बस्ती/अयोध्या से आ रही जानकारी के अनुसार, श्री राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान के प्रबंधन और वित्तीय शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए ₹1000 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह वित्तीय अनियमितता कथित तौर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है: मंदिर के दान-पात्रों से चढ़ावे की चोरी, जमीन अधिग्रहण में बाजार दर से अधिक दाम दिखाने और सौदों में अनियमितता, तथा निर्माण कार्यों के हर टेंडर में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग। इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या ये गिरफ्तार किए गए आठ लोग वास्तव में इतने बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति और प्रभाव को देखते हुए, यह संदेह जताया जा रहा है कि ₹1000 करोड़ का कथित गबन अकेले उनके बूते से बाहर हो सकता है, और वे बड़ी मछलियों को बचाने के लिए 'छोटे मोहरे' हो सकते हैं। इस विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उंगलियां उठ रही हैं और उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और SIT जांच के बीच, जनता यह जानना चाहती है कि यह महज प्रशासनिक चूक है या एक सुनियोजित भ्रष्टाचार। खोजी पत्रकार अजीत मिश्रा का मानना है कि आस्था के इस केंद्र में ऐसी वित्तीय विसंगतियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं का भी अपमान है। इस अविश्वास को खत्म करने के लिए एक पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
बस्ती/अयोध्या से आ रही जानकारी के अनुसार, श्री राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान के प्रबंधन और वित्तीय शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए ₹1000 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह वित्तीय अनियमितता कथित तौर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है: मंदिर के दान-पात्रों से चढ़ावे की चोरी, जमीन अधिग्रहण में बाजार दर से अधिक दाम दिखाने और सौदों में अनियमितता, तथा निर्माण कार्यों के हर टेंडर में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग। इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या ये गिरफ्तार किए गए आठ लोग वास्तव में इतने बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति और प्रभाव को देखते हुए, यह संदेह जताया जा रहा है कि ₹1000 करोड़ का कथित गबन अकेले उनके बूते से बाहर हो सकता है, और वे बड़ी मछलियों को बचाने के लिए 'छोटे मोहरे' हो सकते हैं। इस विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उंगलियां उठ रही हैं और उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और SIT जांच के बीच, जनता यह जानना चाहती है कि यह महज प्रशासनिक चूक है या एक सुनियोजित भ्रष्टाचार। खोजी पत्रकार अजीत मिश्रा का मानना है कि आस्था के इस केंद्र में ऐसी वित्तीय विसंगतियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं का भी अपमान है। इस अविश्वास को खत्म करने के लिए एक पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के प्रबंधन और उससे जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक बयान जारी कर मंदिर से संबंधित संस्थाओं और उनके क्रियाकलापों पर तीखी टिप्पणी की है। पांडेय ने अपने बयान में ऐतिहासिक तुलना करते हुए कहा कि महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण करके लूटपाट की थी, लेकिन राम मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन का जिम्मा संभालने वालों ने सिर्फ 40 दिनों के भीतर 70 बार लूट को अंजाम दिया है। उन्होंने इस कृत्य को 140 करोड़ लोगों की आस्था के साथ किया गया विश्वासघात बताया। उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस पूरे मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही क्यों नहीं हुई। तंज कसते हुए पांडेय ने कहा कि न कहीं कोई एनकाउंटर हुआ, न गोली चली और न ही 'बुलडोजर' का इस्तेमाल हुआ। 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने का दावा करने वाली सरकार इस प्रकरण पर चुप्पी क्यों साधे हुए है, यह सवाल उन्होंने उठाया। पूर्व मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ है और यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उनके अनुसार, मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों ने इस गहरी आस्था का दुरुपयोग किया है, जिससे बड़े पैमाने पर जनमानस की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में यह भी जोड़ा कि न्याय के प्रति सरकार का दोहरा रवैया चिंताजनक है, पर प्रभु श्री राम सब देख रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, मंदिर प्रशासन या संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।1
- बस्ती जिले के वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महदो गांव में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव के बाहर स्थित तालाब के किनारे एक किशोर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। मृतक किशोर की पहचान होने के बाद उसके परिजनों में कोहराम मच गया; शव को देखते ही उनके होश उड़ गए और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के बीच किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूचना मिलने पर वॉल्टरगंज पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रही है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। इस घटना के बाद क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। वहीं, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।1
- धनघटा थाना क्षेत्र के प्रजापतिपुर गाँव में मारपीट की एक घटना हुई है। इस घटना के संबंध में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर क्षेत्राधिकारी धनघटा ने एक बयान जारी कर जानकारी साझा की है।1
