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भारतीय थलसेना को अपने 31वें प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ मिल गए हैं, जिन्होंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैल्यूट मारकर उनके पैर छुए। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने अपने बड़े भाई तथा नए सेना प्रमुख को सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि उनके पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ, एक सम्मानित सेना दिग्गज होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

3 hrs ago
user_उमेश पाठक सेमरिया रीवा
उमेश पाठक सेमरिया रीवा
सेमरिया, रीवा, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

भारतीय थलसेना को अपने 31वें प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ मिल गए हैं, जिन्होंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैल्यूट मारकर उनके पैर छुए। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने अपने बड़े भाई तथा नए सेना प्रमुख को सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि उनके पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ, एक सम्मानित सेना दिग्गज होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं।

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  • भारतीय थलसेना को अपने 31वें प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ मिल गए हैं, जिन्होंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैल्यूट मारकर उनके पैर छुए। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने अपने बड़े भाई तथा नए सेना प्रमुख को सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि उनके पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ, एक सम्मानित सेना दिग्गज होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं।
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    भारतीय थलसेना को अपने 31वें प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ मिल गए हैं, जिन्होंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैल्यूट मारकर उनके पैर छुए। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने अपने बड़े भाई तथा नए सेना प्रमुख को सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि उनके पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ, एक सम्मानित सेना दिग्गज होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं।
    user_उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    सेमरिया, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बघेलान में रोगी कल्याण समिति द्वारा किए गए खर्चों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिससे समिति की मनमानी पर प्रश्नचिह्न लगा है। लगातार दस्तावेज़ सामने आ रहे हैं, जिसमें हनुमत इंटरप्राइजेज का लगभग ₹30,000 का सीसीटीवी कैमरा से संबंधित बिल (क्रमांक 85) प्रमुख है। इस बिल के साथ-साथ कार्यादेश, क्रेडिट मेमो और अन्य संबंधित दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह मुख्य प्रश्न उठाया गया है कि यदि लगभग ₹30,000 के अलग-अलग कार्यादेश बार-बार जारी किए जा रहे थे, तो क्या इन कार्यों को नियमानुसार एक समेकित प्रक्रिया के माध्यम से कराकर रोगी कल्याण समिति के धन की बचत नहीं की जा सकती थी? यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इसके पीछे के कारणों की गहन जांच की मांग की गई है, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण जांच का विषय है। दस्तावेज़ों के आधार पर तथ्यों को लगातार सार्वजनिक करने का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस बात पर जोर दिया गया है कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल नियमों के अनुसार और जनहित में ही होना चाहिए। इस मुद्दे पर तथ्यों को सामने लाने के लिए लोगों से पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने और अपनी राय कमेंट में लिखने का आग्रह किया गया है।
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    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बघेलान में रोगी कल्याण समिति द्वारा किए गए खर्चों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिससे समिति की मनमानी पर प्रश्नचिह्न लगा है। लगातार दस्तावेज़ सामने आ रहे हैं, जिसमें हनुमत इंटरप्राइजेज का लगभग ₹30,000 का सीसीटीवी कैमरा से संबंधित बिल (क्रमांक 85) प्रमुख है। इस बिल के साथ-साथ कार्यादेश, क्रेडिट मेमो और अन्य संबंधित दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराए गए हैं।

यह मुख्य प्रश्न उठाया गया है कि यदि लगभग ₹30,000 के अलग-अलग कार्यादेश बार-बार जारी किए जा रहे थे, तो क्या इन कार्यों को नियमानुसार एक समेकित प्रक्रिया के माध्यम से कराकर रोगी कल्याण समिति के धन की बचत नहीं की जा सकती थी? यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इसके पीछे के कारणों की गहन जांच की मांग की गई है, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण जांच का विषय है।

