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थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार । पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है । गौरतलब हो कि थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे । इसी क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया । गिरफ्तार अभियुक्त 1. अर्पित पुत्र अभयराज निवासी प्रेमनगर कस्बा व थाना तिंदवारी जनपद बांदा । 2. अरुण कुमार पुत्र बालचन्द्र निवासी छिरौरा टोड़ी फतेहपुर जनपद झांसी ।

3 hrs ago
user_Surash Sahu
Surash Sahu
बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार । पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है । गौरतलब हो कि थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे । इसी क्रम में आज दिनांक 17.04.2026 को थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया । गिरफ्तार अभियुक्त 1. अर्पित पुत्र अभयराज निवासी प्रेमनगर कस्बा व थाना तिंदवारी जनपद बांदा । 2. अरुण कुमार पुत्र बालचन्द्र निवासी छिरौरा टोड़ी फतेहपुर जनपद झांसी ।

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  • बांदा के मटौंध थाना क्षेत्र में 16 अप्रैल को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में क्षेत्राधिकारी सदर राजवीर सिंह गौर ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
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    बांदा के मटौंध थाना क्षेत्र में 16 अप्रैल को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला और एक पुरुष की मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
इस मामले में क्षेत्राधिकारी सदर राजवीर सिंह गौर ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • *धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्त गिरफ्तार* रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233 बाँदा।पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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    *धोखाधड़ी करने वाले वांछित 02 अभियुक्त गिरफ्तार*
रिपोर्ट-अल्तमश हुसैन-7054881233
बाँदा।पुलिस अधीक्षक बांदा  पलाश बंसल के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण लगाये जाने तथा वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु की जा रही कार्यवाही के क्रम में थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 1.98 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। थाना तिंदवारी क्षेत्र के कस्बा तिंदवारी के रहने वाले राजू पुत्र रामखिलावन की कस्बा तिंदवारी में पशु आहार की दुकान है जिसके दुकान में काम करने वाले एक व्यक्ति अर्पित पुत्र अभराज द्वारा उसके चेक पर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर 01 लाख 98 हजार रुपए अपने साथी अरुण पुत्र बाल चन्द्र के माध्यम से निकलवा लिए गए थे । जिसके सम्बन्ध में थाना तिंदवारी में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा अभियुक्त काफी समय से फरार चल रहे थे जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। थाना तिंदवारी पुलिस द्वारा मुखबिर की सूचना पर दोनों अभियुक्तों को तेरही मोड़ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बांदा न्यूज..... 🔥 बांदा में साइबर माफिया का भंडाफोड़! 9 शातिर गिरफ्तार, चोरी के मोबाइल बनते थे ठगी का हथियार बांदा पुलिस को मिली बड़ी सफलता… साइबर क्राइम थाना टीम ने एक संगठित अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है… यह गिरोह गांव-गांव घूमकर चोरी, खोए और खराब मोबाइल सस्ते में खरीदता था… फिर मदरबोर्ड बदलकर और IMEI छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा एक्टिव करता था… इन मोबाइल फोन को साइबर ठगों को सप्लाई किया जाता था… पुलिस ने मौके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है… बरामदगी में 88 मोबाइल, 92 मदरबोर्ड, 66 बैटरी, फर्जी बिल, नकदी और 7 बाइक शामिल हैं… गिरोह के तार राजस्थान और हरियाणा तक जुड़े होने की बात सामने आई है… फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है… बाइट : शिवराज अपर पुलिस अधीक्षक बांदा #BandaPolice #CyberCrime #MobileFraud #CyberGangBusted #UPPolice #CrimeNews #BreakingNews #CyberAlert #IMEI #FraudNetwork
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    बांदा न्यूज.....
