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बीजासणी माता का दरबार—जहाँ रिश्तों पर लगती थी विश्वास की मुहर जब हम ख़ुर्रा ग्राम के बीजासणी माता मेले के इतिहास की बात करते हैं, तो यह केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। आज के 'कॉन्ट्रैक्ट' और 'तलाक' वाले दौर में, माता के मेले में तय हुए रिश्ते आज भी चट्टान की तरह मजबूत खड़े हैं। मैं, खेमराज जोशी, खुद इस परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण हूँ—मेरा अपना रिश्ता इसी पावन मेले में तय हुआ था, जो बिना किसी बिखराव के आज भी पूरी मजबूती के साथ चल रहा है। ​रिश्तों की वह 'अदृश्य' डोर ​आज से ४० साल पहले, जब समाज बीजासणी माता के आँगन में इकट्ठा होता था, तो वहां केवल व्यापार नहीं होता था, बल्कि परिवारों का मिलन होता था। ​शब्द की कीमत: उस समय न कोई लिखित एग्रीमेंट था, न कोई कानूनी कागज़। माता की चौखट पर दी गई 'जुबान' ही सबसे बड़ा कानून थी। ​अटूट बंधन: मेरा स्वयं का उदाहरण गवाह है कि उस समय के रिश्तों में जो 'ठहराव' था, वह माता के प्रति अटूट श्रद्धा और आपसी विश्वास का परिणाम था। आज की चकाचौंध वाले वैवाहिक आयोजनों के मुकाबले, मेले की उस सादगी में बंधे रिश्ते कहीं ज्यादा टिकाऊ साबित हुए हैं। ​संस्कृति का गिरता स्तर और हमारी जिम्मेदारी ​पहले मेहमानों के लिए दरवाजे चौबीस घंटे खुले रहते थे। गाँवों में उत्साह ऐसा होता था कि लोग अपने घर आए मेहमान को भगवान का रूप मानते थे। आज इंतजाम सरकारी हैं, व्यवस्थाएं आधुनिक हैं, लेकिन वह 'अपनापन' गायब है बीजासणी माता के मेले की वह ४० साल पुरानी विरासत आज भी उन लोगों की यादों में और उनके सफल वैवाहिक जीवन में जीवित है, जिन्होंने उस दौर को जिया है। मेरा रिश्ता मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की एक कड़ी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को समझने और सहेजने की जरूरत है ग्राऊंड रिपोर्ट :खेमराज जोशी, शुरू न्यूज़,

1 hr ago
user_Khemraj Joshi
Khemraj Joshi
Yoga instructor राहुवास, दौसा, राजस्थान•
1 hr ago

बीजासणी माता का दरबार—जहाँ रिश्तों पर लगती थी विश्वास की मुहर जब हम ख़ुर्रा ग्राम के बीजासणी माता मेले के इतिहास की बात करते हैं, तो यह केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। आज के 'कॉन्ट्रैक्ट' और 'तलाक' वाले दौर में, माता के मेले में तय हुए रिश्ते आज भी चट्टान की तरह मजबूत खड़े हैं। मैं, खेमराज जोशी, खुद इस परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण हूँ—मेरा अपना रिश्ता इसी पावन मेले में तय हुआ था, जो बिना किसी बिखराव के आज भी पूरी मजबूती के साथ चल रहा है। ​रिश्तों की वह 'अदृश्य' डोर ​आज से ४० साल पहले, जब समाज बीजासणी माता के आँगन में इकट्ठा होता था, तो वहां केवल व्यापार नहीं होता था, बल्कि परिवारों का मिलन होता था। ​शब्द की कीमत: उस समय न कोई लिखित एग्रीमेंट था, न कोई कानूनी कागज़। माता की चौखट पर दी गई 'जुबान' ही सबसे बड़ा कानून थी। ​अटूट बंधन: मेरा स्वयं का उदाहरण

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गवाह है कि उस समय के रिश्तों में जो 'ठहराव' था, वह माता के प्रति अटूट श्रद्धा और आपसी विश्वास का परिणाम था। आज की चकाचौंध वाले वैवाहिक आयोजनों के मुकाबले, मेले की उस सादगी में बंधे रिश्ते कहीं ज्यादा टिकाऊ साबित हुए हैं। ​संस्कृति का गिरता स्तर और हमारी जिम्मेदारी ​पहले मेहमानों के लिए दरवाजे चौबीस घंटे खुले रहते थे। गाँवों में उत्साह ऐसा होता था कि लोग अपने घर आए मेहमान को भगवान का रूप मानते थे। आज इंतजाम सरकारी हैं, व्यवस्थाएं आधुनिक हैं, लेकिन वह 'अपनापन' गायब है बीजासणी माता के मेले की वह ४० साल पुरानी विरासत आज भी उन लोगों की यादों में और उनके सफल वैवाहिक जीवन में जीवित है, जिन्होंने उस दौर को जिया है। मेरा रिश्ता मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की एक कड़ी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को समझने और सहेजने की जरूरत है ग्राऊंड रिपोर्ट :खेमराज जोशी, शुरू न्यूज़,

