प्रयागराज के कोहड़ा़र घाट क्षेत्र के पथरा गांव स्थित सोसायटी पर सोमवार को खाद वितरण में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। खाद लेने पहुँचे किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, वहीं लाइन में लगे किसानों से पहले कुछ दबंग लोग सोसायटी के भीतर बैठकर अपने परिचितों को खाद दिलवा रहे थे, जिससे आम किसान खाद से वंचित रहे। इन धांधलियों के विरोध में किसानों ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। किसानों का आरोप है कि समिति के सचिव द्वारा खाद आने पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रीय दबंगों को भीतर बैठाकर उनके खास लोगों को ही खाद दिलवाई जाती है, जबकि गरीब किसानों को खाद नहीं मिल पाती। यह हर बार का नियम बन गया है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है और उन्हें मजबूरन निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव द्वारा भीतर बैठे लोगों से अधिक पैसे लेकर उनके पहचान वालों को खाद दी जाती है, और कई लोगों को एक के बजाय दो बार खाद मिलती है, जबकि अन्य किसानों को एक बार भी खाद नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें केवल परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं। इस मुद्दे पर जब सोसायटी के सचिव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लोग जबरदस्ती अंदर घुस जाते हैं और बारिश के कारण कुछ लोग अंदर बैठ गए थे। हालांकि, उन्होंने व्यवस्था सुचारू रूप से करने का आश्वासन भी दिया। दूसरी ओर, किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि रजिस्टर की जाँच कराई जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। अब किसान यह देखने को उत्सुक हैं कि उनकी परेशानियाँ कब दूर होती हैं और शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेता है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि समिति के सचिव पर क्या कार्रवाई की जाती है, क्योंकि पथरा सोसायटी पर दबंगों का कब्जा होने और भारी अनियमितताओं के बीच पहचान वालों को खाद मिलने से किसान लगातार परेशान हैं।
प्रयागराज के कोहड़ा़र घाट क्षेत्र के पथरा गांव स्थित सोसायटी पर सोमवार को खाद वितरण में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। खाद लेने पहुँचे किसानों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, वहीं लाइन में लगे किसानों से पहले कुछ दबंग लोग सोसायटी के भीतर बैठकर अपने परिचितों को खाद दिलवा रहे थे, जिससे आम किसान खाद से वंचित रहे। इन धांधलियों के विरोध में किसानों ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। किसानों का आरोप है कि समिति के सचिव द्वारा खाद आने पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रीय दबंगों को भीतर बैठाकर उनके खास लोगों को ही खाद दिलवाई जाती है, जबकि गरीब किसानों को खाद नहीं मिल पाती। यह हर बार का नियम बन गया है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है और उन्हें मजबूरन निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ती है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव द्वारा भीतर बैठे लोगों से अधिक पैसे लेकर उनके पहचान वालों को खाद दी जाती है, और कई लोगों को एक के बजाय दो बार खाद मिलती है, जबकि अन्य किसानों को एक बार भी खाद नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें केवल परेशानियाँ झेलनी पड़ती हैं। इस मुद्दे पर जब सोसायटी के सचिव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लोग जबरदस्ती अंदर घुस जाते हैं और बारिश के कारण कुछ लोग अंदर बैठ गए थे। हालांकि, उन्होंने व्यवस्था सुचारू रूप से करने का आश्वासन भी दिया। दूसरी ओर, किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि रजिस्टर की जाँच कराई जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। अब किसान यह देखने को उत्सुक हैं कि उनकी परेशानियाँ कब दूर होती हैं और शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब संज्ञान लेता है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि समिति के सचिव पर क्या कार्रवाई की जाती है, क्योंकि पथरा सोसायटी पर दबंगों का कब्जा होने और भारी अनियमितताओं के बीच पहचान वालों को खाद मिलने से किसान लगातार परेशान हैं।
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक भीषण सड़क हादसे में चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना सुबह के समय हाईवे किनारे उस वक्त हुई, जब अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने पंचर बना रहे चार युवकों को रौंद दिया। मृतकों की पहचान अनवर, एहसान, साबिर और एहसान के रूप में हुई है, जो अपने वाहन से चारपाई लेकर जा रहे थे। बताया गया है कि सैनी थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर स्थित कंगन होटल के पास उनके चारपाई लदे वाहन का टायर पंचर हो गया था। पंचर ठीक कराने के दौरान ही एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी, जिससे चारों की जान चली गई। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही, फरार हुए अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश में गहनता से जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सरकारी इंजीनियरों द्वारा बारिश के मौसम में सड़क निर्माण कार्य पर तीखी टिप्पणी की गई है। इस प्रक्रिया पर कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि बारिश में सड़क कैसे बनाई जाती है, यह उत्तर प्रदेश के सरकारी इंजीनियरों से सीखा जा सकता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी की ओर इशारा करती है, क्योंकि जिस तरह सड़क पर बारिश का पानी बह रहा है, उसी प्रकार सरकारी पैसा भी व्यर्थ बहाया जा रहा है। यह पोस्ट स्पष्ट रूप से सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर तीव्र आलोचना व्यक्त करती है।1