🔥 बांदा में साइबर माफिया का भंडाफोड़! 9 शातिर गिरफ्तार, चोरी के मोबाइल बनते थे ठगी का हथियार
बांदा पुलिस को मिली बड़ी सफलता…
साइबर क्राइम थाना टीम ने एक संगठित अन्तर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है…
यह गिरोह गांव-गांव घूमकर चोरी, खोए और खराब मोबाइल सस्ते में खरीदता था…
फिर मदरबोर्ड बदलकर और IMEI छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा एक्टिव करता था…
इन मोबाइल फोन को साइबर ठगों को सप्लाई किया जाता था…
पुलिस ने मौके से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है…
बरामदगी में 88 मोबाइल, 92 मदरबोर्ड, 66 बैटरी, फर्जी बिल, नकदी और 7 बाइक शामिल हैं…
गिरोह के तार राजस्थान और हरियाणा तक जुड़े होने की बात सामने आई है…
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है…
बाइट : शिवराज अपर पुलिस अधीक्षक बांदा
#BandaPolice #CyberCrime #MobileFraud #CyberGangBusted #UPPolice #CrimeNews #BreakingNews #CyberAlert #IMEI #FraudNetwork
    user_LK Tiwari Ram G
    LK Tiwari Ram G
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • #apkiawajdigital ​महिला पत्रकार से बदसलूकी और आरपीएफ की 'क्लीन चिट' पर भड़का आक्रोश; गंगा समग्र ने खोला मोर्चा ​बांदा। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून की वर्दी पहनकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटा जाने लगे, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधलाने लगती है। जनपद बांदा में आरपीएफ (RPF) कर्मियों द्वारा पत्रकारों और विशेषकर एक महिला पत्रकार के साथ की गई 'बर्बरता' ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। विभागीय जांच के नाम पर हुई 'खानापूर्ति' और दोषियों को दी गई 'क्लीन चिट' के विरोध में गंगा समग्र ने हुंकार भरते हुए महामहिम राष्ट्रपति के द्वार पर दस्तक दी है। ​घटना की भयावहता: सूचना मांगने पर मिली 'धमकियां और धक्का' ​22 मार्च की काली रात को आरपीएफ पोस्ट बांदा में जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। ​मर्यादा तार-तार: सूचना के अधिकार और कर्तव्य के तहत पहुंची महिला पत्रकार के साथ एएसआई संतोष कुमार ने न केवल अभद्रता की, बल्कि उनका मोबाइल छीनकर शारीरिक रूप से धक्का दिया गया। ​वर्दी का अहंकार: सरून राजभर और राजकुमार राजपूत जैसे कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों को अपनी जागीर समझते हुए बल प्रयोग किया और भद्दी गालियों का सहारा लिया। ​मुख्य मुद्दा: 'अंधा विभाग, गूंगा प्रशासन' ​सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि घटना के वीडियो साक्ष्य चिल्ला-चिल्लाकर सच्चाई बयां कर रहे हैं, लेकिन आरपीएफ के उच्चाधिकारियों को अपनी जांच में कुछ दिखाई नहीं दिया। दोषियों को पाक-साफ बताकर छोड़ देना यह सिद्ध करता है कि विभाग अपने भ्रष्ट और हिंसक कर्मियों को संरक्षण दे रहा है। ​न्याय की 'अंतिम' पुकार: ज्ञापन के प्रमुख अंश ​गंगा समग्र के जिला संयोजक महेश प्रजापति ने जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में सीधी चेतावनी दी है: ​दोषियों की बर्खास्तगी: एएसआई संतोष कुमार, सरून राजभर और सीसीआई राजकुमार राजपूत पर सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो। ​निष्पक्ष जांच का आदेश: स्थानीय रेल प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होकर किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए। ​पत्रकार सुरक्षा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर होने वाले इन हमलों को 'आतंक' की श्रेणी में रखकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ​"क्या