रायगढ़ जिला पुलिस बल के लिए आज का दिन भावनात्मक और गौरवपूर्ण रहा, जब उप निरीक्षक हेतराम सिदार और आरक्षक निस्तोर तिर्की अपनी लंबी और अनुकरणीय सेवा के बाद विधिवत सेवानिवृत्त हुए। पुलिस कार्यालय रायगढ़ में आयोजित एक गरिमामय सेवा सम्मान समारोह में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने दोनों पुलिस अधिकारियों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया और विभाग की ओर से उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों के परिजन भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आत्मीय बन गया। रक्षित निरीक्षक श्री अमित सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक हेतराम सिदार वर्ष 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत और कार्यकुशलता से पदोन्नति प्राप्त करते हुए उन्होंने कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में लगभग चार दशकों तक सेवाएं दीं, और वर्ष 2014 में उप निरीक्षक बने। वे डीसीआरबी प्रभारी के रूप में रायगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। वहीं, आरक्षक निस्तोर तिर्की ने वर्ष 1983 में जिला जगदलपुर से आरक्षक के रूप में अपना पुलिस जीवन शुरू किया था। वर्ष 1993 में उनका स्थानांतरण रायगढ़ हुआ, जहाँ उन्होंने यातायात, कोतवाली, चौकी जोबी, रक्षित केंद्र, जूटमिल, कापू, धरमजयगढ़ और लैलूंगा जैसे विभिन्न थानों एवं इकाइयों में कुशलतापूर्वक जिम्मेदारियाँ निभाईं और ट्रेजरी गार्ड धरमजयगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। गर्व की बात यह भी है कि उनका पुत्र सिकंदर तिर्की भी वर्तमान में पुलिस विभाग में सेवारत है, जो परिवार की दूसरी पीढ़ी के रूप में पुलिस सेवा का दायित्व निभा रहा है। समारोह में दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने लंबे सेवाकाल के अनुभव साझा किए। उप निरीक्षक हेतराम सिदार ने पुलिस विभाग में सेवा को अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय बताया, जबकि निस्तोर तिर्की ने कहा कि वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करना उनके लिए गर्व का विषय रहा है, और उनके पुत्र के भी इसी विभाग में होने से यह गर्व और भी बढ़ गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए आश्वस्त किया कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का औपचारिक समापन है, विभाग से उनका आत्मीय रिश्ता सदैव बना रहेगा और भविष्य में किसी भी आवश्यकता पर विभाग उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम का समापन उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर दी गई शुभकामनाओं और स्वल्पाहार के साथ एक आत्मीय विदाई के साथ हुआ।
रायगढ़ जिला पुलिस बल के लिए आज का दिन भावनात्मक और गौरवपूर्ण रहा, जब उप निरीक्षक हेतराम सिदार और आरक्षक निस्तोर तिर्की अपनी लंबी और अनुकरणीय सेवा के बाद विधिवत सेवानिवृत्त हुए। पुलिस कार्यालय रायगढ़ में आयोजित एक गरिमामय सेवा सम्मान समारोह में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने दोनों पुलिस अधिकारियों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया और विभाग की ओर से उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों के परिजन भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आत्मीय बन गया। रक्षित निरीक्षक श्री अमित सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक हेतराम सिदार वर्ष 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत और कार्यकुशलता से पदोन्नति प्राप्त करते हुए उन्होंने
कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में लगभग चार दशकों तक सेवाएं दीं, और वर्ष 2014 में उप निरीक्षक बने। वे डीसीआरबी प्रभारी के रूप में रायगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। वहीं, आरक्षक निस्तोर तिर्की ने वर्ष 1983 में जिला जगदलपुर से आरक्षक के रूप में अपना पुलिस जीवन शुरू किया था। वर्ष 1993 में उनका स्थानांतरण रायगढ़ हुआ, जहाँ उन्होंने यातायात, कोतवाली, चौकी जोबी, रक्षित केंद्र, जूटमिल, कापू, धरमजयगढ़ और लैलूंगा जैसे विभिन्न थानों एवं इकाइयों में कुशलतापूर्वक जिम्मेदारियाँ निभाईं और ट्रेजरी गार्ड धरमजयगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। गर्व की बात यह भी है कि उनका पुत्र सिकंदर तिर्की भी वर्तमान में पुलिस विभाग में सेवारत है, जो परिवार की दूसरी पीढ़ी के रूप में पुलिस सेवा का दायित्व निभा रहा है। समारोह में दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने लंबे सेवाकाल के
अनुभव साझा किए। उप निरीक्षक हेतराम सिदार ने पुलिस विभाग में सेवा को अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय बताया, जबकि निस्तोर तिर्की ने कहा कि वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करना उनके लिए गर्व का विषय रहा है, और उनके पुत्र के भी इसी विभाग में होने से यह गर्व और भी बढ़ गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए आश्वस्त किया कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का औपचारिक समापन है, विभाग से उनका आत्मीय रिश्ता सदैव बना रहेगा और भविष्य में किसी भी आवश्यकता पर विभाग उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम का समापन उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर दी गई शुभकामनाओं और स्वल्पाहार के साथ एक आत्मीय विदाई के साथ हुआ।
