जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का। महागामा थाना क्षेत्र के कुसाहा गांव के मैदान में सुबह लोगों को एक नवजात बच्ची रोती हुई मिली। सोचिए… जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से देखा तक नहीं था, उसे खुले मैदान में अकेला छोड़ दिया गया। आखिर उस बच्ची की क्या गलती थी? उसने क्या कुसूर किया था? गलती अगर किसी बड़े से हुईy थी, मजबूरी अगर किसी परिवार की थी, परिस्थितियां अगर कठिन थीं—तो उसकी सजा इस मासूम को क्यों? जन्म लेते ही एक बच्चे को क्या चाहिए? मां का आंचल… मां की ममता… पिता का प्यार… और एक सुरक्षित घर। लेकिन इस बच्ची को क्या मिला? एक सुनसान मैदान… रोती हुई आवाज… और जिंदगी का पहला दिन ही एक ऐसी जगह, जहां कोई जानवर भी उसे नुकसान पहुंचा सकता था। जरा सोचिए, अगर उस सुबह किसी की नजर इस मासूम पर नहीं पड़ती तो क्या होता? किसी जानवर के हमले से उसकी जान जा सकती थी। ठंड, भूख या किसी दूसरी वजह से उसकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। लेकिन कहते हैं ना— मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। किसी की नजर उस मासूम पर पड़ी। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। महागामा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने साथ लेकर महागामा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। अब डॉक्टरों की टीम बच्ची की जांच और देखभाल कर रही है। लेकिन इस घटना के बाद हमारे सामने कई सवाल खड़े हैं। आखिर इस बच्ची को यहां कौन छोड़ गया? क्यों छोड़ गया? किन परिस्थितियों में छोड़ गया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए बिना सच्चाई जाने किसी महिला या परिवार को दोष देना सही नहीं होगा। लेकिन समाज के तौर पर हमें एक बात जरूर समझनी होगी— बच्चे कभी अपनी परिस्थितियों के जिम्मेदार नहीं होते। अगर किसी को मजबूरी है, अगर कोई नवजात बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो बच्चे को खुले में छोड़ना समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में पुलिस, अस्पताल, प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था से मदद ली जा सकती है। क्योंकि एक मासूम को सड़क, मैदान या सुनसान जगह पर छोड़ देना उसकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। आज यह बच्ची अस्पताल में सुरक्षित है। अब उम्मीद यही है कि यह मासूम स्वस्थ हो, इसे सुरक्षित संरक्षण मिले और इसे जिंदगी में वह प्यार मिले जिसकी हर बच्चे को जरूरत होती है। और जाते-जाते बस इतना सोचिए— अगर यह बच्ची आपकी होती… तो क्या आप इसे यूं अकेला छोड़ पाते? बच्चे की कोई गलती नहीं होती। गलत परिस्थितियों की सजा किसी मासूम को नहीं मिलनी चाहिए। अब सुनते हैं, इस घटना को लेकर मौके पर मौजूद महिलाओं और स्थानीय लोगों का क्या कहना है।
जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का। महागामा थाना क्षेत्र के कुसाहा गांव के मैदान में सुबह लोगों को एक नवजात बच्ची रोती हुई मिली। सोचिए… जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से देखा तक नहीं था, उसे खुले मैदान में अकेला छोड़ दिया गया। आखिर उस बच्ची की क्या गलती थी? उसने क्या कुसूर किया था? गलती अगर किसी बड़े से हुईy थी, मजबूरी अगर किसी परिवार की थी, परिस्थितियां अगर कठिन थीं—तो उसकी सजा इस मासूम को क्यों? जन्म लेते ही एक बच्चे को क्या चाहिए? मां का आंचल… मां की ममता… पिता का प्यार… और एक सुरक्षित घर। लेकिन इस बच्ची को क्या मिला? एक सुनसान मैदान… रोती हुई आवाज… और जिंदगी का पहला दिन ही एक ऐसी जगह, जहां कोई जानवर भी उसे नुकसान पहुंचा सकता था। जरा सोचिए, अगर उस सुबह किसी की नजर इस मासूम पर नहीं पड़ती तो क्या होता? किसी जानवर के हमले से उसकी जान जा सकती थी। ठंड, भूख या किसी दूसरी वजह से उसकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। लेकिन कहते हैं ना— मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। किसी की नजर उस मासूम पर पड़ी। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। महागामा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने साथ लेकर महागामा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। अब डॉक्टरों की टीम बच्ची की जांच और देखभाल कर रही है। लेकिन इस घटना के बाद हमारे सामने कई सवाल खड़े हैं। आखिर इस बच्ची को यहां कौन छोड़ गया? क्यों छोड़ गया? किन परिस्थितियों में छोड़ गया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए बिना सच्चाई जाने किसी महिला या परिवार को दोष देना सही नहीं होगा। लेकिन समाज के तौर पर हमें एक बात जरूर समझनी होगी— बच्चे कभी अपनी परिस्थितियों के जिम्मेदार नहीं होते। अगर किसी को मजबूरी है, अगर कोई नवजात बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो बच्चे को खुले में छोड़ना समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में पुलिस, अस्पताल, प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था से मदद ली जा सकती है। क्योंकि एक मासूम को सड़क, मैदान या सुनसान जगह पर छोड़ देना उसकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। आज यह बच्ची अस्पताल में सुरक्षित है। अब उम्मीद यही है कि यह मासूम स्वस्थ हो, इसे सुरक्षित संरक्षण मिले और इसे जिंदगी में वह प्यार मिले जिसकी हर बच्चे को जरूरत होती है। और जाते-जाते बस इतना सोचिए— अगर यह बच्ची आपकी होती… तो क्या आप इसे यूं अकेला छोड़ पाते? बच्चे की कोई गलती नहीं होती। गलत परिस्थितियों की सजा किसी मासूम को नहीं मिलनी चाहिए। अब सुनते हैं, इस घटना को लेकर मौके पर मौजूद महिलाओं और स्थानीय लोगों का क्या कहना है।
- पुलिस टीम द्वारा चेकिंग के दौरान 09 लीटर अवैध देशी शराब के साथ 01 अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार सकलडीहा पुलिस टीम द्वारा चेकिंग के दौरान 09 लीटर अवैध देशी शराब के साथ 01 अभियुक्त को किया गया गिरफ्तार *चंदौली-* *उच्चाधिकारीगण के निर्देशन में थानाध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार निषाद* के कुशल नेतृत्व में थाना सकलडीहा पुलिस टीम द्वारा चेकिंग के दौरान दिनांक 29.09.2026 को समय करीब 08.15 बजे ग्राम इटवा मेन रोड (देशी शराब की दुकान के पास) से 01 अभियुक्त को 200ml के 45 पैकेट (कुल 09 लीटर अवैध देशी शराब) के साथ गिरफ्तार किया गया तथा उसके कब्जे से अवैध शराब बरामद की गई। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान राजेश यादव पुत्र रामबिचार यादव निवासी ग्राम चाडी थाना कर्मा जनपद सोनभद्र (उम्र करीब 23 वर्ष) के रूप में हुई। गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर थाना सकलडीहा पर मु.अ.सं. 192/2026 धारा 60 आबकारी अधिनियम पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। *गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण-* राजेश यादव पुत्र रामबिचार यादव निवासी ग्राम चाडी थाना कर्मा जनपद सोनभद्र (उम्र करीब 23 वर्ष)। *पंजीकृत अभियोग का विवरण-* 1. मु.अ.सं. 192/2026 धारा 60 आबकारी अधिनियम थाना सकलडीहा जनपद चंदौली। *बरामदगी का दिनांक व स्थान-* दिनांक - 29.09.2026, स्थान - ग्राम इटवा मेन रोड (देशी शराब की दुकान के पास), थाना सकलडीहा जनपद चंदौली। *बरामदगी का विवरण-* 45 पाउच ब्लू लाईम देशी शराब (प्रत्येक 200ML, कुल 09 लीटर)। *गिरफ्तारी व बरामदगी में शामिल पुलिस टीम-* 1. थानाध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार निषाद थाना सकलडीहा जनपद चंदौली 2. उ0नि0 गोपाल तिवारी थाना सकलडीहा जनपद चंदौली 3. का0 संदीप यादव थाना सकलडीहा जनपद चंदौली 4. का0 सतीश पटेल थाना सकलडीहा जनपद चंदौली1
- अब अधिकारियों की विशेष टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के दूर-दराज के स्कूलों में जाकर करेगी छापेमारी सीडीओ अब अधिकारियों की विशेष टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के दूर-दराज के स्कूलों में जाकर करेगी छापेमारी सीडीओ चंदौली/दिनांक 28 सितम्बर, 2026 विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देशानुसार मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साई की अध्यक्षता में जिला शिक्षा एवं अनुश्रवण समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान जिले में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, परिषदीय विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और कायाकल्प अभियान की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में निर्माण कार्यों से संबंधित टेंडर प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप कराने के निर्देश दिए गए। सीडीओ ने कहा कि पारदर्शिता एवं गुणवत्ता प्रत्येक निर्माण कार्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के छात्रावासों में छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सीडीओ ने पर्याप्त सुरक्षा गार्ड, प्रभावी निगरानी व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाया जाए और शासन की प्राथमिकताओं का पूरी जिम्मेदारी से पालन हो। