Shuru
Apke Nagar Ki App…
बेगूसराय जिले के साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र अंतर्गत विष्णुपुर अशोक में बीते दिनों एक महिला पंच और उनके परिवार के लोगों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया है। विष्णुपुर अशोक में महिला पंच व उनके परिजनों के साथ हुई इस मारपीट की घटना सामने आई है।
Update
बेगूसराय जिले के साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र अंतर्गत विष्णुपुर अशोक में बीते दिनों एक महिला पंच और उनके परिवार के लोगों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया है। विष्णुपुर अशोक में महिला पंच व उनके परिजनों के साथ हुई इस मारपीट की घटना सामने आई है।
More news from बिहार and nearby areas
- बेगूसराय जिले के साहेबपुरकमाल थाना क्षेत्र अंतर्गत विष्णुपुर अशोक में बीते दिनों एक महिला पंच और उनके परिवार के लोगों के साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया है। विष्णुपुर अशोक में महिला पंच व उनके परिजनों के साथ हुई इस मारपीट की घटना सामने आई है।1
- बिहार के मुंगेर में अस्पताल पहुंचते ही एक ई-रिक्शा डिलीवरी रूम बन गया, जहाँ महिला ने एक नन्हीं बच्ची को जन्म दिया। मॉडल सदर अस्पताल परिसर में जीएनएम स्टूडेंट के सहयोग से यह नॉर्मल और सुरक्षित डिलीवरी संपन्न हुई। अस्पताल पहुंचते ही ई-रिक्शा के भीतर बच्ची के जन्म की यह बेहद सुखद और सकारात्मक खबर सामने आई है।1
- मुंगेर जिले के जमालपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर शुक्रवार को रेल थाना जमालपुर जीआरपी की ओर से मानव तस्करी, चाइल्ड ट्रैफिकिंग, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी, महिला अपराध और साइबर अपराध की रोकथाम को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेल इंस्पेक्टर विजय कुमार ने यात्रियों को मानव तस्करी की पहचान, इसके दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। रेल इंस्पेक्टर ने बताया कि किसी व्यक्ति को बहला-फुसलाकर, धोखे से या जबरन एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाकर उसका शोषण करना मानव तस्करी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा-143 के तहत यह अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसका सबसे अधिक शिकार महिलाओं और बच्चों को बनाया जाता है। यात्रियों से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें और आपात स्थिति में 112, महिला हेल्पलाइन 181 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें। इस अभियान के तहत महिलाओं एवं बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों और साइबर अपराध से बचाव के तरीकों के प्रति भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान रेल थाना प्रभारी एसआई अर्चना कुमारी, एसआई निरंजन कुमार रजक, एएसआई शिशुपाल, सार्जेंट नैयर आजम, पिंकी कुमारी, अन्य पुलिसकर्मी, एनजीओ सदस्य और सीडब्ल्यूसी मुंगेर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। रेल पुलिस ने जोर देकर कहा कि किसी भी अपराध को रोकने में आम जनता का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।1
- बिहार के बेगूसराय में नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार प्रिंस की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने देश भर में छात्र-छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज, पेपर लीक और पटना स्थित सदाकत आश्रम पर हंगामे व पत्थरबाजी के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। कांग्रेस भवन स्थित इंदिरा गांधी की प्रतिमा से शुरू हुआ यह प्रदर्शन वीर कुंवर सिंह चौक और आयुर्वेदिक कॉलेज होते हुए रेलवे गुमटी स्थित बाजार तक पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने 'नरेंद्र मोदी हाय-हाय', 'अमित शाह हाय-हाय', 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' और 'छात्रों पर लगाए गए फर्जी मुकदमे वापस लो' के उग्र नारे लगाए, जिसका राहगीरों ने भी आक्रोशपूर्ण समर्थन किया। प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए नगर अध्यक्ष ब्रजेश कुमार प्रिंस ने कहा कि कांग्रेस का उदय ब्रितानी हुकूमत के दौर में हुआ था और जब उस क्रूरतम शासक को उखाड़ फेंकने में देर नहीं लगी, तो एनडीए वाले कब तक सत्ता की धौंस जमाते रहेंगे। वहीं वरिष्ठ नेता रामविलास सिंह ने कहा कि मोदी-शाह की जोड़ी ने भारत को बर्बाद कर दिया है तथा शिक्षा और स्वास्थ्य सहित सभी बुनियादी ढांचे बेपटरी हो गए हैं। कांग्रेस नेता रणजीत कुमार मुखिया और मुरलीधर मुरारी ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता तथा प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री छात्रों के परिजनों से माफी नहीं मांग लेते, तब तक कांग्रेस की यह लड़ाई सड़क से सदन तक चलती रहेगी। इस अवसर पर सुबोध कुमार, सुनील कुमार, ओमप्रकाश झा, आनंद कुमार, कार्तिक झा, अभिषेक कुमार, नीरज कुमार, कैलाश प्रसाद, मुन्ना पासवान और मो. शौकत सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।2
- बिहार बंद के दौरान बेगूसराय में जिला प्रशासन की ओर से बयान दिया गया है।1
- NEET विवाद के बीच चल रहे छात्र आंदोलन का बड़ा असर देखने को मिला है, जहाँ छात्रों की लगातार माँग के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री का पद छोड़ दिया है। जिस इस्तीफे की माँग छात्र लगातार कर रहे थे, आखिरकार वह फैसला हो गया है। इस बड़े घटनाक्रम को छात्रों के आंदोलन की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।1