दस्तावेज़ों के आधार पर तथ्यों को लगातार सार्वजनिक करने का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस बात पर जोर दिया गया है कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल नियमों के अनुसार और जनहित में ही होना चाहिए। इस मुद्दे पर तथ्यों को सामने लाने के लिए लोगों से पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने और अपनी राय कमेंट में लिखने का आग्रह किया गया है।
    user_प्रशांत कुमार त्रिपाठी
    प्रशांत कुमार त्रिपाठी
    Lawyer रामपुर बघेलन, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बैकुंठपुर के पास माडव में एक बोलेरो और ऑटो के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
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    बैकुंठपुर के पास माडव में एक बोलेरो और ऑटो के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
    user_पत्रकार विनोद पांडेय
    पत्रकार विनोद पांडेय
    TV News Anchor जावा, रीवा, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • रीवा जिले की रायपुर कर्चुलियान तहसील के ग्राम देवरा फरेंदा में आम रास्ते पर पानी भर जाने से लगभग 200 ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह रास्ता गाँव की मुख्य पहुंच मार्ग है, जिसका उपयोग लगभग 200 लोग अपने दैनिक आवागमन के लिए करते हैं, लेकिन जलभराव के कारण उनका चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद, संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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    रीवा जिले की रायपुर कर्चुलियान तहसील के ग्राम देवरा फरेंदा में आम रास्ते पर पानी भर जाने से लगभग 200 ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह रास्ता गाँव की मुख्य पहुंच मार्ग है, जिसका उपयोग लगभग 200 लोग अपने दैनिक आवागमन के लिए करते हैं, लेकिन जलभराव के कारण उनका चलना-फिरना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद, संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
    user_Ram Singh
    Ram Singh
    रीवा, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बांधा में 'जन चौपाल - आपकी पुलिस आपके द्वार' अभियान के तहत एक जन चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डीएसपी मनोज दीक्षित और थाना प्रभारी निरीक्षक संदीप चतुर्वेदी ने उपस्थित ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। सरपंच सुधाकर शर्मा की मौजूदगी में आयोजित इस पुलिस जन चौपाल में, ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं पुलिस अधिकारियों को बताईं। कार्यक्रम के दौरान डीएसपी मनोज दीक्षित ने साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को जागरूक किया।
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    रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बांधा में 'जन चौपाल - आपकी पुलिस आपके द्वार' अभियान के तहत एक जन चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डीएसपी मनोज दीक्षित और थाना प्रभारी निरीक्षक संदीप चतुर्वेदी ने उपस्थित ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। सरपंच सुधाकर शर्मा की मौजूदगी में आयोजित इस पुलिस जन चौपाल में, ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं पुलिस अधिकारियों को बताईं। कार्यक्रम के दौरान डीएसपी मनोज दीक्षित ने साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को जागरूक किया।
    user_ऋषिकेश त्रिपाठी
    ऋषिकेश त्रिपाठी
    रामपुर बघेलन, सतना, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गौरव राजपूत ने जनता और पुलिस के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक नवाचार 'जन चौपाल' कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य पूरे संभाग में बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करना, जनता की समस्याओं को सुनना और उनके बहुमूल्य सुझावों को प्राप्त करना है। इसी पहल के तहत, आज 'जन चौपाल 3.0' का आयोजन रीवा शहर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में स्थित सोनौरा गांव में किया गया। इस विशेष चौपाल में स्वयं पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत मौजूद रहे, जहाँ उन्होंने निजी तौर पर जनता से अपने विभाग की कमियां सुनीं। आईजी राजपूत ने जनता को आश्वासन दिया कि हर समस्या का निराकरण उनकी व्यक्तिगत निगरानी में कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान, आमजन ने सिटी एसपी राजीव पाठक के कार्यों की प्रशंसा की, जिसके लिए आईजी ने उनकी पीठ भी थपथपाई।
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    रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गौरव राजपूत ने जनता और पुलिस के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से एक नवाचार 'जन चौपाल' कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य पूरे संभाग में बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करना, जनता की समस्याओं को सुनना और उनके बहुमूल्य सुझावों को प्राप्त करना है। इसी पहल के तहत, आज 'जन चौपाल 3.0' का आयोजन रीवा शहर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में स्थित सोनौरा गांव में किया गया।

