अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल, परिजनों ने मंदिर प्रशासन पर कार्रवाई की मांग की अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अशोकधाम मंदिर में भगदड़ के बाद अब जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी के बावजूद सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का सवाल है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? परिजनों ने घटना की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मृतकों के परिजनों ने मंदिर प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा करनी चाहिए और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल, परिजनों ने मंदिर प्रशासन पर कार्रवाई की मांग की अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अशोकधाम मंदिर में भगदड़ के बाद अब जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी के बावजूद सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का सवाल है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? परिजनों ने घटना की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मृतकों के परिजनों ने मंदिर प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा करनी चाहिए और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
- अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन पर सवाल, परिजनों ने मंदिर प्रशासन पर कार्रवाई की मांग की अशोकधाम हादसे के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल अशोकधाम मंदिर में भगदड़ के बाद अब जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी के बावजूद सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों का सवाल है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? परिजनों ने घटना की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मृतकों के परिजनों ने मंदिर प्रशासन के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा करनी चाहिए और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।1
- देवघर से लौटने के क्रम में बरबीघा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण का प्रयास रहा चर्चा में बरबीघा शेखपुरा खबर.. संवाददाता: तरुण कुमार के रिपोर्ट... *बरबीघा सिटी खबर... *देवघर से लौटने के क्रम में बरबीघा पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण का प्रयास रहा चर्चा में बरबीघा। देवघर से वापस लौटने के क्रम में बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार सोमवार को बरबीघा पहुंचे। उनके बरबीघा पहुंचने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और समर्थकों के बीच हलचल देखने को मिली। इस दौरान मंत्री ने बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया। मंत्री प्रतिमा स्थल पर पहुंचे और सीढ़ियों के रास्ते प्रतिमा के पास जाने लगे। प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए उन्होंने कुछ सीढ़ियां भी चढ़ीं, लेकिन कुछ सीढ़ियां ऊपर जाने के बाद वे अचानक वापस नीचे लौट आए। इसके बाद वे प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं कर सके। मंत्री के इस तरह प्रतिमा स्थल से वापस लौटने की घटना वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। मौके पर मौजूद लोग आपस में तरह-तरह की चर्चा करते नजर आए। हालांकि, मंत्री के सीढ़ियों से वापस लौटने के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। श्री बाबू की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे मंत्री गौरतलब है कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, जिन्हें बिहार केसरी के नाम से जाना जाता है, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री थे। बिहार के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। बरबीघा और आसपास के क्षेत्र में भी श्री बाबू की विरासत और उनके योगदान को लेकर लोगों में विशेष सम्मान की भावना है। इसी कारण किसी भी राजनीतिक अथवा सार्वजनिक प्रतिनिधि का श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करना स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। स्वास्थ्य मंत्री के प्रतिमा स्थल पर पहुंचने और फिर बिना माल्यार्पण किए लौटने की घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। मौके पर बनी रही लोगों की नजर मंत्री के प्रतिमा स्थल पर पहुंचने के दौरान वहां मौजूद लोगों की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही। कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद जब मंत्री वापस लौटे तो वहां मौजूद लोगों के बीच इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, स्वास्थ्य मंत्री के बरबीघा आगमन और श्री बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के प्रयास के बाद वापस लौटने का मामला स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।4
- बेगूसराय पहुंचे दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति का छात्रों ने किया विरोध।। छात्र का मांग है की डिग्री कॉलेज में विस्तार केंद्र का चालू किया जाए।।1
- विधायक ने एसडीएम की कार्रवाई पर उठाए सवाल, कड़े शब्दों में बोलकर एसडीएम ने काटा फोन, विभाग पर एफआईआर दर्ज करने की मांग किसी का जान गया है सुनते ही एसडीएम ने फोन काट दिया, विधायक ने एसडीएम पर अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया है। बख्तियारपुर में तीसरे सोमवारी को लेकर गंगा स्नान करने गई सात बच्ची डूबने लगी जिसमें से तीन को स्थानीय ने बचा लिया, लेकिन चार डूब गई। जिसमें से तीन का शव बाहर निकाला गया है वहीं एक लापता है। मामले को लेकर स्थानीय विधायक अरुण कुमार शाह मौके पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि परिजनों को मुआवजा मिलने से क्या वह बच्ची लौट जाएगी, आगे ऐसी घटना दोबारा ना हो इसके लिए प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने जल संसाधन विभाग के एसडीओ से बात की लेकिन वह लखीसराय गए हुए थे, इसके बाद उन्होंने एसडीएम को कॉल किया तो एसडीएम गरिमा लोहिया ने उनसे कड़े शब्द में पूछा क्या बात है, उन्होंने उनके ऐसे लैंग्वेज पर आपत्ति जताई है। जब इन्होंने उन्हें घाट पर आकर वर्तमान स्थिति देखने को कहा तो उन्होंने फोन काट दिया। इसके बाद उन्होंने डीएम को फोन किया और डीएम ने उनकी सराहना की है। गंगा घाट के चैनल में गंगा बालू की कटाई को लेकर उन्होंने कहा कि विभाग पर एफआईआर होनी चाहिए। इसलिए उन्होंने एसडीएम को मौके पर बुलाया है, मामले की जांच होनी चाहिए और दोषी पदाधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए।1
