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रामप्रसाद धनगर गुर्जर कि खास रिपोर्ट रामप्रसाद धनगर गुर्जर कि खास रिपोर्ट

1 hr ago
user_Ramprasad dhangar
Ramprasad dhangar
Photographer शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

रामप्रसाद धनगर गुर्जर कि खास रिपोर्ट रामप्रसाद धनगर गुर्जर कि खास रिपोर्ट

More news from राजस्थान and nearby areas
  • थाने के पास ट्यूबवेल बंद, पुराने बस स्टैंड का हैंडपंप खराब — आमजन व यात्री परेशान रिपोर्टर: अब्दुल अलीम, डग डग कस्बे में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्थाओं की हालत बदहाल बनी हुई है। नगर पालिका की लापरवाही के चलते थाने के समीप स्थित ट्यूबवेल पिछले 15 दिनों से बंद पड़ा है। वहीं पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए लगा एकमात्र हैंडपंप भी खराब होकर बंद हो गया है। इस कारण यात्रियों और आमजन को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है और दुकानदारों से पानी मांगकर काम चलाना पड़ रहा है। थाने के पास पशुओं के लिए बनी पानी की टंकी भी ट्यूबवेल बंद होने से सूखी पड़ी है, जिससे पशु भी प्यास से परेशान हैं। तेज गर्मी के बीच पेयजल स्रोत बंद होने से सलामत भाई,इशाक पटेल,केलाश चंद्र,मे रोष है। स्थानीय लोग, दुकानदारों ने नगर पालिका से जल्द मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।
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    थाने के पास ट्यूबवेल बंद, पुराने बस स्टैंड का हैंडपंप खराब — आमजन व यात्री परेशान
रिपोर्टर: अब्दुल अलीम, डग
डग कस्बे में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन पेयजल व्यवस्थाओं की हालत बदहाल बनी हुई है। नगर पालिका की लापरवाही के चलते थाने के समीप स्थित ट्यूबवेल पिछले 15 दिनों से बंद पड़ा है। वहीं पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए लगा एकमात्र हैंडपंप भी खराब होकर बंद हो गया है।
इस कारण यात्रियों और आमजन को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है और दुकानदारों से पानी मांगकर काम चलाना पड़ रहा है। थाने के पास पशुओं के लिए बनी पानी की टंकी भी ट्यूबवेल बंद होने से सूखी पड़ी है, जिससे पशु भी प्यास से परेशान हैं।
तेज गर्मी के बीच पेयजल स्रोत बंद होने से सलामत भाई,इशाक पटेल,केलाश चंद्र,मे रोष है। स्थानीय लोग, दुकानदारों ने नगर पालिका से जल्द मरम्मत कर पेयजल व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।
    user_Abdul Alim
    Abdul Alim
    Librarian डुग, झालावाड़, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • Post by Arun Kumar Dubey
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    Post by Arun Kumar Dubey
    user_Arun Kumar Dubey
    Arun Kumar Dubey
    Teacher ताल, रतलाम, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • ​रामगंजमंडी में मोड़क थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोटा से झालावाड़ की ओर जा रहा एक ट्रक अमझार नदी की पुलिया पर अनियंत्रित होकर करीब 30 फीट नीचे नदी में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने राहगीरों की मदद से मोड़क अस्पताल पहुंचाया गया।
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    ​रामगंजमंडी में मोड़क थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोटा से झालावाड़ की ओर जा रहा एक ट्रक अमझार नदी की पुलिया पर अनियंत्रित होकर करीब 30 फीट नीचे नदी में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने राहगीरों की मदद से मोड़क अस्पताल पहुंचाया गया।
    user_Aajam Choudhary
    Aajam Choudhary
    Riportar रामगंज मंडी, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • *फरियादी आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर* मध्य प्रदेश, मंदसौर (मल्हारगढ़) — सीमांकन में गड़बड़ी और अधिकारियों पर गंभीर आरोप मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील में सीमांकन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां फरियादी लोकेश शर्मा ने पटवारी योगेंद्र राठौर एवं आरआई घीसू लाल पर मनमानी, गलत सीमांकन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। फरियादी के अनुसार, वह पिछले 3 वर्षों से अपनी जमीन के सही सीमांकन के लिए आवेदन कर रहा है, लेकिन हर बार गलत सीमांकन किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले सीमांकन में 14 आरी में से 6 आरी जमीन निकाली गई, दूसरा सीमांकन में फिर 4 आरी जमीन निकाली गई। इस प्रकार अब तक कुल 10 आरी जमीन निकाली गई, अभी भी 4 आरी यह कहकर दबा दी गई यहां मध्य प्रदेश शासन की जमीन है जबकि वहां पर मध्य प्रदेश शासन की कोई जमीन नहीं है सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। फरियादी ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित पटवारी योगेंद्र राठौर और आरआई घीसूलाल द्वारा पंचनामे पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसकी रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर जानबूझकर गलत सीमांकन किया जा रहा है। इस संबंध में फरियादी द्वारा तहसीलदार को शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, 181 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत क्रमांक 33063807 (मुन्नी बाई के नाम से) एवं 35352799 (लोकेश शर्मा के नाम से) को बिना संतोषजनक कार्रवाई के बंद कर दिया गया। फरियादी का आरोप है कि उन्हें सुनवाई की तारीख का नोटिस भी नहीं दिया गया। फरियादी ने बताया कि संबंधित अधिकारी खुलेआम यह कहते हैं कि “जहां जाना है जाओ, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इससे वह और उनका परिवार मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान हो चुका है। फरियादी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी होंगे।
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    *फरियादी आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर*
मध्य प्रदेश, मंदसौर (मल्हारगढ़) — सीमांकन में गड़बड़ी और अधिकारियों पर गंभीर आरोप
मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील में सीमांकन को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां फरियादी लोकेश शर्मा ने पटवारी योगेंद्र राठौर एवं आरआई घीसू लाल पर मनमानी, गलत सीमांकन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
फरियादी के अनुसार, वह पिछले 3 वर्षों से अपनी जमीन के सही सीमांकन के लिए आवेदन कर रहा है, लेकिन हर बार गलत सीमांकन किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले सीमांकन में 14 आरी में से 6 आरी जमीन निकाली गई, दूसरा सीमांकन में फिर 4 आरी जमीन निकाली गई। इस प्रकार अब तक कुल 10 आरी जमीन निकाली गई, अभी भी 4 आरी यह कहकर दबा दी गई यहां मध्य प्रदेश शासन की जमीन है जबकि वहां पर मध्य प्रदेश शासन की कोई जमीन नहीं है सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
