मध्य प्रदेश के सतना जिले में रामपुर बघेलान के हनुमानगंज स्थित शासकीय आवासों पर वर्षों से ऐसे लोगों का कब्जा बताया जा रहा है जो इन सरकारी क्वार्टरों में रहने के पात्र नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधीन इन आवासों पर गैर-कर्मचारियों, सेवानिवृत्त हो चुके व्यक्तियों (जिनमें से एक वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी आज तक क्वार्टर खाली नहीं किया है), अन्य संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों, अटैचमेंट पर कार्यरत स्टाफ, और यहाँ तक कि 108 एम्बुलेंस चालकों के निवास करने का मामला सामने आया है। यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह 'खेल' चल रहा है और यदि नियम केवल आम कर्मचारियों तथा जनता के लिए हैं, तो इन विशिष्ट मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। जानकारी मिली है कि बीएमओ द्वारा कुछ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि जिन अन्य लोगों पर भी ये नियम लागू होते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी। इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है, और यह स्पष्ट किया गया है कि जैसे-जैसे दस्तावेज प्राप्त होंगे, एक-एक तथ्य जनता के सामने रखा जाएगा। जोर देकर कहा गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से बने ये सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं, और यदि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर जवाब देना होगा।
मध्य प्रदेश के सतना जिले में रामपुर बघेलान के हनुमानगंज स्थित शासकीय आवासों पर वर्षों से ऐसे लोगों का कब्जा बताया जा रहा है जो इन सरकारी क्वार्टरों में रहने के पात्र नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधीन इन आवासों पर गैर-कर्मचारियों, सेवानिवृत्त हो चुके व्यक्तियों (जिनमें से एक वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी आज तक क्वार्टर खाली नहीं किया है), अन्य संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों, अटैचमेंट पर कार्यरत स्टाफ, और यहाँ तक कि 108 एम्बुलेंस चालकों के निवास करने का मामला सामने आया है। यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह 'खेल' चल रहा है और यदि नियम केवल आम कर्मचारियों तथा जनता के लिए हैं, तो इन विशिष्ट मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। जानकारी मिली है कि बीएमओ द्वारा कुछ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि जिन अन्य लोगों पर भी ये नियम लागू होते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी। इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है, और यह स्पष्ट किया गया है कि जैसे-जैसे दस्तावेज प्राप्त होंगे, एक-एक तथ्य जनता के सामने रखा जाएगा। जोर देकर कहा गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से बने ये सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं, और यदि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर जवाब देना होगा।
- सतना जिले की महिला पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर श्वेता मौर्या का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर मौर्या ने मैहर स्थित प्रसिद्ध शारदा देवी मंदिर परिसर में कॉमेडी "बड़ी मुश्किल से समझाया है दिल को। छोटी सी जिंदगी है.." पर एक रील बनाकर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट *@inspector_shweta* पर पोस्ट की है। उनकी इंस्टा प्रोफाइल के अनुसार, वे *SATNA MP Police* में पदस्थ हैं और उनके *75.7K फॉलोअर्स* हैं, जिसमें उनकी एक रील पर *9.7 लाख व्यूज* भी दिख रहे हैं। पुलिस आचरण नियमावली के अनुसार, वर्दी में रहते हुए धार्मिक स्थलों या सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्तिगत या मनोरंजन के लिए वीडियो बनाना सेवा शर्तों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हमारा ग्रुप वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।1
- मध्य प्रदेश के सतना में एक निजी अस्पताल पर लापरवाही और आर्थिक शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल ने डेढ़ लाख रुपये वसूलने के बाद भी उनके बेटे का इलाज नहीं किया। अब अस्पताल प्रबंधन कथित तौर पर दवाइयां वापस मांग रहा है, और सवाल पूछने पर मरीज को रेफर कर दिया गया। पीड़ित पिता ने कैमरे पर बताया कि भर्ती के समय आईसीयू का खर्च प्रतिदिन 12-13 हजार रुपये बताया गया था, जबकि उसका वास्तविक शुल्क 3500 रुपये प्रतिदिन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि "डेढ़ लाख पचास हजार घाटे में" देने के बावजूद बेटे का इलाज नहीं हुआ; बेटा अस्पताल में चलकर आया था, लेकिन आईसीयू में रखे जाने के बाद उसे पीलिया हो गया और उसकी हालत बिगड़ गई। जब पीड़ित ने अस्पताल से सवाल किए, तो बेटे को "सीरियस है" कहकर रेफर कर दिया गया। एक नए वीडियो में सामने आई बातचीत में अस्पताल द्वारा दी गई दवाइयां वापस मांगे जाने का आरोप है, जिसके जवाब में पीड़ित ने सभी दवाइयों के पूरे बिल होने की बात कही। लाल गमछा पहने और हल्के नीले कुर्ते में पीड़ित पिता ने अस्पताल के बिस्तर पर बैठकर हाथ जोड़ते हुए दर्द बयां किया कि "अच्छा, तो गरीबों के साथ अत्याचार नहीं होगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पास दवा और जांच के सभी बिल मौजूद हैं। पीड़ित ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की जांच की मांग की है, सवाल करते हुए कि एक गरीब व्यक्ति इतना पैसा कहां से लाए और अब अपने बेटे को लेकर कहां जाए। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह जानकारी पीड़ित द्वारा कैमरे पर दिए गए बयानों पर आधारित है, और सतना के संबंधित निजी अस्पताल का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है।3
