नाम एक, किस्मत अनेक: बुलंदशहर की शिखा का 'UPSC सिलेक्शन' निकला फर्जी; 113वीं रैंक के जश्न पर फिरा पानी #Apkiawajdigital स्त्रोत-ANI बुलंदशहर | शुक्रवार, 13 मार्च 2026 ब्यूरो रिपोर्ट यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों के बीच उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ की एक युवती शिखा ने अपनी 113वीं रैंक आने का ढिंढोरा पीट दिया, लेकिन जब सच्चाई की परतें खुलीं, तो पूरी कहानी झूठ की बुनियाद पर खड़ी पाई गई। असल में, 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने हासिल की है। PDF में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद बुलंदशहर की शिखा ने अजीबोगरीब सफाई देते हुए कहा, "उसका भी नाम शिखा है और मेरा भी। मैंने पीडीएफ में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर चेक करना भूल गई।" हालांकि, जांच में यह बात सामने आई है कि बुलंदशहर वाली शिखा का तो मेंस (मुख्य परीक्षा) भी क्लियर नहीं हुआ था। ऐसे में अंतिम सूची में अपना नाम ढूंढना और उसका जश्न मनाना एक सोची-समझी साजिश या भारी लापरवाही मानी जा रही है। मिठाई बंटी, बधाई मिली और फिर हुई किरकिरी जैसे ही शिखा ने अपने चयन की खबर फैलाई, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिजनों ने खुशी में मिठाई बांटी और मोहल्ले में जश्न का माहौल हो गया। लेकिन असली शिखा (हरियाणा निवासी) के दस्तावेजों और रोल नंबर से मिलान होने पर बुलंदशहर वाली शिखा का दावा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। UPSC उम्मीदवारों के लिए सबक प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के परिणामों में केवल नाम ही नहीं, बल्कि रोल नंबर सबसे महत्वपूर्ण पहचान होता है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है, जहाँ लोग इसे 'सस्ते प्रचार' का जरिया बता रहे हैं। फिलहाल, इस फर्जी दावे के बाद युवती और उसके परिवार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है।
नाम एक, किस्मत अनेक: बुलंदशहर की शिखा का 'UPSC सिलेक्शन' निकला फर्जी; 113वीं रैंक के जश्न पर फिरा पानी #Apkiawajdigital स्त्रोत-ANI बुलंदशहर | शुक्रवार, 13 मार्च 2026 ब्यूरो रिपोर्ट यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों के बीच उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ की एक युवती शिखा ने अपनी 113वीं रैंक आने का ढिंढोरा पीट दिया, लेकिन जब सच्चाई की परतें खुलीं, तो पूरी कहानी झूठ की बुनियाद पर खड़ी पाई गई। असल में, 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने हासिल की है। PDF में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद बुलंदशहर की शिखा ने अजीबोगरीब सफाई देते हुए कहा, "उसका भी नाम शिखा है और मेरा भी। मैंने पीडीएफ में सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर चेक करना भूल गई।" हालांकि, जांच में यह बात सामने आई है कि बुलंदशहर वाली शिखा का तो मेंस (मुख्य परीक्षा) भी क्लियर नहीं हुआ था। ऐसे में अंतिम सूची में अपना नाम ढूंढना और उसका जश्न मनाना एक सोची-समझी साजिश या भारी लापरवाही मानी जा रही है। मिठाई बंटी, बधाई मिली और फिर हुई किरकिरी जैसे ही शिखा ने अपने चयन की खबर फैलाई, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिजनों ने खुशी में मिठाई बांटी और मोहल्ले में जश्न का माहौल हो गया। लेकिन असली शिखा (हरियाणा निवासी) के दस्तावेजों और रोल नंबर से मिलान होने पर बुलंदशहर वाली शिखा का दावा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। UPSC उम्मीदवारों के लिए सबक प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा के परिणामों में केवल नाम ही नहीं, बल्कि रोल नंबर सबसे महत्वपूर्ण पहचान होता है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है, जहाँ लोग इसे 'सस्ते प्रचार' का जरिया बता रहे हैं। फिलहाल, इस फर्जी दावे के बाद युवती और उसके परिवार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है।
- बाँदा फ्लैश 🚨 “टार्च की रोशनी में इलाज! बाँदा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल” बाँदा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। नरैनी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली व्यवस्था ठप होने के कारण मरीजों का इलाज टार्च की रोशनी में किया गया। बताया जा रहा है कि आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुँचे मरीज का उपचार डॉक्टरों और स्टाफ को टार्च की रोशनी के सहारे करना पड़ा। इस घटना ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी और लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। चिकित्सीय सेवाओं के नाम पर चल रही अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल यह मामला नरैनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का बताया जा रहा है, जहां टार्च की रोशनी में इलाज का वीडियो और तस्वीरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।5
