दरभंगा के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत आनंदपुर सहोड़ा पंचायत भवन कार्यालय में शनिवार को एक विदाई-सह-स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पंचायत में कार्यरत कार्यपालक सहायक दीपक कुमार एवं लेखापाल अनुराधा कुमारी के स्थानांतरण होने पर उन्हें विदाई दी गई। वहीं, पंचायत में नवनियुक्त कार्यपालक सहायक वरुण कुमार एवं लेखापाल सीमा कुमारी का भी स्वागत किया गया। समारोह में सभी कर्मचारियों को मिथिला की पारंपरिक पाग एवं चादर भेंट कर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर सहोड़ा पंचायत के मुखिया कृष्णकांत चौधरी 'रमन' ने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले व्यक्ति को लोगों का आशीर्वाद और सम्मान स्वतः ही प्राप्त होता है। उन्होंने कार्यपालक सहायक दीपक कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग तीन वर्षों तक पंचायत में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य किया, जिसके दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली। इसके साथ ही, उन्होंने लेखापाल अनुराधा कुमारी के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सभी दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और हर कार्य को समय पर पूरा किया। मुखिया ने भावुक होते हुए कहा कि दोनों कर्मचारियों के स्थानांतरण की खबर से पूरा पंचायत परिवार भावुक हो गया है। उन्होंने स्थानांतरित होकर जा रहे कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं और नवनियुक्त कर्मचारियों का स्वागत करते हुए उनसे भी पंचायत के विकास तथा जनसेवा में पूरी निष्ठा से काम करने की उम्मीद जताई।
दरभंगा के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत आनंदपुर सहोड़ा पंचायत भवन कार्यालय में शनिवार को एक विदाई-सह-स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पंचायत में कार्यरत कार्यपालक सहायक दीपक कुमार एवं लेखापाल अनुराधा कुमारी के स्थानांतरण होने पर उन्हें विदाई दी गई। वहीं, पंचायत में नवनियुक्त कार्यपालक सहायक वरुण कुमार एवं लेखापाल सीमा कुमारी का भी स्वागत किया गया। समारोह में सभी कर्मचारियों को मिथिला की पारंपरिक पाग एवं चादर भेंट कर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर सहोड़ा पंचायत के मुखिया कृष्णकांत चौधरी 'रमन' ने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले व्यक्ति को लोगों का आशीर्वाद और सम्मान स्वतः ही प्राप्त होता है। उन्होंने कार्यपालक सहायक दीपक कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग तीन वर्षों तक पंचायत में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य किया, जिसके दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली। इसके साथ ही, उन्होंने लेखापाल अनुराधा कुमारी के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सभी दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और हर कार्य को समय पर पूरा किया। मुखिया ने भावुक होते हुए कहा कि दोनों कर्मचारियों के स्थानांतरण की खबर से पूरा पंचायत परिवार भावुक हो गया है। उन्होंने स्थानांतरित होकर जा रहे कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं और नवनियुक्त कर्मचारियों का स्वागत करते हुए उनसे भी पंचायत के विकास तथा जनसेवा में पूरी निष्ठा से काम करने की उम्मीद जताई।
- दरभंगा के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत आनंदपुर सहोड़ा पंचायत भवन कार्यालय में शनिवार को एक विदाई-सह-स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पंचायत में कार्यरत कार्यपालक सहायक दीपक कुमार एवं लेखापाल अनुराधा कुमारी के स्थानांतरण होने पर उन्हें विदाई दी गई। वहीं, पंचायत में नवनियुक्त कार्यपालक सहायक वरुण कुमार एवं लेखापाल सीमा कुमारी का भी स्वागत किया गया। समारोह में सभी कर्मचारियों को मिथिला की पारंपरिक पाग एवं चादर भेंट कर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर सहोड़ा पंचायत के मुखिया कृष्णकांत चौधरी 'रमन' ने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले व्यक्ति को लोगों का आशीर्वाद और सम्मान स्वतः ही प्राप्त होता है। उन्होंने कार्यपालक सहायक दीपक कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग तीन वर्षों तक पंचायत में पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य किया, जिसके दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली। इसके साथ ही, उन्होंने लेखापाल अनुराधा कुमारी के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सभी दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और हर कार्य को समय पर पूरा किया। मुखिया ने भावुक होते हुए कहा कि दोनों कर्मचारियों के स्थानांतरण की खबर से पूरा पंचायत परिवार भावुक हो गया है। उन्होंने स्थानांतरित होकर जा रहे कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं और नवनियुक्त कर्मचारियों का स्वागत करते हुए उनसे भी पंचायत के विकास तथा जनसेवा में पूरी निष्ठा से काम करने की उम्मीद जताई।1
- बिहार के समस्तीपुर जिले के मथुरापुर घाट से एक वीडियो सामने आया है, जिसे 'हमारा समाचार' और 'अजय व्लॉग' (Ajay Vlog) द्वारा 11 जुलाई 2026 को बनाया गया है। इस वीडियो में मथुरापुर घाट पर हो रही बारिश और राजबाला के काम करने के दृश्यों को दर्शाया गया है।1
- बिहार के दरभंगा जिले के गोरा बौराम स्थित मथुर पंचायत का मुखिया भ्रष्टाचारी है। यहाँ विकास के मुद्दे पर आवाज उठाने पर लोगों के साथ मारपीट की जाती है और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है।4
