मैनपुरी के थाना भोगांव क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ गिहार कॉलोनी की रहने वाली नेहा गिहार और उनकी बहनें अपने इकलौते छोटे भाई की सुरक्षा को लेकर खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। न्याय की गुहार लगाते हुए ये पीड़ित महिलाएं आज पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचीं और दबंगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, साथ ही पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। यह पूरा मामला पुरानी रंजिश और सरेराह गुंडागर्दी से जुड़ा है। नेहा ने बताया कि 15-16 जून को जब वे छुट्टियाँ बिताने आई थीं, तब उनका भाई बाजार में लस्सी पीने गया था। उसी दौरान गिहार कॉलोनी के अभिमन्यु, विशाल, समीर, अरुण, करन और गौरव सहित कई अन्य युवकों ने 6-7 मोटरसाइकिलों से आकर उसे चारों तरफ से घेर लिया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ितों का आरोप है कि ये दबंग उनके भाई को अकेला पाकर अक्सर घेर लेते हैं; कुछ दिन पहले तो आरोपियों ने घर में घुसकर मारपीट की और खुलेआम फायरिंग भी की। नेहा के अनुसार, इन आरोपियों का इलाके में काफी दबदबा है, ये लोग लूटपाट और जेब काटने जैसे गलत कामों में शामिल हैं, और इनके पास अवैध हथियार भी हैं, जिसका वीडियो भी पीड़ितों के पास मौजूद है। पीड़ित महिलाओं ने स्थानीय थाना पुलिस (कोतवाली भोगांव) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। नेहा का कहना है कि फायरिंग और झगड़े के दौरान वह खुद पुलिस को मौके पर लेकर आई थीं, लेकिन पुलिस उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थी और उलटा उनके बच्चों को ही गलत ठहरा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 जून की रात दबंगों ने घर में घुसकर उनके भाई को दोबारा पीटा, और पुलिस सामने खड़ी रही लेकिन कोई मदद नहीं की। पीड़ितों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से भी दो बार मिल चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। भाई की जान पर मंडराते खतरे को देखते हुए, बहनों ने एसपी से गुहार लगाई है कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद मैनपुरी पुलिस प्रशासन इन बेबस बहनों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।
मैनपुरी के थाना भोगांव क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ गिहार कॉलोनी की रहने वाली नेहा गिहार और उनकी बहनें अपने इकलौते छोटे भाई की सुरक्षा को लेकर खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। न्याय की गुहार लगाते हुए ये पीड़ित महिलाएं आज पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचीं और दबंगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, साथ ही पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। यह पूरा मामला पुरानी रंजिश और सरेराह गुंडागर्दी से जुड़ा है। नेहा ने बताया कि 15-16 जून को जब वे छुट्टियाँ बिताने आई थीं, तब उनका भाई बाजार में लस्सी पीने गया था। उसी दौरान गिहार कॉलोनी के अभिमन्यु, विशाल, समीर, अरुण, करन और गौरव सहित कई अन्य युवकों ने 6-7 मोटरसाइकिलों से आकर उसे चारों तरफ से घेर लिया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ितों का आरोप है कि ये दबंग उनके भाई को अकेला पाकर अक्सर घेर लेते हैं; कुछ दिन पहले तो आरोपियों ने घर में घुसकर मारपीट की और खुलेआम फायरिंग भी की। नेहा के अनुसार, इन आरोपियों का इलाके में काफी दबदबा है, ये लोग लूटपाट और जेब काटने जैसे गलत कामों में शामिल हैं, और इनके पास अवैध हथियार भी हैं, जिसका वीडियो भी पीड़ितों के पास मौजूद है। पीड़ित महिलाओं ने स्थानीय थाना पुलिस (कोतवाली भोगांव) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। नेहा का कहना है कि फायरिंग और झगड़े के दौरान वह खुद पुलिस को मौके पर लेकर आई थीं, लेकिन पुलिस उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थी और उलटा उनके बच्चों को ही गलत ठहरा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 जून की रात दबंगों ने घर में घुसकर उनके भाई को दोबारा पीटा, और पुलिस सामने खड़ी रही लेकिन कोई मदद नहीं की। पीड़ितों ने बताया कि वे इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से भी दो बार मिल चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। भाई की जान पर मंडराते खतरे को देखते हुए, बहनों ने एसपी से गुहार लगाई है कि आरोपियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद मैनपुरी पुलिस प्रशासन इन बेबस बहनों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।
- QS वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2026 में भारत की रैंकिंग को लेकर देश में सियासत तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्कफोर्स की तैयारी के मामले में भारत 74वें स्थान पर है, जबकि ह्यूमन कैपिटल के मामले में यह 73वें स्थान पर रहा है। इन्हीं रैंकिंग्स को आधार बनाकर शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा निशाना साधा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भारत में कौशल की कमी (स्किल गैप) एक बहुत बड़ी समस्या है। उन्होंने आगे कहा कि देश के पास AI-आधारित भविष्य का लाभ उठाने का शानदार अवसर मौजूद है, लेकिन नौकरी के लिए तैयार टैलेंट विकसित करने में हम लगातार पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री को 'अक्षम' बताते हुए यह भी कहा कि स्किल डेवलपमेंट को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। इन आरोपों के बीच, यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट की दिशा में बड़े और बुनियादी सुधारों की सख्त जरूरत है?1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य की जनता ने उनकी 'साइकिल' को पंचर कर दिया है। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यदि अखिलेश यादव की साइकिल चलेगी तो वह दंगे करवाएगी और कर्फ्यू लगवाएगी।1