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  • जब हम ख़ुर्रा ग्राम के बीजासणी माता मेले के इतिहास की बात करते हैं, तो यह केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। आज के 'कॉन्ट्रैक्ट' और 'तलाक' वाले दौर में, माता के मेले में तय हुए रिश्ते आज भी चट्टान की तरह मजबूत खड़े हैं। मैं, खेमराज जोशी, खुद इस परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण हूँ—मेरा अपना रिश्ता इसी पावन मेले में तय हुआ था, जो बिना किसी बिखराव के आज भी पूरी मजबूती के साथ चल रहा है। ​रिश्तों की वह 'अदृश्य' डोर ​आज से ४० साल पहले, जब समाज बीजासणी माता के आँगन में इकट्ठा होता था, तो वहां केवल व्यापार नहीं होता था, बल्कि परिवारों का मिलन होता था। ​शब्द की कीमत: उस समय न कोई लिखित एग्रीमेंट था, न कोई कानूनी कागज़। माता की चौखट पर दी गई 'जुबान' ही सबसे बड़ा कानून थी। ​अटूट बंधन: मेरा स्वयं का उदाहरण गवाह है कि उस समय के रिश्तों में जो 'ठहराव' था, वह माता के प्रति अटूट श्रद्धा और आपसी विश्वास का परिणाम था। आज की चकाचौंध वाले वैवाहिक आयोजनों के मुकाबले, मेले की उस सादगी में बंधे रिश्ते कहीं ज्यादा टिकाऊ साबित हुए हैं। ​संस्कृति का गिरता स्तर और हमारी जिम्मेदारी ​पहले मेहमानों के लिए दरवाजे चौबीस घंटे खुले रहते थे। गाँवों में उत्साह ऐसा होता था कि लोग अपने घर आए मेहमान को भगवान का रूप मानते थे। आज इंतजाम सरकारी हैं, व्यवस्थाएं आधुनिक हैं, लेकिन वह 'अपनापन' गायब है बीजासणी माता के मेले की वह ४० साल पुरानी विरासत आज भी उन लोगों की यादों में और उनके सफल वैवाहिक जीवन में जीवित है, जिन्होंने उस दौर को जिया है। मेरा रिश्ता मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की एक कड़ी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को समझने और सहेजने की जरूरत है ग्राऊंड रिपोर्ट :खेमराज जोशी, शुरू न्यूज़,
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    जब हम ख़ुर्रा ग्राम के बीजासणी माता मेले के इतिहास की बात करते हैं, तो यह केवल सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं। आज के 'कॉन्ट्रैक्ट' और 'तलाक' वाले दौर में, माता के मेले में तय हुए रिश्ते आज भी चट्टान की तरह मजबूत खड़े हैं। मैं, खेमराज जोशी, खुद इस परंपरा का एक जीता-जागता उदाहरण हूँ—मेरा अपना रिश्ता इसी पावन मेले में तय हुआ था, जो बिना किसी बिखराव के आज भी पूरी मजबूती के साथ चल रहा है।
​रिश्तों की वह 'अदृश्य' डोर
​आज से ४० साल पहले, जब समाज बीजासणी माता के आँगन में इकट्ठा होता था, तो वहां केवल व्यापार नहीं होता था, बल्कि परिवारों का मिलन होता था।
​शब्द की कीमत: उस समय न कोई लिखित एग्रीमेंट था, न कोई कानूनी कागज़। माता की चौखट पर दी गई 'जुबान' ही सबसे बड़ा कानून थी।
​अटूट बंधन: मेरा स्वयं का उदाहरण गवाह है कि उस समय के रिश्तों में जो 'ठहराव' था, वह माता के प्रति अटूट श्रद्धा और आपसी विश्वास का परिणाम था। आज की चकाचौंध वाले वैवाहिक आयोजनों के मुकाबले, मेले की उस सादगी में बंधे रिश्ते कहीं ज्यादा टिकाऊ साबित हुए हैं।
​संस्कृति का गिरता स्तर और हमारी जिम्मेदारी
​पहले मेहमानों के लिए दरवाजे चौबीस घंटे खुले रहते थे। गाँवों में उत्साह ऐसा होता था कि लोग अपने घर आए मेहमान को भगवान का रूप मानते थे। आज इंतजाम सरकारी हैं, व्यवस्थाएं आधुनिक हैं, लेकिन वह 'अपनापन' गायब है