सच लिखना और पूछना अब अपराध है? एक महिला पत्रकार के साथ सरेआम बदसलूकी होती है और विभाग आंखें मूंद लेता है। यह लड़ाई अब केवल बांदा की नहीं, बल्कि देश के हर उस पत्रकार की है जो सच के लिए लड़ता है। हम चुप नहीं बैठेंगे!" — महेश प्रजापति, जिला संयोजक, गंगा समग्र ​निष्कर्ष: अब गेंद शासन के पाले में ​यह ज्ञापन केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए अल्टीमेटम है। यदि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर गाज नहीं गिरती, तो यह मान लिया जाएगा कि बांदा में कानून का नहीं, बल्कि 'वर्दी वाले गुंडों' का राज है। अब देखना होगा कि महामहिम के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में क्या मोड़ आता है।
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    #apkiawajdigital  
​महिला पत्रकार से बदसलूकी और आरपीएफ की 'क्लीन चिट' पर भड़का आक्रोश; गंगा समग्र ने खोला मोर्चा
​बांदा। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और कानून की वर्दी पहनकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का गला घोंटा जाने लगे, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधलाने लगती है। जनपद बांदा में आरपीएफ (RPF) कर्मियों द्वारा पत्रकारों और विशेषकर एक महिला पत्रकार के साथ की गई 'बर्बरता' ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। विभागीय जांच के नाम पर हुई 'खानापूर्ति' और दोषियों को दी गई 'क्लीन चिट' के विरोध में गंगा समग्र ने हुंकार भरते हुए महामहिम राष्ट्रपति के द्वार पर दस्तक दी है।
​घटना की भयावहता: सूचना मांगने पर मिली 'धमकियां और धक्का'
​22 मार्च की काली रात को आरपीएफ पोस्ट बांदा में जो हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है।
​मर्यादा तार-तार: सूचना के अधिकार और कर्तव्य के तहत पहुंची महिला पत्रकार के साथ एएसआई संतोष कुमार ने न केवल अभद्रता की, बल्कि उनका मोबाइल छीनकर शारीरिक रूप से धक्का दिया गया।
​वर्दी का अहंकार: सरून राजभर और राजकुमार राजपूत जैसे कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों को अपनी जागीर समझते हुए बल प्रयोग किया और भद्दी गालियों का सहारा लिया।
​मुख्य मुद्दा: 'अंधा विभाग, गूंगा प्रशासन'
​सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि घटना के वीडियो साक्ष्य चिल्ला-चिल्लाकर सच्चाई बयां कर रहे हैं, लेकिन आरपीएफ के उच्चाधिकारियों को अपनी जांच में कुछ दिखाई नहीं दिया। दोषियों को पाक-साफ बताकर छोड़ देना यह सिद्ध करता है कि विभाग अपने भ्रष्ट और हिंसक कर्मियों को संरक्षण दे रहा है।
​न्याय की 'अंतिम' पुकार: ज्ञापन के प्रमुख अंश
​गंगा समग्र के जिला संयोजक महेश प्रजापति ने जिलाधिकारी के जरिए राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में सीधी चेतावनी दी है:
​दोषियों की बर्खास्तगी: एएसआई संतोष कुमार, सरून राजभर और सीसीआई राजकुमार राजपूत पर सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
​निष्पक्ष जांच का आदेश: स्थानीय रेल प्रशासन के प्रभाव से मुक्त होकर किसी उच्चस्तरीय एजेंसी से इस मामले की जांच कराई जाए।
​पत्रकार सुरक्षा: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर होने वाले इन हमलों को 'आतंक' की श्रेणी में रखकर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
​"क्या सच लिखना और पूछना अब अपराध है? एक महिला पत्रकार के साथ सरेआम बदसलूकी होती है और विभाग आंखें मूंद लेता है। यह लड़ाई अब केवल बांदा की नहीं, बल्कि देश के हर उस पत्रकार की है जो सच के लिए लड़ता है। हम चुप नहीं बैठेंगे!"
