मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विशवारी गांव के वार्ड संख्या तीन में बीती रात भीषण अग्निकांड की घटना घटी। इस हादसे में एक ही परिवार के दो घर जलकर पूरी तरह राख हो गए। आग से लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति नष्ट होने की बात कही जा रही है। पीड़ित की पहचान गुंजा कामत, पिता स्वर्गीय पहल कामत के रूप में हुई है। ग्रामीण ध्यानी ऋषिदेव ने बताया कि पीड़ित परिवार ने एक दिन पहले ही लोन कंपनी से पचास हजार रुपये नगद प्राप्त किए थे, जो आग में जलकर नष्ट हो गए। घटना के समय रामजी कामत समेत दर्जन भर लोग मौके पर मौजूद थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, देर रात अचानक आग की लपटें उठती देख लोगों ने शोर मचाया और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। वहीं, उप प्रमुख प्रतिनिधि विनोद कुमार यादव ने घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अंचलाधिकारी से मामले की जांच कर शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। वही अंचला अधिकारी ग्वालपाड़ा देव कृष्ण कामत इस मामले में कहा कि मामले की जानकारी मिली है जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी
मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विशवारी गांव के वार्ड संख्या तीन में बीती रात भीषण अग्निकांड की घटना घटी। इस हादसे में एक ही परिवार के दो घर जलकर पूरी तरह राख हो गए। आग से लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति नष्ट होने की बात कही जा रही है। पीड़ित की पहचान गुंजा कामत, पिता स्वर्गीय पहल कामत के रूप में हुई है। ग्रामीण ध्यानी ऋषिदेव ने बताया कि पीड़ित परिवार ने एक दिन पहले ही लोन कंपनी से पचास हजार रुपये नगद प्राप्त किए थे, जो आग में जलकर नष्ट हो गए। घटना के समय रामजी कामत समेत दर्जन भर लोग मौके पर मौजूद थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, देर रात अचानक आग की लपटें उठती देख लोगों ने शोर मचाया और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। वहीं, उप प्रमुख प्रतिनिधि विनोद कुमार यादव ने घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अंचलाधिकारी से मामले की जांच कर शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। वही अंचला अधिकारी ग्वालपाड़ा देव कृष्ण कामत इस मामले में कहा कि मामले की जानकारी मिली है जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी
- मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विशवारी गांव के वार्ड संख्या तीन में बीती रात भीषण अग्निकांड की घटना घटी। इस हादसे में एक ही परिवार के दो घर जलकर पूरी तरह राख हो गए। आग से लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति नष्ट होने की बात कही जा रही है। पीड़ित की पहचान गुंजा कामत, पिता स्वर्गीय पहल कामत के रूप में हुई है। ग्रामीण ध्यानी ऋषिदेव ने बताया कि पीड़ित परिवार ने एक दिन पहले ही लोन कंपनी से पचास हजार रुपये नगद प्राप्त किए थे, जो आग में जलकर नष्ट हो गए। घटना के समय रामजी कामत समेत दर्जन भर लोग मौके पर मौजूद थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, देर रात अचानक आग की लपटें उठती देख लोगों ने शोर मचाया और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। वहीं, उप प्रमुख प्रतिनिधि विनोद कुमार यादव ने घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने अंचलाधिकारी से मामले की जांच कर शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। वही अंचला अधिकारी ग्वालपाड़ा देव कृष्ण कामत इस मामले में कहा कि मामले की जानकारी मिली है जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी1
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- Post by Mannu Maharaj1
- सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के खजुरी पंचायत के वार्ड नंबर 12 में अखिल भारतीय भगैत महासम्मेलन का 66 वें वार्षिक बिहार राज्य भगैत महासम्मेलन 2026 को लेकर भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें 251 महिलाएं शामिल हुईं। कलश शोभा यात्रा पूरे बैंड बाजा के साथ पूरे गांव का भ्रमण कर पंचायत स्थित कारू बाबा मंदिर परिसर के तालाब से जल भरकर भ्रमण करते हुए यज्ञ स्थल पर पहुंचे।1
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- Post by Sotu kumar1
- बिहार के मधेपुरा जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “हर घर नल का जल” पर अब सवाल उठने लगे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में नल सूखे पड़े हैं। लोगों को आज भी पीने के पानी के लिए चापाकल और हैंडपंप पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आखिर जमीनी हकीकत क्या है दरअसल मधेपुरा जिले के कई प्रखंड में जमीनी हकीकत कुछ और है। ताजा मामला मधेपुरा सदर प्रखंड के मठाही, मुरलीगंज प्रखंड के गंगापुर, मुरलीगंज नगर पंचायत,रमनी, भलनी, रघुनाथपुर और घैलाढ़ प्रखंड के भान टेकती सहित कई इलाकों में “हर घर नल का जल” योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। कहीं नल लगे ही नहीं हैं, और जहां लगे हैं वहां महीनों से पानी नहीं आया। कई जगहों पर जलमीनारें खड़ी हैं, लेकिन मोटर खराब है। कहीं बिजली कनेक्शन नहीं है तो कहीं पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं। गर्मी बढ़ने के साथ ही परेशानी भी बढ़ रही है। ग्रामीणों को सुबह-शाम पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। महिलाओं को दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत में कुछ दिन पानी मिला, लेकिन उसके बाद सप्लाई बंद हो गई। कई बार शिकायत के बावजूद न तो मरम्मत हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। बाइट – अशोक कुमार, स्थानीय निवासी सरकार ने नल तो लगा दिया, लेकिन पानी नहीं आता। शुरुआत में दो-चार दिन पानी आया था, उसके बाद सब बंद हो गया। हमलोग आज भी हैंडपंप का पानी पी रहे हैं। बाइट – कृष्णा मुखर्जी, स्थानीय निवासी सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। दूर से पानी लाना पड़ता है। गर्मी में हालात और खराब हो जाते हैं। अगर नल-जल योजना ठीक से चले तो बहुत राहत मिले।” ग्राउंड पर हालात यह हैं कि टावर तो खड़े हैं, लेकिन नलों में पानी नहीं बह रहा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही कब तय होगी? खराब पड़ी जलमीनारों और पाइपलाइन की मरम्मत कब होगी? और क्या मधेपुरा के घरों तक वाकई साफ पानी पहुंच पाएगा?4
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