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बैकुंठपुर के पास माडव में एक बोलेरो और ऑटो के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
पत्रकार विनोद पांडेय
बैकुंठपुर के पास माडव में एक बोलेरो और ऑटो के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
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- बैकुंठपुर के पास माडव में एक बोलेरो और ऑटो के बीच ज़बरदस्त भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।1
- रीवा जिले की बैकुंठपुर पुलिस ने ग्राम जामू में एक जन चौपाल का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के तहत, थाना प्रभारी श्रृंगेश सिंह राजपूत ने जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें विभिन्न मुद्दों पर जागरूक किया।1
- रीवा जिले की अमाँव ग्राम पंचायत में 'रास्ते के लिए रण' की स्थिति बनी हुई है, जहाँ ग्रामीणों को रास्ते से संबंधित समस्या का निराकरण नहीं मिल पा रहा है।1
- भारतीय थलसेना को अपने 31वें प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ मिल गए हैं, जिन्होंने हाल ही में कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ को सैल्यूट मारकर उनके पैर छुए। उनके छोटे भाई, रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी समारोह में उपस्थित थे और उन्होंने अपने बड़े भाई तथा नए सेना प्रमुख को सलाम कर सम्मान व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि उनके पिता, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ, एक सम्मानित सेना दिग्गज होने के साथ-साथ छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं।1
- जनपद पंचायत गंगेव के अध्यक्ष विकास तिवारी ने भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को समर्पित एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया है। उन्होंने घोषणा की कि क्षेत्र में 11 अटल जल सरोवरों का निर्माण, संरक्षण और सौंदर्यीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसके साथ ही, जल संरक्षण से जुड़े जल गंगा संवर्धन अभियान को भी पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है। विकास तिवारी ने जोर देकर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना केवल विकास तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की सोच भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल थी। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए, जनपद पंचायत गंगेव जल संरक्षण के क्षेत्र में ठोस और स्थायी कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि चिन्हित सरोवरों के विकास, साफ-सफाई, गहरीकरण, जल संचयन और आसपास हरित वातावरण विकसित करने के लिए एक चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, प्रशासन और आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह केवल एक सरकारी योजना न रहकर जनभागीदारी का एक व्यापक अभियान बन सके। जनपद पंचायत अध्यक्ष ने क्षेत्रवासियों से भी अपील की है कि वे जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने में अपना सहयोग दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से गंगेव क्षेत्र जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा और अटल जी के सुशासन, विकास तथा प्रकृति संरक्षण के विचारों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।1
- चित्रकूट में उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सीमा पर ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार बरौधा ने एक ओवरलोड ट्रक को पकड़ा था और उसे थाना माझगवां ले जाने का निर्देश दिया था। सुरक्षा कारणों से ट्रक में दो चौकीदारों को भी बैठाया गया था। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने वाहन को उत्तर प्रदेश क्षेत्र में स्थित गौतम पेट्रोल पंप पर खड़ा कर दिया और मौके से फरार हो गया। इसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों को ट्रक को आगे ले जाने में खासी परेशानी हुई। आरोप है कि इस दौरान गौतम पेट्रोल पंप के संचालक ने अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोन से नायब तहसीलदार से बात की और कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में कहा कि "मेरे पेट्रोल पंप से गाड़ी नहीं हटनी चाहिए, नहीं तो अच्छा नहीं होगा। यह उत्तर प्रदेश है।" स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई के समय ओवरलोड वाहन अक्सर इसी पेट्रोल पंप पर खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे कार्रवाई में बाधा उत्पन्न होती है। कुछ लोगों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं से अवैध बालू परिवहन को संरक्षण मिलने की आशंका है।1
- रीवा जिले के पनवार थाना क्षेत्र में पुलिस अधीक्षक के निर्देशन पर नशे के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इस कार्रवाई के तहत, पनवार थाना प्रभारी प्रवीण उपाध्याय ने सलैया गांव के जोरी टोला से भारी मात्रा में 87 किलोग्राम गांजा जब्त किया। पनवार पुलिस द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।1
- रीवा जिले के तराई अंचल में हरदोली-डभोरा मुख्य मार्ग पर दोन्दर बगीचा से लेकर बौसड़ नदी तक का लगभग 200 मीटर का हिस्सा पूरी तरह कीचड़ और तालाब में बदल गया है, जिससे 10 गांवों के लोग गंभीर रूप से परेशान हैं। यह मार्ग, जो कभी हरदोली-डभोरा को जोड़ता था, अब जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। स्थिति इतनी बदतर है कि 'विकास के दावे' 'विनाश की हकीकत' में तब्दील हो गए हैं, और यह दुर्दशा किसी पिछड़े जंगल की नहीं, बल्कि एक मुख्य मार्ग की है जहाँ सड़क नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है। इस बदहाली के चलते 10 गांवों के लोग 'नरकीय जीवन' जीने को मजबूर हैं; बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, और मेडिकल इमरजेंसी में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक गांवों के अंदर नहीं आ पाती। रात-बिरात की आपातकालीन स्थिति में भगवान ही मालिक है, क्योंकि इस रास्ते से वाहन निकालना बेहद मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 'दो बूंद बारिश' में ही यह हाल है और आने वाले बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब होने की आशंका है, जिससे 10 गांवों का डभौरा व अन्य बाजारों से संपर्क टूट जाएगा। सड़क पर गाड़ियां ऐसे फिसल रही हैं जैसे बर्फ पर चल रही हों, जिससे हर कदम पर हादसे का डर बना हुआ है। जनता का आरोप है कि स्थानीय विधायक, जनप्रतिनिधि, सरकार और प्रशासन के आला अधिकारी 'कुंभकर्णी नींद' में सोए हुए हैं और उन्हें जनता के सुख-दुख से कोई मतलब नहीं है। सिरमौर विधायक से इस मामले में बात करने पर उन्होंने सिर्फ 'दिखवाने' की बात कही, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वे किसी 'हादसे का इंतजार' कर रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका यह भी कहना है कि जिन लोगों ने सड़क रोक रखी है, उनसे भी कोई जनप्रतिनिधि या विधायक अपनी जिम्मेदारी समझकर बात करने की कोशिश नहीं कर रहा है। जनता आक्रोशित है और सवाल उठा रही है कि हर साल करोड़ों का विधायक निधि बजट आखिर कहाँ जाता है और क्या पहली बारिश से निपटने की कोई तैयारी नहीं थी। वे यह भी कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो संपर्क टूटने की जिम्मेदारी भाजपा के विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले भाजपा नेता, विधायक और सांसद की होगी। यह देखना बाकी है कि इस खबर के बाद 'कुंभकर्णी नींद' में सोया प्रशासन, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि जागते हैं या जनता यूँ ही इस 'कीचड़ में पिसती' रहेगी।1