— महेश प्रजापति, जिला संयोजक, गंगा समग्र
​निष्कर्ष: अब गेंद शासन के पाले में
​यह ज्ञापन केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए अल्टीमेटम है। यदि वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद दोषियों पर गाज नहीं गिरती, तो यह मान लिया जाएगा कि बांदा में कानून का नहीं, बल्कि 'वर्दी वाले गुंडों' का राज है। अब देखना होगा कि महामहिम के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में क्या मोड़ आता है।
    user_ApkiAwajDigital
    ApkiAwajDigital
    Local News Reporter बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • चिकित्सा सेवा या सामूहिक दबाव?—बाँदा मेडिकल कॉलेज की घटना पर सवाल बाँदा के मेडिकल कॉलेज में घटित हालिया घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक या कानूनी विवाद भर नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, जवाबदेही और नैतिकता पर गहरे प्रश्न खड़े करता है। एक ओर 5 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसकी चिकित्सा लापरवाही के कथित परिणामस्वरूप उसका पैर काटना पड़ा, और दूसरी ओर उसी आरोप के बाद चिकित्सकों का सामूहिक विरोध—इन दोनों के बीच फंसा है आम मरीज, जिसकी पीड़ा सबसे अधिक उपेक्षित रही।चिकित्सा, जिसे सेवा और संवेदना का पर्याय माना जाता है, जब विरोध और दबाव की भाषा में बदलने लगे तो यह चिंताजनक हो उठता है। डॉ विनीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने और तत्पश्चात उनकी बर्खास्तगी ने चिकित्सक समुदाय को आक्रोशित कर दिया। उनका यह आक्रोश समझा जा सकता है—क्योंकि हर पेशेवर को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। किंतु प्रश्न यह है कि क्या इस आक्रोश की अभिव्यक्ति का तरीका उचित था?मेडिकल कॉलेज के गेट बंद कर लगभग दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना, मरीजों को इलाज से वंचित करना और उन्हें असहाय स्थिति में छोड़ देना—क्या यह चिकित्सा धर्म के अनुरूप है? क्या यह वही शपथ है, जो एक डॉक्टर अपने पेशे में प्रवेश करते समय लेता है? यदि न्याय की मांग के लिए मरीजों को कष्ट दिया जाए, तो यह न्याय की अवधारणा को ही संदिग्ध बना देता है।यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता हो। यदि बिना समुचित जांच के किसी चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई होती है, तो यह भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। अतः यह आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष हो, बल्कि उसका स्वरूप ऐसा हो जिसमें सभी पक्षों को सुना जाए और न्याय होते हुए दिखे भी।इस पूरे घटनाक्रम ने दो महत्वपूर्ण पक्षों को उजागर किया है—एक, चिकित्सा सेवा की नैतिक जिम्मेदारी; और दूसरा, प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता। दोनों ही पक्षों में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि अंततः स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र बिंदु ‘मरीज’ ही है, न कि डॉक्टर या प्रशासन।समाज को यह अपेक्षा है कि डॉक्टर अपने पेशे की गरिमा बनाए रखें और प्रशासन न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहे। विरोध और प्रतिरोध लोकतांत्रिक अधिकार हैं, परंतु जब वे जनहित को बाधित करने लगें, तो आत्ममंथन आवश्यक हो जाता है।बाँदा की यह घटना केवल एक स्थान विशेष की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है—कि सेवा और संवेदना की डोर कहीं कमजोर न पड़ जाए।