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, मध्याह्न भोजन (MDM) की गुणवत्ता बनाए रखने तथा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत शेष बचे मूलभूत अवस्थापना कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।डीबीटी (DBT) के तहत छात्रवृत्ति व ड्रेस की राशि के हस्तांतरण प्रक्रिया में तेजी लाने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा अब अधिकारियों की विशेष टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के दूर-दराज के स्कूलों में जाकर छापेमारी करेंगी रिपोर्ट से अवगत तत्काल कराएगी। समीक्षा के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले और अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें, अन्यथा जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार मौजूद रहे। उन्होंने समिति के समक्ष जिले में शिक्षा से जुड़ी योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों पर समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी, समस्त अपर पंचायत राज अधिकारी और अनुश्रवण समिति के नामित सदस्य भी उपस्थित रहे।2
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- प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर आज आम सभा हुआ कैसे क्या करना है.?1
- कैमूर/बिहार, मोहनियां चेकपोस्ट का डीएम-एसपी ने किया निरीक्षण, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश वाहनों की जांच, CCTV कैमरों और चेकपोस्ट की आधारभूत सुविधाओं का लिया जायजा कैमूर। जिला पदाधिकारी कैमूर कुमार अनुराग एवं पुलिस अधीक्षक कैमूर शिखर चौधरी ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को संयुक्त रूप से मोहनियां चेकपोस्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान चेकपोस्ट से होकर आने-जाने वाले विभिन्न प्रकार के वाहनों के आवागमन, जांच प्रक्रिया एवं निगरानी व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया गया। बता दें कि निरीक्षण के क्रम में उत्पाद विभाग, जिला परिवहन विभाग एवं खनन विभाग से संबंधित वाहनों की जांच और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों द्वारा चेकपोस्ट पर उपयोग किए जा रहे कार्यालय, अभिलेखों तथा कार्यप्रणाली का भी निरीक्षण किया। वही परिवहन विभाग के चेक प्वाइंट पर निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के उद्देश्य से जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को अतिरिक्त CCTV कैमरे स्थापित करने तथा कैमरों की संख्या बढ़ाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। साथ ही चेकपोस्ट पर पहले से स्थापित CCTV कैमरों की कार्यशीलता एवं निगरानी व्यवस्था की भी जांच की गई। आपको बताते हुए चलें कि निरीक्षण के दौरान चेकपोस्ट परिसर में प्रकाश व्यवस्था, सड़क की स्थिति एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। वही जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने चेकपोस्ट पर वाहनों के आवागमन की प्रभावी निगरानी, वाहनों की जांच में नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।4
- सिलौंधा मोड़ के पास भीषण हादसे में 9वीं की छात्रा की मौत प्रशासन ने पीड़ित परिवार को सौंपा 20 हजार का चेक मोहनिया कैमूर:-स्थानीय थाना क्षेत्र के सिलौंधा मोड़ के पास सुबह लगभग 9:30 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कैथियां गांव की रहने वाली 12 वर्षीय खुशी कुमारी, जो उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय कटरा कलां में 9वीं कक्षा की छात्रा थी, रोज की तरह साइकिल से स्कूल जा रही थी। इसी दौरान गिट्टी लदे एक अनियंत्रित डंपर ने उसे रौंद दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद डंपर सड़क पर ही पलट गया और चालक फरार हो गया, जबकि छात्रा का शव सड़क किनारे गड्ढे में जा गिरा। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने मुआवजे और सुरक्षा की मांग को लेकर सड़क पर जाम लगा दिया। इससे सड़क के दोनों ओर गाड़ियों और एम्बुलेंस की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही मोहनिया थाना प्रभारी आलोक कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी मोहनिया और कुदरा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। मौके पर पहुंचीं कुदरा प्रखंड विकास पदाधिकारी शांभवी श्रीवास्तव ने बताया, "सड़क हादसे में बच्ची की मौत के बाद ग्रामीण और परिजन अनुदान राशि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन की ओर से नियमानुसार 20 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक तत्काल प्रभाव से मृतका के पिता को हस्तगत करा दिया गया है। लोगों को समझा-बुझाकर जाम खुलवा दिया गया है।" प्रशासनिक आश्वासन और त्वरित आर्थिक सहायता मिलने के बाद ग्रामीणों ने दो घंटे बाद जाम समाप्त किया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका। वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बाइट - प्रखंड विकास पदाधिकारी कुदरा2
- चंदौली के चकिया बनरसिया गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने DM से की मुलाकात , ग्रामीण कार्तिकेय पांडेय1
- जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का जरा एक मिनट रुकिए… इस वीडियो को सिर्फ खबर समझकर मत देखिए आज सवाल सिर्फ एक नवजात बच्ची का नहीं है… सवाल है इंसानियत का। महागामा थाना क्षेत्र के कुसाहा गांव के मैदान में सुबह लोगों को एक नवजात बच्ची रोती हुई मिली। सोचिए… जिस बच्ची ने अभी दुनिया को ठीक से देखा तक नहीं था, उसे खुले मैदान में अकेला छोड़ दिया गया। आखिर उस बच्ची की क्या गलती थी? उसने क्या कुसूर किया था? गलती अगर किसी बड़े से हुईy थी, मजबूरी अगर किसी परिवार की थी, परिस्थितियां अगर कठिन थीं—तो उसकी सजा इस मासूम को क्यों? जन्म लेते ही एक बच्चे को क्या चाहिए? मां का आंचल… मां की ममता… पिता का प्यार… और एक सुरक्षित घर। लेकिन इस बच्ची को क्या मिला? एक सुनसान मैदान… रोती हुई आवाज… और जिंदगी का पहला दिन ही एक ऐसी जगह, जहां कोई जानवर भी उसे नुकसान पहुंचा सकता था। जरा सोचिए, अगर उस सुबह किसी की नजर इस मासूम पर नहीं पड़ती तो क्या होता? किसी जानवर के हमले से उसकी जान जा सकती थी। ठंड, भूख या किसी दूसरी वजह से उसकी जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। लेकिन कहते हैं ना— मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। किसी की नजर उस मासूम पर पड़ी। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। महागामा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने साथ लेकर महागामा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। अब डॉक्टरों की टीम बच्ची की जांच और देखभाल कर रही है। लेकिन इस घटना के बाद हमारे सामने कई सवाल खड़े हैं। आखिर इस बच्ची को यहां कौन छोड़ गया? क्यों छोड़ गया? किन परिस्थितियों में छोड़ गया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। इसलिए बिना सच्चाई जाने किसी महिला या परिवार को दोष देना सही नहीं होगा। लेकिन समाज के तौर पर हमें एक बात जरूर समझनी होगी— बच्चे कभी अपनी परिस्थितियों के जिम्मेदार नहीं होते। अगर किसी को मजबूरी है, अगर कोई नवजात बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो बच्चे को खुले में छोड़ना समाधान नहीं है। ऐसी स्थिति में पुलिस, अस्पताल, प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था से मदद ली जा सकती है। क्योंकि एक मासूम को सड़क, मैदान या सुनसान जगह पर छोड़ देना उसकी जिंदगी को खतरे में डाल सकता है। आज यह बच्ची अस्पताल में सुरक्षित है। अब उम्मीद यही है कि यह मासूम स्वस्थ हो, इसे सुरक्षित संरक्षण मिले और इसे जिंदगी में वह प्यार मिले जिसकी हर बच्चे को जरूरत होती है। और जाते-जाते बस इतना सोचिए— अगर यह बच्ची आपकी होती… तो क्या आप इसे यूं अकेला छोड़ पाते? बच्चे की कोई गलती नहीं होती। गलत परिस्थितियों की सजा किसी मासूम को नहीं मिलनी चाहिए। अब सुनते हैं, इस घटना को लेकर मौके पर मौजूद महिलाओं और स्थानीय लोगों का क्या कहना है।1