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मोहर्रम की पांचवीं तारीख के अवसर पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं।

1 hr ago
user_Surash Sahu
Surash Sahu
बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

मोहर्रम की पांचवीं तारीख के अवसर पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं।

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  • मोहर्रम की पांचवीं तारीख के अवसर पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं।
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    मोहर्रम की पांचवीं तारीख के अवसर पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बाँदा पुलिस ने 'पहले सेहत, फिर ड्यूटी' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस पहल के तहत पुलिस लाइन में एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया। शिविर में मौजूद योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी और सभी जवानों से उनका अभ्यास कराया। जवानों ने शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार लाने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न आसन किए। यह पहल केवल पुलिस लाइन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के हर थाने में भी योग शिविर लगाए गए, जहाँ थाना प्रभारियों से लेकर सिपाहियों तक सभी ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इन शिविरों में उपस्थित रहे। बाँदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल का मानना है कि 'योग से जवान तंदुरुस्त होगा, तो अपराधी होंगे पस्त'। इस आयोजन के माध्यम से वर्दीधारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक स्वस्थ और सेहतमंद पुलिस बल ही एक सुरक्षित समाज की गारंटी है।
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    12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बाँदा पुलिस ने 'पहले सेहत, फिर ड्यूटी' का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस पहल के तहत पुलिस लाइन में एक विशाल योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक सहित सभी अधिकारियों और जवानों ने उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया।

शिविर में मौजूद योगाचार्यों और विशेषज्ञों ने विभिन्न योग आसनों और प्राणायाम की विस्तृत जानकारी दी और सभी जवानों से उनका अभ्यास कराया। जवानों ने शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार लाने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न आसन किए। यह पहल केवल पुलिस लाइन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के हर थाने में भी योग शिविर लगाए गए, जहाँ थाना प्रभारियों से लेकर सिपाहियों तक सभी ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतिसार निरीक्षक बेलास यादव सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इन शिविरों में उपस्थित रहे।

बाँदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल का मानना है कि 'योग से जवान तंदुरुस्त होगा, तो अपराधी होंगे पस्त'। इस आयोजन के माध्यम से वर्दीधारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक स्वस्थ और सेहतमंद पुलिस बल ही एक सुरक्षित समाज की गारंटी है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है। बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
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    देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है।

बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
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    बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
    user_दिलीप कुमार जैन
    दिलीप कुमार जैन
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • पाँचवीं मोहर्रम के अवसर पर रविवार को मौदहा नगर और क्षेत्र के विभिन्न गांवों में आलम के जुलूस पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए, जिन्होंने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मातम किया। जुलूस के पूरे मार्ग पर मोहर्रम की रौनक देखने को मिली, जहाँ विभिन्न स्थानों पर लंगर, शरबत और हुसैनी सबील का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में लोगों ने राहगीरों और जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को जलपान कराया। अकीदतमंदों ने शांति एवं सौहार्द के साथ इन धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहे। जुलूस के मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था, और अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जिसके परिणामस्वरूप सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।
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    पाँचवीं मोहर्रम के अवसर पर रविवार को मौदहा नगर और क्षेत्र के विभिन्न गांवों में आलम के जुलूस पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए, जिन्होंने हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मातम किया।

जुलूस के पूरे मार्ग पर मोहर्रम की रौनक देखने को मिली, जहाँ विभिन्न स्थानों पर लंगर, शरबत और हुसैनी सबील का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में लोगों ने राहगीरों और जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं को जलपान कराया। अकीदतमंदों ने शांति एवं सौहार्द के साथ इन धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहे। जुलूस के मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था, और अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जिसके परिणामस्वरूप सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    52 min ago
  • हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
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    हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • मौसम विभाग ने देश के कई क्षेत्रों में आगामी बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के मद्देनजर, लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। विभाग ने आगाह किया है कि मौसम में हो रहे इन बदलावों के कारण कुछ प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक जीवन और यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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    मौसम विभाग ने देश के कई क्षेत्रों में आगामी बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के मद्देनजर, लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने और मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। विभाग ने आगाह किया है कि मौसम में हो रहे इन बदलावों के कारण कुछ प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक जीवन और यातायात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
    user_Dilip Kumar Bharti
    Dilip Kumar Bharti
    Local News Reporter नरैनी, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मोहर्रम की पांचवीं तारीख पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं। शहर के विभिन्न मोहल्लों और प्रमुख मार्गों से ये सवारियां अपने-अपने इमामबाड़ों से रवाना हुईं। इस दौरान मातमी धुनों और या हुसैन की सदाओं के बीच अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ढाल सवारियां शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात तक अपने निर्धारित स्थलों तक पहुंचीं, जहाँ जियारत और अन्य धार्मिक रस्में अदा की गईं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सवारियों का स्वागत किया और मोहर्रम की परंपराओं में भाग लिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा तथा जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। मोहर्रम की पांचवीं पर निकली इन ढाल सवारियों ने एक बार फिर बांदा की गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
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    उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मोहर्रम की पांचवीं तारीख पर पारंपरिक ढाल सवारियां पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाली गईं। शहर के विभिन्न मोहल्लों और प्रमुख मार्गों से ये सवारियां अपने-अपने इमामबाड़ों से रवाना हुईं। इस दौरान मातमी धुनों और या हुसैन की सदाओं के बीच अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

ढाल सवारियां शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात तक अपने निर्धारित स्थलों तक पहुंचीं, जहाँ जियारत और अन्य धार्मिक रस्में अदा की गईं। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सवारियों का स्वागत किया और मोहर्रम की परंपराओं में भाग लिया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा तथा जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। मोहर्रम की पांचवीं पर निकली इन ढाल सवारियों ने एक बार फिर बांदा की गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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