छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को तार-तार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ पुलिस बल और खुद एसडीओपी (SDOP) ध्रुवेश जायसवाल की मौजूदगी में सत्ता से जुड़े कथित भू-माफियाओं और गुंडों ने थाने के भीतर पत्रकार अमित पांडेय की बेरहमी से पिटाई कर दी। अमित पांडेय का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक बेबस परिवार की बेशकीमती जमीन को फर्जीवाड़े से हड़पने और विरोध करने पर भू-स्वामी की हत्या करने वाले कथित भू-माफियाओं के काले कारनामों को उजागर किया था। इस घटना के बाद से ही लोग बेहद आक्रोशित हैं और सोशल मीडिया पर #JusticeForAmitPandey और #पत्थलगांव_गुंडाराज के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार पिछले 15 वर्षों से घुट-घुट कर जीने को मजबूर था और अमित पांडेय की खबरों से उनके भीतर न्याय की उम्मीद जगी थी। लेकिन कोयला चोरी, अवैध रेत खनन, नकली बीज बेचने और सौ करोड़ की सरकारी व निजी जमीनें हड़पने के धंधे में डूबे रसूखदारों ने पुलिस को अपनी 'प्राइवेट सिक्योरिटी' की तरह इस्तेमाल किया। रसूखदारों ने पत्रकार का हौसला तोड़ने के लिए उन पर रंगदारी और वसूली (Extortion) के झूठे केस थोपने की धमकी देकर चरित्र हनन की घटिया साजिश रची। इस संकट की घड़ी में प्रेस क्लब के कुछ दलाल भी पीड़ित पत्रकार के साथ खड़े होने के बजाय सत्ता और रसूखदारों की चाटुकारिता में व्यस्त रहे। इस पूरी वारदात ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं और लोग व्यवस्था को #सुशासन_या_जंगलराज का नाम दे रहे हैं। इस घिनौने कांड में सबसे संदिग्ध भूमिका एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल की मानी जा रही है, जिन पर साजिश के तहत पत्रकार को थाने बुलाकर अपराधियों से पिटवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ध्रुवेश जायसवाल का इतिहास पहले भी दागी रहा है। बलरामपुर (वाड्रफनगर) कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कोयला-रेत माफिया और पुलिसिया सांठगांठ को उजागर करने वाले निर्भीक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को इनके खिलाफ जांच के निर्देश देने पड़े थे। इसके अलावा, सरगुजा पदस्थापना के दौरान आदिवासियों (विशेषकर पहाड़ी कोरवाओं) का हक डकारने वाले भ्रष्ट एनजीओ को मूक संरक्षण देने में भी इनकी कार्यप्रणाली संदिग्ध रही थी। यही कारण है कि अब आक्रोशित जनता सीधे तौर पर #SuspendDhruveshJaiswal की मांग कर रही है। इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी सिर्फ सोशल मीडिया की 'टॉइलट एक्टिविज्म' तक ही सीमित नजर आ रही है। आरोप है कि पत्थलगांव के इन 'सेठों' के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से भी जुड़े हैं, जिसके चलते पार्टी केवल औपचारिकता निभा रही है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब सरगुजा संभाग के कद्दावर नेता और पीसीसी चीफ की दौड़ में शामिल टी.एस. सिंहदेव (टीएस बाबा) ने अपने ही क्षेत्र में हुई इस अमानवीय घटना पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या 'महाराज' ने सेठों के रसूख के आगे घुटने टेक दिए हैं, और इसीलिए सोशल मीडिया पर #TS_Singhdeo_Silent_Why की गूंज सुनाई दे रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विपक्ष मूकदर्शक बना रहे, तब यह लड़ाई सीधे जनता बनाम व्यवस्था की बन जाती है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को तार-तार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ पुलिस बल और खुद एसडीओपी (SDOP) ध्रुवेश जायसवाल की मौजूदगी में सत्ता से जुड़े कथित भू-माफियाओं और गुंडों ने थाने के भीतर पत्रकार अमित पांडेय की बेरहमी से पिटाई कर दी। अमित पांडेय का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक बेबस परिवार की बेशकीमती जमीन को फर्जीवाड़े से हड़पने और विरोध करने पर भू-स्वामी की हत्या करने वाले कथित भू-माफियाओं के काले कारनामों को उजागर किया था। इस घटना के बाद से ही लोग बेहद आक्रोशित हैं और सोशल मीडिया पर #JusticeForAmitPandey और #पत्थलगांव_गुंडाराज के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार पिछले 15 वर्षों से घुट-घुट कर जीने को मजबूर था और अमित पांडेय की खबरों से उनके भीतर न्याय की उम्मीद जगी थी। लेकिन कोयला चोरी, अवैध रेत खनन, नकली बीज बेचने और सौ करोड़ की सरकारी व निजी जमीनें हड़पने के धंधे में डूबे रसूखदारों ने पुलिस को अपनी 'प्राइवेट