फरियादी ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित पटवारी योगेंद्र राठौर और  आरआई घीसूलाल द्वारा पंचनामे पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसकी रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर जानबूझकर गलत सीमांकन किया जा रहा है।
इस संबंध में फरियादी द्वारा तहसीलदार को शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, 181 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत क्रमांक 33063807 (मुन्नी बाई के नाम से) एवं 35352799 (लोकेश शर्मा के नाम से) को बिना संतोषजनक कार्रवाई के बंद कर दिया गया। फरियादी का आरोप है कि उन्हें सुनवाई की तारीख का नोटिस भी नहीं दिया गया।
फरियादी ने बताया कि संबंधित अधिकारी खुलेआम यह कहते हैं कि “जहां जाना है जाओ, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” इससे वह और उनका परिवार मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान हो चुका है।
फरियादी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी होंगे।
    user_Mukesh Prajapat
    Mukesh Prajapat
    Engineer मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • Post by हर खबर आपके साथ
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    Post by हर खबर आपके साथ
    user_हर खबर आपके साथ
    हर खबर आपके साथ
    Voice of people सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • रायपुर क्षेत्र में हाड़ौती के झालावाड़ जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई होती है। इस बार किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, जिससे वे खुश भी हैं, लेकिन उत्पादन कम और क्वालिटी खराब होने से निराशा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है, लेकिन निर्यात ठप होने से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी इस साल मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक हो रही है। देशी लहसुन का भाव 3000 से 12000 रुपये प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का 5000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। हालांकि खराब क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों और विदेशों में सप्लाई नहीं हो पा रही है। लहसुन एक्सपोर्ट लायक नहीं होने से बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है। किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के बेचान करते हैं। पिछले साल से कम हुई पैदावार किसान राजेश दांगी कालीतलाई के अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है। एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है। औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं। किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है। बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर? फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया। इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा। 2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई। इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ। सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ। अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।
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    रायपुर क्षेत्र में हाड़ौती के झालावाड़ जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई होती है। इस बार किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, जिससे वे खुश भी हैं, लेकिन उत्पादन कम और क्वालिटी खराब होने से निराशा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है, लेकिन निर्यात ठप होने से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है।
मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी
इस साल मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक हो रही है। देशी लहसुन का भाव 3000 से 12000 रुपये प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का 5000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। हालांकि खराब क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों और विदेशों में सप्लाई नहीं हो पा रही है।  लहसुन एक्सपोर्ट लायक नहीं होने से बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है।
किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा
झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के बेचान करते हैं।
पिछले साल से कम हुई पैदावार
किसान राजेश दांगी कालीतलाई  के अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।
एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी
लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है।
एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा
किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है।
औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई
इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं। किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है।
बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर?
फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया।
इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा।
2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई।
इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ।
सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है।
कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ।
अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री
लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।
    user_Mukesh Mehar
    Mukesh Mehar
    रायपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by Ramprasad dhangar
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    Post by Ramprasad dhangar
    user_Ramprasad dhangar
    Ramprasad dhangar
    Photographer शामगढ़, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • yah bahut badi gufa hai aur Dhyan se nikalna padta hai
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    yah bahut badi gufa hai aur Dhyan se nikalna padta hai
    user_Govind Jatt
    Govind Jatt
    सुसनेर, आगर मालवा, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • Post by Mangal Dev rathore
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    Post by Mangal Dev rathore
    user_Mangal Dev rathore
    Mangal Dev rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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