बीजासणी माता के मेले की वह ४० साल पुरानी विरासत आज भी उन लोगों की यादों में और उनके सफल वैवाहिक जीवन में जीवित है, जिन्होंने उस दौर को जिया है। मेरा रिश्ता मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की एक कड़ी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को समझने और सहेजने की जरूरत है
ग्राऊंड रिपोर्ट :खेमराज जोशी, शुरू न्यूज़,
    user_Khemraj Joshi
    Khemraj Joshi
    Yoga instructor राहुवास, दौसा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • डॉक्टर भी —पता नहीं कौन सा नशा करते हैं,Right leg का ऑपरेशन करना था, कर दिया Left leg का अब केसे अंदाजा लगाया जाए की डॉक्टर कौन सा अच्छा है और कौन से गलत ये तो जानता हीं बता सकती हैं।
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    डॉक्टर भी —पता नहीं कौन सा नशा करते हैं,Right leg का ऑपरेशन करना था, कर दिया Left leg का अब केसे अंदाजा लगाया जाए की डॉक्टर कौन सा अच्छा है और कौन से गलत ये तो जानता हीं बता सकती हैं।
    user_RIVENDRA KUMAR SHARMA
    RIVENDRA KUMAR SHARMA
    Local News Reporter Dausa, Rajasthan•
    5 hrs ago
  • Post by Yogesh Kumar Gupta
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    Post by Yogesh Kumar Gupta
    user_Yogesh Kumar Gupta
    Yogesh Kumar Gupta
    पत्रकार बस्सी, जयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by Anil Kumar journalist
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    Post by Anil Kumar journalist
    user_Anil Kumar journalist
    Anil Kumar journalist
    Rajasthan TV news buro chief Gangapur, Sawai Madhopur•
    4 hrs ago
  • गंगापुर सिटी का हाई सेकेंडरी मैदान में आज सफाई अभियान किया गया मॉर्निंग मूवर्स ग्रुप एवं समस्त मित्र मंडल के साथ गंगापुर क्षेत्र के समस्त समाज से भी संस्थाओं द्वारा सफाई अभियान कार्य किया गया, सफाई अभियान की पहल आलोक मालदानी के द्वारा कि गई, मौके पर विष्णु गुरुजी, निवर्तमान सभापति शिवरतन अग्रवाल,रवि प्रकाश मीना,
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    गंगापुर सिटी का हाई सेकेंडरी मैदान में आज सफाई अभियान किया गया मॉर्निंग मूवर्स ग्रुप एवं समस्त मित्र मंडल के साथ गंगापुर क्षेत्र के समस्त समाज से भी संस्थाओं द्वारा सफाई अभियान कार्य किया गया, सफाई अभियान की पहल आलोक मालदानी के द्वारा कि गई, मौके पर विष्णु गुरुजी, निवर्तमान सभापति शिवरतन अग्रवाल,रवि प्रकाश मीना,
    user_Uttam Kumar Meena
    Uttam Kumar Meena
    Media and information sciences faculty गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • ​आभानेरी। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पूर्व अध्यक्ष और समाज सुधारक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को आभानेरी स्थित श्री देवनारायण एवं भौणा जी मंदिर परिसर में गुर्जर समाज द्वारा एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के प्रबुद्धजनों और युवाओं ने कर्नल बैंसला के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। ​महापुरुष के आदर्शों पर चलने का आह्वान ​श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आरक्षण संघर्ष समिति बांदीकुई के अध्यक्ष मोहरसिंह माल ने कर्नल बैंसला के सिद्धांतों को याद किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि समाज की प्रगति के लिए कर्नल साहब के बताए चार सूत्रों— अच्छी शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य, पढ़ी-लिखी माँ और कर्ज मुक्त समाज को अपने जीवन में उतारें। ​वही, राजेश पायलट किसान संगठन के प्रदेश महासचिव रतन पटेल ने