तालाब में डूबने से वृद्ध की मौत, 24 घंटे बाद भी नहीं मिला तालाब से शव रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत रेंगाई पंचायत के काठो गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां तालाब में नहाने के दौरान एक वृद्ध की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दुर्गा मांझी (उम्र लगभग 60 वर्ष) के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे दुर्गा मांझी गांव के कुछ लोगों के साथ तालाब में नहाने गए थे। इसी दौरान तैरते समय अचानक वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। साथ में नहा रहे लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वे पूरी तरह पानी में समा चुके थे। घटना के बाद से ही ग्रामीणों द्वारा शव की खोजबीन जारी है, लेकिन तालाब अधिक गहरा होने के कारण करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि शव तालाब के अंदर ही है इसे लेकर ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शव को बाहर निकालने के लिए गोताखोरों की मदद लेने की मांग की है।
तालाब में डूबने से वृद्ध की मौत, 24 घंटे बाद भी नहीं मिला तालाब से शव रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत रेंगाई पंचायत के काठो गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां तालाब में नहाने के दौरान एक वृद्ध की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दुर्गा मांझी (उम्र लगभग 60 वर्ष) के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे दुर्गा मांझी गांव के कुछ लोगों के साथ तालाब में नहाने गए थे। इसी दौरान तैरते समय अचानक वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। साथ में नहा
रहे लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वे पूरी तरह पानी में समा चुके थे। घटना के बाद से ही ग्रामीणों द्वारा शव की खोजबीन जारी है, लेकिन तालाब अधिक गहरा होने के कारण करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि शव तालाब के अंदर ही है इसे लेकर ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शव को बाहर निकालने के लिए गोताखोरों की मदद लेने की मांग की है।
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत रेंगाई पंचायत के काठो गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां तालाब में नहाने के दौरान एक वृद्ध की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दुर्गा मांझी (उम्र लगभग 60 वर्ष) के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे दुर्गा मांझी गांव के कुछ लोगों के साथ तालाब में नहाने गए थे। इसी दौरान तैरते समय अचानक वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। साथ में नहा रहे लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वे पूरी तरह पानी में समा चुके थे। घटना के बाद से ही ग्रामीणों द्वारा शव की खोजबीन जारी है, लेकिन तालाब अधिक गहरा होने के कारण करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि शव तालाब के अंदर ही है इसे लेकर ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शव को बाहर निकालने के लिए गोताखोरों की मदद लेने की मांग की है।2
- गुमला: आज गुरुवार को गुमला स्थित नर्सिंग कौशल कॉलेज में आयोजित लैंप लाइटिंग एवं ओथ टेकिंग समारोह में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो एवं सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि नर्सिंग पेशा सेवा, समर्पण एवं संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने छात्राओं को निष्ठा एवं मानवीय मूल्यों के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल कौशल विकास का केंद्र है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम भी है। ज्ञात हो कि इस संस्थान की स्थापना राज्य सरकार के प्रयासों से की गई थी, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार से जोड़ना है। विगत वर्षों में यहां से प्रशिक्षित लगभग 500 छात्राओं को रोजगार प्राप्त हुआ है, जबकि कुछ छात्राओं का चयन विदेशों में भी हुआ है। कॉलेज में नर्सिंग प्रशिक्षण के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता एवं जीवन कौशल से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसमें प्रथम वर्ष संस्थान में प्रशिक्षण एवं द्वितीय वर्ष ऑन जॉब ट्रेनिंग शामिल है। कार्यक्रम में संबंधित पदाधिकारी, संस्थान के प्रतिनिधि एवं छात्राएं उपस्थित थीं।2
- चैनपुर: पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे चैनपुर के निवासियों को आज प्रकृति ने दोहरी सौगात दी। अचानक बदले मौसम के मिजाज से जहाँ एक तरफ लोगों को तपती धूप से निजात मिली, वहीं दूसरी ओर आसमान से गिरे ओलों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।1
