प्लाटिंग के लिए भाट दिया गया नाला! अवैध कालोनी बनाने वाले माफियाओं का बड़ा खेल! धतूरा में प्लाटिंग में रोक लगी डॉढी में कब! मैहर में जगह-जगह अवैध कॉलोनीयों का निर्माण होता जा रहा है देखा जाए तो भू माफिया शासन के नियम कानून को दरकिनार कर अवैध प्लाटिंग कर करोड़ों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं जिसमें सरकार और शासन को लाखों रुपए की रेवेन्यू की चोरी की जा रही है कृषि भूमि को बिना किसी स्वीकृत मंजूरी के प्लाटों में टुकड़े कर बेची जा रही है इतना ही नहीं अभी हाल ही में धतूरा में अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आया था जिस पर मैहर एसडीएम दिव्या पटेल द्वारा रोक लगा दी गई लेकिन देखा जाए तो यह कोई पहला प्लाटिंग का खेल नहीं है उसके आसपास और मैहर शहर के चारों कोनों में 4 किलोमीटर सराउंडिंग में कई अवैध कॉलोनी डेवलप की जा रही है जहां पर कृषि भूमि एवं शासकीय भूमियों में भी प्लाटिंग करके बेची जा रही अभी हाल ही में आमडा नाला विद्युत मंडल ऑफिस के पीछे वार्ड नंबर दो और वार्ड नंबर 4 में अवैध प्लाटिंग का कारोबारी द्वारा नाले को भाडट दिया गया है बताया जा रहा है इस नाले से आमडा नाला से निकलने वाला पानी गुजरता है ऐसी स्थिति में बरसात के दिनों में यह जमीन पूरी तरह से पानी में डूब क्षेत्र में आती है ऐसी स्थिति में इसकी भटाई कर प्लाटिंग करके जमीन बेचने की तैयारी भू माफिया द्वारा कर ली गई है ।
प्लाटिंग के लिए भाट दिया गया नाला! अवैध कालोनी बनाने वाले माफियाओं का बड़ा खेल! धतूरा में प्लाटिंग में रोक लगी डॉढी में कब! मैहर में जगह-जगह अवैध कॉलोनीयों का निर्माण होता जा रहा है देखा जाए तो भू माफिया शासन के नियम कानून को दरकिनार कर अवैध प्लाटिंग कर करोड़ों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं जिसमें सरकार और शासन को लाखों रुपए की रेवेन्यू की चोरी की जा रही है कृषि भूमि को बिना किसी स्वीकृत मंजूरी के प्लाटों में टुकड़े कर बेची जा रही है इतना ही नहीं अभी हाल ही में धतूरा में अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आया था जिस पर मैहर एसडीएम दिव्या पटेल द्वारा रोक लगा दी गई लेकिन देखा जाए तो यह कोई पहला प्लाटिंग का खेल नहीं है उसके आसपास और मैहर शहर के चारों कोनों में 4 किलोमीटर सराउंडिंग में कई अवैध कॉलोनी डेवलप की जा रही है जहां पर कृषि भूमि एवं शासकीय भूमियों में भी प्लाटिंग करके बेची जा रही अभी हाल ही में आमडा नाला विद्युत मंडल ऑफिस के पीछे वार्ड नंबर दो और वार्ड नंबर 4 में अवैध प्लाटिंग का कारोबारी द्वारा नाले को भाडट दिया गया है बताया जा रहा है इस नाले से आमडा नाला से निकलने वाला पानी गुजरता है ऐसी स्थिति में बरसात के दिनों में यह जमीन पूरी तरह से पानी में डूब क्षेत्र में आती है ऐसी स्थिति में इसकी भटाई कर प्लाटिंग करके जमीन बेचने की तैयारी भू माफिया द्वारा कर ली गई है ।
- महिला आरक्षण बिल पर फिर बोले नारायण त्रिपाठी पूर्व विधायक मैहर1
- Post by Unchehra news1
- Post by Neeraj Ravi1
- थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है। जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?” यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है। जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं। भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है। यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की। यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता। थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें। यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है। जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।1
- भीम आर्मी का प्रदर्शन जारी?1
- Post by AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश1
- सतना। भगवान श्री परशुराम जी की शोभायात्रा में हिंदू पर्व समन्वय समिति ने सहभागिता की। कार्यकर्ताओं ने विप्र बंधुओं का स्वागत किया और मार्ग में पुष्प वर्षा की। समिति के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य इस अवसर पर उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाया।1
- इस तरह मरीज और उनके परिजनों से वसूले जाते पैसे।1