सिक्योरिटी' की तरह इस्तेमाल किया। रसूखदारों ने पत्रकार का हौसला तोड़ने के लिए उन पर रंगदारी और वसूली (Extortion) के झूठे केस थोपने की धमकी देकर चरित्र हनन की घटिया साजिश रची। इस संकट की घड़ी में प्रेस क्लब के कुछ दलाल भी पीड़ित पत्रकार के साथ खड़े होने के बजाय सत्ता और रसूखदारों की चाटुकारिता में व्यस्त रहे। इस पूरी वारदात ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं और लोग व्यवस्था को #सुशासन_या_जंगलराज का नाम दे रहे हैं। इस घिनौने कांड में सबसे संदिग्ध भूमिका एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल की मानी जा रही है, जिन पर साजिश के तहत पत्रकार को थाने बुलाकर अपराधियों से पिटवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ध्रुवेश जायसवाल का इतिहास पहले भी दागी रहा है। बलरामपुर (वाड्रफनगर) कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कोयला-रेत माफिया और पुलिसिया सांठगांठ को उजागर करने वाले निर्भीक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को इनके खिलाफ जांच के निर्देश देने पड़े थे। इसके अलावा, सरगुजा पदस्थापना के दौरान आदिवासियों (विशेषकर पहाड़ी कोरवाओं) का
हक डकारने वाले भ्रष्ट एनजीओ को मूक संरक्षण देने में भी इनकी कार्यप्रणाली संदिग्ध रही थी। यही कारण है कि अब आक्रोशित जनता सीधे तौर पर #SuspendDhruveshJaiswal की मांग कर रही है। इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी सिर्फ सोशल मीडिया की 'टॉइलट एक्टिविज्म' तक ही सीमित नजर आ रही है। आरोप है कि पत्थलगांव के इन 'सेठों' के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से भी जुड़े हैं, जिसके चलते पार्टी केवल औपचारिकता निभा रही है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब सरगुजा संभाग के कद्दावर नेता और पीसीसी चीफ की दौड़ में शामिल टी.एस. सिंहदेव (टीएस बाबा) ने अपने ही क्षेत्र में हुई इस अमानवीय घटना पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या 'महाराज' ने सेठों के रसूख के आगे घुटने टेक दिए हैं, और इसीलिए सोशल मीडिया पर #TS_Singhdeo_Silent_Why की गूंज सुनाई दे रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विपक्ष मूकदर्शक बना रहे, तब यह लड़ाई सीधे जनता बनाम व्यवस्था की बन जाती है।
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ (उदयपुर) में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद एक महिला के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने के बाद इस मामले में यह कार्रवाई अमल में लाई गई है।1
- छत्तीसगढ़ के जशपुर में NH-43 के वैकल्पिक मार्ग पर साल 2016 के बाद पहली बार डामर की नई परत बिछाई गई है। वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी इस सड़क पर आवागमन करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। सड़क को सुधारने के लिए कई ठेकेदार आए और गए, लेकिन इसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया था। अब M/s विनोद जैन को यह कार्य मिलने के बाद सड़क को बेहतर बनाया गया है। सड़क दुरुस्त होने से स्थानीय लोगों और राहगीरों को बड़ी राहत मिली है और लोग इस कार्य की सराहना कर रहे हैं।1
- छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने प्रदेश की महान लोक कलाकार और विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला और लोक परंपरा के संरक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।1