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    चिकित्सा सेवा या सामूहिक दबाव?—बाँदा मेडिकल कॉलेज की घटना पर सवाल बाँदा के मेडिकल कॉलेज में घटित हालिया घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक या कानूनी विवाद भर नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, जवाबदेही और नैतिकता पर गहरे प्रश्न खड़े करता है। एक ओर 5 वर्षीय मासूम बच्ची, जिसकी चिकित्सा लापरवाही के कथित परिणामस्वरूप उसका पैर काटना पड़ा, और दूसरी ओर उसी आरोप के बाद चिकित्सकों का सामूहिक विरोध—इन दोनों के बीच फंसा है आम मरीज, जिसकी पीड़ा सबसे अधिक उपेक्षित रही।चिकित्सा, जिसे सेवा और संवेदना का पर्याय माना जाता है, जब विरोध और दबाव की भाषा में बदलने लगे तो यह चिंताजनक हो उठता है। डॉ विनीत सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने और तत्पश्चात उनकी बर्खास्तगी ने चिकित्सक समुदाय को आक्रोशित कर दिया। उनका यह आक्रोश समझा जा सकता है—क्योंकि हर पेशेवर को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। किंतु प्रश्न यह है कि क्या इस आक्रोश की अभिव्यक्ति का तरीका उचित था?मेडिकल कॉलेज के गेट बंद कर लगभग दो घंटे तक स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना, मरीजों को इलाज से वंचित करना और उन्हें असहाय स्थिति में छोड़ देना—क्या यह चिकित्सा धर्म के अनुरूप है? क्या यह वही शपथ है, जो एक डॉक्टर अपने पेशे में प्रवेश करते समय लेता है? यदि न्याय की मांग के लिए मरीजों को कष्ट दिया जाए, तो यह न्याय की अवधारणा को ही संदिग्ध बना देता है।यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और निष्पक्षता हो। यदि बिना समुचित जांच के किसी चिकित्सक पर कठोर कार्रवाई होती है, तो यह भी व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। अतः यह आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष हो, बल्कि उसका स्वरूप ऐसा हो जिसमें सभी पक्षों को सुना जाए और न्याय होते हुए दिखे भी।इस पूरे घटनाक्रम ने दो महत्वपूर्ण पक्षों को उजागर किया है—एक, चिकित्सा सेवा की नैतिक जिम्मेदारी; और दूसरा, प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता। दोनों ही पक्षों में संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, क्योंकि अंततः स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र बिंदु ‘मरीज’ ही है, न कि डॉक्टर या प्रशासन।समाज को यह अपेक्षा है कि डॉक्टर अपने पेशे की गरिमा बनाए रखें और प्रशासन न्याय के सिद्धांतों पर अडिग रहे। विरोध और प्रतिरोध लोकतांत्रिक अधिकार हैं, परंतु जब वे जनहित को बाधित करने लगें, तो आत्ममंथन आवश्यक हो जाता है।बाँदा की यह घटना केवल एक स्थान विशेष की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी है—कि सेवा और संवेदना की डोर कहीं कमजोर न पड़ जाए।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • मौदहा हमीरपुर। मौदहा से मांचा जाते समय बच्चा छीनने के लिए पहले से घात लगाए ससुरालियों ने पत्नी सहित अन्य लोगों को लाठी डण्डा और लोहे के राड से बेरहमी से पीटकर लहूलुहान कर दिया जिनमे से एक की हालत नाजुक बनी हुए है हालांकि पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मांचा निवासी शबनम बानो पत्नी दानिश अली ने कोतवाली में दिए शिकायती पत्र में बताया कि, शुक्रवार सुबह वह मौदहा से मांचा अपने भाई निजाम, फरीद और माँ जैनब के साथ आटो से जा रही थी तभी रास्ते में सिलौली में उसके पति दानिश अली ने फोर व्हीलर लगाकर उसका बच्चा छीनने की कोशिश की, लेकिन बच्चा छीनने में नाकाम होने पर उसके पति ने अपने परिजनों दावर अली उर्फ़ सोनू, नवाब अली, हयात अली उर्फ़ बफाती, बब्बू अली और नवाब अली सभी निवासी मांचा ने उनका आटो मांचा गेट पर आगे फोर व्हीलर लगाकर रोक लिया और सभी को लाठी डण्डा और लोहे के राड से बेरहमी से पीटकर लहूलुहान कर दिया जबकि उसके भाई फरीद को जान से मरा समझकर सडक किनारे नाले में फेंक दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को इलाज के लिए मौदहा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां से फरीद की हालत नाजुक होने के कारण सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी संतोष सिंह ने सरकारी अस्पताल पहुंच घायलों का हाल जाना और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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    मौदहा हमीरपुर। मौदहा से मांचा जाते समय बच्चा छीनने के लिए पहले से घात लगाए ससुरालियों ने पत्नी सहित अन्य लोगों को लाठी