*मृत व्यक्ति के नाम पर* *सीमांकन!* — सिलपरा में बड़ा प्रशासनिक खेल "क्या आपने कभी सुना है कि दुनिया छोड़ चुके किसी इंसान की जमीन नापने के लिए सरकारी अमला उसके खेत में उतर जाए? जी हां, रीवा जिले के ग्राम सिलपरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं!" 6 जुलाई 2026 - मृत्यु | 22 जुलाई - आपत्ति | 24 जुलाई - सीमांकन का आदेश] सिलपरा गांव के रहने वाले एक व्यक्ति की मृत्यु बीते 6 जुलाई 2026 को हो चुकी है। घर में मातम है, लेकिन कागजों का खेल देखिए... मृत व्यक्ति के नाम से ही जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जब मृत व्यक्ति के भाई जगजीवन चतुर्वेदी को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने कानून पर भरोसा जताया। उन्होंने बिना किसी देरी के 22 तारीख को सीधे कलेक्टर महोदय के दरबार में अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने साफ-साफ बताया कि जिसके नाम से सीमांकन मांगा गया है, वो अब इस दुनिया में हैं ही नहीं!" शासन का लापरवाह रवैया - "सबको लगा कि आपत्ति के बाद साहब हरकत में आएंगे, जांच होगी और गलत प्रक्रिया रुक जाएगी। लेकिन... सिस्टम की नींद देखिए! आपत्ति दर्ज होने के महज दो दिन बाद, यानी 24 तारीख को सीमांकन का आदेश जारी कर दिया जाता है! सवाल ये उठता है: क्या कलेक्टर दफ्तर में दी गई आपत्ति की अर्जी सिर्फ रद्दी की टोकरी में फेंकने के लिए होती है? जिस इंसान की मृत्यु हो चुकी है, उसके नाम पर तहसील और राजस्व विभाग किसके इशारे पर सीमांकन का आदेश चमका रहा है? क्या सिलपरा में किसी बड़े भू-माफिया का दबाव है, या फिर राजस्व अमला इतना लापरवाह हो चुका है कि उसे जिंदा और मुर्दा इंसान के फर्क से भी कोई मतलब नहीं बचा?" जगजीवन चतुर्वेदी का पक्ष और न्याय की गुहार "पीड़ित जगजीवन चतुर्वेदी आज न्याय की आस में भटक रहे हैं। एक तरफ भाई के जाने का गम, और दूसरी तरफ अपनी ही पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए सरकारी अव्यवस्था से जंग। अगर मृत व्यक्ति के नाम पर सीमांकन की रिपोर्ट तैयार कर दी गई, तो कानूनन उसकी क्या वैधता रहेगी? और इस गलत आदेश का जिम्मेदार आखिर कौन होगा?" "ग्राम सिलपरा का यह मामला सिर्फ एक जमीन की नाप-जोख का नहीं है, यह उस अंधे कानून और सोए हुए प्रशासन का सबूत है जो कागजों पर आंखें मूंदकर दस्तखत कर देता है। हम मांग करते हैं कि इस अवैध सीमांकन आदेश पर तुरंत रोक लगाई जाए और 22 तारीख की आपत्ति को अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही हो
*मृत व्यक्ति के नाम पर* *सीमांकन!* — सिलपरा में बड़ा प्रशासनिक खेल "क्या आपने कभी सुना है कि दुनिया छोड़ चुके किसी इंसान की जमीन नापने के लिए सरकारी अमला उसके खेत में उतर जाए? जी हां, रीवा जिले के ग्राम सिलपरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं!" 6 जुलाई 2026 - मृत्यु | 22 जुलाई - आपत्ति | 24 जुलाई - सीमांकन का आदेश] सिलपरा गांव के रहने वाले एक व्यक्ति की मृत्यु बीते 6 जुलाई 2026 को हो चुकी है। घर में मातम है, लेकिन कागजों का खेल देखिए... मृत व्यक्ति के नाम से ही जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जब मृत व्यक्ति के भाई जगजीवन चतुर्वेदी को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने कानून पर भरोसा जताया। उन्होंने बिना किसी देरी के 22 तारीख को सीधे कलेक्टर महोदय के दरबार में अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने साफ-साफ बताया कि जिसके नाम से सीमांकन मांगा गया है, वो अब इस दुनिया में हैं ही नहीं!" शासन का लापरवाह रवैया - "सबको लगा कि आपत्ति के बाद साहब हरकत में आएंगे, जांच होगी और गलत प्रक्रिया रुक जाएगी। लेकिन... सिस्टम की नींद देखिए! आपत्ति दर्ज होने के महज दो दिन बाद, यानी 24 तारीख को सीमांकन का आदेश जारी कर दिया जाता है! सवाल ये उठता है: क्या कलेक्टर दफ्तर में दी गई आपत्ति की अर्जी सिर्फ रद्दी की टोकरी में फेंकने के लिए होती है? जिस इंसान की मृत्यु हो चुकी है, उसके नाम पर तहसील और राजस्व विभाग किसके इशारे पर सीमांकन का आदेश चमका रहा है? क्या सिलपरा में किसी बड़े भू-माफिया का दबाव है, या फिर राजस्व अमला इतना लापरवाह हो चुका है कि उसे जिंदा और मुर्दा इंसान के फर्क से भी कोई मतलब नहीं बचा?" जगजीवन चतुर्वेदी का पक्ष और न्याय की गुहार "पीड़ित जगजीवन चतुर्वेदी आज न्याय की आस में भटक रहे हैं। एक तरफ भाई के जाने का गम, और दूसरी तरफ अपनी ही पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए सरकारी अव्यवस्था से जंग। अगर मृत व्यक्ति के नाम पर सीमांकन की रिपोर्ट तैयार कर दी गई, तो कानूनन उसकी क्या वैधता रहेगी? और इस गलत आदेश का जिम्मेदार आखिर कौन होगा?" "ग्राम सिलपरा का यह मामला सिर्फ एक जमीन की नाप-जोख का नहीं है, यह उस अंधे कानून और सोए हुए प्रशासन का सबूत है जो कागजों पर आंखें मूंदकर दस्तखत कर देता है। हम मांग करते हैं कि इस अवैध सीमांकन आदेश पर तुरंत रोक लगाई जाए और 22 तारीख की आपत्ति को अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही हो
