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धनबाद में एथलेटिक मीट का आयोजन, लोहरदगा के 17 बच्चे लेंगे हिस्सा बच्चों का दावा पहले भी जीते हैं मेडल, इस बार भी जीतेंगे!..
Badri Narayan Sahu
धनबाद में एथलेटिक मीट का आयोजन, लोहरदगा के 17 बच्चे लेंगे हिस्सा बच्चों का दावा पहले भी जीते हैं मेडल, इस बार भी जीतेंगे!..
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- विश्व का अजूबा रोड लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड में है आईये ना विधायक जी साथ में नहाते हैं विश्व का अजूबा रोड लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड में है आईये ना विधायक जी साथ में नहाते हैं1
- बिशुनपुर विधानसभा के पूर्व विधायक का निधन,नम आंखों से पार्टी कार्यकर्ता व स्थानीय लोगो ने दिया विदाई भाजपा पूर्व विधायक पार्थिव शरीर को पंच तत्व में हुआ विलय गुरुवार को लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड अंतर्गत उनके पैतृक गांव अरु में कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय ग्रामीणों के साथ क्षेत्र वासियो ने नम आंखों से अंतिम विदाई दिया। इस दौरान उनके कार्यकाल एवं पार्टी के कर्तव्य के साथ समाज उत्थान में लगतार प्रयासरत रहने के कारण आज लोगो को उनकी कमी खल रही है। लोगो ने कहा ज्ञानरूपी उनकी बातें सभी के दिलो में हमेशा कायम रहेगा।1
- आइए जानते हैं, भारी बारिश से कृषि क्षेत्र और किसानों को कितना लाभ हुआ.... लातेहार में पिछले दो दिनों से हुई भारी बारिश से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं कृषि क्षेत्र में किसानों को इसका अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है। जिला कृषि पदाधिकारी नेहा निश्चल ने बताया कि बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है, जिससे खरीफ फसलों को फायदा होगा और किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च में भी राहत मिल सकती है।1
- सिसई : अनाथ अमर की पढ़ाई का सहारा बने सिसई के पत्रकार दस्तावेजों के अभाव में अटकी थी पढ़ाई, पत्रकारों ने कराया छठी में दाखिला ; ड्रेस, जूता, बैग, कॉपी -पेन और राशन देकर बढ़ाया मदद का हाथ सिसई प्रखंड के भदौली पंचायत स्थित सकरौली उरांव टोली से इंसानियत और सामाजिक सरोकार की तस्वीर सामने आई है। आर्थिक तंगी और दस्तावेजों के अभाव में शिक्षा से वंचित होने की कगार पर पहुंचे 10 वर्षीय अनाथ अमर बिरहोर की मदद के लिए सिसई के पत्रकार आगे आए। अमर के माता-पिता का निधन तब हो गया था, जब वह महज एक वर्ष का था। इसके बाद उसकी वृद्ध नानी निरासो मलारिन ही उसका पालन-पोषण कर रही हैं। परिवार में कई बच्चे हैं और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। नानी के नाम पर केवल हरा राशन कार्ड है, जिससे हर माह महज पांच किलो अनाज मिलता है। इसी के सहारे परिवार का गुजर-बसर मुश्किल से हो रहा है। मुसीबत यहीं खत्म नहीं हुई। बरसात में परिवार का कच्चा घर भी ढह गया। अब नानी किसी तरह छपरी बनाकर बच्चों के साथ रहने को मजबूर हैं। सरकारी आवास योजना का लाभ भी अब तक नहीं मिल सका है। दूसरी ओर, दस्तावेजों के अभाव में अमर का नाम राशन कार्ड में नहीं जुड़ पाया और आधार कार्ड भी नहीं बन सका। इसी वजह से उसकी पढ़ाई और स्कूल में दाखिले का रास्ता भी लगभग बंद हो गया था। मामले की जानकारी पत्रकार सह भदौली पंचायत के पंचायत स्तरीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के नामित अध्यक्ष कृष्णा कुमार साहू, पत्रकार शम्भु चौहान, मदन साहू और आनंद साहू को मिली। इसके बाद पत्रकारों ने पहल करते हुए गांव के माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक से संपर्क किया और अमर का छठी कक्षा में दाखिला कराया। अमर के चेहरे पर तब मुस्कान आई, जब उसे पढ़ाई के लिए ड्रेस, जूता, बैग, कॉपी, पेन, स्टोमेन बॉक्स और छाता समेत जरूरी सामग्री सौंपी गई। पत्रकारों ने अमर और उसकी नानी को राशन सामग्री भी उपलब्ध कराई। इस दौरान प्रवीण कुमार, रत्ना कुमारी, संदीप गोप, बजरंग बड़ाईक, बजरंग साहू समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे। अमर की नानी निरासो मलारिन ने प्रशासन से पीला राशन कार्ड बनाने, सभी बच्चों का नाम राशन कार्ड में जोड़ने और परिवार को आवास योजना का लाभ देने की मांग की है। पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ खबर दिखाने और लिखने तक सीमित नहीं है। समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों की आवाज बनना भी पत्रकारिता की जिम्मेदारी है। आर्थिक तंगी या दस्तावेजों की कमी के कारण किसी बच्चे की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। अमर की मदद की यह पहल अब सिर्फ एक बच्चे के दाखिले की कहानी नहीं, बल्कि समाज से यह सवाल भी पूछ रही है—क्या किसी बच्चे का भविष्य गरीबी और दस्तावेजों की कमी के कारण अंधेरे में छोड़ दिया जाए?4
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