डण्डा और लोहे के राड से बेरहमी से पीटकर लहूलुहान कर दिया जिनमे से एक की हालत नाजुक बनी हुए है हालांकि पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम मांचा निवासी शबनम बानो पत्नी दानिश अली ने कोतवाली में दिए शिकायती पत्र में बताया कि, शुक्रवार सुबह वह मौदहा से मांचा अपने भाई निजाम, फरीद और माँ जैनब के साथ आटो से जा रही थी तभी रास्ते में सिलौली में उसके पति दानिश अली ने फोर व्हीलर लगाकर उसका बच्चा छीनने की कोशिश की, लेकिन बच्चा छीनने में नाकाम होने पर उसके पति ने अपने परिजनों दावर अली उर्फ़ सोनू, नवाब अली, हयात अली उर्फ़ बफाती, बब्बू अली और नवाब अली सभी निवासी मांचा ने उनका आटो मांचा गेट पर आगे फोर व्हीलर लगाकर रोक लिया और सभी को लाठी डण्डा और लोहे के राड से बेरहमी से पीटकर लहूलुहान कर दिया जबकि उसके भाई फरीद को जान से मरा समझकर सडक किनारे नाले में फेंक दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी घायलों को इलाज के लिए मौदहा के सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां से फरीद की हालत नाजुक होने के कारण सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी संतोष सिंह ने सरकारी अस्पताल पहुंच घायलों का हाल जाना और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
    user_अनवर हुसैन
    अनवर हुसैन
    Teacher मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    8 min ago
  • Post by JSB NEWS UP
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    Post by JSB NEWS UP
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    पत्रकारिता बबेरू, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    28 min ago
  • *➡️साइबर क्राइम पुलिस थाना बांदा के प्रभारी निरीक्षक व उनकी टीम द्वारा चोरी, खोए हुए एवं खराब मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त कर उन्हें तकनीकी रूप से पुनः सक्रिय कर साइबर अपराधियों को बेचने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अन्तर्राज्यीय गिरोह के 09 सदस्यों को किया गया गिरफ्तार ।* *➡️अभियुक्तों द्वारा गांव-गांव में फेरी लगाकर चोरी, खोए हुए एवं खराब मोबाइल फोन सस्ते दामों में खरीदकर उनके मदरबोर्ड बदलकर IMEI ब्लॉक/आंशिक रुप से खराब डिवाइस को पुनः सक्रिय कर अवैध रूप से साइबर अपराधियों को किया जाता था सप्लाई ।* *➡️अभियुक्तों के कब्जे से कुल 88 एंड्रायड/की-पैड मोबाइल, 92 मोबाइल मदरबोर्ड, 66 मोबाइल बैटरी, 20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल व 11 हजार रुपए सहित 07 दोपहिया वाहन बरामद ।* *विवरण-* पुलिस अधीक्षक बांदा श्री पलाश बंसल के कुशल निर्देशन जनपद में साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक बांदा श्री शिवराज व अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी साइबर सुश्री मेविस टॉक के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस थाना बांदा के प्रभारी निरीक्षक एवं उनकी टीम द्वारा चोरी, खोए हुए, खराब एवं साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त कर उन्हें तकनीकी रूप से पुनः सक्रिय कर साइबर अपराधियों को सप्लाई करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अन्तर्राज्यीय गिरोह के 09 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है । गौरतलब हो कि दिनांक 16.04.2026 को शाम पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि बुन्देलखंड एक्सप्रेस वे ग्राम चहितारा के पास कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के भारी मात्रा में मोबाइल के साथ होने की सूचना प्राप्त हुई । सूचना पर तत्काल साइबर क्राइम पुलिस थाना व विश्वविद्यालय चौकी की पुलिस टीम द्वारा मौके पर जाकर घेराबन्दी करते हुए 09 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया तथा उनके पास से भारी मात्रा में पुराने मोबाइल फोन, मोबाइल फोन के मदरबोर्ड, मोबाइल की बैटरी, मोबाइल के फर्जी क्रय बिल आदि बरामद हुए । जिनमें 41 एंड्रायड