मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड में एक करोड़ 65 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी को लेकर बड़ा वित्तीय विवाद खड़ा हो गया है। प्रखंड प्रमुख अब्दुल जब्बार ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, लेखापाल और नाजीर पर मिलीभगत से यह राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। इस पूरे मामले पर चर्चा के लिए प्रखंड मुख्यालय में पंचायत समिति सदस्यों की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कुल 19 सदस्यों ने भाग लिया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। पुराने सभा भवन में हुई इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख अब्दुल जब्बार ने दावा किया कि उनकी अनुमति और जानकारी के बिना विभिन्न मदों से करोड़ों रुपये निकाल लिए गए। उन्होंने बताया कि जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्हें बताया गया कि सभी खर्चों का हिसाब-किताब उपलब्ध है। इसके बाद सच्चाई जानने के लिए विशेष बैठक आयोजित की गई, लेकिन इसमें बीडीओ, लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर अनुपस्थित रहे। प्रमुख ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर का कार्य देख रहे रंजन झा द्वारा प्रस्तुत किया गया एक बैंक स्टेटमेंट जांच में फर्जी पाया गया। उनके अनुसार, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और प्रस्तुत स्टेटमेंट में बड़ा अंतर मिला, जबकि बैंक से मिली जानकारी से पता चला कि संबंधित खातों में किसी भी मद की राशि शेष नहीं है। अब्दुल जब्बार ने यह भी आरोप लगाया कि डोंगल अपडेट कराने के बहाने कई बार ओटीपी प्राप्त किए गए और इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके खातों से राशि निकाली गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो पंचायत प्रतिनिधि सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में उपस्थित पंचायत समिति सदस्यों ने भी प्रमुख की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारी राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, और यदि अनियमितता हुई है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कृष्णन ने प्रखंड प्रमुख के सभी आरोपों को सिरे से निराधार और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड प्रमुख बिना माप पुस्तिका (एमबी) के ही भुगतान कराने का दबाव बना रहे थे। बीडीओ का कहना है कि सरकारी नियमों के तहत बिना एमबी के किसी भी योजना का भुगतान संभव नहीं है, और जब नियमानुसार भुगतान नहीं किया गया, तभी उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल, यह मामला आरोप-प्रत्यारोप का दौर बन चुका है, जिसमें दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। सभी की निगाहें अब संभावित जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि करोड़ों रुपये की इस निकासी में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है या यह केवल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच का विवाद है। इस आरोप ने मुरलीगंज की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई बहस छेड़ दी है।
मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड में एक करोड़ 65 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी को लेकर बड़ा वित्तीय विवाद खड़ा हो गया है। प्रखंड प्रमुख अब्दुल जब्बार ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, लेखापाल और नाजीर पर मिलीभगत से यह राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। इस पूरे मामले पर चर्चा के लिए प्रखंड मुख्यालय में पंचायत समिति सदस्यों की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी, जिसमें कुल 19 सदस्यों ने भाग लिया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। पुराने सभा भवन में हुई इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रमुख अब्दुल जब्बार ने दावा किया कि उनकी अनुमति और जानकारी के बिना विभिन्न मदों से करोड़ों रुपये निकाल लिए
गए। उन्होंने बताया कि जब प्रखंड विकास पदाधिकारी से इस संबंध में जानकारी मांगी गई तो उन्हें बताया गया कि सभी खर्चों का हिसाब-किताब उपलब्ध है। इसके बाद सच्चाई जानने के लिए विशेष बैठक आयोजित की गई, लेकिन इसमें बीडीओ, लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर अनुपस्थित रहे। प्रमुख ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान लेखापाल, अकाउंटेंट और नाजीर का कार्य देख रहे रंजन झा द्वारा प्रस्तुत किया गया एक बैंक स्टेटमेंट जांच में फर्जी पाया गया। उनके अनुसार, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और प्रस्तुत स्टेटमेंट में बड़ा अंतर मिला, जबकि बैंक से मिली जानकारी से पता चला कि संबंधित खातों में किसी भी मद की राशि शेष नहीं है। अब्दुल जब्बार ने यह भी आरोप लगाया
कि डोंगल अपडेट कराने के बहाने कई बार ओटीपी प्राप्त किए गए और इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके खातों से राशि निकाली गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो पंचायत प्रतिनिधि सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में उपस्थित पंचायत समिति सदस्यों ने भी प्रमुख की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारी राशि जनता के विकास कार्यों के लिए होती है, और यदि अनियमितता हुई है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, दूसरी ओर प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कृष्णन ने प्रखंड प्रमुख के सभी आरोपों को सिरे से निराधार और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड प्रमुख