- रायपुर में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री किरण सिंह देव जी की सहमति से भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, छत्तीसगढ़ द्वारा जिला प्रभारी एवं सह-प्रभारी की घोषणा की गई है। घोषित सूची के अनुसार, वर्तमान में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी का दायित्व संभाल रहे रेहान रज़ा को कोरिया जिले का जिला प्रभारी नियुक्त किया गया है। संगठन ने उनकी सक्रिय कार्यशैली, संगठन के प्रति समर्पण और अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी नेतृत्व ने विश्वास जताया है कि रेहान रज़ा कोरिया जिले में संगठन को और अधिक मजबूत करेंगे तथा पार्टी की नीतियों व जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनकी इस नियुक्ति पर अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने बधाई व शुभकामनाएँ दी हैं। अपनी नियुक्ति पर पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए नवनियुक्त कोरिया जिला प्रभारी रेहान रज़ा ने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, उसके लिए वह प्रदेश नेतृत्व और संगठन का हृदय से धन्यवाद करते हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह सौंपी गई जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करेंगे। इसके साथ ही, वे संगठन को मजबूत बनाने, पार्टी की विचारधारा और जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाने तथा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पूरी मेहनत व भरोसे के साथ कार्य करते रहेंगे।1
- सरगुजा के परसा में आज आसमान में बहुत ज्यादा बादल छाए हुए हैं और हल्की बूंदाबांदी हो रही है। मौसम के इस हाल की वजह से किसान भाइयों के लिए परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है क्योंकि फसल करने का समय भी निकलता जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि अगले दो-चार दिन मौसम का मिजाज ऐसे ही बना रहेगा, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।1
- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सोशल मीडिया पर एक युवती के साथ सरेराह मारपीट का वीडियो वायरल होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्री शशि मोहन सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया है। उनके निर्देश पर थाना कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी नगमा खान उर्फ नूरी को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही, घटना में शामिल दो नाबालिग बालिकाओं के विरुद्ध भी किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की गई है। इस पूरी कार्रवाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। पुलिस जांच और 19 वर्षीय पीड़िता की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 30 जून 2026 की शाम लगभग 4 बजे मेरीन ड्राइव रोड स्थित पुष्पवाटिका गार्डन के पास हुई थी। पीड़िता रायगढ़ में किराये के मकान में रहकर सोनारपारा स्थित एक ज्वेलरी गोदाम में काम करती है। घटना के दिन वह अपनी सहेली के साथ मोटरसाइकिल से वापस लौट रही थी, तभी दो युवतियों ने उनका रास्ता रोक लिया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। दरअसल, मारपीट करने वाली युवतियां वहां सेल्फी ले रही थीं और पीड़िता व उसकी सहेली को हंसते हुए गुजरता देख उन्हें लगा कि वे उन पर हंस रही हैं। इसी गलतफहमी में विवाद खड़ा हुआ और विरोध करने पर युवतियों ने फोन कर अपनी रिश्तेदार नगमा खान उर्फ नूरी को बुला लिया, जिसके बाद सभी ने मिलकर पीड़िता के साथ लात-घूंसों से मारपीट की। कोतवाली पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर अपराध क्रमांक 375/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 126(2), 351(3) एवं 3(5) के तहत मामला पंजीकृत किया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी नगमा खान उर्फ नूरी (पति खबीब खान, उम्र 38 वर्ष, निवासी चांदनी चौक, फौजदारपारा, रायगढ़) को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले पर एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया की ताकत को हल्के में न लें और कानून हाथ में लेकर सरेआम गुंडागर्दी करने वालों को पुलिस हर हाल में ढूंढ निकालेगी।3