मोबाइल फोन, 38 की-पैड फोन, 92 मोबाइल के मदरबोर्ड, 66 मोबाइल की बैटरी, 20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल, 11 हजार रुपए नकद, 07 दोपहिया वाहन, 09 मोबाइल फोन जामा तलाशी से बरामद हुए । पुलिस द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा गांव-गांव में घूम-घूमकर पुराने, चोरी किए हुए, खराब एवं साइबर ठगी/फ्रॉड आदि में प्रयुक्त किए हुए मोबाइल फोन को सस्ते दामों में खरीदते थे और डीसी मशीन का प्रयोग कर मदरबोर्ड आदि की जांच करते थे जिन मोबाइल फोन का मदरबोर्ड सही पाया जाता था उन्हे विभिन्न साइबर ठगी के गिरोह को अच्छे दामों में बेच देते थे । साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त जिन मोबाइल फोन का IMEI नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था/रहता था उन मोबाइल फोन के मदरबोर्ड व अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स को निकालकर उन्हे अन्य मोबाइल फोन में लगा देते थे, या अलग-अलग पार्ट्स को संयोजित कर एक नया मोबाइल फोन तैयार कर साइबर ठगी में उसका प्रयोग करते थे । इनके द्वारा राजस्थान और हरियाणा राज्य में विभिन्न साइबर ठगी के गिरोह को इस तरह के मोबाइल फोन बेचना/सप्लाई करना स्वीकार किया गया । पुलिस द्वारा इस सम्बन्ध में गहनता से जांच की जा रही है कि इनके गिरोह में और कितने लोग शामिल है एवं कहां-कहां इनके द्वारा पुराने मोबाइल फोन को सप्लाई की जाती है/की गई है । बांदा पुलिस द्वारा आम जनमानस से अपील की गई है कि सस्ते व लालच के चक्कर में चोरी अथवा संदिग्ध स्रोत से मोबाइल फोन खरीदने से बचें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें । *बरामदगी-* ▪️88 एंड्रायड/की-पैड मोबाइल फोन ▪️92 मोबाइल के मदरबोर्ड ▪️66 मोबाइल की बैटरी ▪️20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल ▪️11 हजार रुपए नकद ▪️07 दोपहिया वाहन *गिरफ्तार अभियुक्त-* 1. मुस्तकीम पुत्र मुस्ताक रजा निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 2. अरमान पुत्र मुस्ताक रजा निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 3. अनमोल पुत्र मुस्ताक निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 4. असलम पुत्र भूरे निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 5. साहिल अली पुत्र शौकत अली निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 6. समीम पुत्र नवाव निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 7. रेहान पुत्र नवाव निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 8. अमिर पुत्र शौकत अली निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ । 9. मुस्ताक रजा पुत्र भूरे खां निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
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    *➡️साइबर क्राइम पुलिस थाना बांदा के प्रभारी निरीक्षक व उनकी टीम द्वारा चोरी, खोए हुए एवं खराब मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त कर उन्हें तकनीकी रूप से पुनः सक्रिय कर साइबर अपराधियों को बेचने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अन्तर्राज्यीय गिरोह के 09 सदस्यों को किया गया गिरफ्तार ।*
*➡️अभियुक्तों द्वारा गांव-गांव में फेरी लगाकर चोरी, खोए हुए एवं खराब मोबाइल फोन सस्ते दामों में खरीदकर उनके मदरबोर्ड बदलकर IMEI ब्लॉक/आंशिक रुप से खराब डिवाइस को पुनः सक्रिय कर अवैध रूप से साइबर अपराधियों को किया जाता था सप्लाई ।*
*➡️अभियुक्तों के कब्जे से कुल 88 एंड्रायड/की-पैड मोबाइल, 92 मोबाइल मदरबोर्ड, 66 मोबाइल बैटरी, 20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल व 11 हजार रुपए सहित 07 दोपहिया वाहन बरामद ।*