एकता पर जोर देते हुए कहा: ​"संगठित रहकर ही हम कर्नल बैंसला के सपनों को साकार कर सकते हैं। वर्तमान में सरकार समाज के युवाओं को आरक्षण का पूर्ण लाभ देने में विफल रही है, जिसके लिए एकजुटता जरूरी है।" ​राजनीति और सामाजिक शक्ति का संदेश ​पूर्व पार्षद राघवेंद्रसिंह पंवार ने कर्नल बैंसला के राजनीतिक दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि कर्नल साहब अक्सर कहते थे कि "राजनीतिक पावर सौ तालों की एक चाबी है"। यदि समाज अपनी ताकत पहचान ले और सशक्त हो जाए, तो राजनीतिक पार्टियां खुद समाज के द्वार पर दस्तक देंगी। गुर्जर महासभा के तहसील अध्यक्ष बाबूलाल छावड़ी ने कर्नल बैंसला के सैन्य सेवा और सामाजिक आंदोलनों के योगदान को अविस्मरणीय बताया। ​कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे उपस्थित ​श्रद्धांजलि सभा में गुर्जर समाज और अन्य संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे: ​प्रतिनिधि व पदाधिकारी: सुमेर सिंह शयालावास (प्रदेश महामंत्री, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा), महादेव खुटला (प्रधान प्रतिनिधि), नीरू रलावता (युवा जिला अध्यक्ष), अंकित चौधरी बांसड़ा (युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रत्याशी), रतन पटेल, और मानसिंह चेची। ​स्थानीय जनप्रतिनिधि: सरपंच नरेश, पूर्व जिला परिषद सदस्य रामधन गुर्जर, सरपंच भगवत बासड़ा, रामदयाल गादरवाड़ा, कांग्रेस मंडल अध्यक्ष हरिमोहन माल, और हुकम चाडका। ​आयोजक समिति: मंदिर कमेटी अध्यक्ष व पूर्व सरपंच रामसिंह महाणा, मुकेश माल (आभानेरी), उदयभान सिंह पटेल, और अमरसिंह महाणा। ​इस अवसर पर ओम प्रकाश तंवर, गोपाल कृष्ण गुर्जर, कुलदीप माल, जयसिंह थानेदार, डॉ. लालाराम गुर्जर, मक्खन चौधरी, प्रभुदयाल महाणा, और बड़ी संख्या में समाज के युवा एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कर्नल बैंसला के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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    ​आभानेरी। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के पूर्व अध्यक्ष और समाज सुधारक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को आभानेरी स्थित श्री देवनारायण एवं भौणा जी मंदिर परिसर में गुर्जर समाज द्वारा एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज के प्रबुद्धजनों और युवाओं ने कर्नल बैंसला के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
​महापुरुष के आदर्शों पर चलने का आह्वान
​श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए आरक्षण संघर्ष समिति बांदीकुई के अध्यक्ष मोहरसिंह माल ने कर्नल बैंसला के सिद्धांतों को याद किया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि समाज की प्रगति के लिए कर्नल साहब के बताए चार सूत्रों— अच्छी शिक्षा, उत्तम स्वास्थ्य, पढ़ी-लिखी माँ और कर्ज मुक्त समाज को अपने जीवन में उतारें।
​वही, राजेश पायलट किसान संगठन के प्रदेश महासचिव रतन पटेल ने एकता पर जोर देते हुए कहा:
​"संगठित रहकर ही हम कर्नल बैंसला के सपनों को साकार कर सकते हैं। वर्तमान में सरकार समाज के युवाओं को आरक्षण का पूर्ण लाभ देने में विफल रही है, जिसके लिए एकजुटता जरूरी है।"
​राजनीति और सामाजिक शक्ति का संदेश
​पूर्व पार्षद राघवेंद्रसिंह पंवार ने कर्नल बैंसला के राजनीतिक दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि कर्नल साहब अक्सर कहते थे कि "राजनीतिक पावर सौ तालों की एक चाबी है"। यदि समाज अपनी ताकत पहचान ले और सशक्त हो जाए, तो राजनीतिक पार्टियां खुद समाज के द्वार पर दस्तक देंगी। गुर्जर महासभा के तहसील अध्यक्ष बाबूलाल छावड़ी ने कर्नल बैंसला के सैन्य सेवा और सामाजिक आंदोलनों के योगदान को अविस्मरणीय बताया।