- मैनपुरी जिले के कुरावली थाना क्षेत्र के सोनाई पोस्ट के अंतर्गत आने वाले राजलपुर गांव के ग्राम समाज ने एसडीएम साहब से एक विशेष अनुरोध किया है। ग्राम समाज ने एसडीएम साहब से यह सुनिश्चित करने की कृपा करने का आग्रह किया है कि 'ताल तक' किसी चीज को हटवाया जाए। उन्होंने इस कार्रवाई को अपनी महान कृपा बताते हुए इसे गांव की ओर से किया गया एक विनम्र निवेदन बताया है।3
- भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में गौतम गंभीर का कार्यकाल रिकॉर्ड्स और नतीजों के लिहाज़ से अब तक काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उनके कार्यकाल में टीम इंडिया को ऐसे परिणामों का सामना करना पड़ा है जिन्होंने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए और क्रिकेट जगत में बहस छेड़ दी है। इसी दौरान, भारत में हमेशा मज़बूत मानी जाने वाली टीम को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ घरेलू टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा, जो 36 साल बाद देखा गया ऐसा नतीजा था। इसके अलावा, टीम के तीनों प्रारूपों में कई लंबे समय से कायम रिकॉर्ड टूट गए और कुछ अहम सीरीज़ भी हाथ से निकल गईं। हालांकि, किसी भी कोच के प्रदर्शन का आकलन एक लंबी अवधि में किया जाता है, और यह देखना होगा कि आगे आने वाले मुक़ाबले में टीम इंडिया इन चुनौतियों से कैसे उबरती है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया जल्द वापसी कर पाएगी, जिस पर क्रिकेट प्रेमियों से अपनी राय कमेंट्स में साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- मैनपुरी में कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ ने रविवार को एक पत्रकार वार्ता में केंद्र की भाजपा सरकार पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश का भविष्य तय करने वाले युवा और छात्र वर्तमान में खुद को लाचार और बेबस महसूस कर रहे हैं। कुलश्रेष्ठ ने केंद्र सरकार पर वर्ष 2014 से अब तक देशभर में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के लगभग 90 से 93 पेपर लीक होने का आरोप लगाया, जिससे करोड़ों युवाओं और छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिक्षा माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र महंगी शिक्षा व्यवस्था से जूझ रहे हैं, जहां अधिकांश शिक्षा ऋण लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। रोजगार न मिलने की आशंका और ऋण चुकाने की चिंता के कारण युवाओं में तनाव बढ़ रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर सरकारी स्कूलों की उपेक्षा कर शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया। गोपाल कुलश्रेष्ठ ने निजी स्कूलों द्वारा कथित मनमानी फीस वसूली के मुद्दे को भी उठाया, जिससे अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ ने स्पष्ट किया कि पार्टी छात्रों और युवाओं की आवाज को दबने नहीं देगी और उनके साथ हो रहे अन्याय तथा अत्याचार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेगी।1
- उत्तर प्रदेश के निधौली कला क्षेत्र में 'हमारे बाबा साहब' का अपमान किए जाने की बात सामने आई है। इस घटना को लेकर सवाल उठाया गया है कि 'हमारे बाबा साहब' का ऐसा अपमान कैसे किया जा सकता है।1
- उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें कल्याणपुर इलाके के जीवन ज्योति हॉस्पिटल के भीतर पुलिसकर्मियों ने न्याय की गुहार लगा रहे एक लाचार परिवार को बेरहमी से लाठियों, थप्पड़ों और घूंसों से पीटा है। यह घटना किसी भी कानून-पसंद नागरिक का खून खौलाने वाली बताई गई है। यह पूरा मामला कन्नौज के 35 वर्षीय गौरव सिंह की मौत से जुड़ा है, जो बवासीर के इलाज के लिए अस्पताल आए थे। परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाया है कि मेडिकल नेग्लिजेंस — गलत खून चढ़ाने और इलाज में लापरवाही — के कारण गौरव की जान गई। जब दुखी परिवार ने अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा और शव ले जाने से इनकार किया, तो अस्पताल प्रबंधन ने संवेदना दिखाने के बजाय पुलिस बुला ली। इसके बाद पुलिस ने रक्षक की भूमिका निभाने के बजाय, भक्षक का रूप ले लिया और पीड़ित परिवार को बंधक बनाकर उन पर अमानवीय तरीके से हमला किया। यह घटना कई सवाल खड़े करती है कि क्या पुलिस खुद ही जज और जूरी बन सकती है, और क्या हमारे देश में आम नागरिक को इंसाफ मांगने पर सिर्फ ऐसी लाठियां ही मिलेंगी। वीडियो को देखने के बाद लोगों से राय मांगी गई है कि क्या दोषी डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए इस वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने और GD News Network को सब्सक्राइब करने की अपील की गई है।1