*विवरण-* पुलिस अधीक्षक बांदा श्री पलाश बंसल के कुशल निर्देशन जनपद में साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक बांदा श्री शिवराज व अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी साइबर सुश्री मेविस टॉक के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस थाना बांदा के प्रभारी निरीक्षक एवं उनकी टीम द्वारा चोरी, खोए हुए, खराब एवं साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त मोबाइल फोन की खरीद-फरोख्त कर उन्हें तकनीकी रूप से पुनः सक्रिय कर साइबर अपराधियों को सप्लाई करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अन्तर्राज्यीय गिरोह के 09 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है । गौरतलब हो कि दिनांक 16.04.2026 को शाम पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि बुन्देलखंड एक्सप्रेस वे ग्राम चहितारा के पास कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के भारी मात्रा में मोबाइल के साथ होने की सूचना प्राप्त हुई । सूचना पर तत्काल साइबर क्राइम पुलिस थाना व विश्वविद्यालय चौकी की पुलिस टीम द्वारा मौके पर जाकर घेराबन्दी करते हुए 09 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया तथा उनके पास से भारी मात्रा में पुराने मोबाइल फोन, मोबाइल फोन के मदरबोर्ड, मोबाइल की बैटरी, मोबाइल के फर्जी क्रय बिल आदि बरामद हुए । जिनमें 41 एंड्रायड मोबाइल फोन, 38 की-पैड फोन, 92 मोबाइल के मदरबोर्ड, 66 मोबाइल की बैटरी, 20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल, 11 हजार रुपए नकद, 07 दोपहिया वाहन, 09 मोबाइल फोन जामा तलाशी से बरामद हुए । पुलिस द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा गांव-गांव में घूम-घूमकर पुराने, चोरी किए हुए, खराब एवं साइबर ठगी/फ्रॉड आदि में प्रयुक्त किए हुए मोबाइल फोन को सस्ते दामों में खरीदते थे और डीसी मशीन का प्रयोग कर मदरबोर्ड आदि की जांच करते थे जिन मोबाइल फोन का मदरबोर्ड सही पाया जाता था उन्हे विभिन्न साइबर ठगी के गिरोह को अच्छे दामों में बेच देते थे । साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त जिन मोबाइल फोन का IMEI नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था/रहता था उन मोबाइल फोन के मदरबोर्ड व अन्य महत्वपूर्ण पार्ट्स को निकालकर उन्हे अन्य मोबाइल फोन में लगा देते थे, या अलग-अलग पार्ट्स को संयोजित कर एक नया मोबाइल फोन तैयार कर साइबर ठगी में उसका प्रयोग  करते थे । इनके द्वारा राजस्थान और हरियाणा राज्य में विभिन्न साइबर ठगी के गिरोह को इस तरह के मोबाइल फोन बेचना/सप्लाई करना स्वीकार किया गया । पुलिस द्वारा इस सम्बन्ध में गहनता से जांच की जा रही है कि इनके गिरोह में और कितने लोग शामिल है एवं कहां-कहां इनके द्वारा पुराने मोबाइल फोन को सप्लाई की जाती है/की गई है । बांदा पुलिस द्वारा आम जनमानस से अपील की गई है कि सस्ते व लालच के चक्कर में चोरी अथवा संदिग्ध स्रोत से मोबाइल फोन खरीदने से बचें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें ।
*बरामदगी-*
▪️88 एंड्रायड/की-पैड मोबाइल फोन
▪️92 मोबाइल के मदरबोर्ड
▪️66 मोबाइल की बैटरी
▪️20 फर्जी/कूटरचित मोबाइल क्रय बिल
▪️11 हजार रुपए नकद
▪️07 दोपहिया वाहन
*गिरफ्तार अभियुक्त-*
1. मुस्तकीम पुत्र मुस्ताक रजा निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
2. अरमान पुत्र मुस्ताक रजा निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
3. अनमोल पुत्र मुस्ताक निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
4. असलम पुत्र भूरे निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
5. साहिल अली पुत्र शौकत अली निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
6. समीम पुत्र नवाव निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
7. रेहान पुत्र नवाव निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
8. अमिर पुत्र शौकत अली निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
9. मुस्ताक रजा पुत्र भूरे खां निवासी नवावगंज जनपद फतेहगढ़ ।
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    Surash Sahu
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    2 hrs ago
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