- रायगढ़ में अपराध की दुनिया से बाहर आकर तीन दिन के भीतर ही एक और खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले दो आदतन अपराधियों के दुस्साहस को रायगढ़ पुलिस ने नाकाम कर दिया है। कोतवाली पुलिस ने देर रात ढिमरापुर रोड पर एक युवक से हुई ₹15,200 की लूट के मामले में मात्र 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर दोबारा जेल भेज दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने इस त्वरित कार्रवाई पर अपराधियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून तोड़ने वालों पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना 29-30 जून की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे की है। जगन्नाथ हरिशचंद्र ज्वेलर्स के 31 वर्षीय सेल्समैन त्रिनाथ सामल रायपुर से काम निपटाकर रायगढ़ लौटे थे। मालिक को सामान सौंपकर जब वह अपने कमरे की ओर जा रहे थे, तभी ढिमरापुर रोड पर आदित्य मोटर्स के पास घात लगाए बैठे दो युवकों ने उन्हें रोका। गुंडागर्दी दिखाते हुए, आरोपियों ने त्रिनाथ को पीटा, जमीन पर पटका और उनकी जेब से ₹15,200 लूटकर चैतन्य नगर की ओर फरार हो गए। मामला दर्ज होते ही एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने का अल्टीमेटम दिया। कोतवाली पुलिस ने तुरंत घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें काले और मटमैले रंग की शर्ट पहने दो संदिग्ध कैमरे में कैद हो गए। इसके बाद पुलिस के मुखबिर तंत्र ने अपना काम किया और दोनों की पहचान रामभाठा निवासी 19 वर्षीय नीरज टोप्पो और 22 वर्षीय शैलेष मिंज के रूप में हुई। पुलिस टीम ने बिना देरी किए रामभाठा मुक्तिधाम के पास दबिश देकर दोनों को धर दबोचा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी आदतन अपराधी हैं, जिनमें से एक आरोपी तो महज तीन दिन पहले ही जेल से छूटा था। लूट के पैसों से दोनों रातों-रात झारसुगुड़ा (ओडिशा) भाग गए और वहां ऐशो-आराम में अधिकांश रकम उड़ा दी। पुलिस ने उनके पास से सिर्फ ₹700 बरामद किए हैं। पीड़ित त्रिनाथ सामल ने मजिस्ट्रेट के सामने पहचान परेड में दोनों आरोपियों को पहचान लिया है। नीरज टोप्पो के खिलाफ पहले से 2 चोरी और 1 लूट का मामला दर्ज है, जबकि शैलेष मिंज के खिलाफ चोरी और मारपीट के मामले दर्ज हैं। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने इस कार्रवाई पर कहा है कि रायगढ़ पुलिस लूट, चोरी और असामाजिक गतिविधियों के विरुद्ध पूरी दृढ़ता से कार्रवाई कर रही है और आम नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरे ऑपरेशन में एसएसपी के निर्देशन तथा एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी व सीएसपी श्री मयंक मिश्रा के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल और उनकी टीम (उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, पीएसआई प्रिया साहू, एएसआई कोसो सिंह, आरक्षक उत्तम सारथी और कोमल तिवारी) का एक्शन बेहद शानदार रहा।3
- रायगढ़ में खुले बिजली के तार अब जानलेवा खतरा बन गए हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए, रायगढ़ महापौर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं ताकि इस खतरे को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।1
- रायगढ़ जिला पुलिस बल के लिए आज का दिन भावनात्मक और गौरवपूर्ण रहा, जब उप निरीक्षक हेतराम सिदार और आरक्षक निस्तोर तिर्की अपनी लंबी और अनुकरणीय सेवा के बाद विधिवत सेवानिवृत्त हुए। पुलिस कार्यालय रायगढ़ में आयोजित एक गरिमामय सेवा सम्मान समारोह में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने दोनों पुलिस अधिकारियों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया और विभाग की ओर से उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों के परिजन भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल और भी आत्मीय बन गया। रक्षित निरीक्षक श्री अमित सिंह ने बताया कि उप निरीक्षक हेतराम सिदार वर्ष 1984 में अविभाजित मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरक्षक के पद पर भर्ती हुए थे। अपनी मेहनत और कार्यकुशलता से पदोन्नति प्राप्त करते हुए उन्होंने कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर सहित विभिन्न जिलों में लगभग चार दशकों तक सेवाएं दीं, और वर्ष 2014 में उप निरीक्षक बने। वे डीसीआरबी प्रभारी के रूप में रायगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। वहीं, आरक्षक निस्तोर तिर्की ने वर्ष 1983 में जिला जगदलपुर से आरक्षक के रूप में अपना पुलिस जीवन शुरू किया था। वर्ष 1993 में उनका स्थानांतरण रायगढ़ हुआ, जहाँ उन्होंने यातायात, कोतवाली, चौकी जोबी, रक्षित केंद्र, जूटमिल, कापू, धरमजयगढ़ और लैलूंगा जैसे विभिन्न थानों एवं इकाइयों में कुशलतापूर्वक जिम्मेदारियाँ निभाईं और ट्रेजरी गार्ड धरमजयगढ़ से सेवानिवृत्त हुए। गर्व की बात यह भी है कि उनका पुत्र सिकंदर तिर्की भी वर्तमान में पुलिस विभाग में सेवारत है, जो परिवार की दूसरी पीढ़ी के रूप में पुलिस सेवा का दायित्व निभा रहा है। समारोह में दोनों सेवानिवृत्त अधिकारियों ने अपने