बस्ती जिले के वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महदो गांव में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव के बाहर स्थित तालाब के किनारे एक किशोर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। मृतक किशोर की पहचान होने के बाद उसके परिजनों में कोहराम मच गया; शव को देखते ही उनके होश उड़ गए और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के बीच किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूचना मिलने पर वॉल्टरगंज पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रही है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। इस घटना के बाद क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। वहीं, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
बस्ती जिले के वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महदो गांव में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव के बाहर स्थित तालाब के किनारे एक किशोर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। मृतक किशोर की पहचान होने के बाद उसके परिजनों में कोहराम मच गया; शव को देखते ही उनके होश उड़ गए और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के बीच किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूचना मिलने पर वॉल्टरगंज पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रही है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। इस घटना के बाद क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। वहीं, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
- बस्ती जिले के वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत महदो गांव में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव के बाहर स्थित तालाब के किनारे एक किशोर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इस सूचना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। मृतक किशोर की पहचान होने के बाद उसके परिजनों में कोहराम मच गया; शव को देखते ही उनके होश उड़ गए और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के बीच किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सूचना मिलने पर वॉल्टरगंज पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहन जांच कर रही है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। इस घटना के बाद क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। वहीं, पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।1
- लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के प्रबंधन और उससे जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक बयान जारी कर मंदिर से संबंधित संस्थाओं और उनके क्रियाकलापों पर तीखी टिप्पणी की है। पांडेय ने अपने बयान में ऐतिहासिक तुलना करते हुए कहा कि महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण करके लूटपाट की थी, लेकिन राम मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन का जिम्मा संभालने वालों ने सिर्फ 40 दिनों के भीतर 70 बार लूट को अंजाम दिया है। उन्होंने इस कृत्य को 140 करोड़ लोगों की आस्था के साथ किया गया विश्वासघात बताया। उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस पूरे मामले में अब तक कोई ठोस कार्यवाही क्यों नहीं हुई। तंज कसते हुए पांडेय ने कहा कि न कहीं कोई एनकाउंटर हुआ, न गोली चली और न ही 'बुलडोजर' का इस्तेमाल हुआ। 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने का दावा करने वाली सरकार इस प्रकरण पर चुप्पी क्यों साधे हुए है, यह सवाल उन्होंने उठाया। पूर्व मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ है और यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उनके अनुसार, मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों ने इस गहरी आस्था का दुरुपयोग किया है, जिससे बड़े पैमाने पर जनमानस की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में यह भी जोड़ा कि न्याय के प्रति सरकार का दोहरा रवैया चिंताजनक है, पर प्रभु श्री राम सब देख रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, मंदिर प्रशासन या संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।1
- पूज्य महंत संजय दास जी महाराज को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के उपरांत, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी जी महाराज, महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्र दास जी महाराज, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत मुरली दास जी महाराज सहित अखाड़ा परिषद के सभी पदाधिकारी और 8 अखाड़ों के श्रीमहंत व सचिवों ने हरिद्वार में धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।1
- आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने संसद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी सदस्यों को संबोधित करते हुए सीधे तौर पर कहा, "चंदा चोरों बैठो।" सिंह ने आगे जोर देकर कहा कि वे तो बहुत पहले से ही यह कहते आ रहे हैं कि "बीजेपी चंदा चोर पार्टी है।" उनके इन तीखे बयानों के बाद सदन का माहौल गरमा गया।1
- हाल ही में हुए चुनाव में वंशीधर शुक्ल को अध्यक्ष चुना गया है। इसी क्रम में, अशोक सिंह को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली है, जबकि राम सिंह यादव को मंत्री के रूप में निर्वाचित किया गया है।1
- प्रतापगढ़ निवासी सियाराम उमावैश्य, जिन्होंने अपनी ज़मीन बेचकर अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये का दान दिया था, कथित दान गड़बड़ी के मामले को लेकर भावुक हो गए हैं। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी श्रद्धा से भगवान राम के मंदिर के लिए यह दान दिया था, लेकिन अब सामने आ रहे घटनाक्रम से उन्हें गहरा दुख हो रहा है। सियाराम उमावैश्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि दान की राशि में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।1
- शनिवार को अयोध्या जिले में थाना सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया, जहाँ प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से फरियादियों की शिकायतें सुनीं। इस दौरान अधिकारियों ने शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। तारुन थाने में आयोजित समाधान दिवस की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी बीकापुर श्रेया ने की, जहाँ थानाध्यक्ष तारुन लालचंद सरोज भी मौजूद थे। उन्होंने राजस्व और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में, बीकापुर कोतवाली में न्यायिक उपजिलाधिकारी राम प्रकाश तिवारी ने प्रभारी निरीक्षक बीकापुर देवेंद्र पाण्डेय की उपस्थिति में फरियादियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बीकापुर कोतवाली में कुल 45 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 29 शिकायतें राजस्व से और 16 पुलिस से संबंधित थीं। राजस्व विभाग की 4 शिकायतों का, और पुलिस से संबंधित 10 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र पाण्डेय ने शेष बची 25 राजस्व शिकायतों को पुलिस और राजस्व टीम के साथ मिलकर एक सप्ताह के भीतर निस्तारित करने पर जोर दिया। दोनों अधिकारियों ने यह भी कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शिकायत का निष्पक्ष, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, तथा शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने पर बल दिया गया।1
- बस्ती/अयोध्या से आ रही जानकारी के अनुसार, श्री राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से मिले दान के प्रबंधन और वित्तीय शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए ₹1000 करोड़ के कथित घोटाले के आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह वित्तीय अनियमितता कथित तौर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है: मंदिर के दान-पात्रों से चढ़ावे की चोरी, जमीन अधिग्रहण में बाजार दर से अधिक दाम दिखाने और सौदों में अनियमितता, तथा निर्माण कार्यों के हर टेंडर में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग। इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) द्वारा आठ लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, खोजी पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या ये गिरफ्तार किए गए आठ लोग वास्तव में इतने बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम देने की क्षमता रखते हैं। उनकी आर्थिक स्थिति और प्रभाव को देखते हुए, यह संदेह जताया जा रहा है कि ₹1000 करोड़ का कथित गबन अकेले उनके बूते से बाहर हो सकता है, और वे बड़ी मछलियों को बचाने के लिए 'छोटे मोहरे' हो सकते हैं। इस विवाद के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उंगलियां उठ रही हैं और उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और SIT जांच के बीच, जनता यह जानना चाहती है कि यह महज प्रशासनिक चूक है या एक सुनियोजित भ्रष्टाचार। खोजी पत्रकार अजीत मिश्रा का मानना है कि आस्था के इस केंद्र में ऐसी वित्तीय विसंगतियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं का भी अपमान है। इस अविश्वास को खत्म करने के लिए एक पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।1