अप्रैल में ही भीषण गर्मी का कहर, शहर को हरा-भरा बनाने की मांग, कट गए जंगल रह गए ठूंठ अप्रैल में ही भीषण गर्मी का कहर, शहर को हरा-भरा बनाने की मांग तेज राजिम।अप्रैल माह की शुरुआत होते ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सुबह से ही सूरज की तीखी किरणें लोगों को झुलसा रही हैं, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आता है। गर्मी का असर इतना बढ़ गया है कि लोग जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। दिन चढ़ने के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे लोगों का घरों में रहना ही मजबूरी बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान में लगातार वृद्धि के कारण बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को तेज धूप में आना-जाना कठिन हो गया है, वहीं दिहाड़ी मजदूरों और ठेले-खोमचे वालों के लिए दोपहर का समय बेहद कठिन साबित हो रहा है। वहीं, बाजारों में भी ग्राहकों की संख्या में कमी देखी जा रही है, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव के चलते बिजली और पानी की मांग भी बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में दोपहर के समय बिजली कटौती और पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। खासकर ग्रामीण और आसपास के इलाकों में पेयजल की समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप लेती जा रही है। इस भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों ने नगर को हरा-भरा बनाने की मांग उठाई है। लोगों का मानना है कि यदि शहर में अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएं, तो तापमान में कुछ हद तक कमी लाई जा सकती है और वातावरण को भी शुद्ध रखा जा सकता है। पेड़ों की कमी के कारण गर्म हवाएं सीधे लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे गर्मी का असर और अधिक महसूस हो रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि शहर के प्रमुख स्थानों, सड़कों के किनारे, शासकीय कार्यालय परिसरों और खाली पड़ी जमीनों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए। साथ ही पहले से लगे पेड़ों की देखरेख, नियमित सिंचाई और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे गर्मी में लोगों को छाया और राहत प्रदान कर सकें। नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि प्रत्येक वार्ड में हरियाली बढ़ाने के लिए जनभागीदारी से अभियान चलाया जाए। नगरवासियों का यह भी कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में इसी तरह की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उन्होंने प्रशासन से जल्द ही ठोस योजना बनाकर शहर को हरियाली से आच्छादित करने, पार्कों का विकास करने और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में काम करने की मांग की है। यदि समय रहते इस दिशा में पहल की जाती है, तो आने वाले वर्षों में शहरवासियों को भीषण गर्मी से काफी राहत मिल सकती है। साथ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और शहर को रहने योग्य बनाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।
अप्रैल में ही भीषण गर्मी का कहर, शहर को हरा-भरा बनाने की मांग, कट गए जंगल रह गए ठूंठ अप्रैल में ही भीषण गर्मी का कहर, शहर को हरा-भरा बनाने की मांग तेज राजिम।अप्रैल माह की शुरुआत होते ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सुबह से ही सूरज की तीखी किरणें लोगों को झुलसा रही हैं, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आता है। गर्मी का असर इतना बढ़ गया है कि लोग जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। दिन चढ़ने के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे लोगों का घरों में रहना ही मजबूरी बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान में लगातार वृद्धि के कारण बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को तेज धूप में आना-जाना कठिन हो गया है, वहीं दिहाड़ी मजदूरों और ठेले-खोमचे वालों के लिए दोपहर का समय बेहद कठिन साबित हो रहा है। वहीं, बाजारों में भी ग्राहकों की संख्या में कमी देखी जा रही है, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव के चलते बिजली और पानी की मांग भी बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में दोपहर के समय बिजली कटौती और पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। खासकर ग्रामीण और आसपास के इलाकों में पेयजल की समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप लेती जा रही है। इस भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों ने नगर को हरा-भरा बनाने की मांग उठाई है। लोगों का मानना है कि यदि शहर में अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएं, तो तापमान में कुछ हद तक कमी लाई जा सकती है और वातावरण को भी शुद्ध रखा जा सकता है। पेड़ों की कमी के कारण गर्म हवाएं सीधे लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे गर्मी का असर और अधिक महसूस हो रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि शहर के प्रमुख स्थानों, सड़कों के किनारे, शासकीय कार्यालय परिसरों और खाली पड़ी जमीनों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए। साथ ही पहले से लगे पेड़ों की देखरेख, नियमित सिंचाई और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे गर्मी में लोगों को छाया और राहत प्रदान कर सकें। नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि प्रत्येक वार्ड में हरियाली बढ़ाने के लिए जनभागीदारी से अभियान चलाया जाए। नगरवासियों का यह भी कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में इसी तरह की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उन्होंने प्रशासन से जल्द ही ठोस योजना बनाकर शहर को हरियाली से आच्छादित करने, पार्कों का विकास करने और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में काम करने की मांग की है। यदि समय रहते इस दिशा में पहल की जाती है, तो आने वाले वर्षों में शहरवासियों को भीषण गर्मी से काफी राहत मिल सकती है। साथ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और शहर को रहने योग्य बनाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।
