अंबेडकरनगर में एक पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई, लेकिन वहां तैनात पीआरओ जितेंद्र रघुवंशी ने उसे मदद देने के बजाय टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इसके बाद टांडा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बिना किसी एफआईआर के पीड़ित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। इस दौरान पीड़ित सड़क पर लेट गया और आसपास मौजूद लोगों ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद ही उसे वहां से किसी तरह बचाया जा सका। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पीड़ित का आपराधिक इतिहास होने का दावा किया है। वहीं, पीड़ित ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए चुनौती दी है कि उस पर केवल एक ही मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने ही दर्ज कराया था। पीड़ित का कहना है कि उसका एकमात्र अपराध यह है कि वह एक व्यक्ति से अपने बकाया 3 लाख रुपये बार-बार वापस मांग रहा था, जिसके बाद से पुलिस ने कथित तौर पर उस व्यक्ति का पक्ष लेते हुए मोर्चा संभाल लिया है।
अंबेडकरनगर में एक पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई, लेकिन वहां तैनात पीआरओ जितेंद्र रघुवंशी ने उसे मदद देने के बजाय टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इसके बाद टांडा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और बिना किसी एफआईआर के पीड़ित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। इस दौरान पीड़ित सड़क पर लेट गया और आसपास मौजूद लोगों ने वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद ही उसे वहां से किसी तरह बचाया जा सका। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पीड़ित का आपराधिक इतिहास होने का दावा किया है। वहीं, पीड़ित ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए चुनौती दी है कि उस पर केवल एक ही मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने ही दर्ज कराया था। पीड़ित का कहना है कि उसका एकमात्र अपराध यह है कि वह एक व्यक्ति से अपने बकाया 3 लाख रुपये बार-बार वापस मांग रहा था, जिसके बाद से पुलिस ने कथित तौर पर उस व्यक्ति का पक्ष लेते हुए मोर्चा संभाल लिया है।
- अम्बेडकरनगर जिले के पतौना गांव में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसकी लोगों ने काफी सराहना की। इस कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण के लिए खोदे गए गड्ढों को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। यह अनूठा प्रयास स्थानीय स्तर पर चर्चा और प्रशंसा का विषय बना हुआ है।1
- जीवन की कठिन राहों पर हर इंसान अक्सर किसी न किसी सहारे की तलाश में रहता है, लेकिन संसार का साथ अक्सर परिस्थितियों के बदलने के साथ ही छूट जाता है। ऐसे समय में जब दुनिया उम्मीदें तोड़ देती है, तब प्रभु का प्रेम और उनकी कृपा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो मन को नई शक्ति और विश्वास प्रदान करता है। सच्चा सहारा न तो धन है, न पद और न ही लोगों का साथ, बल्कि केवल ईश्वर के प्रति अटूट आस्था है। यहाँ तक कि यदि संसार का साथ न भी मिले, तब भी प्रभु का प्रेम हर कठिन परिस्थिति को आसान बनाने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि निराश होने के बजाय ईश्वर पर अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए, क्योंकि उनका प्यार ही जीवन का सबसे बड़ा और स्थायी सहारा है।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती में भाजपा महामंत्री ने अपने ही विधायक पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें घेरा है। इस पूरे घटनाक्रम में एसएसपी पांडेय के समर्थन में भी लोग उतर आए हैं। इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, जिसमें 'पूजा मैडम' पर निशाना साधते हुए यह दावा किया गया है कि वे किसी को नहीं छोड़ती हैं। इस घटना ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है।1
- अयोध्या के मंदिर में चढ़ावा चोरी होने का मामला सामने आया है। इस घटना पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शनिवार को प्रतिक्रिया दी। नृपेंद्र मिश्रा ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए इस घटना पर खेद भी व्यक्त किया है।1
- Post by Shamshad Ahmad2
- उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों के लिए चर्चित ओमप्रकाश राजभर ने अंबेडकरनगर पहुंचकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखे प्रहार किए हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अब लोगों से मिलने और हाथ मिलाने के लिए भी पैसे लेते हैं और उनकी कार्यशैली बसपा जैसी हो गई है। इसके अलावा, उन्होंने अखिलेश यादव की बढ़ती संपत्ति पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि राजनीति में जहां खर्च होता है, वहां उनकी संपत्ति का ग्राफ इतनी तेजी से कैसे बढ़ रहा है। राजभर ने अखिलेश यादव के 'सनातन' प्रेम पर कटाक्ष करते हुए उन्हें 'नकली समाजवादी' करार दिया और कहा कि राजनीतिक जमीन खिसकती देख वे गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं। उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया का उदाहरण देते हुए कहा कि असली समाजवाद जाति हटाने में था, जबकि अखिलेश यादव ने अपने नाम से 'यादव' नहीं हटाया। साथ ही, उन्होंने सपा के पुराने शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान यूपी में केवल दंगे, गुंडागर्दी और हत्याएं ही देखी गई हैं। सपा के 'PDA' नारे पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' बताया और कहा कि सपा का ध्यान केवल अपने परिवार के विकास पर केंद्रित है, जनता पर नहीं। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर राजभर ने कहा कि सरकार पूरी तरह तैयार है और केवल हाईकोर्ट के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। अंबेडकरनगर से दिए गए इन बयानों से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में सपा और भाजपा गठबंधन के बीच जुबानी जंग और तेज होने वाली है।1
- हापुड़ पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल करते हुए जनजागरूकता अभियान चलाया है। इस अभियान के जरिए पुलिस ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जलाशयों की स्वच्छता और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। अपने संदेश के माध्यम से हापुड़ पुलिस ने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधारोपण करने, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने की अपील की है। आमजन ने पुलिस की इस सकारात्मक पहल की सराहना की है और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया है। इस प्रयास को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह याद दिलाता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।1
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक अभिभावक को प्रधानाध्यापिका द्वारा चप्पल से प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। यह घटना तब हुई जब अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य के लिए जरूरी टीसी (TC) लेने स्कूल गए थे। इस कृत्य ने शिक्षा व्यवस्था की गरिमा और शिक्षक-अभिभावक के बीच के संबंध पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल को शिक्षा का मंदिर माना जाता है, लेकिन वहां हुई इस घटना ने व्यवस्था के भीतर पनप रहे अहंकार और 'गुंडागर्दी' को उजागर किया है। एक शिक्षक का इस तरह का व्यवहार बच्चों के भविष्य और उनके कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जब शिक्षक 'गुरु' के बजाय 'शासक' की भूमिका में आ जाए, तो स्कूल का वातावरण अखाड़े में तब्दील हो जाता है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना पर उठ रहे सवाल अब प्रशासन की जवाबदेही और ऐसे शिक्षकों के प्रति सख्त कार्रवाई की मांग की ओर इशारा कर रहे हैं। समाज में इस बात पर बहस तेज है कि शिक्षा विभाग कब तक ऐसी अराजकता को बर्दाश्त करेगा। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि यदि शिक्षा के मंदिरों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ी शिक्षित होने के बजाय भय के साये में पलेगी।1