- झोला छाप डॉ बंगाली से उपचार से फिर हुई मौत,,जिले में लगातार रोजाना झोला छाप डॉ की उपचार से हो रही मौत,,, सीधी ब्रेक - सीने में दर्द की शिकायत पर परिजन लेकर पहुंचे थे झोला छाप डॉ के पास,सुई लगाने के कुछ ही देर बाद हुई मौत,परिजनों का आरोप डॉ के उपचार के बाद हुई मौत,,परिजनों की शिकायत पर झोला छाप डॉ को पुलिस ने लिया अभिरक्षा में,,मामले की कर रही जांच ,कमर्जी थाना क्षेत्र के धुम्मा ग्राम का मामला ।।।।।।।1
- फाइलों में बंद, फील्ड में चालू: बॉर्डरों पर परिवहन चेक पोस्ट की अवैध वसूली बरकरार 💥 *बड़ी खबर*💥 *फाइलों में बंद, फील्ड में चालू: बॉर्डरों पर परिवहन चेक पोस्ट की अवैध वसूली बरकरार* मध्यप्रदेश सरकार के आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। प्रदेश में परिवहन चेक पोस्ट आधिकारिक तौर पर बंद होने के बावजूद राजस्थान सीमा से सटे नयागांव बॉर्डर पर ट्रक चालकों से सरेआम अवैध वसूली जारी है। हाल ही में एक ट्रक ड्राइवर ने इस खुली वसूली का वीडियो कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल है। तमाम शिकायतों और पुख्ता सबूतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं और धड़ल्ले से अवैध वसूली का यह खेल चल रहा है।1
- _सतना जिले में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के बाद नया विवाद, 15 दिन बाद भी पटवारी ने नहीं सौंपा चार्ज_ _सतना जिले में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के बाद नया विवाद, 15 दिन बाद भी पटवारी ने नहीं सौंपा चार्ज_ _"रिश्वतखोर पटवारियों की विदाई पर खुशी, पर चार्ज न देने से ग्रामीणों में आक्रोश"_ _राइजिंग सतना_ _रामदत्त दाहिया_✍🏻 _रामपुर बघेलान, सतना_ जिला सतना के तहसील रामपुर बघेलान के ग्राम खरवाही एवं चोरहटा की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग प्रशासन ने मान ली थी। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे _हल्का चोरहटा के पटवारी श्री सत्येंद्र पांडेय_ एवं _हल्का खरवाही के पटवारी श्री अर्चित शर्मा_ का स्थानांतरण कर दिया गया था। उस समय पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर थी। लेकिन अब 15 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। *चार्ज न देने से बढ़ा विवाद* शिकायत के बाद हुए ट्रांसफर के बावजूद _हल्का चोरहटा के पटवारी सत्येंद्र पांडेय_ द्वारा आज तक नव नियुक्त पटवारी _श्री विकास विश्वकर्मा_ को चार्ज नहीं सौंपा गया है। आरोप है कि जानबूझकर कार्य में बाधा डाली जा रही है, जिससे आम जनता, गरीब, किसान और मजदूरों के राजस्व संबंधी काम अटके पड़े हैं। *ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी* चार्ज न मिलने से नाराज ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि ट्रांसफर के आदेश के बाद भी पुराने पटवारी द्वारा कुर्सी न छोड़ना सीधे-सीधे शासनादेश की अवहेलना है। ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि 2-3 दिन के अंदर चार्ज नहीं सौंपा गया तो _पटवारी सत्येंद्र पांडेय के खिलाफ जन आंदोलन_ किया जाएगा और _पटवारी भवन के सामने धरना_ दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। *जनता ने पहले जताया था आभार* पहले इस त्वरित कार्रवाई के लिए क्षेत्रवासियों ने _श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी महोदय, रामपुर बघेलान_ एवं _श्रीमान कलेक्टर महोदय, सतना_ का धन्यवाद किया था। अब लोगों की मांग है कि आदेश का तत्काल पालन करवाकर नए पटवारी को चार्ज दिलाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था बहाल हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के इस कदम से ही आम जनता का शासन-प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा।1
- मऊगंज जिला में जिला कलेक्टर म सुनील जन समस्या और भरोसा दिलाए मऊगंज जिला में जिला कलेक्टर म सुनील जन समस्या और भरोसा दिलाया का सबको न्याय मिलेगा किसान और ग्रामीण उपस्थित स्कीम के जरिए देख सकते हैं की किस प्रकार से जनता ने अपनी समस्याओं को लेकर के कलेक्टर महोदय को अवगत करवाया है कलेक्टर डोक्टर संजय जैन ने आश्वासन दिया है आपकी समस्या का निराकरण किया जाएगा दीनानाथ गुप्ता जिला मऊगंज ब्यूरो चीफ1
- सतना नगर निगम की अंधेरगर्दी, शहर के मृत पशुओं को करही बाईपास में खुले में किया जा रहा डम्प, बदबू से पेप्टेक सिटी और करही बस्ती के लोगों का हाल बेहाल,1