पीड़ित महिलाएं अपने पैसों के लिए भटकने को मजबूर हैं।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बरपाली में एक जन्मदिन की पार्टी ही मौत की वजह बन गई। यहाँ दोस्त की बोलेरो गाड़ी से कुचलकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जन्मदिन की इस पार्टी के दौरान दोस्त की बोलेरो से कुचलकर इस हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दादर खुर्द में आस्था का जनसैलाब उमड़ने वाला है। यहाँ लोगों की श्रद्धा का सफर 125 साल पुराना है, जिसके चलते यहाँ भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।1
- छत्तीसगढ़ के जशपुर में पुलिस ने 'ऑपरेशन आघात' के तहत एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बड़ी सफलता के दौरान पुलिस ने दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 552 किलो गांजा बरामद करने के साथ ही तीन कारें भी जब्त की हैं। जशपुर पुलिस द्वारा जब्त की गई इस पूरी खेप और वाहनों की कुल कीमत ₹1.20 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।1
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में समय-सीमा के भीतर काम पूरा न करने वाले 6 ठेकेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है। निर्धारित समय-सीमा में कार्य नहीं करने की वजह से इन सभी 6 ठेकेदारों के अनुबंध को निरस्त करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा में आरटीओ अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 26 स्कूलों में बसों पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान आरटीओ अधिकारी द्वारा कुल 69 हजार रुपये की चलानी कार्रवाई की गई है।1
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को तार-तार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ पुलिस बल और खुद एसडीओपी (SDOP) ध्रुवेश जायसवाल की मौजूदगी में सत्ता से जुड़े कथित भू-माफियाओं और गुंडों ने थाने के भीतर पत्रकार अमित पांडेय की बेरहमी से पिटाई कर दी। अमित पांडेय का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक बेबस परिवार की बेशकीमती जमीन को फर्जीवाड़े से हड़पने और विरोध करने पर भू-स्वामी की हत्या करने वाले कथित भू-माफियाओं के काले कारनामों को उजागर किया था। इस घटना के बाद से ही लोग बेहद आक्रोशित हैं और सोशल मीडिया पर #JusticeForAmitPandey और #पत्थलगांव_गुंडाराज के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार पिछले 15 वर्षों से घुट-घुट कर जीने को मजबूर था और अमित पांडेय की खबरों से उनके भीतर न्याय की उम्मीद जगी थी। लेकिन कोयला चोरी, अवैध रेत खनन, नकली बीज बेचने और सौ करोड़ की सरकारी व निजी जमीनें हड़पने के धंधे में डूबे रसूखदारों ने पुलिस को अपनी 'प्राइवेट सिक्योरिटी' की तरह इस्तेमाल किया। रसूखदारों ने पत्रकार का हौसला तोड़ने के लिए उन पर रंगदारी और वसूली (Extortion) के झूठे केस थोपने की धमकी देकर चरित्र हनन की घटिया साजिश रची। इस संकट की घड़ी में प्रेस क्लब के कुछ दलाल भी पीड़ित पत्रकार के साथ खड़े होने के बजाय सत्ता और रसूखदारों की चाटुकारिता में व्यस्त रहे। इस पूरी वारदात ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं और लोग व्यवस्था को #सुशासन_या_जंगलराज का नाम दे रहे हैं। इस घिनौने कांड में सबसे संदिग्ध भूमिका एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल की मानी जा रही है, जिन पर साजिश के तहत पत्रकार को थाने बुलाकर अपराधियों से पिटवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ध्रुवेश जायसवाल का इतिहास पहले भी दागी रहा है। बलरामपुर (वाड्रफनगर) कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कोयला-रेत माफिया और पुलिसिया सांठगांठ को उजागर करने वाले निर्भीक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को इनके खिलाफ जांच के निर्देश देने पड़े थे। इसके अलावा, सरगुजा पदस्थापना के दौरान आदिवासियों (विशेषकर पहाड़ी कोरवाओं) का हक डकारने वाले भ्रष्ट एनजीओ को मूक संरक्षण देने में भी इनकी कार्यप्रणाली संदिग्ध रही थी। यही कारण है कि अब आक्रोशित जनता सीधे तौर पर #SuspendDhruveshJaiswal की मांग कर रही है। इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी सिर्फ सोशल मीडिया की 'टॉइलट एक्टिविज्म' तक ही सीमित नजर आ रही है। आरोप है कि पत्थलगांव के इन 'सेठों' के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से भी जुड़े हैं, जिसके चलते पार्टी केवल औपचारिकता निभा रही है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब सरगुजा संभाग के कद्दावर नेता और पीसीसी चीफ की दौड़ में शामिल टी.एस. सिंहदेव (टीएस बाबा) ने अपने ही क्षेत्र में हुई इस अमानवीय घटना पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या 'महाराज' ने सेठों के रसूख के आगे घुटने टेक दिए हैं, और इसीलिए सोशल मीडिया पर #TS_Singhdeo_Silent_Why की गूंज सुनाई दे रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विपक्ष मूकदर्शक बना रहे, तब यह लड़ाई सीधे जनता बनाम व्यवस्था की बन जाती है।3