- दरभंगा जिला परिषद में विकास योजनाओं में मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई निर्वाचित सदस्यों ने शनिवार को परिषद परिसर में ही महाधरना शुरू कर दिया है, जिससे इलाके में भारी सियासी हलचल मच गई है। इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा ने जिला परिषद अध्यक्ष के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। धर्मेंद्र झा का गंभीर आरोप है कि जिले में विकास कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है, जिसके तहत 15वें और 16वें वित्त आयोग की योजनाएं पोर्टल पर लंबित पड़ी हैं। इसके अलावा, 148 स्वीकृत योजनाओं का कार्यादेश अब तक जारी नहीं किया गया है, जिसके चलते मजदूरों और सप्लायर्स का लाखों रुपये का भुगतान महीनों से अटका हुआ है। मामले में बेहद चौंकाने वाली चेतावनी देते हुए धर्मेंद्र कुमार झा ने भावुक होकर कहा कि यदि जिला परिषद में कमीशनखोरी, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर हो जाएंगे। इस महाधरना को जिला परिषद उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी, लाल कुमार सिंह और मोहम्मद हकीकूल जैसे कई दिग्गज सदस्यों का खुला समर्थन मिला है। इन जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी 10 सूत्री मांगों पर जल्द ही कड़ा फैसला नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप अख्तियार करेगा। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।1
- समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मौलानाचक और सरसौना गांव में शनिवार को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) द्वारा सदस्यता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व भाकपा (माले) के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह और खेग्रामस के प्रखंड अध्यक्ष प्रभात रंजन गुप्ता ने किया। इस दौरान कुल 45 लोगों ने खेग्रामस की सदस्यता ग्रहण की।1
- बिहार के दरभंगा जिले के बहादुरपुर क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है, जहां स्थानीय मंत्री जी के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों से जमा पानी अब जल प्रलय का रूप ले चुका है। इस भीषण जल जमाव की समस्या के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और पिछले 6 दिनों से लगातार अनशन जारी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय लोग अपने-अपने घरों को खाली कर मोहल्ला छोड़कर जाने के लिए पूरी तरह से विवश हो गए हैं।1
- संदीप विश्वविद्यालय ने 14 जुलाई को अपने चेयरमैन डॉ. संदीप नारायण झा के जन्मदिवस के अवसर पर बड़े सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि इस बार जन्मदिवस को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित न रखकर समाज सेवा के रूप में मनाया जाएगा। कुलपति डॉ. अरुण द्विवेदी ने बताया कि संदीप विश्वविद्यालय बिहार का पहला NAAC मान्यता प्राप्त निजी विश्वविद्यालय है और संस्थान शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्व निभाने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छात्रों और शिक्षकों को समाज सेवा से जोड़ना ही इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुनील झा के अनुसार, 14 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर में 100 यूनिट रक्तदान का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए आयाची नगर युवा संगठन के सहयोग से रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। इसके साथ ही, एक निःशुल्क दंत जांच शिविर भी आयोजित होगा जिसमें डॉ. राम रतन एवं उनकी टीम लोगों के दांतों और मसूड़ों की जांच करेगी। नेत्र जांच शिविर में जयनगर आई हॉस्पिटल के चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे, जबकि जनरल हेल्थ चेकअप के लिए महौली क्लिनिक के डॉ. नवनीत कुमार और डॉ. अविशेष कुमार मरीजों की जांच करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराना और बीमारी की शुरुआती पहचान कराना ही इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। प्रशासन ने लोगों से इस रक्तदान और स्वास्थ्य शिविर में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है।1
- बिहार के दरभंगा अंतर्गत लहेरियासराय चट्टी (सिग्नल के पास) से एक बेहद हैरान और परेशान करने वाला नजारा सामने आया है, जहां भारी जाम के बीच खड़े एक व्यक्ति को इतनी तेज पेशाब लगी कि वह बर्दाश्त नहीं कर पाया। मजबूर होकर उसे बीच सड़क पर ही अपनी गाड़ी खड़ी करनी पड़ी और राहगीरों के सामने ही किनारे पर हल्का होना पड़ा। यह घटना शहर की उस गंभीर समस्या को उजागर करती है जिस पर अमूमन लोग बात करने से कतराते हैं, लेकिन यह प्रशासनिक नाकामी से पैदा हुई एक बड़ी मजबूरी बन चुकी है। लाखों की आबादी और रोजाना हजारों राहगीरों की आवाजाही वाले इस मुख्य और व्यस्त मार्ग पर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न ही नगर निगम के अधिकारियों का। शहर में सड़कों को चौड़ा करने और स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी जरूरतें आज भी गायब हैं। पुरुषों को तो मजबूरी में शर्म छोड़कर सड़क किनारे जाना पड़ता है, लेकिन ऐसी स्थिति में महिलाओं को जिस असहनीय पीड़ा और परेशानी से गुजरना पड़ता है उसकी कल्पना भी डरावनी है। स्थानीय जनता इस जमीनी हकीकत को सिस्टम के मुंह पर एक बड़ा तमाचा मान रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द यहां सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराने की मांग कर रही है।1