इस विशेष चौपाल में स्वयं पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत मौजूद रहे, जहाँ उन्होंने निजी तौर पर जनता से अपने विभाग की कमियां सुनीं। आईजी राजपूत ने जनता को आश्वासन दिया कि हर समस्या का निराकरण उनकी व्यक्तिगत निगरानी में कराया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान, आमजन ने सिटी एसपी राजीव पाठक के कार्यों की प्रशंसा की, जिसके लिए आईजी ने उनकी पीठ भी थपथपाई।
    user_JOURNALIST RIPPU PANDEY
    JOURNALIST RIPPU PANDEY
    Court reporter हुजूर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • राष्ट्रीय सवर्ण परिषद सेमरिया के तत्वावधान में रविवार को क्रांतिकारी वीर सपूत स्वर्गीय पंडित भरत भूषण तिवारी की शोक सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सेमरिया में आयोजित हुआ, जिसमें सेमरिया क्षेत्र के सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता, समाजसेवी और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया। सभी उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय तिवारी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि पंडित भरत भूषण तिवारी ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र के हित में समर्पित किया। उनके अन्याय के विरुद्ध बुलंद विचार और क्रांतिकारी आवाज आज भी युवाओं को प्रेरित करती है, और उनके आदर्शों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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    राष्ट्रीय सवर्ण परिषद सेमरिया के तत्वावधान में रविवार को क्रांतिकारी वीर सपूत स्वर्गीय पंडित भरत भूषण तिवारी की शोक सभा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सेमरिया में आयोजित हुआ, जिसमें सेमरिया क्षेत्र के सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता, समाजसेवी और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।

सभी उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय तिवारी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि पंडित भरत भूषण तिवारी ने अपना पूरा जीवन समाज और राष्ट्र के हित में समर्पित किया। उनके अन्याय के विरुद्ध बुलंद विचार और क्रांतिकारी आवाज आज भी युवाओं को प्रेरित करती है, और उनके आदर्शों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
    user_उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    उमेश पाठक सेमरिया रीवा
    सेमरिया, रीवा, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • रीवा जिले के तराई अंचल में हरदोली-डभोरा मुख्य मार्ग पर दोन्दर बगीचा से लेकर बौसड़ नदी तक का लगभग 200 मीटर का हिस्सा पूरी तरह कीचड़ और तालाब में बदल गया है, जिससे 10 गांवों के लोग गंभीर रूप से परेशान हैं। यह मार्ग, जो कभी हरदोली-डभोरा को जोड़ता था, अब जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। स्थिति इतनी बदतर है कि 'विकास के दावे' 'विनाश की हकीकत' में तब्दील हो गए हैं, और यह दुर्दशा किसी पिछड़े जंगल की नहीं, बल्कि एक मुख्य मार्ग की है जहाँ सड़क नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है। इस बदहाली के चलते 10 गांवों के लोग 'नरकीय जीवन' जीने को मजबूर हैं; बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, और मेडिकल इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक गांवों के अंदर नहीं आ पाती। रात-बिरात की आपातकालीन स्थिति में भगवान ही मालिक है, क्योंकि इस रास्ते से वाहन निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 'दो बूंद बारिश' में ही यह हाल है और आने वाले बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है, जिससे 10 गांवों का डभौरा व अन्य बाजारों से संपर्क टूट जाएगा। सड़क पर गाड़ियां ऐसे फिसल रही हैं जैसे बर्फ पर चल रही हों, जिससे हर कदम पर हादसे का डर बना हुआ है। जनता का आरोप है कि स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, सरकार और प्रशासन के आला अधिकारी 'कुंभकर्णी नींद' में सोए हुए हैं और उन्हें जनता के सुख-दुख से कोई मतलब नहीं है। सिरमौर विधायक से इस मामले में बात करने पर उन्होंने सिर्फ 'दिखवाने' की बात कही, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वे किसी 'हादसे का इंतजार' कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका यह भी कहना है कि जिन लोगों ने सड़क रोक रखी है, उनसे भी कोई जनप्रतिनिधि या विधायक अपनी जिम्मेदारी समझकर बात करने की कोशिश नहीं कर रहा है। जनता आक्रोशित है और सवाल उठा रही है कि हर साल करोड़ों का विधायक निधि बजट आखिर कहाँ जाता है और क्या पहली बारिश से निपटने की कोई तैयारी नहीं थी। वे यह भी कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो संपर्क टूटने की जिम्मेदारी भाजपा के विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले भाजपा नेता, विधायक और सांसद की होगी। यह देखना बाकी है कि इस खबर के बाद 'कुंभकर्णी नींद' में सोया प्रशासन, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि जागते हैं या जनता यूँ ही इस 'कीचड़ में पिसती' रहेगी।
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    रीवा जिले के तराई अंचल में हरदोली-डभोरा मुख्य मार्ग पर दोन्दर बगीचा से लेकर बौसड़ नदी तक का लगभग 200 मीटर का हिस्सा पूरी तरह कीचड़ और तालाब में बदल गया है, जिससे 10 गांवों के लोग गंभीर रूप से परेशान हैं। यह मार्ग, जो कभी हरदोली-डभोरा को जोड़ता था, अब जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। स्थिति इतनी बदतर है कि 'विकास के दावे' 'विनाश की हकीकत' में तब्दील हो गए हैं, और यह दुर्दशा किसी पिछड़े जंगल की नहीं, बल्कि एक मुख्य मार्ग की है जहाँ सड़क नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है।