- मध्य प्रदेश के सतना जिले में रामपुर बघेलान के हनुमानगंज स्थित शासकीय आवासों पर वर्षों से ऐसे लोगों का कब्जा बताया जा रहा है जो इन सरकारी क्वार्टरों में रहने के पात्र नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधीन इन आवासों पर गैर-कर्मचारियों, सेवानिवृत्त हो चुके व्यक्तियों (जिनमें से एक वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी आज तक क्वार्टर खाली नहीं किया है), अन्य संस्थानों में पदस्थ कर्मचारियों, अटैचमेंट पर कार्यरत स्टाफ, और यहाँ तक कि 108 एम्बुलेंस चालकों के निवास करने का मामला सामने आया है। यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह 'खेल' चल रहा है और यदि नियम केवल आम कर्मचारियों तथा जनता के लिए हैं, तो इन विशिष्ट मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। जानकारी मिली है कि बीएमओ द्वारा कुछ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि जिन अन्य लोगों पर भी ये नियम लागू होते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी। इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है, और यह स्पष्ट किया गया है कि जैसे-जैसे दस्तावेज प्राप्त होंगे, एक-एक तथ्य जनता के सामने रखा जाएगा। जोर देकर कहा गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से बने ये सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं, और यदि नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर जवाब देना होगा।1
- सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में किसानों के लिए रासायनिक उर्वरक, विशेषकर डीएपी और यूरिया खाद का संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह समस्या क्षेत्र में कृषि कार्यों के लिए बेहद गंभीर मानी जा रही है। इस गंभीर समस्या को उठाते हुए, पूर्व विधायक राम लखन सिंह पटेल ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, रामपुर बाघेलान को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने प्रशासन से क्षेत्र में डीएपी और यूरिया खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की तत्काल मांग की है।2
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी ने दतिया उपचुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि 2023 में दतिया की जनता ने कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती जी को भारी बहुमत से विधायक चुना था। हालांकि, भाजपा और चुनाव आयोग के कथित षड्यंत्र के कारण उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। सिंघार जी के अनुसार, अब भाजपा जल्दबाजी में दतिया में उपचुनाव कराकर इस सीट पर कब्ज़ा करना चाहती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दतिया की जनता एक बार फिर कांग्रेस पार्टी पर अपना भरोसा जताएगी। उमंग सिंघार जी ने दतिया के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अभी से तैयारियाँ शुरू कर दें, ताकि इस बार भी दतिया में कांग्रेस का परचम लहराया जा सके।1
- मैहर में उत्तर दरवाजा से पांडे टोला मार्ग पर पेयजल व्यवस्था की भयावह तस्वीर सामने आई है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने नगर पालिका पर गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा है कि लोगों के घरों तक पहुंचने वाली पेयजल पाइपलाइन खुले नाले के भीतर से गुजर रही है, जिससे दूषित पानी के पेयजल में मिलने का लगातार खतरा बना हुआ है। प्रभात द्विवेदी ने इस स्थिति को नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है। प्रभात द्विवेदी ने कहा कि यह केवल तकनीकी खामी नहीं है। उनके अनुसार, क्षेत्र में नाली के अंदर गंदा और बदबूदार पानी भरा हुआ है, वहीं प्लास्टिक कचरा, घरेलू अपशिष्ट और गंदगी के बीच से पेयजल पाइपलाइन गुजरती दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में पाइपलाइन में किसी भी प्रकार का रिसाव होने पर नाले का दूषित पानी पेयजल में मिलकर घरों तक पहुंच सकता है। श्री द्विवेदी ने बताया कि नाली में बड़ी मात्रा में कचरा जमा है, जिससे जल निकासी प्रभावित हो रही है, और कई स्थानों पर पाइपलाइन सीधे गंदे पानी के संपर्क में नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बरसात के दौरान यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है तथा जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जोर दिया कि नगर पालिका का दायित्व नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन मैहर में हालात इसके विपरीत हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पाइपलाइन को नाली से अलग कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया और जल गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई, तो डायरिया, टाइफाइड, हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कांग्रेस ने जिला प्रशासन से इस मामले की तत्काल जांच कराने, पेयजल की गुणवत्ता का परीक्षण कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उत्तर दरवाजा से पांडे टोला मार्ग की पेयजल व्यवस्था को तत्काल सुधारने के निर्देश देने की भी मांग की गई है। प्रभात द्विवेदी का आरोप है कि नगर पालिका की उदासीनता के कारण जनता दूषित पेयजल पीने को मजबूर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो कांग्रेस जनआंदोलन करने को बाध्य होगी।1