​कार्यक्रम में ये गणमान्य रहे उपस्थित
​श्रद्धांजलि सभा में गुर्जर समाज और अन्य संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
​प्रतिनिधि व पदाधिकारी: सुमेर सिंह शयालावास (प्रदेश महामंत्री, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा), महादेव खुटला (प्रधान प्रतिनिधि), नीरू रलावता (युवा जिला अध्यक्ष), अंकित चौधरी बांसड़ा (युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रत्याशी), रतन पटेल, और मानसिंह चेची।
​स्थानीय जनप्रतिनिधि: सरपंच नरेश, पूर्व जिला परिषद सदस्य रामधन गुर्जर, सरपंच भगवत बासड़ा, रामदयाल गादरवाड़ा, कांग्रेस मंडल अध्यक्ष हरिमोहन माल, और हुकम चाडका।
​आयोजक समिति: मंदिर कमेटी अध्यक्ष व पूर्व सरपंच रामसिंह महाणा, मुकेश माल (आभानेरी), उदयभान सिंह पटेल, और अमरसिंह महाणा।
​इस अवसर पर ओम प्रकाश तंवर, गोपाल कृष्ण गुर्जर, कुलदीप माल, जयसिंह थानेदार, डॉ. लालाराम गुर्जर, मक्खन चौधरी, प्रभुदयाल महाणा, और बड़ी संख्या में समाज के युवा एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कर्नल बैंसला के मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
    user_Raj Kumar Chaturvedi
    Raj Kumar Chaturvedi
    Local News Reporter Bandikui, Dausa•
    21 hrs ago
  • गंगापुर सिटी में यातायात नियमों पर सख्ती, नियम मानने वालों का हुआ सम्मान 🌹 गंगापुर सिटी। गंगापुर सिटी में पुलिस मुख्यालय जयपुर के आदेशानुसार पूरे प्रदेश में यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में भी यह अभियान सक्रिय रूप से संचालित किया गया। पुलिस अधीक्षक सवाई माधोपुर के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत यातायात प्रभारी राजवीर सिंह ने सड़कों पर उतरकर वाहन चालकों को यातायात नियमों की पालना के प्रति जागरूक किया। नियमों का उल्लंघन करने वालों को समझाइश दी गई, वहीं नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया। अभियान के दौरान यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी वसूला गया। इस मौके पर यातायात प्रभारी राजवीर सिंह के साथ एएसआई कुशल, एएसआई मोतीलाल सहित यातायात पुलिस के अन्य जवान भी मौजूद रहे। 👉 पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
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    गंगापुर सिटी में यातायात नियमों पर सख्ती, नियम मानने वालों का हुआ सम्मान 🌹
गंगापुर सिटी। गंगापुर सिटी में पुलिस मुख्यालय जयपुर के आदेशानुसार पूरे प्रदेश में यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी में भी यह अभियान सक्रिय रूप से संचालित किया गया।
पुलिस अधीक्षक सवाई माधोपुर के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत यातायात प्रभारी राजवीर सिंह ने सड़कों पर उतरकर वाहन चालकों को यातायात नियमों की पालना के प्रति जागरूक किया। नियमों का उल्लंघन करने वालों को समझाइश दी गई, वहीं नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप गुलाब का फूल देकर सम्मानित किया गया।
अभियान के दौरान यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी वसूला गया। इस मौके पर यातायात प्रभारी राजवीर सिंह के साथ एएसआई कुशल, एएसआई मोतीलाल सहित यातायात पुलिस के अन्य जवान भी मौजूद रहे।
👉 पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए यातायात नियमों का पालन करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
    user_Bsmeena
    Bsmeena