- #लखीसराय #अशोकधाम में बड़ा #हा६सा! कई मौ !त कई घायM 🥺 | Lakhisarai | सावन सोमवारी मेला | Mobile Tv New1
- तीनों डूबे युवकों के शव बरामद, अलग-अलग स्थानों से मिले शव; इलाके में मचा हड़कंप1
- रानीसराय जहाज घाट पर बड़ा हादसा: स्नान के दौरान एक ही परिवार के चार लोग गहरे पानी में समाए, SDRF ने दो शव निकाले बख्तियारपुर। सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर सोमवार, 17 अगस्त की सुबह बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के रानीसराय जहाज घाट पर स्नान करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। एक ही परिवार के चार लोग गहरे पानी में डूब गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक परिवार के कुल सात लोग घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। इनमें तीन लोग अलग स्नान कर रहे थे, जबकि चार लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर साथ में स्नान कर रहे थे। इसी दौरान चारों लोग धीरे-धीरे गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते पानी में समा गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों के साथ पुलिस प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और लापता लोगों की तलाश शुरू की। SDRF की टीम ने करीब सुबह 9:30 बजे नंदिनी कुमारी और राधिका को पानी से बाहर निकाला। लापता/डूबने वालों की पहचान आरती कुमारी (21 वर्ष), पिता अवधेश चंद्रवंशी; नंदिनी कुमारी (16 वर्ष), पिता अवधेश चंद्रवंशी; राधिका (15 वर्ष), पिता कमलेश चंद्रवंशी; और बबली कुमारी (करीब 12 वर्ष), पिता मंटू चंद्रवंशी के रूप में बताई जा रही है। सभी बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के करनौती पंचायत अंतर्गत रानीसराय गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, परिवार के बच्चे मैट्रिक की परीक्षा के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहे थे। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है। मौके पर प्रशासन और SDRF की टीम द्वारा अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है।1
- सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल लखीसराय खबर... संवाददाता: तरुण कुमार की रिपोर्ट.. * बिहार/ लखीसराय/ अशोक धाम/ सावन की तीसरी सोमवारी / बड़ा हादसा... सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ा हादसा, भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल लखीसराय। सावन की तीसरी सोमवारी के पावन अवसर पर लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम स्थित श्री इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार की सुबह आस्था का माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया। भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जलाभिषेक के लिए उमड़ा था श्रद्धालुओं का सैलाब सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण अशोक धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। भगवान शिव के जलाभिषेक और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में थी और भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। इसी दौरान मंदिर के आसपास अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। अशोक धाम हॉल्ट की ओर से श्रद्धालुओं के पहुंचने और भारी भीड़ के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। बिजली के पोल और अफवाह के बाद मची भगदड़ प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के दौरान एक बिजली का पोल/तार गिरने की स्थिति बनी। इसके बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि बिजली का करंट फैल गया है। अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में अचानक दहशत फैल गई और लोग सुरक्षित निकलने के लिए एक-दूसरे को धक्का देने लगे। देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की प्रशासनिक जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना कुछ ही मिनटों में इतनी तेजी से हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। भीड़ के दबाव में कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और उनके ऊपर से दूसरे लोग निकलते चले गए। सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई की गई, जबकि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। लखीसराय सदर अस्पताल में घायलों के पहुंचने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। अपनों की तलाश में लोग अस्पताल में इधर-उधर भटकते नजर आए। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव कार्य घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और भीड़ नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। घटना ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सावन की सोमवारी पर अशोक धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। ऐसे में प्रवेश-निकास व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पुलिस बल और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को सहायता हादसे पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई है। घायलों के समुचित इलाज के लिए भी प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय नेताओं ने भी घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की पूरी सच्चाई अशोक धाम हादसे ने सावन जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल प्रशासन घटना के प्रत्येक पहलू की जांच कर रहा है। बिजली के पोल/तार की स्थिति, अफवाह कैसे फैली, भीड़ किस दिशा में बढ़ी और बैरिकेडिंग व सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी थी—इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है। सावन की तीसरी सोमवारी पर भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक उत्सव देखते ही देखते एक भयावह त्रासदी में बदल गया। सात महिलाओं की मौत से पूरे लखीसराय और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है।4