लंबे सेवाकाल के अनुभव साझा किए। उप निरीक्षक हेतराम सिदार ने पुलिस विभाग में सेवा को अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय बताया, जबकि निस्तोर तिर्की ने कहा कि वर्दी पहनकर समाज और देश की सेवा करना उनके लिए गर्व का विषय रहा है, और उनके पुत्र के भी इसी विभाग में होने से यह गर्व और भी बढ़ गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल कुमार सोनी ने उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए आश्वस्त किया कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का औपचारिक समापन है, विभाग से उनका आत्मीय रिश्ता सदैव बना रहेगा और भविष्य में किसी भी आवश्यकता पर विभाग उनके साथ खड़ा रहेगा। कार्यक्रम का समापन उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर दी गई शुभकामनाओं और स्वल्पाहार के साथ एक आत्मीय विदाई के साथ हुआ।3
- सभी सतलोक आश्रमों में अनेकों दहेज रहित विवाह समारोह सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं। इन आयोजनों के माध्यम से कई जोड़ों ने बिना किसी दहेज के विवाह बंधन में बंधकर एक मिसाल कायम की है। इन प्रेरणादायक विवाहों की पूरी वीडियो 'SANT RAMPAL JI MAHARAJ YouTube Channel' पर अवश्य देखी जा सकती है।1
- सक्ति पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए एक ब्लाइंड मर्डर का खुलासा केवल 5 दिनों के भीतर कर दिया है। यह हत्या प्रेम प्रसंग का परिणाम थी, जिसकी पूरी साजिश पति-पत्नी ने मिलकर रची थी। पूर्णिमा चौहान की हत्या के लिए 4 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी, और घटना के बाद आरोपियों को 2 लाख रुपये की पहली किस्त भी दी गई। 26 जून को दो नकाबपोशों ने घर में घुसकर पूर्णिमा चौहान को गोली मार दी थी। पुलिस ने इस मामले में छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र से कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में मुख्य शूटर गौरीशंकर सिदार और सुपारी किलिंग ऑपरेशन का orchestrator राजेंद्र महंत भी शामिल हैं। इस पूरी साजिश का पर्दाफाश टावर डंप, कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच के बाद हुआ। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्तौल, जिंदा कारतूस, एक बाइक, कई मोबाइल फोन और नगदी भी बरामद की है। सभी आरोपियों पर BNS की धारा 103(1), 61(2), 3(5) और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें कोर्ट में पेश किया गया है।1
- सक्ती पुलिस ने 26 जून को हुए महिला हत्याकांड की गुत्थी सफलतापूर्वक सुलझा ली है। पुलिस ने इस अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया है कि इस हत्याकांड की मुख्य वजह प्रेम संबंध था। मृतक महिला के पति-पत्नी पर इस पूरी साजिश को रचने का आरोप है। महिला की हत्या के लिए 4 लाख रुपये की सुपारी देने का दावा किया गया है, जिसके बाद दो शूटरों ने गोली मारकर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी के पास से 1 पिस्टल और 4 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा, मामले से संबंधित 2 मोटरसाइकिलें, 7 मोबाइल फोन और 71,500 रुपए नकद भी जब्त किए गए हैं।1
- एक ओर देश 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत पारेमेर का आश्रित ग्राम कौहाड़ाही आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के बीच बसा यह आदिवासी बहुल गाँव, जो विशेष पिछड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों की आबादी वाला है, इसकी तस्वीर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गहरी खाई को उजागर करती है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन के लिए कोई समुचित कच्चा मार्ग उपलब्ध है, जिससे बरसात के मौसम में हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कई परिवार आज भी मिट्टी के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी यहाँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंतनीय है, क्योंकि गाँव में केवल एक प्राथमिक शाला संचालित है, जिसका संचालन भी आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी को दर्शाता है। सरकारें आदिवासी क्षेत्रों के विकास और मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, आवास, शिक्षा, पेयजल तथा विद्युत के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये की योजनाओं और बजट का दावा करती हैं। इसके बावजूद, कौहाड़ाही जैसे गाँवों की यह स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर ये विकास योजनाएँ धरातल तक क्यों नहीं पहुँच पा रही हैं और क्यों आदिवासी परिवार आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को विवश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं का नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाने का समय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन कौहाड़ाही जैसे उपेक्षित गाँवों की ओर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाएगा, ताकि इस दूरस्थ आदिवासी अंचल में भी विकास के बड़े दावे पूरे हो सकें।2
- रायगढ़ जिले के तमनार में पुलिस ने आदतन झगड़ा-मारपीट करने वाले सात उपद्रवी युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद, सभी सातों युवकों के लिए जेल वारंट जारी किए गए हैं।1