- संतकबीरनगर पुलिस ने एक मंगलसूत्र झपटमारी की घटना में शामिल दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से छीना गया मंगलसूत्र मय लॉकेट और वारदात में इस्तेमाल की गई एक्टिवा स्कूटी भी बरामद की है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार मीना, अपर पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद श्री प्रियम राजशेखर पाण्डेय के निर्देशानुसार चलाए गए अभियान के तहत की गई। मामला 25 जून 2026 का है, जब फरियादी श्रीमती सुमन निषाद अपने परिवार के साथ कबीर चौरा समाधि स्थल मगहर में लड़के की रस्म के लिए आई थीं। समाधि स्थल घूमने के बाद जब वे शिव मंदिर की ओर जा रही थीं, तभी स्कूटी सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उनके गले से मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गए थे। इस संबंध में थाना कोतवाली खलीलाबाद में मु0अ0सं0 562/2026 धारा 304(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें बाद में बरामदगी के आधार पर धारा 317(2) और 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई। प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली खलीलाबाद श्री जय प्रकाश दुबे के नेतृत्व में गठित टीम ने 26 जून 2026 को असरफाबाद से रसूलपुर जाने वाले ईंट खड़ंजा के किनारे स्थित बाग के पास से इन दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान अरुण कुमार पुत्र विक्रम और संजय कुमार पुत्र स्व0 सुमिरन के रूप में हुई है, ये दोनों देवरिया सूरस थाना हरपुर बुदहट जनपद गोरखपुर के निवासी हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से छीना गया मंगलसूत्र मय लॉकेट और वारदात में प्रयुक्त एक्टिवा स्कूटी (रजि0 नं0 UP 53 FB 6252) बरामद की है। पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने बताया कि वे आपस में दोस्त हैं और जेब खर्च के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने मिलकर 24 जून 2026 को दोपहर के समय मगहर कबीर चौरा शिव मंदिर के पास से एक महिला के गले से मंगलसूत्र छीनने की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि बरामद मंगलसूत्र को वे बेचने के लिए ग्राहक की तलाश में ले जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। संतकबीरनगर पुलिस द्वारा झपटमारी के इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने और अभियुक्तों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम के उत्साहवर्धन के लिए पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार मीना ने 25,000 रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा की है।3
- आकाशवाणी द्वारा 28 जून 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार, दिनांक 29 जून 2027 को वट पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और इसी दिन कबीर दास जयंती भी मान्य रहेगी।1
- कुछ पल फुर्सत के आनंद बहुत छोटे भाई के साथ में जिंदगी का अलग ही आनंद है 🥹🥹😎😎👍7518055613 कुछ पल फुर्सत के आनंद बहुत छोटे भाई के साथ में जिंदगी का अलग ही आनंद है 🥹🥹😎😎👍75180556131
- संतकबीरनगर जिले में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ हो गया है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद से पल्स पोलियो जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें स्कूली बच्चों ने बैंड-बाजे और उत्साह के साथ लोगों को पोलियो की दो बूंद पिलाने के लिए जागरूक किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जोर दिया कि जन-जागरूकता और आम जनता के सहयोग से ही पोलियो जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपील की कि 28 जून को आयोजित बूथ दिवस पर 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाई जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रामानुज कनौजिया ने बताया कि जनपद में 0 से 5 वर्ष तक के कुल 3 लाख 11 हजार 141 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए जिले में 858 बूथ बनाए गए हैं। साथ ही, 489 हाउस-टू-हाउस टीमें, 28 ट्रांजिट टीमें और 13 मोबाइल टीमें 29 जून से 3 जुलाई तक घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का कार्य करेंगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने सभी टीमों को समय पर बूथ संचालन और कोल्ड चेन व्यवस्था का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से पोलियो मुक्त भारत के इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करने की अपील की है।1
- बस्ती/अयोध्या से आ रही जानकारी के अनुसार, श्री राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान के प्रबंधन और वित्तीय शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए ₹1000 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह वित्तीय अनियमितता कथित तौर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है: मंदिर के दान-पात्रों से चढ़ावे की चोरी, जमीन अधिग्रहण में बाजार दर से अधिक दाम दिखाने और सौदों में अनियमितता, तथा निर्माण कार्यों के हर टेंडर में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग। इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या ये गिरफ्तार किए गए आठ लोग वास्तव में इतने बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति और प्रभाव को देखते हुए, यह संदेह जताया जा रहा है कि ₹1000 करोड़ का कथित गबन अकेले उनके बूते से बाहर हो सकता है, और वे बड़ी मछलियों को बचाने के लिए 'छोटे मोहरे' हो सकते हैं। इस विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उंगलियां उठ रही हैं और उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और SIT जांच के बीच, जनता यह जानना चाहती है कि यह महज प्रशासनिक चूक है या एक सुनियोजित भ्रष्टाचार। खोजी पत्रकार अजीत मिश्रा का मानना है कि आस्था के इस केंद्र में ऐसी वित्तीय विसंगतियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं का भी अपमान है। इस अविश्वास को खत्म करने के लिए एक पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।1