महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा शिक्षा, संस्कार और नवाचार के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरा है। यह विद्यालय आसपास के 12 गांवों के 70 छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जहाँ आमतौर पर छुट्टी के दिनों में स्कूल बंद रहते हैं, वहीं यहाँ बच्चे स्वेच्छा से टिफिन लेकर पढ़ने पहुँचते हैं, जो शिक्षा के प्रति उनकी बढ़ती रुचि और विद्यालय की गुणवत्ता को दर्शाता है। विद्यालय की इस सफलता का श्रेय प्रधान पाठक दयासागर नायक और सहायक शिक्षिका डिमेश चौहान के अथक प्रयास, नवाचार और समर्पण को दिया जा रहा है। इनके साथ ही, गाँव के चार अन्य लोग भी स्वेच्छा से यहाँ आकर शिक्षा दान कर रहे हैं, जो इस स्कूल की एक अनूठी विशेषता है। पिछले तीन वर्षों में, इस विद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 24 बच्चों का आवासीय विद्यालयों में चयन शामिल है। इस प्रदर्शन से प्रेरित होकर, कई अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों के नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई को आधुनिक और रोचक बनाने के लिए स्मार्ट टीवी और कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है, साथ ही गणित प्रतियोगिता और स्पीड रीडिंग जैसी नवाचारी गतिविधियाँ उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, योग, खेलकूद, चित्रकारी और रंगोली प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से आयोजित कर बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाता है। विद्यालय का संचालन पालकों की सहमति से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाता है। विशेष बात यह है कि अवकाश के दिनों में भी विद्यालय खुला रहता है और बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रहती है, जिसमें प्रधानपाठक दयासागर नायक सभी बच्चों के मार्गदर्शन के लिए उपस्थित रहते हैं। पालक भी अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुँचाने और लेने आते हैं, जिससे पालक, बालक और शिक्षक के बीच एक मजबूत कड़ी बनी हुई है। ग्रामीणों और पालकों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में इसी गुणवत्ता, अनुशासन और समर्पण के साथ शिक्षा प्रदान की जाए, तो निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान स्वतः ही कम हो सकता है। शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा आज पूरे क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हो चुका है।
महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा शिक्षा, संस्कार और नवाचार के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरा है। यह विद्यालय आसपास के 12 गांवों के 70 छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जहाँ आमतौर पर छुट्टी के दिनों में स्कूल बंद रहते हैं, वहीं यहाँ बच्चे स्वेच्छा से टिफिन लेकर पढ़ने पहुँचते हैं, जो शिक्षा के प्रति उनकी बढ़ती रुचि और विद्यालय की गुणवत्ता को दर्शाता है। विद्यालय की इस सफलता का श्रेय प्रधान पाठक दयासागर नायक और सहायक शिक्षिका डिमेश चौहान के अथक प्रयास, नवाचार और समर्पण को दिया जा रहा है। इनके साथ ही, गाँव के चार अन्य लोग भी स्वेच्छा से यहाँ आकर शिक्षा दान कर रहे हैं, जो इस स्कूल की एक अनूठी विशेषता है। पिछले तीन वर्षों में, इस विद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 24 बच्चों का आवासीय विद्यालयों में चयन शामिल है। इस प्रदर्शन से प्रेरित होकर, कई अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों के नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई को आधुनिक और रोचक बनाने के लिए स्मार्ट टीवी और कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है, साथ ही गणित प्रतियोगिता और स्पीड रीडिंग जैसी नवाचारी गतिविधियाँ उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, योग, खेलकूद, चित्रकारी और रंगोली प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से आयोजित कर बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाता है। विद्यालय का संचालन पालकों की सहमति से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाता है। विशेष बात यह है कि अवकाश के दिनों में भी विद्यालय खुला रहता है और बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रहती है, जिसमें प्रधानपाठक दयासागर नायक सभी बच्चों के मार्गदर्शन के लिए उपस्थित रहते हैं। पालक भी अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुँचाने और लेने आते हैं, जिससे पालक, बालक और शिक्षक के बीच एक मजबूत कड़ी बनी हुई है। ग्रामीणों और पालकों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में इसी गुणवत्ता, अनुशासन और समर्पण के साथ शिक्षा प्रदान की जाए, तो निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान स्वतः ही कम हो सकता है। शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा आज पूरे क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हो चुका है।
- महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा शिक्षा, संस्कार और नवाचार के एक उत्कृष्ट केंद्र के रूप में उभरा है। यह विद्यालय आसपास के 12 गांवों के 70 छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इसकी सबसे खास बात यह है कि जहाँ आमतौर पर छुट्टी के दिनों में स्कूल बंद रहते हैं, वहीं यहाँ बच्चे स्वेच्छा से टिफिन लेकर पढ़ने पहुँचते हैं, जो शिक्षा के प्रति उनकी बढ़ती रुचि और विद्यालय की गुणवत्ता को दर्शाता है। विद्यालय की इस सफलता का श्रेय प्रधान पाठक दयासागर नायक और सहायक शिक्षिका डिमेश चौहान के अथक प्रयास, नवाचार और समर्पण को दिया जा रहा है। इनके साथ ही, गाँव के चार अन्य लोग भी स्वेच्छा से यहाँ आकर शिक्षा दान कर रहे हैं, जो इस स्कूल की एक अनूठी विशेषता है। पिछले तीन वर्षों में, इस विद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से 24 बच्चों का आवासीय विद्यालयों में चयन शामिल है। इस प्रदर्शन से प्रेरित होकर, कई अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों के नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई को आधुनिक और रोचक बनाने के लिए स्मार्ट टीवी और कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है, साथ ही गणित प्रतियोगिता और स्पीड रीडिंग जैसी नवाचारी गतिविधियाँ उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, योग, खेलकूद, चित्रकारी और रंगोली प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियाँ नियमित रूप से आयोजित कर बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाता है। विद्यालय का संचालन पालकों की सहमति से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाता है। विशेष बात यह है कि अवकाश के दिनों में भी विद्यालय खुला रहता है और बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रहती है, जिसमें प्रधानपाठक दयासागर नायक सभी बच्चों के मार्गदर्शन के लिए उपस्थित रहते हैं। पालक भी अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुँचाने और लेने आते हैं, जिससे पालक, बालक और शिक्षक के बीच एक मजबूत कड़ी बनी हुई है। ग्रामीणों और पालकों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में इसी गुणवत्ता, अनुशासन और समर्पण के साथ शिक्षा प्रदान की जाए, तो निजी स्कूलों की ओर बढ़ता रुझान स्वतः ही कम हो सकता है। शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभाठा आज पूरे क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में स्थापित हो चुका है।1
- रायगढ़ नाबालिग का आपत्तिजनक फोटो शेयर किया,पुलिस ने बाल अपचारी को किया गिरफ्तार।1
- पेंड्रा के मरवाही थाना क्षेत्र के उसाड़ गांव में दिनदहाड़े एक सनसनीखेज अपहरण की घटना सामने आई है, जहाँ दो अज्ञात बदमाशों ने बंदूक की नोक पर एक किराना व्यापारी गिरीश यादव का उसके घर के भीतर से अपहरण कर लिया। यह पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिससे घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। मिली जानकारी के अनुसार, दो अज्ञात युवक कार से उसाड़ गांव पहुँचे थे और उन्होंने ग्रामीणों से किराना व्यापारी गिरीश यादव के घर का पता पूछा। इसके बाद, दोनों आरोपी सामान्य ग्राहक बनकर गिरीश यादव की दुकान पर पहुँचे और कुछ सामान भी खरीदा। इसी दौरान उन्होंने दुकान में मौजूद गिरीश यादव के पुत्र से उनके पिता को बुलाने के लिए कहा। जैसे ही पुत्र अपने पिता को बुलाने घर के अंदर गया, दोनों बदमाश भी उसके पीछे घर के भीतर पहुँच गए, जहाँ गिरीश यादव गलियारे में आराम कर रहे थे। आरोपियों ने खुद को पुलिस बताते हुए गिरीश यादव को जबरन उठा लिया और घर के अन्य सदस्यों को हथियार दिखाकर धमकाया। फिर वे उन्हें घर के बाहर खड़ी अपनी कार तक ले गए और वहाँ से फरार हो गए। परिजनों ने तत्काल मरवाही पुलिस को सूचना दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने और अपहृत व्यापारी की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना के बाद गांव सहित पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है।2
- चलते ट्रक से चावल की चोरी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। इस मामले में गिरोह से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।1
- जांजगीर-चांपा में प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद रोजगार सहायक रिया यादव को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है।1
- कोरबा जिले के बालको थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पुलिस ने एक नाबालिग को ब्लैकमेल कर उससे संबंध बनाने का दबाव डालने के आरोप में कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।1
- जंजीर-चांपा जिले के तनौद गांव में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में इंजीनियरों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया गया है कि 14 हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन इंजीनियरों ने गांव का तालाब शायद कभी देखा ही नहीं है। आरोप है कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के पैसे काटे जा रहे हैं और इंजीनियर अपनी मनमानी कर रहे हैं।1
- सारंगढ़ जिले में बिजली ठेका कर्मियों के साथ लगातार हो रही लापरवाही उनकी जान को खतरे में डाल रही है। यह गंभीर समस्या 2023 में भी सामने आई थी और अब 2026 में भी एक और ऐसी ही घटना देखी गई है, जो इस बात को दर्शाती है कि सुरक्षा को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन जिम्मेदार है। पोस्ट में यह भी बताया गया है कि श्रवण की जान की कीमत 3 लाख रुपये आंकी गई थी। ऐसे में यह गंभीर सवाल बना हुआ है कि आखिर इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों दोहराई जा रही हैं और इनकी जवाबदेही कौन लेगा।1