- भारत गौरव ट्रेन के ज़रिए प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा करने का एक सुनहरा अवसर उपलब्ध है। इस विशेष यात्रा में श्रद्धालु महाकाल, ओंकारेश्वर, सोमनाथ और नागेश्वर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों सहित कई अन्य प्रमुख तीर्थों के दर्शन कर सकते हैं। यह यात्रियों के लिए इन पवित्र स्थानों की यात्रा का एक आकर्षक मौका प्रस्तुत करता है।1
- देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय है, जिसके चलते कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश में, पन्ना, छतरपुर, खंडवा सहित कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जहाँ कई सड़कें बंद हो गई हैं और नदियां उफान पर हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में अगले चार दिनों तक अति भारी और भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें उज्जैन समेत 28 जिलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने और केवल आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में भी मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। मथुरा, गाजियाबाद, हाथरस और लखनऊ सहित कई जिलों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ा है।1
- प्रयागराज के सहसों इलाके में हाल ही में बना एक नया हाईवे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में लोग इस नवनिर्मित हाईवे के मनमोहक नजारों को देखने के लिए पहुँच रहे हैं। यहाँ आए हुए लोग हाईवे के दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए वीडियो बना रहे हैं और तस्वीरें खींच रहे हैं। इन वीडियो और तस्वीरों को लगातार सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है, जिसके चलते यह नया हाईवे इन दिनों एक प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- प्रयागराज के एयर पोर्ट थाना क्षेत्र के अंतर्गत असरौली कला सहित कई जगहों पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान, अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे कई बीघा अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने भी अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए बुलडोजर का इस्तेमाल किया और कई बीघा जमीन को जमींदोज किया।1
- कौशाम्बी में सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में चार युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सैनी थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर स्थित कंगन होटल के पास हाईवे किनारे हुई, जहाँ एक वाहन का टायर पंचर हो गया था। वाहन से चारपाई लेकर जा रहे अनवर, एहसान, साबिर और एहसान नाम के चारों युवक पंचर बनवा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अब इस दर्दनाक घटना को अंजाम देकर फरार हुए अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में एक दारोगा और सिपाही को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है। यह घूस मारपीट के एक मामले में दर्ज एफआईआर से नाम हटाने के लिए ली जा रही थी। जानकारी के अनुसार, आरोपी दारोगा, जिसे 'साहब' कहकर संबोधित किया गया है, पहले ही तीन किस्तें ले चुका था, और आज चौथी किस्त के रूप में ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए टीम ने उन्हें धर दबोचा। इस घटना ने एक बार फिर कानून के रखवालों की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो अपनी ट्रेनिंग के बाद संविधान के प्रति वफादारी, ईमानदारी, कानून का निष्पक्ष पालन करने और बिना किसी भेदभाव के जनसेवा करने की प्रतिज्ञा लेते हैं, लेकिन उसे भूलकर कानून का ही शोषण करते हैं। पोस्ट में गहरी निराशा व्यक्त की गई है कि ये सब रुकने वाला नहीं है, और ऐसे अधिकारी दो-चार महीने बाद फिर किसी थाने में पोस्टिंग पाकर 'सुविधा शुल्क' वसूलना शुरू कर देंगे। यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में रिश्वतखोरी की घटनाएं आम हो गई हैं, और आगरा में भी बहुत से ऐसे मामले हैं जो अभी तक विजिलेंस या एंटी करप्शन टीम की पकड़ से दूर हैं।1
- एक ओर जहाँ देश में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ लोगों की जान ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर दीवारें, इमारतें और मकान ढहने से भी मासूमों की मौत हो रही है। यदि प्राकृतिक आपदाओं को रोकना इंसानों के वश में नहीं है, तो जर्जर ढाँचों के ढहने का कारण केवल और केवल लापरवाही है, जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। सजग और सतर्क रहकर इन मौतों को टाला जा सकता है, लेकिन इस दिशा में कोई कोशिश नहीं की जाती। जर्जर मकान और इमारतें सालों तक वैसी ही खड़ी रहती हैं, उन्हें गिराने की ज़हमत तक नहीं उठाई जाती। न तो ऐसे ढाँचों को नोटिस दिया जाता है और न ही दिए गए नोटिस का पालन करवाया जाता है। विडंबना यह है कि कई बार तो ऐसे खतरनाक भवनों में शादी-ब्याह से लेकर अनेक धार्मिक आयोजन तक कर लिए जाते हैं, जिससे जान का जोखिम और बढ़ जाता है। सरकारी नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि सभी कमजोर और जर्जर भवनों का नियमित रूप से पता लगाकर उन्हें तोड़ने की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन या निकाय द्वारा की जानी चाहिए। हालाँकि, इस महत्वपूर्ण नियम का पालन ही नहीं हो पाता, जिसका खामियाज़ा लोगों को अपनी जान गँवाकर भुगतना पड़ता है।1