- अप्रैल में ही भीषण गर्मी का कहर, शहर को हरा-भरा बनाने की मांग तेज राजिम।अप्रैल माह की शुरुआत होते ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। सुबह से ही सूरज की तीखी किरणें लोगों को झुलसा रही हैं, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आता है। गर्मी का असर इतना बढ़ गया है कि लोग जरूरी काम के अलावा घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। दिन चढ़ने के साथ ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे लोगों का घरों में रहना ही मजबूरी बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान में लगातार वृद्धि के कारण बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को तेज धूप में आना-जाना कठिन हो गया है, वहीं दिहाड़ी मजदूरों और ठेले-खोमचे वालों के लिए दोपहर का समय बेहद कठिन साबित हो रहा है। वहीं, बाजारों में भी ग्राहकों की संख्या में कमी देखी जा रही है, जिससे व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव के चलते बिजली और पानी की मांग भी बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में दोपहर के समय बिजली कटौती और पानी की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। खासकर ग्रामीण और आसपास के इलाकों में पेयजल की समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप लेती जा रही है। इस भीषण गर्मी के बीच शहरवासियों ने नगर को हरा-भरा बनाने की मांग उठाई है। लोगों का मानना है कि यदि शहर में अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएं, तो तापमान में कुछ हद तक कमी लाई जा सकती है और वातावरण को भी शुद्ध रखा जा सकता है। पेड़ों की कमी के कारण गर्म हवाएं सीधे लोगों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे गर्मी का असर और अधिक महसूस हो रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि शहर के प्रमुख स्थानों, सड़कों के किनारे, शासकीय कार्यालय परिसरों और खाली पड़ी जमीनों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए। साथ ही पहले से लगे पेड़ों की देखरेख, नियमित सिंचाई और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे गर्मी में लोगों को छाया और राहत प्रदान कर सकें। नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया है कि प्रत्येक वार्ड में हरियाली बढ़ाने के लिए जनभागीदारी से अभियान चलाया जाए। नगरवासियों का यह भी कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में इसी तरह की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उन्होंने प्रशासन से जल्द ही ठोस योजना बनाकर शहर को हरियाली से आच्छादित करने, पार्कों का विकास करने और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में काम करने की मांग की है। यदि समय रहते इस दिशा में पहल की जाती है, तो आने वाले वर्षों में शहरवासियों को भीषण गर्मी से काफी राहत मिल सकती है। साथ ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और शहर को रहने योग्य बनाने में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।1
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- तिल्दा-नेवरा में सेवा का अनोखा उदाहरण, महिला मंडल ने बांटा शरबत-छाछ1
- Post by सत्य के अंजोर न्यूज1
- भीम जयंती में आयोजित कव्वाली में सैकड़ो की संख्या में लोगों ने उठाया आनंद।1
- तिल्दा नेवरा में माहेश्वरी महिला मंडल के तत्वावधान में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गर्मी को देखते हुए सेवा कार्य का आयोजन किया गया। बुधवार, दिनांक 15 अप्रैल 2026 को बुधवार बाजार में प्याऊ, शरबत और छाछ वितरण का आयोजन किया गया। इस सेवा कार्य में हजारों राहगीरों ने शीतल पेय का लाभ उठाया और गर्मी से राहत पाई। जानकारी देते हुए भाई कैलाश गांधी ने बताया कि यह आयोजन समाज सेवा की भावना से हर वर्ष किया जाता है। कार्यक्रम में महिला मंडल की अध्यक्ष समत गांधी, सचिव कनक भट्टर, मयूरी डागा, समाज की वरिष्ठ सदस्य विमला देवी लाहोटी, डॉ. आशा भट्टर, उषा राठी, पूनम गांधी, राखी सोनी, शारदा राठी सहित बड़ी संख्या में महिला मंडल एवं समाज के सदस्य उपस्थित रहे। गर्मी के इस दौर में यह पहल लोगों के लिए राहत और सेवा का बेहतरीन उदाहरण बनी।4
- सहकार से समृद्धि: CM विष्णुदेव साय ने किया 515 नई सहकारी सोसायटियों का शुभारंभ, साजा के दनिया-सिल्ली-पथरिया में भी खुली समिति रायपुर/साजा, 15 जून 2026: छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन को नई गति देते हुए आज प्रदेश में *515 नवगठित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों* का एक साथ भव्य शुभारंभ हुआ। *मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी* के कर-कमलों से सहकारिता विभाग द्वारा साजा विधानसभा, बोरी-लिटिया भाजपा मंडल के *ग्राम दनिया (पंजीयन क्र. 3420), ग्राम सिल्ली (पंजीयन क्र. 3436) एवं ग्राम पथरिया (पंजीयन क्र. 3421)* की नवगठित सोसायटियों का विधिवत शुभारंभ किया गया। CM साय ने कहा कि नई समितियों से किसानों को धान उपार्जन, खाद-बीज, ऋण व भंडारण की सुविधा अब गांव में ही मिलेगी। यह 'मोदी की गारंटी' को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम है। *शुभारंभ अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे:* जिला किसान मोर्चा उपाध्यक्ष *श्री कृष्णा पटेल*, सोसायटी अध्यक्ष *श्री संजय कश्यप जी*, मीडिया प्रभारी *श्री दिनेश पटेल जी*, जिला युवा मोर्चा मंत्री *श्री राजेन्द्र पटेल जी*, सरपंच *श्री हुलास पटेल*, उपसरपंच *श्री हिमांचल पटेल*, प्राधिकृत अधिकारी दनिया *सुश्री प्रीति सोनी*, समिति प्रबंधक *श्री लेखराम साहू*, युवा मोर्चा उपाध्यक्ष *श्री शुभम मानिकपुरी*, मंडल उपाध्यक्ष पथरिया *श्री श्यामू पारकर*, कोषाध्यक्ष सिल्ली *श्री सीताराम पटेल*। इनके साथ *श्री गणेश पटेल, श्री रोमन पटेल, श्री बिरसिंग पटेल, श्री मानस पटेल, श्री पवन पटेल, पंच श्री ओमप्रकाश पटेल, पंच श्री पुन्नी पटेल, श्री महावीर पटेल, पूर्व सरपंच दनिया श्री रामपालक पटेल, श्री लक्ष्मीनारायण पटेल, समिति प्रबंधक श्री महेंद्र धीवर, श्री बृजलाल निषाद* एवं क्षेत्र के समस्त किसान बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।1
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