इस बदहाली के चलते 10 गांवों के लोग 'नरकीय जीवन' जीने को मजबूर हैं; बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, और मेडिकल इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक गांवों के अंदर नहीं आ पाती। रात-बिरात की आपातकालीन स्थिति में भगवान ही मालिक है, क्योंकि इस रास्ते से वाहन निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 'दो बूंद बारिश' में ही यह हाल है और आने वाले बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है, जिससे 10 गांवों का डभौरा व अन्य बाजारों से संपर्क टूट जाएगा। सड़क पर गाड़ियां ऐसे फिसल रही हैं जैसे बर्फ पर चल रही हों, जिससे हर कदम पर हादसे का डर बना हुआ है।

जनता का आरोप है कि स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, सरकार और प्रशासन के आला अधिकारी 'कुंभकर्णी नींद' में सोए हुए हैं और उन्हें जनता के सुख-दुख से कोई मतलब नहीं है। सिरमौर विधायक से इस मामले में बात करने पर उन्होंने सिर्फ 'दिखवाने' की बात कही, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वे किसी 'हादसे का इंतजार' कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका यह भी कहना है कि जिन लोगों ने सड़क रोक रखी है, उनसे भी कोई जनप्रतिनिधि या विधायक अपनी जिम्मेदारी समझकर बात करने की कोशिश नहीं कर रहा है। जनता आक्रोशित है और सवाल उठा रही है कि हर साल करोड़ों का विधायक निधि बजट आखिर कहाँ जाता है और क्या पहली बारिश से निपटने की कोई तैयारी नहीं थी। वे यह भी कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो संपर्क टूटने की जिम्मेदारी भाजपा के विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले भाजपा नेता, विधायक और सांसद की होगी।

यह देखना बाकी है कि इस खबर के बाद 'कुंभकर्णी नींद' में सोया प्रशासन, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि जागते हैं या जनता यूँ ही इस 'कीचड़ में पिसती' रहेगी।
    user_रिपोर्टर अजय यादव
    रिपोर्टर अजय यादव
    Local News Reporter सिरमौर, रीवा, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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