बिना माप पुस्तिका (एमबी) के ही भुगतान कराने का दबाव बना रहे थे। बीडीओ का कहना है कि सरकारी नियमों के तहत बिना एमबी के किसी भी योजना का भुगतान संभव नहीं है, और जब नियमानुसार भुगतान नहीं किया गया, तभी उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल, यह मामला आरोप-प्रत्यारोप का दौर बन चुका है, जिसमें दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। सभी की निगाहें अब संभावित जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि करोड़ों रुपये की इस निकासी में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है या यह केवल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच का विवाद है। इस आरोप ने मुरलीगंज की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई बहस छेड़ दी है।
- स्थानीय निवासियों के अनुसार, एक शौचालय का निर्माण हुए पाँच साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसमें दरवाजा नहीं लगाया गया है। इस कारण यहाँ के स्थानीय लोगों ने शौचालय पर कब्जा कर लिया है और इसमें अपना-अपना सामान रखते हैं।1
- मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना क्षेत्र में एक महिला की गोली मारकर ह*त्या कर दी गई। यह वारदात तब हुई जब महिला अपने बेटे के साथ घर लौट रही थी। इस घटना में 65 वर्षीय जेरून खातून को सिर में गो*ली लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौ*त हो गई। मामले की जांच के लिए एफएसएल टीम जुट गई है।1
- मधेपुरा जिले के बिहारीगंज थाना क्षेत्र के हथिऔंधा गांव निवासी एक 25 वर्षीय युवक की जियो फाइबर का कार्य करने के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई। मृतक की पहचान उमेश रजक के पुत्र छोटेलाल कुमार के रूप में हुई है। यह दुखद खबर गांव पहुँचते ही पूरे परिवार और आसपास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों के अनुसार, छोटेलाल कुमार पिछले लगभग नौ महीने से जियो कंपनी में सहायक प्वाइंटमैन के पद पर कार्यरत थे। बीते 4 जून को मुरलीगंज थाना क्षेत्र के डुमरिया कोल्हायपट्टी गांव में जियो फाइबर से जुड़ा कार्य करते समय एक घर की छत से फाइबर केबल उतारते वक्त उनका संतुलन बिगड़ गया, जिससे वे ऊँचाई से नीचे गिर पड़े और उन्हें गंभीर चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद, स्थानीय लोगों और परिजनों की सहायता से घायल युवक को मुरलीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मधेपुरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। जब वहाँ भी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना स्थित पीएमसीएच भेजा गया, जहाँ कई दिनों तक चले उपचार के बाद 8 जून को उनकी मौत हो गई। मंगलवार को जब युवक का शव गांव पहुँचा, तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। छोटेलाल अपने परिवार में तीन भाइयों और एक बहन के साथ रहते थे, और परिजनों ने बताया कि वह परिवार के प्रमुख कमाऊ सदस्य थे, जिनकी आय से ही घर का खर्च चलता था। उनके पिता मजदूरी करके किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इस घटना के बाद, परिजनों ने जियो कंपनी से उचित मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी प्रदान करने और मृतक के माता-पिता को आजीवन पेंशन देने की मांग की है। परिजनों ने यह भी जानकारी दी कि शव का पोस्टमार्टम पीएमसीएच में कराया गया है। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में थाना में कोई आवेदन नहीं दिया गया था।4
- मधेपुरा के मंडल कारा में बंद एक विचाराधीन कैदी दीपक कुमार (27) की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद हड़कंप मच गया। मृतक, जो नगर परिषद क्षेत्र के भीरखी वार्ड-24 निवासी रंजन पासवान के पुत्र थे, की मौत के बाद उनके परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदर अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि जेल के अंदर दीपक के साथ मारपीट की गई थी, और जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई, बल्कि मौत के बाद ही जानकारी दी गई। दीपक कुमार ने 2 जून को एक मामले में न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था और पिछले सात दिनों से न्यायिक हिरासत में मंडल कारा में बंद थे। उनकी तबीयत सोमवार रात बिगड़ने पर उन्हें जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाए जाने पर परिजन आक्रोशित हो उठे और जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार, सिंहेश्वर थानाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह सहित कई पुलिस अधिकारियों को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि, जेल प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जेल अधीक्षक राजेश कुमार राय ने बताया कि दीपक ने सोमवार को पेट दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद जेल चिकित्सक ने उनका उपचार किया। देर रात दर्द बढ़ने पर उन्हें तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु हो गई। जेल अधीक्षक ने जेल में मारपीट के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। फिलहाल, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।1
- रौशन आनंद सर के मामा ने पहली बार हमारे कैमरे के सामने एक बड़ा खुलासा किया है। इस विशेष बातचीत में, उन्होंने खान सर से जुड़े विवाद से लेकर रौशन आनंद सर की पढ़ाई-लिखाई तक के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी है।1
- कुमारखंड ब्लॉक परिसर में महंगाई के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में राजद कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, जिसमें नरेंद्र मोदी का पुतला भी दहन किया गया।1
- P S न्यूज़ यह आने वाले भविष्य बच्चों के लिए है. PS news ko like kijiye follow kijiye comment kijiye share kijiye अभी पूरा ऊपर तक छूट चल रहा है इसीलिए बिहार में इतना ज्यादा स्मैक गंज कोरेक्स बिक रहा है PS news ko follow kijiye like kijiye share kijiye2
- मधेपुरा जेल में एक विचाराधीन कैदी दीपक कुमार की मौत हो गई है। मृतक के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दीपक की मौत जेल के अंदर मारपीट के कारण हुई है, जिसके बाद सदर अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ। जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार को सात दिन पहले न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हालांकि, जेल प्रशासन ने परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।1