भंडावद गांव के लाल और राजपूत रेजीमेंट के हवलदार कमल सिंह सोनगरा 1 जून को 16 साल की गौरवपूर्ण देशसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके आगमन को लेकर पूरे जीरापुर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है और ग्रामीणों ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमल सिंह सोनगरा 28 मार्च 2010 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे, जिन्होंने 16 वर्षों तक कश्मीर से कन्याकुमारी तक मां भारती की अनवरत सेवा की है। उनके स्वागत में 1 जून को प्रातः 8:00 बजे ग्राम खूबनपुरा स्थित सीएम राइज स्कूल के सामने से 'वीर सम्मान समारोह' की शुरुआत होगी। यहां से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा, जो जीरापुर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ भंडावद स्थित बालाजी मंदिर पहुंचेगा। इस पूरे रास्ते 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से आसमान गूंज उठेगा। ग्रामीणों ने बताया है कि कमल सिंह ने गांव का नाम रोशन किया है और उनका स्वागत ऐतिहासिक होगा, जिसमें हर घर से एक व्यक्ति जुलूस में शामिल होगा। कमल सिंह के पिता, भंडावद निवासी ठाकुर सा. विक्रम सिंह सोनगरा की देशभक्ति पूरे अंचल में प्रशंसा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उनके पांच बेटों में से तीन ने देशसेवा को चुना है। उनके सबसे बड़े बेटे भंवर सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे बेटे स्व. लक्ष्मण सिंह (जो 2012 में दिवंगत हुए) भी किसान थे। तीसरे बेटे शिव सिंह 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और चौथे बेटे लाल सिंह अभी भी भारतीय सेना में सेवारत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कमल सिंह 16 साल की सेवा के बाद घर लौट रहे हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा है। ग्रामीण इस परिवार को 'धन्य है वो पिता जिसने तीन लाल फौज को दिए' कहकर सम्मानित कर रहे हैं और भंडावद के लिए इसे सौभाग्य बता रहे हैं कि 'एक घर से तीन-तीन फौजी' हैं।
भंडावद गांव के लाल और राजपूत रेजीमेंट के हवलदार कमल सिंह सोनगरा 1 जून को 16 साल की गौरवपूर्ण देशसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके आगमन को लेकर पूरे जीरापुर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है और ग्रामीणों ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमल सिंह सोनगरा 28 मार्च 2010 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे, जिन्होंने 16 वर्षों तक कश्मीर से कन्याकुमारी तक मां भारती की अनवरत सेवा की है। उनके स्वागत में 1 जून को प्रातः 8:00 बजे ग्राम खूबनपुरा स्थित सीएम राइज स्कूल के सामने से 'वीर सम्मान समारोह' की शुरुआत होगी। यहां से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा, जो जीरापुर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ भंडावद स्थित बालाजी मंदिर पहुंचेगा। इस पूरे रास्ते 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से आसमान गूंज उठेगा। ग्रामीणों ने बताया है कि कमल सिंह ने गांव का नाम रोशन किया है और उनका स्वागत ऐतिहासिक होगा, जिसमें हर घर से एक व्यक्ति जुलूस में शामिल होगा। कमल सिंह के पिता, भंडावद निवासी ठाकुर सा. विक्रम सिंह सोनगरा की देशभक्ति पूरे अंचल में प्रशंसा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उनके पांच बेटों में से तीन ने देशसेवा को चुना है। उनके सबसे बड़े बेटे भंवर सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे बेटे स्व. लक्ष्मण सिंह (जो 2012 में दिवंगत हुए) भी किसान थे। तीसरे बेटे शिव सिंह 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और चौथे बेटे लाल सिंह अभी भी भारतीय सेना में सेवारत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कमल सिंह 16 साल की सेवा के बाद घर लौट रहे हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा है। ग्रामीण इस परिवार को 'धन्य है वो पिता जिसने तीन लाल फौज को दिए' कहकर सम्मानित कर रहे हैं और भंडावद के लिए इसे सौभाग्य बता रहे हैं कि 'एक घर से तीन-तीन फौजी' हैं।
- भंडावद गांव के लाल और राजपूत रेजीमेंट के हवलदार कमल सिंह सोनगरा 1 जून को 16 साल की गौरवपूर्ण देशसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके आगमन को लेकर पूरे जीरापुर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है और ग्रामीणों ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमल सिंह सोनगरा 28 मार्च 2010 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे, जिन्होंने 16 वर्षों तक कश्मीर से कन्याकुमारी तक मां भारती की अनवरत सेवा की है। उनके स्वागत में 1 जून को प्रातः 8:00 बजे ग्राम खूबनपुरा स्थित सीएम राइज स्कूल के सामने से 'वीर सम्मान समारोह' की शुरुआत होगी। यहां से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा, जो जीरापुर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ भंडावद स्थित बालाजी मंदिर पहुंचेगा। इस पूरे रास्ते 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से आसमान गूंज उठेगा। ग्रामीणों ने बताया है कि कमल सिंह ने गांव का नाम रोशन किया है और उनका स्वागत ऐतिहासिक होगा, जिसमें हर घर से एक व्यक्ति जुलूस में शामिल होगा। कमल सिंह के पिता, भंडावद निवासी ठाकुर सा. विक्रम सिंह सोनगरा की देशभक्ति पूरे अंचल में प्रशंसा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उनके पांच बेटों में से तीन ने देशसेवा को चुना है। उनके सबसे बड़े बेटे भंवर सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे बेटे स्व. लक्ष्मण सिंह (जो 2012 में दिवंगत हुए) भी किसान थे। तीसरे बेटे शिव सिंह 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और चौथे बेटे लाल सिंह अभी भी भारतीय सेना में सेवारत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कमल सिंह 16 साल की सेवा के बाद घर लौट रहे हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा है। ग्रामीण इस परिवार को 'धन्य है वो पिता जिसने तीन लाल फौज को दिए' कहकर सम्मानित कर रहे हैं और भंडावद के लिए इसे सौभाग्य बता रहे हैं कि 'एक घर से तीन-तीन फौजी' हैं।1
- पूज्य संत श्री आसाराम जी महाराज के आश्रम में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी मिली है कि यह आयोजन उनके आश्रम परिसर में होगा।1
- डग-सुसनेर रोड पर एक खौफनाक हादसा सामने आया है, जहाँ एक ट्रेलर ने बाइक सवार को रौंद दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद ट्रेलर का चालक मौके से फरार हो गया। इस हादसे के चलते पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।1
- Post by Devbijore4
- देश में जनगणना 2027 की तैयारी चल रही है, जिसके मद्देनज़र लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है। सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि जनगणना के कार्य में लगे कोई भी कर्मचारी आपसे OTP, बैंक PIN या किसी भी प्रकार का पैसा नहीं मांगेंगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी फ़र्ज़ी कॉल और नकली सर्वे लिंक से बचें। यह भी कहा गया है कि अपनी जानकारी केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रदान करें।1
- मुरादाबाद से रिश्तों के कत्ल की एक सनसनीखेज कहानी सामने आई है, जहाँ एक पत्नी पर अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को दर्दनाक मौत देने का आरोप है। शुरुआत में पति की मौत को सामान्य माना गया था, जिससे इस खूनी साजिश पर पर्दा पड़ा रहा। हालांकि, पुलिस जांच ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कॉल डिटेल्स खंगालने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सुनियोजित हत्या की साजिश थी। जांच में सामने आया कि पत्नी ने अवैध संबंधों के चलते बेरहमी से पति का कत्ल किया। पुलिस ने इस मामले में गहन छानबीन कर हत्या का राज खोला और कथित प्रेमी समेत आरोपियों की गिरफ्तारी की।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले में मांझी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 29 मई 2026 को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। समाज ने मांग की है कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति में शामिल धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची क्रमांक 12 से हटाया जाए। मांझी समाज के पदाधिकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में कई पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 07 जनवरी 1950 को जारी तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 में मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग म.प्र. आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को मांझी जनजाति में मूल रूप से समाहित होना स्वीकार किया गया है। यह मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है, जहां 13 मार्च 2023 को अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह और भोई मांझी जनजाति में समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है। समाज के जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले जिलों जैसे रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया और टीकमगढ़ में "मांझी" नाम की कोई अलग जाति नहीं पाई जाती। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को ही मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है, और ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे। कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार कर इसे उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया है।1
- मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर सुसनेर के खेरिया में स्वच्छता की शपथ दिलाई गई। इस पहल के तहत, अहिंसा वेलफेयर सोसायटी द्वारा सेनेटरी पैड्स का वितरण भी किया गया।1