- बाँदा :24 घंटे में चोरी का खुलासा नरैनी पुलिस ने शातिर चोर दबोचा1
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- Post by Mamta chaurasiya1
- बांदा : थाना नरैनी पुलिस टीम द्वारा थाना नरैनी क्षेत्रान्तर्गत बरसडामानपुर में घर का ताला तोड़कर हुई चोरी की घटना का सफल अनावरण करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया है । बताया गया कि थाना नरैना क्षेत्र के बरसडामानपुर में पप्पू पुत्र रामसेवक के घर का ताला तोड़कर अज्ञात चोरों द्वारा सोने के जेवरात चोरी करने की घटना को अंजाम दिया गया था । जिसके सम्बन्ध में थाना नरैनी में अभियोग पंजीकृत किया गया कर अभियुक्त की पहचान व गिरफ्तारी हेतु कई टीमों का गठन किया गया था । इसी क्रम में थाना नरैनी पुलिस टीम द्वारा सीसीटीवी कैमरों, वैज्ञानिक व तकनिकी साक्ष्यों का प्रयोग कर अभियुक्तों की पहचान करते हुए मुखबिर की सूचना पर 24 घण्टे के अन्दर लहुटेरा के पास से अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया1
- #Apkiawajdigital बुलंदशहर | गुरुवार, 12 मार्च 2026 विशेष संवाददाता कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर बुलंदशहर के एक बुजुर्ग का वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में बाबा अपनी पोती शिखा की UPSC परीक्षा में 113वीं रैंक आने की खुशी में फूट-फूटकर रो रहे थे। उस पल को लोगों ने 'संघर्ष की जीत' के रूप में देखा था। लेकिन आज, जब हकीकत सामने आई है, तो वही खुशी के आंसू परिवार के लिए गहरे शर्म और अफसोस का सबब बन गए हैं। धोखे की बुनियाद और टूटता हुआ विश्वास जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि पोती शिखा का यूपीएससी परीक्षा में चयन नहीं हुआ है। असल में, 113वीं रैंक हरियाणा की एक अन्य शिखा ने हासिल की थी, और बुलंदशहर वाली शिखा तो मुख्य परीक्षा (Mains) भी पास नहीं कर सकी थीं। केवल नाम की समानता का लाभ उठाकर किए गए इस दावे ने न केवल प्रशासन की नजर में परिवार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उस बुजुर्ग बाबा की भावनाओं का भी मजाक बना दिया है, जिन्होंने अपनी पोती की कथित सफलता को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि माना था। सोशल मीडिया का 'दिखावटी जश्न' और उसका कड़वा सच यह वायरल वीडियो मंगलवार, 10 मार्च 2026 को सामने आया था। उस वक्त बाबा का भावुक चेहरा हर किसी के दिल को छू गया था। लेकिन जब सच सामने आया कि यह सफलता महज एक 'नाम का भ्रम' थी, तो सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को 'असंवेदनशील प्रचार' करार दिया है। परिवार पर उठे सवाल सवाल यह उठता है कि क्या केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए एक पूरे परिवार ने बुजुर्ग दादा की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया? बिना रोल नंबर की पुष्टि किए, एक बड़े जश्न का आयोजन करना और उसे सार्वजनिक करना अब बुलंदशहर के इस परिवार पर भारी पड़ रहा है। यह घटना दिखाती है कि कैसे डिजिटल युग में बिना ठोस तथ्यों के किया गया प्रचार, अंततः अपनों के सम्मान को ही दांव पर लगा देता है। आज वह बाबा, जो गर्व से रो रहे थे, सच्चाई सामने आने के बाद शर्मिंदगी के साए में हैं।1
- हमीरपुर जिले की गौशालाओं में गोवंश की लगातार हो रही मौतों और अव्यवस्थाओं को लेकर मामला गरमा गया है। भारतीय श्री राधाकृष्ण गौरक्षा संघ के जिलाध्यक्ष राजा साहू ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ गौशालाओं में ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से गोवंश की उपेक्षा की जा रही है। चारा-पानी की कमी के कारण गोवंश की हालत खराब हो रही है और कई स्थानों पर उनकी मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं। गौरक्षा संघ का यह भी आरोप है कि मृत गोवंश के शवों को खुले में फेंक दिया जाता है, जिससे गंभीर लापरवाही उजागर हो रही है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि गौशालाओं का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।1
- Post by Mamta chaurasiya1