- *शिक्षक का स्नेह ही वह चाबी है, जो बच्चे के भीतर छिपी प्रतिभा का द्वार खोलती है -विजय बहादुर सिंह।* बालकों के सर्वांगीण विकास और उन्हें संस्कारयुक्त शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, गुमला में दो दिवसीय संकुल स्तरीय शिशु वाटिका कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में गुमला संकुल के विभिन्न विद्यालयों— भरनो, कैम्बा टेंगेरिया, आदर, मुर्गो और सिसई की वाटिका दीदी उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रामकिशोर रजक, सचिव विजय बहादुर सिंह, पूर्व विभाग शिशु वाटिका प्रमुख पूनम सारंगी, प्राचार्य जितेन्द्र तिवारी एवं कार्यक्रम प्रमुख अर्चना मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। प्राचार्य जितेन्द्र तिवारी ने कार्यशाला की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि शिशु वाटिका का मूल आधार शिशुओं में पंचकोष का विकास करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, यदि हम बच्चों में शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास के 12 क्रियाकलापों को सही ढंग से लागू करें, तो हम एक श्रेष्ठ और आदर्श नागरिक की नींव रख सकते हैं। *शारीरिक, मानसिक विकास आध्यात्मिक विकास का संतुलन ही एक आदर्श नागरिक की नींव है जितेंद्र तिवारी।* वहीं, विशेषज्ञ पूनम सारंगी ने शिशु वाटिका की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं की बारीकियों और उनकी उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने अपील की कि वह बालकों को मां तथा दादी बनकर शिक्षा दें। विद्यालय के सचिव विजय बहादुर सिंह ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिशु उस कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें जैसा रूप दिया जाए वे वैसे ही बन जाते हैं। उन्होंने उपस्थित सभी दीदी जी से आह्वान करते हुए कहा कि हमारी शिशु वाटिका केवल एक पाठशाला नहीं बल्कि वह संस्कारशाला है जहाँ खेल-खेल में बच्चों के व्यक्तित्व को निखारा जाता है। हमें ऐसी शिक्षा पद्धति पर काम करना है जहाँ बच्चा विद्यालय आने के लिए डरे नहीं, बल्कि उत्साहित रहे। एक शिक्षिका का स्नेह ही बच्चे की छिपी प्रतिभा को उजागर कर सकता है। दो दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रशिक्षण के साथ-साथ कई रचनात्मक गतिविधियाँ भी आकर्षण का केंद्र होने वाली है वाटिका के नन्हे शिशुओं द्वारा बनाई गई सुंदर कलाकृतियों का प्रदर्शन। रंगमंच एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों और दीदी जी द्वारा विभिन्न रचनात्मक प्रस्तुतियाँ। शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए खेलों का अभ्यास। इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक और पारंपरिक शिक्षा पद्धति के समन्वय का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी वैश्विक स्तर की गुणवत्तापूर्ण और सुसंस्कृत शिक्षा प्राप्त हो सके।4
- घायलों को पहुंचाया अस्पताल4
- महुआडांड़ (लातेहार) महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत रेंगाई पंचायत के काठो गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां तालाब में नहाने के दौरान एक वृद्ध की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दुर्गा मांझी (उम्र लगभग 60 वर्ष) के रूप में की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे दुर्गा मांझी गांव के कुछ लोगों के साथ तालाब में नहाने गए थे। इसी दौरान तैरते समय अचानक वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। साथ में नहा रहे लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक वे पूरी तरह पानी में समा चुके थे। घटना के बाद से ही ग्रामीणों द्वारा शव की खोजबीन जारी है, लेकिन तालाब अधिक गहरा होने के कारण करीब 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि शव तालाब के अंदर ही है इसे लेकर ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द शव को बाहर निकालने के लिए गोताखोरों की मदद लेने की मांग की है।1
- Post by Shamsher Alam1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत परहाटोली पंचायत के ग्राम बैलटोली स्थित बाबा कोड़ी नाथ धाम क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।घने प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपने भीतर कई ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व समेटे हुए है। यहां स्थापित प्राचीन शिवलिंग वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, इस धाम का इतिहास काफी पुराना है और यहां पूजा-अर्चना की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। प्रत्येक वर्ष नए साल की शुरुआत और विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ सामूहिक विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा चुका है, जो इस स्थल की सामाजिक महत्ता को भी दर्शाता है।हालांकि, इतनी ख्याति के बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए सड़क की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं को करीब 2 किलोमीटर पहले ही अपने वाहन छोड़ने पड़ते हैं और उसके बाद पैदल चलते हुए नदी पार कर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह मार्ग और भी कठिन व जोखिम भरा हो जाता है। इतना ही नहीं, मंदिर के विस्तार और सुंदरीकरण के लिए निर्माण कार्य भी शुरू किया गया था, लेकिन धन की कमी के कारण यह कार्य अधूरा ही पड़ा हुआ है। अधूरे निर्माण के चलते न तो मंदिर का समुचित विकास हो पा रहा है और न ही श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से सड़क निर्माण, पुल निर्माण तथा मंदिर के अधूरे कार्य को पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए, तो बाबा कोड़ी नाथ धाम धार्मिक पर्यटन के रूप में भी उभर सकता है।कठिनाइयों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था इस धाम से जुड़ी हुई है, जो हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ में साफ दिखाई देती है।4