    Local News Reporter गंगापुर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • मलारना डूंगर उपखंड क्षेत्र के मलारना रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग महिला की ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई। यह घटना देर रात डाउन लाइन में प्लेटफॉर्म नंबर दो के खंभा संख्या 1059/4 के पास हुई। महिला की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। डीलक्स एक्सप्रेस के ड्राइवर ने रेलवे लाइन पर एक महिला के पड़े होने की सूचना स्टेशन मास्टर मनकेश मीणा को दी। मौके पर पहुंची टीम को महिला 50 से 60 वर्ष की प्रतीत हुई, जिसने लाल-गुलाबी साड़ी पहन रखी थी। उसके पैरों में पायल और चप्पलें थीं, और रंग गोरा था। महिला के पास से एक गुलाबी रंग का लेडीज पर्स मिला, जिसमें 360 रुपये नकद थे। हालांकि, पर्स में पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई है। स्टेशन मास्टर मनकेश मीणा ने पोटर माजीद खान को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद आरपीएफ, जीआरपीएफ और राजस्थान पुलिस थाना मलारना डूंगर को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही मलारना स्टेशन चौकी से कांस्टेबल सतवीर सिंह बैंसला, रेलवे कर्मचारी विनोद गुर्जर और विक्की मेहरा मौके पर पहुंचे। आरपीएफ से एएसआई पृथ्वीराज मीणा और हेड कांस्टेबल अमर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। जीआरपीएफ से हेड कांस्टेबल राजेंद्र, कांस्टेबल महेंद्र (380) और कांस्टेबल रसीला (224) ने भी मौके पर पहुंचकर जांच में सहयोग किया। बुजुर्ग महिला के शव को बरामद कर लिया गया है। सुबह 9:45 बजे जयपुर-बयाना ट्रेन से शव को गंगापुर सिटी ले जाया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और महिला की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं।
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    मलारना डूंगर उपखंड क्षेत्र के मलारना रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग महिला की ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई। यह घटना देर रात डाउन लाइन में प्लेटफॉर्म नंबर दो के खंभा संख्या 1059/4 के पास हुई। महिला की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है।
डीलक्स एक्सप्रेस के ड्राइवर ने रेलवे लाइन पर एक महिला के पड़े होने की सूचना स्टेशन मास्टर मनकेश मीणा को दी। मौके पर पहुंची टीम को महिला 50 से 60 वर्ष की प्रतीत हुई, जिसने लाल-गुलाबी साड़ी पहन रखी थी। उसके पैरों में पायल और चप्पलें थीं, और रंग गोरा था।
महिला के पास से एक गुलाबी रंग का लेडीज पर्स मिला, जिसमें 360 रुपये नकद थे। हालांकि, पर्स में पहचान संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे महिला की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
स्टेशन मास्टर मनकेश मीणा ने पोटर माजीद खान को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद आरपीएफ, जीआरपीएफ और राजस्थान पुलिस थाना मलारना डूंगर को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही मलारना स्टेशन चौकी से कांस्टेबल सतवीर सिंह बैंसला, रेलवे कर्मचारी विनोद गुर्जर और विक्की मेहरा मौके पर पहुंचे।
आरपीएफ से एएसआई पृथ्वीराज मीणा और हेड कांस्टेबल अमर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। जीआरपीएफ से हेड कांस्टेबल राजेंद्र, कांस्टेबल महेंद्र (380) और कांस्टेबल रसीला (224) ने भी मौके पर पहुंचकर जांच में सहयोग किया।
बुजुर्ग महिला के शव को बरामद कर लिया गया है। सुबह 9:45 बजे जयपुर-बयाना ट्रेन से शव को गंगापुर सिटी ले जाया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और महिला की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं।
    user_दैनिक भास्कर संवाददाता
    दैनिक भास्कर संवाददाता
    Video Creator मलारना डूंगर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
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