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को तार-तार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ पुलिस बल और खुद एसडीओपी (SDOP) ध्रुवेश जायसवाल की मौजूदगी में सत्ता से जुड़े कथित भू-माफियाओं और गुंडों ने थाने के भीतर पत्रकार अमित पांडेय की बेरहमी से पिटाई कर दी। अमित पांडेय का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने एक बेबस परिवार की बेशकीमती जमीन को फर्जीवाड़े से हड़पने और विरोध करने पर भू-स्वामी की हत्या करने वाले कथित भू-माफियाओं के काले कारनामों को उजागर किया था। इस घटना के बाद से ही लोग बेहद आक्रोशित हैं और सोशल मीडिया पर #JusticeForAmitPandey और #पत्थलगांव_गुंडाराज के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार पिछले 15 वर्षों से घुट-घुट कर जीने को मजबूर था और अमित पांडेय की खबरों से उनके भीतर न्याय की उम्मीद जगी थी। लेकिन कोयला चोरी, अवैध रेत खनन, नकली बीज बेचने और सौ करोड़ की सरकारी व निजी जमीनें हड़पने के धंधे में डूबे रसूखदारों ने पुलिस को अपनी 'प्राइवेट सिक्योरिटी' की तरह इस्तेमाल किया। रसूखदारों ने पत्रकार का हौसला तोड़ने के लिए उन पर रंगदारी और वसूली (Extortion) के झूठे केस थोपने की धमकी देकर चरित्र हनन की घटिया साजिश रची। इस संकट की घड़ी में प्रेस क्लब के कुछ दलाल भी पीड़ित पत्रकार के साथ खड़े होने के बजाय सत्ता और रसूखदारों की चाटुकारिता में व्यस्त रहे। इस पूरी वारदात ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं और लोग व्यवस्था को #सुशासन_या_जंगलराज का नाम दे रहे हैं। इस घिनौने कांड में सबसे संदिग्ध भूमिका एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल की मानी जा रही है, जिन पर साजिश के तहत पत्रकार को थाने बुलाकर अपराधियों से पिटवाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। ध्रुवेश जायसवाल का इतिहास पहले भी दागी रहा है। बलरामपुर (वाड्रफनगर) कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने कोयला-रेत माफिया और पुलिसिया सांठगांठ को उजागर करने वाले निर्भीक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा था, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को इनके खिलाफ जांच के निर्देश देने पड़े थे। इसके अलावा, सरगुजा पदस्थापना के दौरान आदिवासियों (विशेषकर पहाड़ी कोरवाओं) का हक डकारने वाले भ्रष्ट एनजीओ को मूक संरक्षण देने में भी इनकी कार्यप्रणाली संदिग्ध रही थी। यही कारण है कि अब आक्रोशित जनता सीधे तौर पर #SuspendDhruveshJaiswal की मांग कर रही है। इस पूरे मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी सिर्फ सोशल मीडिया की 'टॉइलट एक्टिविज्म' तक ही सीमित नजर आ रही है। आरोप है कि पत्थलगांव के इन 'सेठों' के तार कांग्रेस के बड़े नेताओं से भी जुड़े हैं, जिसके चलते पार्टी केवल औपचारिकता निभा रही है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब सरगुजा संभाग के कद्दावर नेता और पीसीसी चीफ की दौड़ में शामिल टी.एस. सिंहदेव (टीएस बाबा) ने अपने ही क्षेत्र में हुई इस अमानवीय घटना पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या 'महाराज' ने सेठों के रसूख के आगे घुटने टेक दिए हैं, और इसीलिए सोशल मीडिया पर #TS_Singhdeo_Silent_Why की गूंज सुनाई दे रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विपक्ष मूकदर्शक बना रहे, तब यह लड़ाई सीधे जनता बनाम व्यवस्था की बन जाती है।3